ज़ोहो का अपना क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्रों को मुफ्त मिलेगा कैटलिस्ट एक्सेस: श्रीधर वेम्बू

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ज़ोहो का अपना क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्रों को मुफ्त मिलेगा कैटलिस्ट एक्सेस: श्रीधर वेम्बू
02 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

ज़ोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया कि कंपनी ने अमेज़ॅन वेब सर्विसेज यानी एडब्ल्यूएस और गूगल क्लाउड जैसे बड़े क्लाउड प्रदाताओं पर मुख्य रूप से स्थिर रहने के बजाय अपना खुद का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों विकसित किया। उनके अनुसार, ज़ोहो ने कंपनी के शुरुआती वर्षों में ही अपने सॉफ़्टवेयर एप्लिकेशन बनाने के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शुरू कर दिया था।

समय के साथ यह इंफ्रास्ट्रक्चर काफी विस्तृत हो गया। इसमें डेटाबेस, कंप्यूटिंग, स्टोरेज, आइडेंटिटी मैनेजमेंट, मैसेजिंग और सर्च जैसी क्लाउड सेवाएं शामिल हैं। ज़ोहो ने धीरे-धीरे इन इंटरनल सिस्टम विकसित किए और बाद में इसके कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स को अपने कैटलिस्ट प्लेटफॉर्म के लिए बाहरी डेवलपर्स के माध्यम से भी उपलब्ध कराना शुरू कर दिया।

अब कंपनी Catalyst पर अपना ध्यान और बढ़ा रही है। इसके तहत Zoho की योजना छात्रों को Catalyst का Free Access देने की भी है, ताकि वे बिना Infrastructure Cost की चिंता किए Software Projects तैयार और Deploy कर सकें।

कैटेलिस्ट का दायरा ज़ोहो इकोसिस्टम से आगे बढ़ा Catalyst Expands Beyond the Zoho Ecosystem

Catalyst को शुरुआत में Zoho Applications को बेहतर बनाने और उन्हें जरूरत के अनुसार Customize करने में Developers की मदद के लिए तैयार किया गया था। यह एक Serverless Development Platform है, जिसका इस्तेमाल अब Zoho Ecosystem से बाहर के Developers भी कर सकते हैं।

ज़ोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू Sridhar Vembu के अनुसार, कंपनी Catalyst पर अपना ध्यान बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य Developers को ऐसी Infrastructure सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिनकी मदद से वे Software के किसी विचार को वास्तविक Application में बदल सकें।

Application तैयार करने के दौरान Developers को केवल Coding पर ही ध्यान नहीं देना होता। Server, Database, Storage, Deployment और अन्य Infrastructure से जुड़े कई तकनीकी काम भी करने पड़ते हैं। Catalyst का उद्देश्य इन प्रक्रियाओं से जुड़ी कुछ जटिलताओं को कम करना है, ताकि Developers अपने Product और उसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर अधिक ध्यान दे सकें।

छात्रों को मुफ्त कैटेलिस्ट एक्सेस देने की तैयारी Zoho Plans Free Catalyst Access for Students

Catalyst को ज्यादा Developers तक पहुंचाने की अपनी योजना के तहत Zoho अब छात्रों के लिए इसे मुफ्त करने की तैयारी कर रही है।

कंपनी का उद्देश्य छात्रों को Software Development के साथ प्रयोग करने और अपने Projects को Deploy करने का अवसर देना है, ताकि उन्हें शुरुआती स्तर पर Infrastructure के खर्च की चिंता न करनी पड़े।

छात्रों के लिए क्लाउड डेवलपमेंट का अवसर An Opportunity for Students to Explore Cloud Development

Free Access मिलने पर छात्र Cloud-Based Tools की मदद से Applications तैयार कर सकेंगे। इससे उन्हें Coding के साथ-साथ Application Development और Product Building की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिल सकता है।

Zoho की इस पहल का व्यापक उद्देश्य Developers को ऐसी Infrastructure सुविधाएं देना है, जिनकी मदद से वे केवल एक विचार तक सीमित न रहें, बल्कि उस विचार को वास्तविक Product में बदल सकें।

ज़ोहो अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़्यादा कंट्रोल रखता है। Zoho Emphasises Greater Control Over Its Infrastructure

Sridhar Vembu पहले भी Zoho के Software Development, Data Management और Infrastructure से जुड़े दृष्टिकोण के बारे में बात कर चुके हैं।

उनके अनुसार, Zoho अपने Products को भारत में विकसित करता है और कंपनी का Global Headquarters Chennai में है। कंपनी 80 से अधिक देशों में Offices संचालित करती है और अमेरिका में भी उसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है।

Vembu के अनुसार, Zoho की Services ऐसे Hardware पर चलती हैं, जिनका स्वामित्व कंपनी के पास है। इसके साथ कंपनी अपने Internal Software Frameworks और Linux तथा PostgreSQL जैसी Open-Source Technologies का भी इस्तेमाल करती है।

कोर होस्टिंग के लिए AWS और Azure पर निर्भर नहीं Zoho Zoho Does Not Rely on AWS or Azure for Core Hosting

Sridhar Vembu के अनुसार, Zoho अपने Products की मुख्य Hosting के लिए AWS या Microsoft Azure जैसे बड़े Public Cloud Platforms का इस्तेमाल नहीं करता।

कंपनी अलग-अलग क्षेत्रों में अपने Data Centres संचालित करती है। Vembu पहले बता चुके हैं कि भारत में रहने वाले ग्राहकों का Data भारत के भीतर ही Host किया जाता है। इसके लिए Mumbai, Delhi और Chennai जैसे स्थानों में Facilities मौजूद हैं तथा भविष्य में अन्य स्थानों पर भी Infrastructure बढ़ाने की योजना है।

Zoho के पास दुनिया भर में 18 से अधिक Data Centres हैं। कंपनी का Data Hosting Model अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में लागू नियमों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

कुछ विशेष कार्यों, जैसे Regional Traffic Switching, के लिए Zoho कुछ Cloud Provider Services का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, Vembu के अनुसार, ग्राहकों का मुख्य Data उन Services पर Store नहीं किया जाता।

ज़ोहो ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क बना रहा है Zoho Is Building a Global Infrastructure Network

Zoho की Infrastructure Strategy केवल अपने Servers और Data Centres रखने तक सीमित नहीं है। कंपनी अलग-अलग स्थानों पर अपने Points of Presence यानी PoPs का भी विस्तार कर रही है।

इसका उद्देश्य Network Connectivity और Services की Performance को बेहतर बनाना है। Hardware और Software Stack पर अधिक नियंत्रण रखने से कंपनी अपने Applications को चलाने वाले Infrastructure को सीधे Manage कर सकती है।

डेटा और एप्लिकेशन प्रदर्शन पर नियंत्रण Greater Control Over Data and Application Performance

अपने Infrastructure को खुद संचालित करने से Zoho को Data Hosting, Application Performance और Software Services को चलाने वाली मूल प्रणालियों पर अधिक नियंत्रण रखने का अवसर मिलता है।

कंपनी का यह मॉडल उसके Products और Services के पीछे मौजूद तकनीकी ढांचे को अपने स्तर पर विकसित और संचालित करने की रणनीति को दर्शाता है।

एआई से तैयार होने वाले कोड को लेकर श्रीधर वेम्बू की चिंता Sridhar Vembu Raises Concerns About AI-Generated Code

Sridhar Vembu ने Software Development में Artificial Intelligence के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी अपनी राय रखी है।

AI-Assisted Programming से जुड़ी एक हालिया चर्चा में उन्होंने Developers को सावधान किया कि AI Systems को Software की समझ का पूरी तरह विकल्प नहीं बनने देना चाहिए।

उनका कहना है कि Engineers AI Coding Tools का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने Applications, Architecture और Code की मजबूत तकनीकी समझ बनाए रखनी चाहिए।

डेवलपर्स के लिए टेक्निकल समझ ज़रूरी है Developers Should Maintain Strong Technical Understanding

Vembu के अनुसार, AI Coding Systems का बहुत तेजी से इस्तेमाल तब जोखिम पैदा कर सकता है, जब Developers द्वारा तैयार किए गए Code पर उनकी अपनी समझ कम होती जाए।

उनकी यह टिप्पणी एक Developer द्वारा साझा किए गए ऐसे कार्यस्थल के अनुभव के जवाब में आई, जहां Specifications, Code, Tests और Engineering से जुड़े अन्य कामों के लिए Claude Code जैसे AI Coding Tools का बढ़ता इस्तेमाल किया जा रहा था।

Vembu का दृष्टिकोण यह है कि AI एक उपयोगी Development Assistant हो सकता है, लेकिन Engineers को उन Systems की समझ बनाए रखनी चाहिए जिन्हें वे बनाते और Maintain करते हैं।

उन्होंने AI Development Tools को तेजी से अपनाने की तुलना एक ऐसे अत्याधुनिक वाहन के इस्तेमाल से की, जिसे चलाने वाला व्यक्ति उसके संचालन को पूरी तरह नहीं समझता। उनके अनुसार, Development की गति बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके साथ Technical Knowledge को बनाए रखना भी जरूरी है।

Technology को लेकर Zoho की व्यापक रणनीति Zoho’s Broader Approach to Technology

Zoho का अपने Infrastructure में निवेश और Catalyst को ज्यादा Developers तक पहुंचाने की योजना कंपनी की व्यापक Technology Strategy का हिस्सा है।

कंपनी लंबे समय से अपने Software और Infrastructure को अंदर से विकसित करने पर जोर देती रही है। अब वह इसी Infrastructure के कुछ हिस्सों को व्यापक Developer Community और विशेष रूप से छात्रों के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दूसरी ओर, AI Coding को लेकर Sridhar Vembu की टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि कंपनी नई Technology को अपनाने के साथ-साथ Engineering Knowledge को बनाए रखने पर भी जोर देती है।

Infrastructure पर नियंत्रण, Developers के लिए Technology की पहुंच और AI-Assisted Software Development के जिम्मेदार इस्तेमाल पर Zoho का यह दृष्टिकोण आने वाले समय में कंपनी की Technology Strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।