दूध उद्योग में बड़ा बदलाव, मदर डेयरी ने पेश किया इको-फ्रेंडली पाउच
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प्लास्टिक कचरे से बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं के बीच मदर डेयरी ने एक ऐसी अभिनव पैकेजिंग पेश की है, जो प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती है। कंपनी ने भारत का पहला प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नष्ट होने वाला दूध पाउच लॉन्च किया है, जो समय के साथ पूरी तरह से विघटित हो जाता है, और पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई अवशेष नहीं छोड़ता। यह पहल टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मदर डेयरी ने पेश किया भारत का पहला प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाला दूध पाउच
डेयरी और पैकेजिंग उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Mother Dairy ने एक विशेष दूध पाउच लॉन्च करने की घोषणा की है, जिसे मिट्टी में प्राकृतिक रूप से विघटित होने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नवाचार का अनावरण किया और इसे भारतीय डेयरी उद्योग की अपनी तरह की पहली पैकेजिंग तकनीक बताया।
नया पाउच इस तरह विकसित किया गया है, कि उपयोग के बाद यह धीरे-धीरे प्राकृतिक तत्वों में बदल जाता है। पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग जहां सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बनी रह सकती है, वहीं यह नई पैकेजिंग अपेक्षाकृत कम समय में मिट्टी में विघटित हो जाती है।
इस पहल के साथ मदर डेयरी भारत के खाद्य एवं पेय उद्योग में टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देने वाली अग्रणी कंपनियों में शामिल हो गई है।
विश्व पर्यावरण दिवस से होगी शुरुआत
मदर डेयरी ने घोषणा की है, कि शुरुआत में यह नई डिग्रेडेबल पैकेजिंग दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बेचे जाने वाले अपने गाय के दूध (Cow Milk) वैरिएंट के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
इसकी शुरुआत 5 जून से होगी, जिसे दुनियाभर में World Environment Day के रूप में मनाया जाता है। यह समय-निर्धारण कंपनी की पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता और सतत विकास लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कंपनी उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया और परिचालन प्रदर्शन का आकलन करने के बाद भविष्य में इसे अन्य उत्पादों और क्षेत्रों तक विस्तार दे सकती है।
कैसे काम करता है, नया दूध पाउच
नई पैकेजिंग में एक विशेष प्रकार की डिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक प्लास्टिक से अलग तरीके से व्यवहार करती है।
मदर डेयरी के अनुसार उपयोग के बाद यह सामग्री बायो-अवेलेबल वैक्स (Bioavailable Wax) में परिवर्तित हो जाती है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव (माइक्रोब्स) इस पदार्थ को प्राकृतिक रूप से तोड़ देते हैं और यह अंततः प्राकृतिक तत्वों में बदल जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई हानिकारक अवशेष नहीं बचता, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।
कुछ वर्षों में मिट्टी में हो जाएगा पूरी तरह विघटित
इस नई पैकेजिंग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी तेज विघटन क्षमता है।
सामान्य प्लास्टिक पैकेजिंग को पूरी तरह खत्म होने में कई सौ साल लग सकते हैं, जबकि मदर डेयरी का यह नया दूध पाउच कुछ ही वर्षों में मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नष्ट हो सकता है।
इससे लैंडफिल, कृषि भूमि और प्राकृतिक पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे के जमाव को कम करने में सहायता मिलेगी।
यह पहल भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करती है।
उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त आर्थिक बोझ
नई तकनीक और अनुसंधान पर आधारित इस पैकेजिंग के बावजूद मदर डेयरी ने स्पष्ट किया है, कि उपभोक्ताओं को दूध की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Meenesh Shah, चेयरमैन, National Dairy Development Board के अनुसार पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग की ओर यह बदलाव ग्राहकों पर अतिरिक्त लागत डाले बिना किया जा रहा है।
यह कदम सुनिश्चित करता है, कि टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर न हों।
चार वर्षों के अनुसंधान का परिणाम है, यह नवाचार
इस प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले दूध पाउच को विकसित करने में कंपनी को चार वर्ष से अधिक समय लगा।
मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक Jayatheertha Chary के अनुसार इस तकनीक को विकसित करने के लिए व्यापक अनुसंधान और परीक्षण किए गए। इसमें उपयुक्त सामग्री की पहचान, पैकेजिंग की मजबूती, दूध की गुणवत्ता की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों का गहन अध्ययन शामिल था।
कई वर्षों के प्रयासों के बाद कंपनी ऐसी पैकेजिंग विकसित करने में सफल रही जो उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करती है।
रीसाइक्लिंग के साथ प्राकृतिक विघटन की सुविधा
इस नवाचार की एक और विशेषता यह है, कि यह पाउच प्राकृतिक रूप से विघटित होने के साथ-साथ रीसाइक्लेबल भी है।
इसका मतलब है, कि जहां रीसाइक्लिंग की व्यवस्था उपलब्ध है, वहां इन पाउचों को पुनर्चक्रित किया जा सकता है। वहीं यदि वे मिट्टी में पहुंच जाते हैं तो समय के साथ प्राकृतिक रूप से नष्ट भी हो जाएंगे।
कंपनी के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य "फ्यूजिटिव प्लास्टिक" यानी ऐसा प्लास्टिक कचरा कम करना है, जो औपचारिक कचरा प्रबंधन प्रणाली से बाहर निकलकर पर्यावरण में फैल जाता है।
भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
विशेषज्ञ इस लॉन्च को भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। दुनियाभर में उपभोक्ता तेजी से ऐसे ब्रांडों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को महत्व देते हैं।
प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाली दूध पैकेजिंग का यह कदम दर्शाता है, कि पारंपरिक उद्योग भी नवाचार और तकनीक के माध्यम से टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
NDDB चेयरमैन मीनिश शाह ने इसे डेयरी क्षेत्र द्वारा स्थापित किया गया एक नया मानक बताया, जो भविष्य के लिए तैयार और पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करता है।
मदर डेयरी का विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो
वर्ष 1974 में स्थापित मदर डेयरी आज भारत की सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों में से एक है। कंपनी प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध की आपूर्ति विभिन्न राज्यों में करती है।
दूध के अलावा कंपनी दही, पनीर, घी, आइसक्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों का निर्माण और विपणन भी करती है।
इसके अलावा कंपनी का विविधीकृत पोर्टफोलियो खाद्य तेलों के क्षेत्र में Dhara ब्रांड तथा फल, सब्जियां, फ्रोजन फूड, स्नैक्स, पल्प और कंसंट्रेट्स के क्षेत्र में Safal ब्रांड के माध्यम से भी मौजूद है।
निष्कर्ष:
मदर डेयरी द्वारा भारत के पहले प्राकृतिक रूप से मिट्टी में नष्ट होने वाले दूध पाउच का लॉन्च टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह नवाचार न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, बल्कि खाद्य एवं पेय उद्योग के लिए पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग का नया मानक भी स्थापित करेगा। उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत डाले बिना इस तकनीक को अपनाना कंपनी की पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। आने वाले समय में यह पहल अन्य कंपनियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।


