FSSAI के एक्शन पर डाबर का जवाब, कहा- हमारे सभी प्रोडक्ट लेबल नियमों के अनुरूप हैं

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FSSAI के एक्शन पर डाबर का जवाब, कहा- हमारे सभी प्रोडक्ट लेबल नियमों के अनुरूप हैं
05 Aug 2026
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News Synopsis

भारत में पैकेज्ड फूड उत्पादों की लेबलिंग को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नियामक संस्था ने Dabur India को निर्देश दिया है कि वह उन खाद्य उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दे, जिनके लेबल पर "100% Natural", "100% Pure", "100% Organic", "100% Purity Guaranteed" और "100% Tender Coconut Water" जैसे दावे किए गए हैं।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का मानना है कि इस प्रकार के पूर्ण (Absolute) दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं, क्योंकि इन्हें वैज्ञानिक रूप से हर स्थिति में साबित करना संभव नहीं होता। वहीं, Dabur ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उसके सभी उत्पादों के लेबल मौजूदा कानूनों और नियामकीय मानकों के अनुरूप हैं तथा कंपनी ने कभी भी ग्राहकों को गुमराह करने का प्रयास नहीं किया है।

यह मामला केवल Dabur तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में फूड लेबलिंग, उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता को लेकर FSSAI के बढ़ते अभियान का भी हिस्सा माना जा रहा है।

FSSAI की कार्रवाई और पूरे मामले का परिचय (FSSAI's Action and Overview of the Case)

'100%' दावों वाले उत्पादों पर FSSAI की सख्ती (FSSAI Takes Action Against Products Carrying '100%' Claims)

भारत की प्रमुख FMCG कंपनी Dabur India इन दिनों भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच के दायरे में है। FSSAI ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उन खाद्य उत्पादों की बिक्री तुरंत बंद करे, जिनके लेबल पर "100% Natural", "100% Pure", "100% Organic", "100% Purity Guaranteed" और "100% Tender Coconut Water" जैसे दावे किए गए हैं।

FSSAI के अनुसार, इस प्रकार के दावे उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकते हैं कि उत्पाद पूरी तरह शुद्ध या प्राकृतिक है, जबकि ऐसे दावों को हर परिस्थिति में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना संभव नहीं होता। इसलिए नियामक संस्था ने इन दावों को संभावित रूप से भ्रामक माना है।

यह कार्रवाई भारत में पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की लेबलिंग को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है।

उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना FSSAI की प्राथमिकता (Providing Accurate Information to Consumers Is FSSAI's Priority)

FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में स्पष्ट, सही और सत्यापित जानकारी मिले। यदि किसी उत्पाद पर ऐसे दावे किए जाते हैं जिन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता, तो इससे ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं।

इसी कारण FSSAI खाद्य कंपनियों को ऐसे दावे करने से बचने की सलाह दे रहा है, जो उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता या संरचना से अधिक प्रभावशाली दिखाई देते हों।

डाबर ने रेगुलेटरी कार्रवाई पर जवाब दिया (Dabur Responds to the Regulatory Action)

कंपनी ने कहा- हमारे सभी लेबल मौजूदा नियमों के अनुरूप हैं (Company Says Its Labels Comply with Existing Regulations)

FSSAI के निर्देश के बाद Dabur India ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उसके सभी उत्पादों के लेबल वर्तमान कानूनी और नियामकीय ढांचे के अनुरूप हैं।

कंपनी का कहना है कि उसकी लेबलिंग प्रक्रिया लंबे समय से उद्योग में अपनाए जा रहे मानकों के अनुसार है और उसने हमेशा गुणवत्ता तथा उपभोक्ता विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

ग्राहकों को गुमराह करने का कभी प्रयास नहीं किया (Company Says It Never Intended to Mislead Consumers)

Dabur ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने कभी भी अपने किसी उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता को लेकर ग्राहकों को जानबूझकर भ्रमित करने वाले दावे नहीं किए हैं।

कंपनी का कहना है कि उसके सभी उत्पाद उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार किए जाते हैं और वह अपने पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो की विश्वसनीयता पर पूरा भरोसा रखती है।

FSSAI ने '100%' दावों पर क्यों जताई आपत्ति (Why FSSAI Objected to the '100%' Claims)

पूर्ण (Absolute) दावे उपभोक्ताओं को कर सकते हैं भ्रमित (Absolute Claims May Mislead Consumers)

FSSAI का मानना है कि "100%" जैसे शब्द उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा बना सकते हैं कि संबंधित उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या ऑर्गेनिक है और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट या अन्य सामग्री शामिल नहीं है।

हालांकि कई मामलों में ऐसे दावों को वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित करना संभव नहीं होता। इसलिए नियामक संस्था का मानना है कि इस तरह की भाषा उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं को वास्तविकता से अधिक बढ़ा सकती है।

उत्पाद की वास्तविक संरचना को लेकर हो सकता है भ्रम (Claims May Create Confusion About Product Composition)

FSSAI के अनुसार, इस प्रकार के दावे उत्पाद की वास्तविक संरचना और उसमें मौजूद सामग्री को लेकर गलत धारणा पैदा कर सकते हैं।

इसी वजह से नियामक संस्था ने Dabur को संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया है, जब तक कि इन दावों से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता।

यह कदम भ्रामक विज्ञापन और गलत मार्केटिंग दावों पर रोक लगाने की दिशा में FSSAI की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन (Jaivik Bharat Logo) पर उठे सवाल (Organic Certification (Jaivik Bharat Logo) Also Comes Under Scrutiny)

Jaivik Bharat Logo के इस्तेमाल पर FSSAI की आपत्ति (FSSAI Raises Concerns Over the Use of Jaivik Bharat Logo)

'100%' दावों के अलावा FSSAI ने Dabur के कुछ उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए Jaivik Bharat Logo को लेकर भी आपत्ति जताई है।

नियामक संस्था के अनुसार, Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar और Dabur Organic Honey जैसे कुछ उत्पादों पर यह ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन लोगो प्रदर्शित किया गया था, जबकि इन उत्पादों को Food Safety and Standards (Organic Foods) Regulations, 2017 के तहत आवश्यक अनुमोदन प्राप्त नहीं था।

बिना अधिकृत प्रमाणन के लोगो का उपयोग क्यों चिंता का विषय है? (Why Is the Use of the Logo Without Authorization a Concern?)

FSSAI का कहना है कि यदि किसी उत्पाद पर आवश्यक मंजूरी के बिना ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़ा लोगो लगाया जाता है, तो उपभोक्ता यह मान सकते हैं कि वह उत्पाद आधिकारिक रूप से प्रमाणित ऑर्गेनिक उत्पाद है।

इससे ग्राहकों के खरीदारी संबंधी निर्णय प्रभावित हो सकते हैं और वे गलत जानकारी के आधार पर उत्पाद चुन सकते हैं।

इसी कारण FSSAI ने इस मुद्दे को भी गंभीरता से लेते हुए Dabur से आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

नारियल दूध (Coconut Milk) उत्पाद पर FSSAI की आपत्ति (FSSAI Raises Objections Over Coconut Milk Product)

'100% Purity' दावा नियमों के अनुरूप नहीं माना गया। (100% Purity' Claim Considered Non-Compliant with Regulations)

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Dabur Hommade Coconut Milk पर भी आपत्ति जताई है। यह उत्पाद "100% Purity" यानी "100% शुद्धता" के दावे के साथ बाजार में बेचा जा रहा था।

FSSAI का कहना है कि इस तरह का दावा कंपाउंड फूड (Compound Food) यानी ऐसे खाद्य उत्पादों के लिए स्वीकार्य नहीं है, जिनमें एक से अधिक सामग्री (Ingredients) शामिल होती हैं।

नियामक संस्था के अनुसार, जब किसी उत्पाद में कई तरह की सामग्री का उपयोग किया जाता है, तब उसे "100% शुद्ध" बताना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। ऐसे दावे से लोगों को यह गलत संदेश मिल सकता है कि उत्पाद में केवल एक ही प्राकृतिक तत्व मौजूद है या उसमें किसी प्रकार का मिश्रण नहीं किया गया है।

इसी वजह से FSSAI ने इस दावे को खाद्य लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं माना और इसे हटाने के निर्देश दिए। यह मामला भी उन प्रमुख कारणों में शामिल है, जिनके आधार पर नियामक ने संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने का आदेश जारी किया।

FSSAI ने मांगी Action Taken Report (ATR) (FSSAI Seeks Action Taken Report (ATR))

15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश। (Company Directed to Submit Compliance Report Within 15 Days)

अपनी नियामकीय कार्रवाई के तहत FSSAI ने Dabur को निर्देश दिया है कि वह चिन्हित किए गए सभी उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दे और 15 दिनों के भीतर एक Action Taken Report (ATR) जमा करे।

इस रिपोर्ट में कंपनी को यह बताना होगा कि उसने FSSAI द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इसमें उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग दावों में किए गए बदलावों की पूरी जानकारी शामिल होगी।

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों में इस तरह की अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करना एक सामान्य नियामकीय प्रक्रिया मानी जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित कंपनी नियामक के निर्देशों का सही तरीके से पालन कर रही है।

Dabur कानूनी विकल्पों पर कर रहा है विचार (Dabur Is Evaluating Legal Options)

कंपनी ने कहा- सभी नियमों का पालन जारी रहेगा। (Company Says It Will Continue to Follow All Regulations)

हालांकि Dabur ने यह दोहराया है कि उसके सभी उत्पादों के लेबल मौजूदा नियमों और कानूनों के अनुरूप हैं, लेकिन कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह FSSAI के आदेश का अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह ले रही है।

कंपनी का कहना है कि वह खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और नियामकीय अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Dabur ने यह भी स्पष्ट किया कि FSSAI की यह कार्रवाई केवल कुछ विशेष उत्पादों तक सीमित है और इसका असर कंपनी के पूरे कारोबार पर नहीं पड़ेगा। इसलिए कंपनी का मानना है कि इस आदेश का उसके समग्र व्यवसाय पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया (Market Reacts to Regulatory Action)

 नियामकीय कार्रवाई के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। (Regulatory Action Triggers Investor Concerns)

FSSAI की कार्रवाई का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला।

आदेश सामने आने के बाद Dabur India के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को चिंता है कि यदि कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग या मार्केटिंग रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़े, तो इसका असर उसके खाद्य उत्पाद कारोबार पर पड़ सकता है।

हालांकि कंपनी ने कहा है कि इस आदेश का वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन निवेशक अब आगे की कानूनी प्रक्रिया, FSSAI के साथ होने वाली बातचीत और संभावित लेबल बदलावों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

पारदर्शी फूड लेबलिंग पर FSSAI का बढ़ता फोकस (FSSAI's Growing Focus on Transparent Food Labelling)

उपभोक्ताओं को सही और वैज्ञानिक जानकारी देने पर जोर। (Emphasis on Providing Accurate and Scientifically Verified Information)

पिछले कुछ वर्षों में FSSAI ने खाद्य उत्पादों की लेबलिंग को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने पर विशेष ध्यान दिया है।

नियामक लगातार खाद्य कंपनियों को ऐसे दावे करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जिन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया जा सके। साथ ही उत्पादों के लेबल पर सामग्री (Ingredients), पोषण संबंधी जानकारी (Nutritional Information) और प्रमाणपत्रों (Certifications) को स्पष्ट और सही तरीके से दर्शाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय सही जानकारी मिले और वे किसी भी भ्रामक विज्ञापन या दावे से प्रभावित न हों।

इस पहल से न केवल उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भारत के पैकेज्ड फूड उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

Dabur India और FSSAI के बीच चल रहा यह विवाद भारत के FMCG और पैकेज्ड फूड उद्योग में सटीक फूड लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

जहां Dabur का कहना है कि उसके उत्पादों के लेबल मौजूदा कानूनी नियमों के अनुरूप हैं, वहीं FSSAI का मानना है कि "100% Natural", "100% Pure", "100% Organic" और इसी तरह के कुछ दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी अपनी कानूनी समीक्षा के बाद क्या कदम उठाती है और FSSAI के साथ होने वाली आगे की चर्चा का क्या परिणाम निकलता है। यह मामला भविष्य में भारत में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापन संबंधी नियमों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।