अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगाया: जानें 10 अहम बातें

News Synopsis
अमेरिका ने बुधवार, 27 अगस्त 2025 को सुबह 9:31 बजे (IST) से भारत के कुछ निर्यात उत्पादों पर 50% आयात शुल्क लागू कर दिया है। यह शुल्क पहले से मौजूद ड्यूटी के ऊपर लगाया गया है और इसका सीधा असर भारत के व्यापार, अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर पड़ेगा।
भारत पर 50% टैरिफ लागू 50% Tariffs on India Begin
भारत को दुनिया की सबसे कठोर ड्यूटी का सामना India faces one of the world’s harshest tariff regimes
जेपी मॉर्गन के अनुसार, अब भारत को अमेरिकी निर्यात पर औसतन 34% टैरिफ झेलना पड़ेगा, जो चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक है। ASEAN देशों की दर सिर्फ 16% है, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी।
घरेलू निर्यात पर सीधा असर Exposure of domestic value-added exports
भारत के GDP का लगभग 1.1% हिस्सा जो अमेरिकी निर्यात से जुड़ा है, अब सीधे इस टैरिफ के घेरे में है। खासकर टेक्सटाइल और मशीनरी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
टेक्सटाइल सेक्टर संकट में Textiles sector at risk
भारत के कॉटन बेडलिनेन, जर्सी और गारमेंट्स पर अब 50% ड्यूटी लगेगी। इससे अमेरिका का बिज़नेस बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो सकता है। गोकलदास, इंडो काउंट और वेलस्पन लिविंग जैसी कंपनियां जिनकी 20–70% कमाई अमेरिका से होती है, सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
रत्न और आभूषण उद्योग पर असर Gems and jewellery hit hard
रत्न और आभूषण पर भी 50% शुल्क लगाया गया है। यह उद्योग गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लाखों लोगों को रोजगार देता है और भारत के निर्यात का बड़ा हिस्सा है।
अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर असर Potential economic and job losses
नए टैरिफ से भारत का मार्केट शेयर घट सकता है। इससे रोज़गार, खपत और आय पर सीधा असर पड़ेगा। कंपनियों को नए बाज़ार तलाशने पड़ेंगे, जिससे लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा।
FDI और निवेश को खतरा FDI and investment concerns
भारत की निवेश आकर्षण क्षमता ASEAN देशों की तुलना में कम हो सकती है। 50% टैरिफ से विदेशी निवेशक भारत से दूरी बना सकते हैं और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी असर पड़ सकता है।
चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा Current account deficit may widen
भारत का चालू खाता घाटा (CAD) अभी 0.6% है। लेकिन JPMorgan का अनुमान है कि यह 1.5% तक बढ़ सकता है। इससे रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।
विदेशी मुद्रा भंडार का सहारा Reserves offer buffer but not immunity
भारत के पास $638 अरब का फॉरेक्स रिज़र्व है, जो कुछ समय तक सहारा देगा। लेकिन लंबे समय तक टैरिफ जारी रहने से रुपया अस्थिर हो सकता है।
सेवाओं का क्षेत्र अभी सुरक्षित Services sector remains a blind spot
भारत के IT और बिज़नेस सर्विसेज अमेरिका को माल निर्यात से तीन गुना अधिक हैं। अभी इन पर कोई टैरिफ नहीं लगा है, लेकिन भविष्य में अगर यहां भी प्रतिबंध लगते हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर Implications for global value chain integration
अगर भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यापक व्यापार समझौता नहीं हुआ, तो भारत को निर्यात, निवेश और रोजगार के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अमेरिका द्वारा भारत के निर्यात पर लगाया गया 50% टैरिफ न केवल व्यापार बल्कि पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। इस नए शुल्क से खासकर टेक्सटाइल और जेम्स-आभूषण सेक्टर पर सबसे गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि इन उद्योगों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाज़ार से आता है।
लाखों लोगों की रोज़गार सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और कंपनियों को अपने उत्पादों के लिए नए बाज़ार खोजने पड़ेंगे, जिससे लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा कम होगी। इसके अलावा, निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे भारत की विकास गति धीमी पड़ सकती है।
चालू खाता घाटा और रुपए पर दबाव भी बढ़ने की आशंका है। हालांकि, भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और सेवाओं का सुरक्षित क्षेत्र है, लेकिन लंबे समय में यह पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए भारत को अब व्यापार विविधीकरण, नीति सुधार और रणनीतिक समझौतों पर ध्यान देना होगा ताकि अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।