UPI का दबदबा जारी, भारत में 85% डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कब्जा: RBI रिपोर्ट
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भारतीय राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस (UPI) ने 2025 की दूसरी छमाही में सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन का 85.5 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जो भारत के भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी बढ़ती प्रमुखता को दर्शाता है। यह जानकारी Reserve Bank of India के आंकड़ों के अनुसार सामने आई है।
डिजिटल भुगतान में अन्य प्रणालियों की हिस्सेदारी
रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), जो एक उच्च-मूल्य लेकिन कम मात्रा वाला भुगतान सिस्टम है, ने लेनदेन की मात्रा में केवल 0.1 प्रतिशत का योगदान दिया। वहीं नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) दोनों ने 3.6-3.6 प्रतिशत का योगदान दिया, जैसा कि RBI की नवीनतम अर्धवार्षिक भुगतान प्रणाली रिपोर्ट में बताया गया है।
लेनदेन मूल्य में RTGS की प्रमुख भूमिका
हालांकि लेनदेन की मात्रा में UPI सबसे आगे है, लेकिन मूल्य के मामले में RTGS सबसे प्रमुख बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार:
- RTGS का हिस्सा: 68.6 प्रतिशत
- NEFT का हिस्सा: 14.9 प्रतिशत
- UPI का हिस्सा: 9.5 प्रतिशत
- PPIs का हिस्सा: 0.1 प्रतिशत
यह दर्शाता है, कि RTGS बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है, जबकि UPI मुख्य रूप से छोटे और खुदरा भुगतान के लिए उपयोग होता है।
UPI का खुदरा भुगतान में वर्चस्व
रिपोर्ट में बताया गया है, कि UPI पूरे देश में बड़े पैमाने पर खुदरा डिजिटल भुगतान का मुख्य चालक बना हुआ है। वहीं RTGS बड़े मूल्य के निपटान (settlements) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NEFT की क्षमता, जो छोटे और बड़े दोनों प्रकार के लेनदेन को एक घंटे के भीतर निपटाने में सक्षम है, इसे भारत के विकसित हो रहे डिजिटल भुगतान वातावरण में प्रासंगिक बनाए रखती है।
भारत के डिजिटल भुगतान में तेजी से वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र काफी तेजी से बढ़ा है:
- 2016 से 2025 के बीच लेनदेन की मात्रा 33 गुना बढ़ी
- इसी अवधि में लेनदेन मूल्य लगभग तीन गुना बढ़ा
पिछले पांच वर्षों में:
- लेनदेन की मात्रा चार गुना से अधिक बढ़ी
- लेनदेन मूल्य लगभग दोगुना हुआ
CAGR और विकास दर
इस अवधि में:
- लेनदेन मात्रा में 43 प्रतिशत CAGR
- लेनदेन मूल्य में 17 प्रतिशत CAGR दर्ज किया गया
विकास के प्रमुख कारण
RBI के अनुसार इस तेज वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
- स्मार्टफोन का बढ़ता उपयोग
- UPI जैसी सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना का विकास
- सुरक्षित और आसान कैशलेस लेनदेन पर बढ़ता भरोसा
- डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार
कुल डिजिटल भुगतान में भारी वृद्धि
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि भारत में कुल भुगतान लेनदेन तेजी से बढ़े हैं:
- 2021 में कुल लेनदेन: 6,437 करोड़
- 2025 में कुल लेनदेन: 26,819 करोड़
मूल्य के हिसाब से:
- 2021 में: ₹1,741 लाख करोड़
- 2025 में: ₹3,215 लाख करोड़
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर भारत का डिजिटल भुगतान सिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। UPI ने खुदरा डिजिटल लेनदेन में अपना दबदबा मजबूत किया है, जबकि RTGS और NEFT बड़े और मध्यम मूल्य के लेनदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
Reserve Bank of India की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है, कि भारत का भुगतान ढांचा पिछले दशक में अत्यधिक विकसित हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसके और अधिक डिजिटल और मजबूत होने की संभावना है।


