BRICS 2026: लखनऊ में जुटेंगे BRICS देशों के सांख्यिकी प्रमुख, डेटा सहयोग पर होगी बड़ी चर्चा

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BRICS 2026: लखनऊ में जुटेंगे BRICS देशों के सांख्यिकी प्रमुख, डेटा सहयोग पर होगी बड़ी चर्चा
03 Aug 2026
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News Synopsis

भारत 3 और 4 अगस्त 2026 को लखनऊ में BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (National Statistical Offices-NSOs) के प्रमुखों की प्रतिष्ठित बैठक की मेजबानी करेगा। यह आयोजन भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 के तहत किया जा रहा है और आधिकारिक आंकड़ों (Official Statistics), डेटा गवर्नेंस तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

इस बैठक में BRICS देशों और हाल ही में शामिल नए सदस्य देशों के वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी भाग लेंगे। वे सांख्यिकी प्रणालियों को मजबूत बनाने, डेटा गुणवत्ता में सुधार, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय आंकड़ों के बेहतर उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

BRICS अध्यक्षता 2026 की थीम क्या है? (What Is the Theme of India's BRICS Chairship 2026?)

लचीलापन, नवाचार और सतत विकास पर रहेगा फोकस (Focus on Resilience, Innovation and Sustainability)

भारत ने अपनी BRICS Chairship 2026 के लिए मुख्य थीम चुनी है—

"Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability (BRICS)."

इसी व्यापक थीम के अंतर्गत BRICS Statistics Track का मुख्य विषय रखा गया है—

"Quality Statistics as Driver of Change."

यह विषय इस बात पर जोर देता है कि विश्वसनीय, समय पर उपलब्ध और उच्च गुणवत्ता वाले आधिकारिक आंकड़े प्रभावी नीति निर्माण, सतत विकास और साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) प्रशासन की मजबूत नींव होते हैं।

भारत इस बैठक के दौरान डेटा नवाचार, बेहतर डेटा प्रसार (Data Dissemination) और नागरिक-केंद्रित सांख्यिकी प्रणालियों में अपनी उपलब्धियों को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।

कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल (Senior Officials From Multiple Countries Will Participate)

BRICS और नए सदस्य देशों की होगी भागीदारी (Participation From BRICS Members and Newly Expanded Countries)

इस महत्वपूर्ण बैठक में BRICS सदस्य देशों के साथ-साथ हाल ही में जुड़े नए साझेदार देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSOs) के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

बैठक में शामिल होने वाले देशों में प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • ब्राज़ील (Brazil)
  • रूस (Russia)
  • भारत (India)
  • चीन (China)
  • दक्षिण अफ्रीका (South Africa)
  • मिस्र (Egypt)
  • इथियोपिया (Ethiopia)
  • इंडोनेशिया (Indonesia)
  • ईरान (Iran)
  • संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates-UAE)

इन देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत और आधुनिक सांख्यिकी प्रणालियों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में सहयोग को मिलेगा बढ़ावा (Strengthening Cooperation in Official Statistics)

कई अहम विषयों पर होगी विस्तृत चर्चा (Discussions on Multiple Key Areas)

बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच Official Statistics के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाना है।

प्रतिनिधि निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे—

  • सांख्यिकीय प्रकाशन (Statistical Publications)
  • डेटा हार्मोनाइजेशन (Data Harmonisation)
  • सांख्यिकीय कार्यप्रणालियों में सुधार (Methodological Improvements)
  • ज्ञान साझा करना (Knowledge Sharing)
  • क्षमता निर्माण (Capacity Building)
  • डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation)
  • सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार (Innovation in Statistical Systems)

अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्यों है जरूरी? (Why Is International Statistical Cooperation Important?)

इन क्षेत्रों में सहयोग से विभिन्न देशों के आंकड़ों की तुलनात्मकता (Comparability) और संगति (Consistency) बेहतर होती है।

साथ ही विश्वसनीय आंकड़े—

  • सरकारों को बेहतर नीतियां बनाने में मदद करते हैं।
  • व्यवसायों को रणनीतिक निर्णय लेने में सहायता देते हैं।
  • शोधकर्ताओं को सटीक विश्लेषण उपलब्ध कराते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए भरोसेमंद डेटा सुनिश्चित करते हैं।

BRICS Statistics Track की अब तक की उपलब्धियां (Progress Under the BRICS Statistics Track)

2010 से जारी है सांख्यिकीय सहयोग (Statistical Cooperation Continues Since 2010)

लखनऊ में होने वाली यह बैठक BRICS Statistics Track के तहत वर्षों से चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाएगी।

साल 2010 से BRICS सदस्य देश मिलकर Joint Statistical Publication (JSP) प्रकाशित कर रहे हैं।

इस प्रकाशन में सभी सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों को एक समान प्रारूप (Harmonised Format) में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे विभिन्न देशों के विकास संकेतकों की तुलना करना आसान हो जाता है।

Snapshot BRICS Publication भी बनी महत्वपूर्ण पहल (Snapshot BRICS Publication Has Also Become an Important Initiative)

साल 2020 में BRICS देशों ने Snapshot BRICS Joint Statistical Publication शुरू किया।

यह संक्षिप्त रिपोर्ट नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को BRICS देशों से जुड़े प्रमुख सांख्यिकीय आंकड़ों की त्वरित जानकारी उपलब्ध कराती है।

समय के साथ ये दोनों प्रकाशन BRICS देशों के बीच Evidence-Based Policymaking को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज बन चुके हैं।

तकनीकी बैठक में हुई तैयारियों की समीक्षा (Progress Reviewed During the Technical Meeting)

अप्रैल 2026 की तकनीकी बैठक ने तैयार की रूपरेखा

लखनऊ में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक की तैयारियां इसी वर्ष 16–17 अप्रैल 2026 को आयोजित राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSOs) की तकनीकी बैठक से शुरू हो गई थीं।

इस बैठक के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रगति की समीक्षा की, जिनमें शामिल थे—

  • Joint Statistical Publication (JSP) 2026

  • Snapshot BRICS JSP 2026

  • डेटा हार्मोनाइजेशन (Data Harmonisation)

  • प्रकाशन की समय-सीमा (Publication Timelines)

  • सदस्य देशों का योगदान (Member Country Contributions)

सांख्यिकीय कार्यप्रणालियों में सुधार पर रहा विशेष जोर (Special Focus on Improving Statistical Methodologies)

बैठक में विभिन्न देशों की सांख्यिकीय कार्यप्रणालियों (Statistical Methodologies) को अधिक समान और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। साथ ही राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार किया गया।

उम्मीद है कि लखनऊ में होने वाली बैठक के दौरान इन संयुक्त प्रकाशनों के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

डेटा गुणवत्ता और उसकी उपलब्धता पर रहेगा विशेष फोकस (Focus on Improving Data Quality and Accessibility)

बेहतर आंकड़े बेहतर नीतियों की मजबूत नींव (Better Data Leads to Better Policymaking)

आज के डेटा-आधारित दौर में उच्च गुणवत्ता वाले आधिकारिक आंकड़ों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

लखनऊ बैठक में निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा होगी—

  • व्यापक आर्थिक आंकड़े (Macroeconomic Statistics)

  • सामाजिक संकेतक (Social Indicators)

  • क्षेत्र-विशेष डेटा (Sector-Specific Data)

  • सांख्यिकीय गुणवत्ता मानक (Statistical Quality Standards)

  • डेटा की उपलब्धता (Data Accessibility)

  • सार्वजनिक डेटा प्रसार (Public Dissemination)

नागरिकों और व्यवसायों दोनों को मिलेगा लाभ (Benefits for Citizens and Businesses)

यदि सांख्यिकी प्रणालियां अधिक मजबूत और पारदर्शी होंगी, तो—

  • सरकारें अधिक प्रभावी नीतियां बना सकेंगी।

  • उद्योग और निवेशक बेहतर व्यावसायिक निर्णय ले सकेंगे।

  • शोधकर्ताओं को अधिक विश्वसनीय आंकड़े मिलेंगे।

  • आम नागरिक आर्थिक और सामाजिक बदलावों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

प्रशासनिक डेटा के बेहतर उपयोग पर होगी चर्चा (Discussions on Unlocking the Potential of Administrative Data)

प्रशासनिक डेटा क्यों है महत्वपूर्ण? (Why Administrative Data Is Important?)

बैठक के दौरान आयोजित होने वाले प्रमुख साइड इवेंट (Side Event) में से एक का विषय होगा—

"Unlocking the Potential of Administrative Data."

प्रशासनिक डेटा वह जानकारी होती है, जिसे सरकारी विभाग अपने नियमित कार्यों के दौरान एकत्रित करते हैं, जैसे—

  • कर प्रशासन (Tax Administration)

  • जनसंख्या रिकॉर्ड (Population Records)

  • शिक्षा (Education)

  • स्वास्थ्य सेवाएं (Healthcare)

  • रोजगार (Employment)

  • सामाजिक कल्याण योजनाएं (Social Welfare Programmes)

लागत कम होगी, सटीकता बढ़ेगी (Better Accuracy with Lower Costs)

यदि प्रशासनिक डेटा का बेहतर उपयोग किया जाए, तो—

  • सर्वेक्षणों की लागत कम होगी।

  • लोगों पर बार-बार जानकारी देने का बोझ घटेगा।

  • अधिक सटीक और समय पर आंकड़े उपलब्ध होंगे।

  • सरकारें तेजी से नीतिगत निर्णय ले सकेंगी।

इस सत्र में प्रशासनिक डेटा को आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली में प्रभावी ढंग से शामिल करने के सर्वोत्तम तरीकों पर चर्चा होगी।

भविष्य की सांख्यिकी प्रणालियों में AI निभाएगा अहम भूमिका (Artificial Intelligence Will Shape Future Statistical Systems)

AI Readiness पर विशेष चर्चा होगी (Special Focus on AI Readiness)

बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र होगा—

"AI Readiness in the Evolving Data Ecosystem."

आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) आधिकारिक आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और प्रसार के तरीके को तेजी से बदल रही है।

चर्चा के प्रमुख विषय होंगे—

  • स्वचालित डेटा प्रोसेसिंग (Automated Data Processing)

  • मशीन लर्निंग (Machine Learning)

  • डेटा वैलिडेशन (Data Validation)

  • प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स (Predictive Analytics)

  • बिग डेटा इंटीग्रेशन (Big Data Integration)

  • AI का नैतिक उपयोग (Ethical Use of AI)

AI से बढ़ेगी दक्षता और पारदर्शिता (AI Can Improve Efficiency and Transparency)

प्रतिनिधि इस बात पर विचार करेंगे कि AI तकनीकों का उपयोग करके सांख्यिकी प्रणालियों को अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय कैसे बनाया जा सकता है, साथ ही पारदर्शिता और जनता के विश्वास को भी कैसे बनाए रखा जाए।

अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय सहयोग क्यों है जरूरी? (Why International Statistical Cooperation Matters?)

वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मिलेगा  सहयोग(Cooperation Helps Address Global Challenges)

जैसे-जैसे दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से अधिक जुड़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे आधिकारिक आंकड़ों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व भी बढ़ता जा रहा है।

तुलनात्मक और विश्वसनीय आंकड़े देशों को मदद करते हैं—

  • आर्थिक विकास मापने में

  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की निगरानी में

  • सामाजिक प्रगति का आकलन करने में

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य की समीक्षा में

  • जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नीतियां बनाने में

  • बेहतर नीति निर्माण में

साझा मानक बढ़ाते हैं भरोसा (Common Standards Improve Trust)

साझा सांख्यिकीय मानक अपनाने से विभिन्न देशों के आंकड़ों में एकरूपता आती है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई मजबूती मिलती है।

डेटा गवर्नेंस में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका (India's Growing Leadership in Data Governance)

डिजिटल सांख्यिकी प्रणालियों में तेजी से हुआ विकास (Rapid Modernisation of India's Statistical Systems)

BRICS NSO बैठक की मेजबानी भारत की वैश्विक डेटा गवर्नेंस में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

पिछले एक दशक में भारत ने—

  • डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली को मजबूत किया।

  • आधुनिक तकनीकों को अपनाया।

  • डेटा प्रसार (Data Dissemination) में सुधार किया।

  • पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।

  • नागरिक-केंद्रित सांख्यिकी प्रणाली विकसित की।

उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बनेगा सहयोग का नया मंच (A New Platform for Emerging Economies)

भारत का उद्देश्य BRICS देशों के बीच बेहतर डेटा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और आधुनिक सांख्यिकी प्रणालियों के विकास को बढ़ावा देना है।

इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत डेटा ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

लखनऊ में आयोजित होने वाली BRICS राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSOs) की बैठक वैश्विक सांख्यिकी सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। "Quality Statistics as Driver of Change" थीम के तहत यह आयोजन सदस्य देशों के बीच डेटा गुणवत्ता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रशासनिक डेटा, सांख्यिकी नवाचार और नीति निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहयोग को नई दिशा देगा।

यह बैठक न केवल सांख्यिकीय प्रणालियों को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने में मदद करेगी, बल्कि सदस्य देशों के बीच ज्ञान साझा करने, क्षमता निर्माण और डेटा आधारित शासन को भी मजबूत बनाएगी।