डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर टैरिफ लगाया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर टैरिफ नियम बदल दिए हैं, कच्चे मेटल पर 50% टैक्स लगेगा, जबकि उनसे बने कई प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी घटाकर 10% से 25% कर दी गई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Donald Trump ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, यह कदम अमेरिका की इंडस्ट्री को मजबूत बनाने और टैक्स सिस्टम को आसान करने के लिए उठाया गया है, पहले जहां यह व्यवस्था काफी जटिल थी, वहीं अब इसे सरल बनाने की कोशिश की गई है, ताकि कंपनियों को नियम समझने और लागू करने में आसानी हो।
नई व्यवस्था के तहत बेसिक यानी कच्चे स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ पहले की तरह ही लागू रहेगा, टेक्निकली यह नया टैरिफ ही होगा क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले लगाए गए टैरिफ को अमान्य करार दे दिया है, लेकिन नए नियमों में अब खास बात यह है, कि यह टैक्स आयात की घोषित कीमत पर नहीं, बल्कि वास्तविक बिक्री मूल्य पर लगाया जाएगा, इसका मकसद उन कंपनियों पर लगाम लगाना है, जो कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश करती थीं।
डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को मिली राहत
जो प्रोडक्ट सीधे मेटल नहीं हैं, बल्कि उनसे बने होते हैं, जैसे मशीनें, उपकरण या एवरीडे की चीजें उन पर नियम बदल दिए गए हैं, अगर किसी प्रोडक्ट में स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर की मात्रा 15% से कम है, तो अब उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा, उदाहरण के तौर पर अगर किसी परफ्यूम की बोतल में थोड़ा सा एल्युमीनियम इस्तेमाल हुआ है, तो अब उस पर टैक्स नहीं देना होगा, इससे छोटे और हल्के मेटल वाले प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं।
भारी मेटल वाले प्रोडक्ट्स पर नया नियम
अगर किसी प्रोडक्ट में इन धातुओं की मात्रा 15% से ज्यादा है, तो उस पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा, यह टैक्स केवल मेटल की कीमत पर नहीं, बल्कि पूरे प्रोडक्ट की कीमत पर लागू होगा, जैसे कि वॉशिंग मशीन या गैस चूल्हा, जो ज्यादातर स्टील से बने होते हैं, उन पर सीधे 25% टैक्स देना होगा, इससे ऐसे प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ सकती है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर को मिली राहत
कुछ खास इंडस्ट्रियल मशीनों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर टैरिफ को घटाकर 15% कर दिया गया है, यह राहत 2027 तक लागू रहेगी, इसका मकसद अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देना है, ताकि कंपनियां आसानी से जरूरी मशीनें आयात कर सकें, एक दिलचस्प बदलाव यह भी है, कि अगर कोई प्रोडक्ट विदेश में बना है, लेकिन उसमें इस्तेमाल हुआ स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर पूरी तरह से अमेरिकी है, तो उस पर सिर्फ 10% टैरिफ लगेगा, इससे अमेरिकी मेटल इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा।
क्यों जरूरी था, यह बदलाव?
पुरानी व्यवस्था में हजारों तरह के प्रोडक्ट्स के लिए अलग-अलग नियम थे, जिससे कंपनियों को काफी परेशानी होती थी, हर प्रोडक्ट में कितनी मेटल है, उसका हिसाब लगाना मुश्किल था, अब सरकार ने इसे आसान और पारदर्शी बनाने की कोशिश की है, सरकार का मानना है, कि इससे टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और सिस्टम ज्यादा साफ-सुथरा होगा, हालांकि कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन सरकार की टैरिफ से कमाई थोड़ी बढ़ सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
अमेरिका की ओर से स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर 50% टैरिफ जारी रखने का असर सिर्फ उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव भारत सहित वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है, इन धातुओं से बने उत्पादों की लागत बढ़ने से कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा, भारत जैसे देशों के लिए अमेरिकी बाजार में निर्यात करना महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा, इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अस्थिरता भी बढ़ने की संभावना है।


