टाटा स्टारबक्स की बड़ी उपलब्धि, भारत में 500 स्टोर्स का आंकड़ा पार

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टाटा स्टारबक्स की बड़ी उपलब्धि, भारत में 500 स्टोर्स का आंकड़ा पार
19 May 2026
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News Synopsis

Tata Consumer Products और Starbucks Corporation के संयुक्त उद्यम टाटा स्टारबक्स ने FY26 में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। प्रीमियम कैफे चेन ने अपने घाटे में बड़ी कमी की है, और भारत में 500 से अधिक स्टोर्स का आंकड़ा भी पार कर लिया है। कंपनी ने महानगरों के साथ-साथ टियर-II और टियर-III शहरों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है।

FY26 में टाटा स्टारबक्स का घाटा घटा

Tata Starbucks ने FY26 में अपने शुद्ध घाटे में बड़ी गिरावट दर्ज की, जो बेहतर ऑपरेशनल दक्षता और संतुलित विस्तार रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का शुद्ध घाटा FY25 के 135.7 करोड़ रुपये से घटकर FY26 में 49.47 करोड़ रुपये रह गया, यानी इसमें 60 प्रतिशत से अधिक की कमी आई।

यह सुधार ऐसे समय में आया है, जब उपभोक्ताओं के विवेकाधीन खर्च पर दबाव बना हुआ है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है, कि लागत नियंत्रण, बेहतर स्टोर उत्पादकता और नियंत्रित विस्तार ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद की।

साथ ही कंपनी की आय में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई। FY26 में टाटा स्टारबक्स का राजस्व 7 प्रतिशत बढ़कर 1,367 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस वृद्धि में नए स्टोर खुलने और मौजूदा स्टोर्स पर ग्राहकों के बढ़ते खर्च का बड़ा योगदान रहा।

टिकाऊ विकास पर केंद्रित विस्तार रणनीति

FY26 के दौरान टाटा स्टारबक्स ने अपने रिटेल नेटवर्क का विस्तार जारी रखा, हालांकि कंपनी ने आक्रामक विस्तार के बजाय संतुलित रणनीति अपनाई। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने 23 नए स्टोर्स जोड़े, जिसके बाद भारत में इसके कुल स्टोर्स की संख्या 500 के पार पहुंच गई। कंपनी अब देश के 80 शहरों में संचालन कर रही है।

कंपनी ने कहा कि अब उसकी विस्तार रणनीति अधिक योजनाबद्ध और लाभप्रदता केंद्रित है। तेजी से स्टोर खोलने के बजाय कंपनी हर स्टोर की कमाई और ऑपरेशनल दक्षता पर ध्यान दे रही है।

यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब भारत में कई वैश्विक फूड और बेवरेज ब्रांड बदलती उपभोक्ता मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी विस्तार योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

टियर-II और टियर-III शहरों में मजबूत पकड़

महानगर टाटा स्टारबक्स के लिए अभी भी अहम बाजार बने हुए हैं, लेकिन कंपनी अब छोटे शहरों पर भी तेजी से फोकस बढ़ा रही है। टियर-II और टियर-III शहरों में बढ़ती शहरीकरण दर, बढ़ती आय और बदलती लाइफस्टाइल प्रीमियम कैफे ब्रांड्स के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

कंपनी का मानना है कि छोटे शहरों में युवा उपभोक्ताओं के बीच कैफे कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिससे भविष्य में बड़े विकास की संभावना है। टाटा स्टारबक्स ने कहा कि उसकी रणनीति प्रीमियम ब्रांडिंग और व्यापक पहुंच के बीच संतुलन बनाने पर आधारित है।

स्थानीय जरूरतों के अनुसार स्टोर फॉर्मेट और प्रोडक्ट्स पेश करके कंपनी नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

स्थानीय पसंद के अनुसार कीमत और मेन्यू में बदलाव

भारत के बाजार को ध्यान में रखते हुए टाटा स्टारबक्स अब अपने प्रोडक्ट्स और प्राइसिंग को अधिक स्थानीय बनाने पर काम कर रही है। कंपनी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए स्थानीय स्वाद के अनुरूप मेन्यू, मौसमी प्रोडक्ट्स और भारत-केंद्रित ऑफर्स पेश कर रही है।

कंपनी ने बताया कि FY26 में उसकी वृद्धि में नए बेवरेज इनोवेशन, फूड पोर्टफोलियो का विस्तार, मौसमी सहयोग और बेहतर गिफ्टिंग रेंज का अहम योगदान रहा। इन पहलों से ग्राहकों की भागीदारी बढ़ी और दोबारा आने वाले ग्राहकों की संख्या में सुधार हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है, कि भारत के प्रतिस्पर्धी फूड सर्विस बाजार में वैश्विक ब्रांड्स के लिए स्थानीय पसंद के अनुसार खुद को ढालना बेहद जरूरी हो गया है।

पॉजिटिव Same-Store Sales Growth से मजबूत मांग का संकेत

FY26 में टाटा स्टारबक्स के प्रदर्शन की एक बड़ी उपलब्धि उसका पॉजिटिव Same-Store Sales Growth (SSG) रहा। SSG उन स्टोर्स की बिक्री में वृद्धि को मापता है जो कम से कम एक साल से संचालन में हैं और इसे रिटेल तथा रेस्तरां उद्योग में कारोबार की मजबूती का अहम संकेतक माना जाता है।

पॉजिटिव SSG का मतलब है, कि पुराने स्टोर्स से अधिक राजस्व आ रहा है, जो बढ़ती ग्राहक संख्या, मजबूत ब्रांड जुड़ाव और प्रति ऑर्डर अधिक खर्च को दर्शाता है। विश्लेषकों के अनुसार यह आर्थिक दबाव के बावजूद ग्राहकों की स्थिर मांग और ब्रांड के प्रति भरोसे को दिखाता है।

कंपनी ने इस प्रदर्शन का श्रेय बेहतर ग्राहक अनुभव, बेहतर संचालन और नए प्रोडक्ट ऑफर्स को दिया।

लागत प्रभावी स्टोर फॉर्मेट पर जोर

टाटा स्टारबक्स और उसकी मूल कंपनियां अब भारत में दीर्घकालिक विकास के लिए कम लागत वाले स्टोर फॉर्मेट पर जोर दे रही हैं। कंपनी ऐसे स्टोर मॉडल तलाश रही है जो कम ऑपरेशनल लागत के साथ अधिक पहुंच प्रदान कर सकें।

विशेषज्ञों का कहना है, कि छोटे और अधिक कुशल स्टोर फॉर्मेट कंपनी को कम निवेश में तेजी से विस्तार करने में मदद कर सकते हैं। इससे बदलते उपभोक्ता व्यवहार, जैसे टेकअवे और क्विक-सर्विस कैफे की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा।

कंपनी ने कहा कि वह ग्राहक और कर्मचारियों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ उत्पादकता आधारित पहलों के जरिए लाभदायक वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करती रहेगी।

भारत के कैफे बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

पिछले कुछ वर्षों में भारत का कैफे और आउट-ऑफ-होम डाइनिंग बाजार काफी प्रतिस्पर्धी हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के अलावा घरेलू कैफे चेन और क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट कंपनियां भी तेजी से विस्तार कर रही हैं।

इस प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां अब केवल विस्तार पर नहीं बल्कि लाभप्रदता, ग्राहक बनाए रखने और ऑपरेशनल दक्षता पर भी ध्यान दे रही हैं। टाटा स्टारबक्स की नई रणनीति भी इसी बदलते उद्योग ट्रेंड को दर्शाती है।

चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते कॉफी बाजारों में से एक बना हुआ है, जो संगठित कैफे चेन के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है।

टाटा स्टारबक्स का आगे का प्लान

आने वाले समय में टाटा स्टारबक्स के चयनित विस्तार के साथ लाभप्रदता पर और अधिक फोकस करने की संभावना है। कंपनी की रणनीति में संतुलित स्टोर विस्तार, छोटे शहरों में गहरी पहुंच, स्थानीय मेन्यू और ग्राहक-केंद्रित इनोवेशन अहम भूमिका निभाएंगे।

भारत में 500 से अधिक स्टोर्स के साथ कंपनी अब ऐसे चरण में पहुंच चुकी है, जहां तेज विस्तार के बजाय टिकाऊ विकास और बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी।