PMKVY में 28.5 लाख को ट्रेनिंग, नौकरी मिली सिर्फ 7% को; सामने आए अहम आंकड़े

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PMKVY में 28.5 लाख को ट्रेनिंग, नौकरी मिली सिर्फ 7% को; सामने आए अहम आंकड़े
05 Sep 2026
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News Synopsis

भारत सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत लाखों युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल प्रदान करना और उन्हें रोजगार के लिए अधिक सक्षम बनाना है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रशिक्षण पाने वाले उम्मीदवारों की तुलना में रोजगार हासिल करने वालों की संख्या काफी कम है।

PMKVY डैशबोर्ड से उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त तक करीब 28.5 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि इनमें से केवल 2,00,224 उम्मीदवारों का प्लेसमेंट दर्ज किया गया। इसके आधार पर योजना के तहत रिपोर्ट की गई प्लेसमेंट दर लगभग 7 प्रतिशत बैठती है।

ये आंकड़े भारत में बड़े स्तर पर कौशल प्रशिक्षण देने के बावजूद प्रशिक्षित युवाओं को वास्तविक रोजगार से जोड़ने की चुनौती को सामने लाते हैं। किसी उम्मीदवार का प्रशिक्षण पूरा करना और प्रमाणपत्र प्राप्त करना अपने आप में नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है।

PMKVY का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाना PMKVY Aims to Improve Youth Employability

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को युवाओं को बाजार और उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। योजना के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए जरूरी व्यावहारिक और तकनीकी कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाता है।

2015 में शुरू हुई थी PMKVY योजना The PMKVY Scheme Was Launched in 2015

PMKVY की शुरुआत 2015 में हुई थी। इसका उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग आधारित कौशल प्रदान करना और उनकी रोजगार पाने की क्षमता बढ़ाना था।

समय के साथ योजना में कई बदलाव किए गए और इसे अब व्यापक Skill India Programme का हिस्सा बनाया गया है। सरकार ने उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण व्यवस्था को लगातार अपडेट करने का प्रयास किया है।

2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए Skill India Programme के लिए लगभग ₹8,800 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई थी। वहीं PMKVY के मौजूदा चरण PMKVY 4.0 के लिए करीब ₹6,000 करोड़ का आवंटन किया गया है।

PMKVY डैशबोर्ड में बड़ी संख्या में ड्रॉपआउट भी सामने आए PMKVY Dashboard Shows Significant Dropouts

योजना से जुड़े आंकड़े यह भी बताते हैं कि प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल सभी उम्मीदवार इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को बीच में ही योजना से बाहर होने वाले यानी ड्रॉपआउट के रूप में दर्ज किया गया है।

6.8 लाख से अधिक उम्मीदवार हुए ड्रॉपआउट More Than 6.8 Lakh Candidates Were Classified as Dropouts

PMKVY के अलग-अलग चरणों में करीब 35.4 लाख उम्मीदवारों का नामांकन हुआ था। इनमें से 6.83 लाख से अधिक उम्मीदवारों को ड्रॉपआउट के रूप में दर्ज किया गया।

वहीं लगभग 20.4 लाख उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया और करीब 19.5 लाख उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

नामांकन से लेकर मूल्यांकन, प्रमाणन और रोजगार तक उम्मीदवारों की संख्या में लगातार अंतर दिखाई देता है। यह अंतर बताता है कि कौशल प्रशिक्षण में भाग लेना और वास्तविक नौकरी हासिल करना दो अलग-अलग परिणाम हैं।

अलग-अलग क्षेत्रों में प्लेसमेंट दर में बड़ा अंतर Placement Rates Vary Significantly Across Sectors

PMKVY के तहत रोजगार से जुड़े परिणाम सभी क्षेत्रों में एक जैसे नहीं रहे। कुछ क्षेत्रों में प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोजगार मिलने की दर अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह काफी कम रही।

दूरसंचार क्षेत्र सबसे आगे Telecom Sector Leads Major Sectors

प्रमुख क्षेत्रों में दूरसंचार यानी Telecom क्षेत्र में सबसे अधिक प्लेसमेंट दर दर्ज की गई। यहां लगभग 17.5 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोजगार मिला।

इसके बाद हस्तशिल्प क्षेत्र रहा, जहां प्लेसमेंट दर करीब 14.4 प्रतिशत रही। वहीं परिधान क्षेत्र में यह आंकड़ा लगभग 13.3 प्रतिशत रहा।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुछ उद्योगों में प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत बेहतर है।

प्रबंधन क्षेत्र में सबसे कम प्लेसमेंट Management Sector Records the Lowest Placement Rate

दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने वाले उम्मीदवारों का अनुपात काफी कम रहा।

ऑटोमोबाइल और मीडिया क्षेत्र भी पीछे Automotive and Media Sectors Also Lag Behind

प्रबंधन क्षेत्र में केवल लगभग 1.1 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों का प्लेसमेंट दर्ज किया गया। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यह दर करीब 3.4 प्रतिशत रही, जबकि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में लगभग 3.8 प्रतिशत उम्मीदवारों को रोजगार मिला।

क्षेत्रों के बीच प्लेसमेंट दर में इतना बड़ा अंतर यह सवाल उठाता है कि क्या सभी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को संबंधित उद्योगों की वास्तविक मांग और उपलब्ध नौकरियों के साथ पर्याप्त रूप से जोड़ा गया है।

ड्रॉपआउट दर भी बनी बड़ी चिंता Dropout Rates Remain a Major Concern

केवल प्लेसमेंट ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण पूरा करने से पहले उम्मीदवारों के योजना छोड़ने की दर भी चिंता का विषय है। अलग-अलग क्षेत्रों में ड्रॉपआउट का स्तर काफी अलग रहा।

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट Media and Entertainment Records the Highest Dropout Rate

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में ड्रॉपआउट दर करीब 26.5 प्रतिशत रही, जो प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक है।

इसके बाद आईटी और आईटी आधारित सेवाओं का क्षेत्र रहा, जहां लगभग 25.9 प्रतिशत नामांकित उम्मीदवारों ने योजना बीच में छोड़ दी।

पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में भी ड्रॉपआउट दर करीब 24.9 प्रतिशत रही।

यदि बड़ी संख्या में उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा नहीं कर पाते हैं, तो इससे योजना के समग्र परिणाम और रोजगार से जुड़ी सफलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

सरकार ने PMKVY के परिणाम मापने का तरीका बदला Government Changes How PMKVY Outcomes Are Measured

सरकार ने PMKVY 4.0 में योजना के परिणामों को मापने का तरीका भी व्यापक किया है। पहले योजना की सफलता का आकलन करने में प्लेसमेंट को काफी महत्व दिया जाता था।

अब सरकार केवल यह नहीं देख रही है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले उम्मीदवार को नौकरी मिली या नहीं, बल्कि प्रमाणपत्र हासिल करने के बाद उनकी स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रमाणन के बाद एक साल तक होगी निगरानी Candidates Will Be Tracked for One Year After Certification

PMKVY 4.0 के तहत उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र मिलने के बाद एक वर्ष तक ट्रैक करने की व्यवस्था अपनाई गई है।

इस निगरानी में यह देखा जाता है कि उम्मीदवार रोजगार हासिल करता है, आगे की पढ़ाई करता है या अतिरिक्त प्रशिक्षण लेकर अपने कौशल को और बेहतर बनाता है।

यह तरीका योजना के प्रभाव को केवल तत्काल नौकरी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि उम्मीदवार की आगे की प्रगति के आधार पर समझने में मदद कर सकता है।

प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी को समझना जरूरी Understanding the Gap Between Training and Employment

PMKVY के आंकड़े एक महत्वपूर्ण अंतर की ओर ध्यान दिलाते हैं। किसी उम्मीदवार का प्रशिक्षण पूरा करना, मूल्यांकन में सफल होना या प्रमाणपत्र हासिल करना जरूरी रूप से नौकरी मिलने का परिणाम नहीं देता।

उद्योग की मांग से प्रशिक्षण का जुड़ाव जरूरी Training Must Be Closely Linked to Industry Demand

यदि कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक उद्योग की मांग, भर्ती की उपलब्धता और करियर के अवसरों से मजबूती से जोड़ा जाए, तो प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावना बढ़ सकती है।

सरकार की नई निगरानी व्यवस्था से यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि प्रशिक्षण के बाद कितने उम्मीदवार नौकरी में जाते हैं, कितने आगे की पढ़ाई जारी रखते हैं और कितने अतिरिक्त प्रशिक्षण लेते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ने भारत में बड़े पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, PMKVY डैशबोर्ड के अनुसार करीब 28.5 लाख प्रशिक्षित उम्मीदवारों में केवल 2,00,224 प्लेसमेंट दर्ज होना लगभग 7 प्रतिशत प्लेसमेंट दर को दर्शाता है।

इसके साथ ही, 6.83 लाख से अधिक ड्रॉपआउट और अलग-अलग क्षेत्रों में प्लेसमेंट दर के बड़े अंतर यह बताते हैं कि प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

PMKVY 4.0 में प्रमाणन के बाद एक साल तक उम्मीदवारों की स्थिति पर नजर रखने का नया तरीका योजना के वास्तविक प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। आने वाले समय में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योग की मांग और रोजगार के अवसरों के बीच बेहतर तालमेल बनाना योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।