कोका-कोला ने HCCB के समर IPO की योजना बनाई
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Coca-Cola का लक्ष्य HCCB को इस साल के अंत तक लिस्ट कराने का है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने करीब 1 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9,027 करोड़ का फंड जुटाने का लक्ष्य रखा है। 1 अरब डॉलर के इश्यू के हिसाब से कंपनी 10 अरब डॉलर का वैल्यूएशन चाहती है। भारतीय FMCG और कंज्यूमर सेक्टर के हिसाब से इसे बड़े IPOs की कैटेगरी में खड़ा करता है।
क्या होगा इश्यू प्राइस?
अभी IPO Price Band या इश्यू प्राइस पर कोई ऑफिशियल डिटेल सामने नहीं आई है। IPO प्राइस आमतौर पर कई फैक्टर्स से तय होता है। इनमें कंपनी का वैल्यूएशन, फाइनेंशियल, ग्रोथ आउटलुक, मार्केट सेंटिमेंट, एंकर और इन्स्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की रुचि, पीयर कंपनियों का वैल्यूएशन शामिल होता है।
कहां लिस्टेड है, कोका कोला?
Coca-Cola असल में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इसकी Coca Cola की मूल कंपनी NYSE में लिस्टेड हैं, जहां इसके शेयर “KO” टिकर से ट्रेड करते हैं। वहीं भारत में Coca-Cola नाम से कोई कंपनी कंपनी लिस्टेड नहीं है। आने वाले दिनों में हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेज भारतीय बाजार में लिस्ट हो सकती है।
क्या करती है, HCCB?
HCCB भारत के ₹60,000 करोड़ के सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ी प्लेयर है। कंपनी भारत में कई पॉपुलर ब्रांड्स बनाती और बेचती है। इनमें कोका कोला के अलावा थंब्स अप, स्पा्रइअ, माजा, किन्ले और Georgia Coffee और Schweppes जैसे ब्रांड्स की पैकेजिंग करती है। कंपनी भारत में 15 प्लांट्स के जरिए ऑपरेशन चलाती है।
IPO की नींव कैसे पड़ी?
HCCB IPO की तैयारी का ट्रिगर पॉइंट उस डील को माना जा रहा है, जिसमें कोका कोला ने ने हिंदुस्तान कोका कोला होल्डिंग्स में अपनी 40% हिस्सेदारी जुबिलैंट भारतिया ग्रुप को ₹12,500 करोड़ में बेची थी। यह कोका कोला की एसेट लाइट स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसमें कंपनी बॉटलिंग जैसे भारी खर्च और संसाधन वाले बिजनेस से धीरे-धीरे हटकर ब्रांड बिल्डिंग और इनोवेशन पर ज्यादा फोकस कर रही है।
कितनी कमाई कर रही HCCB?
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज फाइलिंग्स के मुताबिक FY25 में कंपनी का रेवेन्यू ₹12,751.29 करोड़ रहा, इसमें सालाना आधार पर करीब 9% की कमी आई है।
बारिश बड़ा रिस्क?
रिपोर्ट के मुताबिक सॉफ्ट ड्रिंक्स की सालाना खपत में करीब आधी अप्रैल-सितंबर के बीच होती है। लेकिन बेमौसम और लगातार बारिश की वजह से गर्मियों में पीक डिमांड कमजोर रहती है, जिससे इंडस्ट्री के स्तर पर सेल्स प्रभावित होती है। यही वजह है, कि अगर 2026 में भी ऐसा मौसम पैटर्न आता है, तो IPO की टाइमलाइन आगे बढ़ सकती है।


