ONDC DigiDukaan से जुड़े 21 हजार किराना दुकानदार, 450 से ज्यादा ब्रांड का मिला साथ
News Synopsis
भारत में छोटे दुकानदारों और किराना कारोबार को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) की पहल DigiDukaan तेजी से आगे बढ़ रही है। सितंबर 2026 तक इस मंच के माध्यम से हैदराबाद, जयपुर और मुंबई के 21 हजार से अधिक खुदरा दुकानदार 450 से ज्यादा ब्रांड से जुड़ चुके हैं। पिछली तिमाही में यह संख्या करीब 12 हजार थी। इससे पता चलता है कि आसपास की दुकानों में सामान खरीदने और मंगाने के लिए डिजिटल तरीकों को अपनाने की रुचि बढ़ रही है।
DigiDukaan का मुख्य उद्देश्य भारत के पारंपरिक खुदरा कारोबार यानी जनरल ट्रेड को आधुनिक बनाना है। इसके तहत किराना दुकानदार डिजिटल माध्यम से अलग-अलग कंपनियों और वितरकों से सामान मंगा सकते हैं, अपने स्टॉक का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक आसान बना सकते हैं।
इस पहल की प्रगति की समीक्षा नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयोजित भारत कॉमर्स चिंतन शिविर के दौरान की गई। शुक्रवार को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) तथा ONDC की ओर से आयोजित इस बैठक में मुख्य रूप से FMCG क्षेत्र के 40 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों और कंपनियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
हैदराबाद में डिजी दुकान को मिल रही मजबूत प्रतिक्रिया (DigiDukaan Records Strong Retailer Adoption in Hyderabad)
डिजी दुकान DigiDukaan के विस्तार में हैदराबाद एक प्रमुख बाजार बनकर उभरा है। यहां 16 हजार से अधिक खुदरा दुकानदार इस मंच से जुड़ चुके हैं। यह संख्या बताती है कि छोटे कारोबारियों के बीच डिजिटल खरीदारी की व्यवस्था को लेकर अच्छी रुचि पैदा हो रही है।
प्लेटफॉर्म पर हर महीने दोबारा ऑर्डर देने वाले दुकानदारों की दर 73 से 78 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में दुकानदार पहली बार सामान मंगाने के बाद भी नियमित रूप से इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ONDC के शुरुआती खुदरा दुकानदार सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। सर्वे में शामिल करीब 40 प्रतिशत दुकानदारों ने बताया कि DigiDukaan के माध्यम से खरीदे जाने वाले उत्पादों का स्टॉक उनके पास पहले की तुलना में कम रहता है। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल खरीदारी के जरिए दुकानदार जरूरत के अनुसार सामान मंगा सकते हैं। इससे अनावश्यक भंडारण कम करने और कारोबार में उपलब्ध पूंजी का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
पीयूष गोयल ने FMCG कंपनियों से DigiDukaan से जुड़ने की अपील की (Piyush Goyal Encourages FMCG Companies to Join DigiDukaan)
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि छोटे दुकानदारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजिटल सुविधाएं विकसित करना जरूरी है। उन्होंने DigiDukaan को ऐसा उदाहरण बताया, जो खुले डिजिटल मंचों के जरिए सामान की खरीद को आसान बना सकता है, पारदर्शिता बढ़ा सकता है और आसपास के छोटे कारोबारों को आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
उन्होंने FMCG कंपनियों से इस पहल में अधिक सक्रिय भागीदारी करने और देश के दूसरे हिस्सों में भी इसका विस्तार करने का आग्रह किया।
DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने भी कहा कि खुला डिजिटल ढांचा भारत के खुदरा कारोबार में बदलाव की गति तेज कर सकता है। उनके अनुसार, दुकानदारों, वितरकों और FMCG कंपनियों को एक साझा डिजिटल मंच से जोड़ने पर छोटे कारोबारियों के लिए सामान खरीदना अधिक सुलभ और प्रभावी हो सकता है।
भारत के जनरल ट्रेड को मजबूत बनाने की पांच प्रमुख प्राथमिकताएं (Five Key Priorities to Strengthen India's General Trade Ecosystem)
बैठक में किराना दुकानों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और खुदरा कारोबार में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
1. दुकानदारों के लिए साझा डिजिटल पहचान (Common Digital Identity for Retailers)
किराना दुकानों के लिए एक समान डिजिटल पहचान बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इससे दुकानदार एक ही मंच के माध्यम से अलग-अलग ब्रांड, वितरकों और सेवा प्रदाताओं से जुड़ सकेंगे। उन्हें हर कंपनी के साथ बार-बार पंजीकरण और शुरुआती प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत कम होगी।
2. साझा लॉजिस्टिक्स और छोटे भंडारण केंद्र (Shared Logistics and Micro-Warehousing)
बैठक में साझा परिवहन और छोटे भंडारण केंद्र विकसित करने पर भी विचार किया गया। ऐसी सुविधाओं से वितरकों की पहुंच बढ़ सकती है और दुकानदारों को अगले दिन तक जरूरी उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसका लाभ उन क्षेत्रों को भी मिल सकता है, जहां सामान की नियमित आपूर्ति में परेशानी होती है।
3. औपचारिक कर्ज तक आसान पहुंच (Improved Access to Formal Credit)
डिजिटल खरीदारी का रिकॉर्ड और लेनदेन का इतिहास छोटे दुकानदारों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने में मदद कर सकता है। इससे उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी हो सकती है और वितरकों से अनौपचारिक उधार पर निर्भरता घट सकती है।
4. तकनीक को अपनाने की आसान व्यवस्था (Easier Technology Integration)
इस पहल के तहत ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया, जिसे कारोबारी आसानी से अपने मौजूदा सिस्टम से जोड़ सकें। इसमें वितरक प्रबंधन प्रणाली (DMS) को सरल तरीके से जोड़ना, उत्पादों की सूची के लिए समान मानक और साझा डिजिटल इंटरफेस विकसित करना शामिल है।
5. उद्योग से जुड़े भागीदारों के लिए व्यावसायिक प्रोत्साहन (Commercial Incentives for Industry Participants)
डिजिटल ऑर्डर बढ़ाने के लिए FMCG कंपनियों, वितरकों, बिक्री टीमों और दूसरे कारोबारी भागीदारों को उचित वित्तीय प्रोत्साहन देने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। इससे इस व्यवस्था में उनकी भागीदारी लगातार बनी रह सकती है।
ONDC DigiDukaan किराना दुकानों की कैसे कर रहा है मदद? (How ONDC DigiDukaan Helps Kirana Stores)
DigiDukaan का उद्देश्य पारंपरिक वितरण व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि किराना दुकानदारों को डिजिटल खरीदारी की सुविधा देना है। इस मंच के जरिए दुकानदार एक ही डिजिटल माध्यम पर कई ब्रांड, वितरकों और थोक विक्रेताओं के उत्पाद देख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार ऑर्डर दे सकते हैं। इससे उत्पादों की उपलब्धता, कीमतों और व्यापारिक योजनाओं की जानकारी हासिल करना भी आसान होता है।
ONDC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक विभोर जैन ने बताया कि कई वितरक बिल बनाने और ऑर्डर प्रबंधन के लिए डिजिटल साधनों का इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों का एक बड़ा हिस्सा अब भी हाथ से लिखे रिकॉर्ड और पारंपरिक ऑर्डर व्यवस्था पर निर्भर है।
DigiDukaan इसी अंतर को कम करने का प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा वितरक संबंधों को बनाए रखते हुए दुकानदारों को नई डिजिटल सेवाओं से जोड़ना है।
प्रमुख FMCG, तकनीक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां नेटवर्क में शामिल (Major FMCG, Technology and Logistics Companies Join the Network)
DigiDukaan के विस्तार में कई बड़ी कंपनियां अपने वितरण और तकनीकी नेटवर्क के माध्यम से भागीदारी कर रही हैं। FMCG क्षेत्र में हिंदुस्तान यूनिलीवर, मैरिको, कोलगेट-पामोलिव, इमामी और अमूल जैसी कंपनियां इस पहल से जुड़ी हैं। ITC, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और ब्रिटानिया भी अलग-अलग स्तर पर तकनीकी एकीकरण या बातचीत की प्रक्रिया में हैं।
तकनीकी भागीदारों में Paytm for Business, Qwipo और Mulltiply.ai पहले से सक्रिय हैं। वहीं Bizom, Botree, QuIDPe और ENS जैसे सेवा प्रदाता भी इस नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।
परिवहन, सामान की आपूर्ति और भंडारण के क्षेत्र में ElasticRun, Shiprocket, India Post और Moeving जैसे भागीदार शामिल हैं।
अगले चरण में ONDC मुंबई, विशेषकर उत्तर मुंबई में अधिक ब्रांड और वितरकों को जोड़ने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही मौजूदा शहरों में भी सेवाओं और संचालन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड DigiDukaan के विस्तार में करेगा सहयोग (National Traders' Welfare Board Supports DigiDukaan Expansion)
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) National Traders' Welfare Board (NTWB) भी DigiDukaan के विस्तार में ONDC के साथ मिलकर काम कर रहा है। बोर्ड की अध्यक्षता सुनील जे. सिंघी कर रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य स्थानीय व्यापारी संगठनों से संपर्क बढ़ाना और अधिक किराना दुकानदारों को डिजिटल खरीदारी की सुविधा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इसके जरिए छोटे कारोबारियों को बेहतर वितरण सेवाओं, सामान की आसान उपलब्धता और डिजिटल खरीदारी से मिलने वाले लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
ONDC देशभर में डिजिटल कारोबार का विस्तार कर रहा है (ONDC Expands Its Digital Commerce Ecosystem Across India)
ONDC भारत में खुले डिजिटल कॉमर्स ढांचे को विकसित कर रहा है, ताकि छोटे कारोबारियों और उद्यमों के लिए ऑनलाइन व्यापार में शामिल होना आसान हो सके। इसका उद्देश्य डिजिटल बाजार में प्रवेश की बाधाओं को कम करना और अधिक कारोबारियों को नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर देना है।
अब तक ONDC नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में 50 करोड़ से अधिक लेनदेन हो चुके हैं। इसकी प्रमुख पहलों में शामिल हैं:
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DigiDukaan: B2B खरीदारी के लिए 21 हजार से अधिक खुदरा दुकानदारों को डिजिटल मंच से जोड़ना।
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Amazing India: किसानों, कारीगरों, सहकारी समितियों और छोटे उत्पादकों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में मदद करना।
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सार्वजनिक परिवहन: 40 से अधिक उपभोक्ता ऐप के माध्यम से प्रतिदिन पांच लाख से ज्यादा मेट्रो और बस यात्राओं की सुविधा देना।
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लॉजिस्टिक्स: 80 हजार से अधिक कारोबारियों और 30 से ज्यादा छोटे व सूक्ष्म वाहन बेड़ा संचालकों को सहायता देना।
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पर्यटन: 170 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) स्मारकों और 29 संग्रहालयों सहित एक हजार से अधिक अनुभवों की पेशकश करना।
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वित्तीय सेवाएं: छोटे निवेश और कर्ज से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना। इसमें टियर-2 शहरों और उनसे छोटे शहरों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
DigiDukaan का विस्तार ONDC के व्यापक उद्देश्य को आगे बढ़ाता है। इसके जरिए भारत के पारंपरिक कारोबार को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के साथ मौजूदा खुदरा और वितरण व्यवस्था को भी मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


