Zoho ने 12,313 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया

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Zoho ने 12,313 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया
02 May 2026
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Zoho के श्रीधर वेंबू की अपील: अमेरिका में बसे भारतीय तुरंत लौटें भारत

वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए एक प्रभावशाली संदेश में Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में बसे भारतीय पेशेवरों से भारत लौटने पर विचार करने की अपील की है। देश में बढ़ते अवसरों और तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ऐसे महत्वपूर्ण दौर में है जहां वैश्विक अनुभव देश के विकास को तेज़ी दे सकता है।

रिवर्स माइग्रेशन के लिए मजबूत अपील

श्रीधर वेंबू ने संयुक्त राज्य अमेरिका में काम कर रहे भारतीय मूल के पेशेवरों से भारत लौटकर देश के विकास में योगदान देने की जोरदार अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत अब पहले से कहीं अधिक वैश्विक प्रतिभा का उपयोग करने के लिए तैयार है।

श्रीधर वेंबू के अनुसार रिवर्स माइग्रेशन केवल भावनात्मक अपील नहीं बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है। उनका मानना है, कि विदेशों में काम कर रहे भारतीयों के पास ऐसा अनुभव और ज्ञान है, जो भारत को वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में मजबूत बना सकता है। देश को एक नवाचार केंद्र बनाने के लिए उनकी वापसी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारत की युवा पीढ़ी को मिलेगा लाभ

श्रीधर वेंबू ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता को विकसित करने के लिए अनुभवी मार्गदर्शन की आवश्यकता है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में काम कर चुके पेशेवर भारत की नई पीढ़ी को दिशा दे सकते हैं।

उन्होंने बताया कि विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने उन्नत तकनीक, प्रबंधन और नवाचार आधारित कार्य संस्कृति का अनुभव हासिल किया है। यदि वे भारत लौटते हैं, तो वे युवाओं का मार्गदर्शन कर सकते हैं, मजबूत संस्थान बना सकते हैं और देश को प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं।

अमेरिका में भारतीयों की सफलता की कहानी

श्रीधर वेंबू ने उन भारतीयों की यात्रा का भी जिक्र किया जो सीमित संसाधनों के बावजूद अमेरिका गए और अपनी मेहनत व शिक्षा के बल पर सफलता हासिल की।

उन्होंने अमेरिका द्वारा दिए गए अवसरों के लिए आभार जताया, लेकिन यह भी कहा कि विदेशों में मिली सफलता और अनुभव को अब भारत के विकास में लगाया जाना चाहिए।

बदलते वैश्विक माहौल पर चिंता

श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में बढ़ती एंटी-इमिग्रेंट भावना पर भी चिंता जताई। उनका मानना है, कि इस तरह के रुझान भविष्य में विदेशी पेशेवरों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे समय में भारत लौटना एक बेहतर विकल्प हो सकता है, जहां न केवल अवसर हैं, बल्कि अपनेपन का भाव भी है।

तकनीकी ताकत से तय होता है, वैश्विक सम्मान

श्रीधर वेंबू का मानना है, कि आज के दौर में किसी भी देश का वैश्विक सम्मान उसकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर करता है। जो देश नवाचार, अनुसंधान और उन्नत उत्पादन में आगे हैं, वही वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनते हैं।

भारत लंबे समय से प्रतिभाशाली लोगों का बड़ा स्रोत रहा है, लेकिन इनमें से कई लोग विदेश चले गए। श्रीधर वेंबू के अनुसार यदि भारत को वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है, तो उसे अपनी प्रतिभा को देश में ही बनाए रखना होगा।

भारत में बढ़े हैं, अवसर

श्रीधर वेंबू ने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले एक दशक में भारत में अवसरों में काफी वृद्धि हुई है। स्टार्टअप, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है।

अब भारत लौटना करियर के लिए समझौता नहीं बल्कि एक बड़ा अवसर है, जहां पेशेवर देश के विकास में योगदान देते हुए खुद भी आगे बढ़ सकते हैं।

वेंबू की अपनी यात्रा प्रेरणा का स्रोत

श्रीधर वेंबू की अपनी कहानी उनके संदेश को और मजबूत बनाती है। उन्होंने अमेरिका में काम करने के बाद भारत लौटकर Zoho को एक वैश्विक कंपनी बनाया।

उन्होंने तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्र से कंपनी का संचालन कर यह साबित किया कि विश्वस्तरीय नवाचार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

भारत के भविष्य को आकार देने की अपील

वेंबू की अपील का मुख्य उद्देश्य वैश्विक भारतीयों को भारत के भविष्य निर्माण में शामिल करना है। उनका मानना है, कि विदेशों से लौटने वाले पेशेवर देश को आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत बना सकते हैं।

उनका संदेश “भारत को आपकी प्रतिभा की ज़रूरत है” इस बात को स्पष्ट करता है, कि देश की प्रगति उसके लोगों के सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करती है।

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बिजनेस सॉल्यूशंस देने वाली कंपनी Zoho Corporation भारत की पहली ऐसी बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप बन गई है, जिसने 12,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर लिया है। कंपनी ने साल-दर-साल 17.8% की लगातार ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि Sridhar Vembu द्वारा शुरू की गई इस कंपनी का मुनाफा इस दौरान स्थिर रहा।

रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ से मिले कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के मुताबिक पिछले तीन फाइनेंशियल सालों में Zoho का रेवेन्यू लगभग दोगुना हो गया है, FY22 में 6,711 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 12,313 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने मुख्य रूप से अपने इन-हाउस एंटरप्राइज़ IT मैनेजमेंट और बिज़नेस एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर की बिक्री से रेवेन्यू कमाया। इसके मुख्य प्रोडक्ट ManageEngine और Zoho ग्रोथ के मुख्य ज़रियें बने रहे। Zoho Suite ने कुल रेवेन्यू में 57% का योगदान दिया, जो कि 7,051 करोड़ रुपये था, जबकि ManageEngine का योगदान 39% रहा, जो कि 4,863 करोड़ रुपये था। बाकी 399 करोड़ रुपये सेवाओं की बिक्री से आए।

कंपनी ने अन्य आय से भी 1,231 करोड़ रुपये जोड़े—जो मुख्य रूप से ब्याज और मौजूदा निवेशों की बिक्री से हुए लाभ से प्राप्त हुए—जिससे वित्त वर्ष 24 के 11,193 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 25 में कुल राजस्व बढ़कर 13,544 करोड़ रुपये हो गया।

ज्योग्राफिकली, नॉर्थ अमेरिका सबसे बड़ा मार्केट बना रहा, जिसने रेवेन्यू में 41% यानी 5,028 करोड़ रुपये का कंट्रीब्यूशन दिया। इसके बाद एशिया और यूरोप का स्थान रहा, जिन्होंने क्रमशः 30% (3,711 करोड़ रुपये) और 23% (2,819 करोड़ रुपये) का योगदान दिया। शेष राजस्व लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे क्षेत्रों से प्राप्त हुआ।

खर्च के मामले में एम्प्लॉई बेनिफिट्स सबसे बड़ा खर्च बनकर उभरा, जो कुल खर्च का 47% था। यह खर्च FY24 के 3,372 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 29% की बढ़ोतरी के साथ 4,347 करोड़ रुपये हो गया। विज्ञापन और प्रचार पर होने वाला खर्च भी 31.3% बढ़कर 2,230 करोड़ रुपये हो गया।

कुल खर्च साल-दर-साल 30.5% बढ़कर FY25 में 9,217 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 7,062 करोड़ रुपये था। इसकी वजह लीगल, सर्वर, डेटा सेंटर, डेप्रिसिएशन और ट्रैवल खर्च पर ज़्यादा खर्च था।

खर्चों में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी ने रेवेन्यू ग्रोथ को पीछे छोड़ दिया, जिसके चलते FY24 के ₹3,299 करोड़ के मुकाबले FY25 में मुनाफ़े में थोड़ी गिरावट आकर यह ₹3,191 करोड़ रह गया। खास बात यह है, कि डेफ़र्ड टैक्स समेत टैक्स खर्च ₹820 करोड़ से बढ़कर ₹1,112 करोड़ हो गए, जिससे मुनाफ़े पर और भी ज़्यादा दबाव पड़ा।

यूनिट लेवल पर Zoho ने FY25 में एक रुपया कमाने के लिए 0.75 रुपये खर्च किए। इसके ROCE और EBITDA मार्जिन क्रमशः 16.85% और 31.27% रहे। FY25 तक कंपनी ने कुल 6,010 करोड़ रुपये की मौजूदा संपत्ति बताई, जिसमें 1,880 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस शामिल है।

इस साल के दौरान श्रीधर वेम्बु ने अपनी सक्रिय कार्यकारी भूमिका से हटकर 'चीफ़ साइंटिस्ट' का पद संभाला। शैलेश कुमार डेवी को नया 'ग्रुप CEO' नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही Zoho Corporation ने 'Zoho Pay' लॉन्च करके कंज्यूमर फिनटेक के क्षेत्र में भी कदम रखा है, यह एक पेमेंट्स ऐप है, जो उसके चैट प्लेटफ़ॉर्म 'Arattai' के साथ इंटीग्रेटेड है, और यह एंटरप्राइज़ सॉफ़्टवेयर से आगे उसके विस्तार का संकेत है।

चूंकि कंपनी पब्लिक मार्केट से दूर है, और उसकी कैश की स्थिति भी काफी अच्छी है, इसलिए Zoho का कम मार्जिन शायद घरेलू बाज़ार पर उसके फोकस का नतीजा हो सकता है। इस बाज़ार में उसने कुछ ऐसी बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं, जिन्होंने खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं, जैसे कि अब वह भारत सरकार के कई मंत्रालयों को ईमेल सेवाएँ दे रही है। भले ही इन 'प्रतिष्ठित' सफलताओं का आर्थिक मूल्य कम हो, लेकिन इन्होंने संस्थापक वेम्बु की 'स्वदेशी' सोच और साख को एक नया आयाम दिया है। कंपनी भारत में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है, भले ही उसका मार्जिन कम हो - और साथ ही वह दूसरे बाज़ारों में अपने कारोबार पर AI के असर से भी निपट रही है। ZohoPay या Arattai जैसे प्रोडक्ट्स की शुरुआत असल में घरेलू बाज़ार के लिए एक तरह के 'ट्रायल' ही हैं, जहाँ कंपनी सिर्फ़ व्यवसायों तक ही सीमित न रहकर, एक सेवा प्रदाता के तौर पर और भी बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद रखती है। अमेरिका में वेम्बु की पत्नी से तलाक़ से जुड़ी कानूनी परेशानियाँ कंपनी पर एक 'साये' की तरह मंडरा रही हैं, शायद इसी वजह से कंपनी वेम्बु पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि अमेरिकी अदालतें कंपनी की संपत्तियों को ज़ब्त करने का अधिकार रखती हैं। इन मुद्दों के सुलझने के बाद कंपनी के विकास और उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में विस्तार को एक नई और ज़ोरदार गति मिलेगी, लेकिन फ़िलहाल कंपनी अपने नए 'ग्रुप CEO' को काम समझने और अपनी जगह बनाने के लिए ज़्यादा आज़ादी और समय देने में ही संतुष्ट रहेगी।