सरकार ने इनकम-टैक्स रूल्स 2026 को नोटिफाई कर दिया

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सरकार ने इनकम-टैक्स रूल्स 2026 को नोटिफाई कर दिया
21 Mar 2026
6 min read

News Synopsis

सरकार ने इनकम टैक्स का नया नियम Income Tax Rules 2026 अधिसूचित कर दिया है। इसमें सरकार ने एचआरए से लेकर कैपिटल गेन्स तक में बदलाव किया है। बड़े शहरों में रहने और नौकरी करने वालों को एचआरए छूट का ज्यादा फायदा मिलेगा। वहीं किरायेदार को मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता भी बताना होगा। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) से लागू होंगे। इनका असर जुलाई 2027 में भरे जाने वाले आईटीआर (ITR) पर दिखेगा।

जानें क्या-क्या हुआ बदलाव?

1. सैलरीड लोगों के लिए HRA में छूट

> नए नियमों के तहत सैलरी कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के नियमों को स्पष्ट किया गया है।

> अब भारत के 8 प्रमुख शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को उनके वेतन के 50% तक की HRA छूट मिलेगी। ये शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु हैं।

> इन 8 शहरों के अलावा अन्य स्थानों पर रहने वालों के लिए एचआरए छूट की सीमा 40% रहेगी।

2. मकान मालिक के साथ बताना होगा संबंध

> टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार ने अब पारदर्शिता बढ़ा दी है। इनकम टैक्स के नए नियमों के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अब फॉर्म 124 में यह खुलासा करना होगा कि उनका मकान मालिक के साथ क्या संबंध है।

> एचआरए छूट की गणना अभी भी तीन आधारों में से सबसे कम राशि पर होगी। इनमें पहला- प्राप्त वास्तविक एचआरए, दूसरा- चुकाया गया किराया (सैलरी का 10%) और तीसरा- सैलरी का 50% या 40% शामिल हैं।

3. स्टॉक एक्सचेंजों के लिए कड़े नियम

सरकार ने इनकम टैक्स के नए नियमों में स्टॉक एक्सचेंजों को लेकर भी कुछ बदलाव किए हैं। डेरिवेटिव ट्रेडिंग (F&O) के लिए मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज कहलाने के लिए अब एक्सचेंजों को सख्त शर्तों का पालन करना होगा:

> एक्सचेंजों को ग्राहकों का PAN और यूनिक क्लाइंट आईडी जैसे डेटा को अनिवार्य रूप से कैप्चर करना होगा।

> सभी कैश और डेरिवेटिव लेनदेन का पूरा ऑडिट ट्रेल 7 साल तक सुरक्षित रखना होगा।

> एक्सचेंजों को हर महीने की 15 तारीख तक आयकर महानिदेशक (सिस्टम) को मासिक विवरण जमा करना होगा।

4. एसेट होल्डिंग पीरियड पर स्पष्टता

कैपिटल गेन्स की कैलकुलेशन के लिए होल्डिंग पीरियड (संपत्ति पास रखने की अवधि यानी शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म) को लेकर नियम साफ किए गए हैं:

> आपने बॉन्ड या डिबेंचर को शेयरों में बदला है, तो होल्डिंग पीरियड की गणना मूल इंस्ट्रूमेंट को खरीदने की तारीख से की जाएगी।

> अगर अचल संपत्ति इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (IDS) 2016 के तहत घोषित है, तो होल्डिंग पीरियड रजिस्टर्ड डीड की तारीख से माना जाएगा। अन्य संपत्तियों के मामले में होल्डिंग पीरियड की गिनती 1 जून 2016 से होगी।

क्या है, नए नियमों का उद्देश्य?

सरकार का मानना है, कि नए Income Tax Rules 2026 से टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियम ज्यादा स्पष्ट होंगे। हालांकि इससे टैक्सपेयर्स और कंपनियों के लिए कॉम्प्लायंस का दायरा भी बढ़ेगा। सरकार का फोकस टैक्स चोरी रोकना और सिस्टम को आधुनिक बनाना है।

डिजिटल बिजनेस पर भारतीय टैक्स लागू

सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल कारोबारियों के लिए है। अब ऐसे विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऐप्स, ऑनलाइन सेवाओं और उत्पादों को भारत में टैक्स देना होगा भले ही उनका भारत में कोई ऑफिस न हो। नए नियम तय करते हैं, कि अगर भारतीय यूजर्स से भुगतान 2 करोड़ रुपये से अधिक है, या भारत में कम से कम 3 लाख यूजर्स हैं, तो कंपनी भारत में टैक्स के दायरे में आ जाएगी। इसका मतलब है, कि गूगल, मेटा, टिक‑टॉक जैसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स को भारत में टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ेगा, भले ही वह भारत में पर्सनल मौजूदगी न रखते हों।