नॉन-बायोडीग्रेडेबल वेस्ट क्या होता है?

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20 Feb 2023
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नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट अपघटित नहीं होता है। वे पर्यावरण में जमा हो जाते हैं और बायोमैग्निफिकेशन का कारण बनते हैं; इस संचय के परिणामस्वरूप, वे मिट्टी और पानी को प्रदूषित करते हैं; वे पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। अगर ऐसे कचरे को जलाया जाए तो ये हवा को प्रदूषित करते हैं।
गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट, जैसे कि कीटनाशक, मिट्टी की उर्वरता को कम कर देते हैं क्योंकि वे इसमें प्रवेश करते हैं। मिट्टी का पीएच स्तर पौधों की वृद्धि के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। कुछ पदार्थ पर्यावरण को दूषित करते हैं, जिससे जीवों को नुकसान होता है।

नॉन-बायोडिग्रेडेबलवेस्ट वह कचरा होता है, जो बहुत अधिक समय तक पृथ्वी पर रहता है, आसानी से प्रकृति में नहीं मिलता है और प्रकृति को नुकसान पहुंचाता है। चाहे हम कैसे भी नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट का डिस्पोजल करें, इसकी वजह से पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता ही है। 

इस ब्लॉग में हम  जानेंगें की नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट क्या होता है ? What is non-biodegradable waste? इसके पर्यावरण पर क्या नकारात्मक प्रभाव होते है और इसे कैसे सुरक्षित रूप से डिस्पोज़ किया जा सकता है। 

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वेस्ट waste उस चीज़ को कहते हैं जिसका हम और उपयोग नहीं कर सकते हैं और जो हमारे काम का ना रह गया हो। मनुष्य आज जितने भी काम कर रहा है उन सभी कामों से वेस्ट का उत्पादन भी होता है। यूनिसेफ के अनुसार, सॉलिड वेस्ट solid waste 2 तरह के होते हैं-

  • नॉन- बायोडिग्रेडेबल वेस्ट Non-biodegradable waste 

  • बायोडिग्रेडेबल वेस्ट Biodegradable waste

जो वेस्ट पर्यावरण को बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचाता है और बहुत आसानी से प्रकृति में मिलकर नष्ट हो जाता है, उसे बायोडिग्रेडेबल वेस्ट कहते हैं। जैसे- सब्जियों और फलों के छिलके, पेपर वेस्ट paper waste, जंतुओं के अपशिष्ट Animal waste, कृषि वेस्ट agricultural waste आदि।

वहीं दूसरी ओर नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट, बायोडिग्रेडेबल वेस्ट से अलग होता है। आप कह सकते हैं कि यह खतरनाक कचरा है, जिससे पृथ्वी को खतरा है। जैसे- प्लास्टिक plastic, मेटल metal, बैटरीज batteries, कार्बन पेपर carbon paper, मेडिकल वेस्ट medical waste, थर्मोकोल, टेट्रा पैक्स, ग्लास, आदि।

नॉन-बायोडीग्रेडेबल वेस्ट क्या होता है? What is non-biodegradable waste?

नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट वह कचरा होता है, जो बहुत अधिक समय तक पृथ्वी पर रहता है, आसानी से प्रकृति में नहीं मिलता है और प्रकृति को नुकसान पहुंचाता है। दरअसल, प्रकृति में जितने भी सूक्ष्मजीव microorganisms हैं, वे इन कचरों को छोटे पदार्थों में तोड़ नहीं पाते हैं इसीलिए ये लंबे समय तक ज्यों के त्यों बने रहते हैं। उसके बाद यही वेस्ट हवा, मिट्टी और पानी में मिलकर जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। 

नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट Non-biodegradable waste को भी 2 भागों में बांटा गया है:-

  • रीसाइक्लेबल वेस्ट Recyclable waste : ऐसे वेस्ट जिन्हें रीसायकल कर सकते हैं।

  • नॉन- रीसाइक्लेबल वेस्ट Non- recyclable waste : ऐसे नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट जिन्हें रीसायकल नहीं कर सकते हैं।

दरअसल, जिन नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को रीसाइल कर सकते हैं, उनका एक आर्थिक मूल्य होता है लेकिन फिर भी लोग इस्तेमाल हो जाने पर उसे फेंक देते हैं। इन वेस्ट को रीसायकल recycle करके इनका पुनः उपयोग किया जा सकता है। जैसे- प्लास्टिक, पेपर आदि।

वहीं दूसरी ओर जिन कचरों का कोई उपयोगिता मूल्य नहीं होता है, उन्हें रीसायकल नहीं किया जाता है। जैसे- थर्मोकोल, टेट्रा पैक्स, मेडिकल वेस्ट, और कार्बन पेपर आदि। यही वेस्ट पृथ्वी पर इक्कठा होते रहता है और वायुं, जल और मृदा प्रदूषण soil pollution का कारण बनता है।

इतना ही नहीं, कई नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट तो माइक्रोप्लास्टिक microplastics और गैस के रूप में हवा, पानी और ज़मीन में मिल जाते हैं और जीव-जंतुओं के शरीर में प्रवेश करके उन्हें हानि पहुंचाते हैं। यही कारण है कि आज कम उम्र में ही लोगों को गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। 

अगर इन प्रोडक्ट्स का आप समझदारी से डिस्पोजल करते हैं तो इस समस्या को कम किया जाता सकता है। समझदारी तो इसी में है कि इन्हें कम से कम इस्तेमाल किया जाए ताकि नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट कम से कम प्रॉड्यूस हो।

नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट बिलकुल भी इको-फ्रेंडली Eco-friendly नहीं होते हैं इसीलिए ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और जिसे रीसायकल किया जा सके। दुनिया भर में कई अरब टन वेस्ट प्रोड्यूस होता है।

घर, इंडस्ट्रीज, एग्रीकल्चर, आदि चीज़ों से वेस्ट प्रोड्यूस होता है इसीलिए ये सिर्फ गवर्नमेंट की ही नहीं बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल कम करें जिससे पर्यावरण को किसी भी तरह का खतरा हो। 

नॉन- बायोडिग्रेडेबल वेस्ट का डिस्पोजल कैसे होता है?

1. रीसायकल करना

2. कचरे को जलाना

3 . लैंडफिल

1. रीसायकल करना

जो नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट रीसायकल करने योग्य होता है, उसे रीसायकल करने के लिए भेज दिया जाता है। रीसायकल होने के बाद वही वेस्ट एक उपयोगी मैटेरियल में बदल दिया जाता है, जिसका हम फिर से इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, पॉलीमर्स को और बेहतरीन बनाने के लिए उसमें कई पदार्थ मिलाए जाते हैं इसीलिए अब रीसायकल करने का प्रोसेस भी पहले से कठिन हो गया है।

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2. कचरे को जलाना

जो नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट रीसायकल करने योग्य नहीं होता है उसे जला दिया जाता है। इन कचरों को जलाने की वजह से कई खतरनाक गैसें हवा में मिलती हैं और उसे दूषित करती हैं। 

चाहे हम कैसे भी नॉन-बायोडीग्रेडेबल वेस्ट का डिस्पोजल करें, इसकी वजह से पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता ही है इसलिए एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते हम सभी का यह कर्तव्य बनता है कि हम कम से कम नॉन-बायोडीग्रेडेबल वस्तुओं का उपयोग करें।

3 . लैंडफिल Landfill

कचरे के डिस्पोजल का एक तरीका लैंडफिल भी है। दरअसल इसमें कचरे के ढेर को ज़मीन के अंदर गहरा गड्ढा खोद कर गाड़ दिया जाता है। समय-समय पर इस कचरे के ऊपर मिटटी डाली जाती है ताकि यह आसपास के पर्यावरण के संपर्क में ना आए।

लैंडफिल से लीक होने वाली खतरनाक गैस का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है लेकिन यदि इस गैस का सही प्रबंधन न किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए काफी बड़ा खतरा है। इसके अलावा लैंडफिल में भरे कचरे का एक और और नुकसान है जल प्रदूषण।

क्योंकि जब बारिश का पानी मिट्टी से होता हुआ इस कचरे से गुज़रकर भूजल तक पहुँचता है ,तब इसमें कई खतरनाक माइक्रो पार्टिकल्स मिल जाते हैं ये नदियों, हैंडपंप आदि के पानी को दूषित करते हैं जो हमारे लिए नुकसानदेय होता है।

नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट Non-biodegradable waste को कम करने के 3 तरीके 

नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट Non-biodegradable waste को कम करने के 3 तरीके हैं जो निम्न हैं -

नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा के डिस्पोजल या निस्तारण के तरीकों के बारे में हमने जाना इससे हम यह समझ गए हैं कि इस कचरे को कितना भी मैनेज किया जाए लेकिन फिर भी हमारी पृथ्वी के लिए यह एक खतरा ही है।

ऐसे में एक ज़िम्मेदार व्यक्ति होने के नाते हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपनी ओर से कम से कम नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट बनाएं। इसके तीन तरीके हैं, जिन्हें आप अपना सकते हैं- 

1- रिड्यूस Reduce

2- रियूज Reuse

3- रीसायकल Recycle

1. रिड्यूस Reduce

कुछ लोग ज़रूरत से ज़्यादा सामान खरीद लेते हैं और वो जितना सामान लेते हैं उतना इस्तेमाल नहीं करते, उससे कहीं ज्यादा फेंकते हैं इसलिए ऐसा न करें। यह अच्छी आदत नहीं है आप अपनी इस खूबसूरत धरती को स्वच्छ रखने के लिए और पर्यावरण को साफ़ सुथरा रखने के लिए आप ऐसा करना छोड़ दें।

जितनी जरुरत है उतना ही सामान खरीदें। कोशिश करें कि कम से कम नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा फेंकें और ये इतना मुश्किल भी नहीं है। बस छोटी सी शुरुआत शुरू करें। जैसे आप शॉपिंग के लिए घर से कपड़े, जूट आदि का बैग लेकर जाएं। पॉलिथीन का प्रयोग न करें।

प्लास्टिक की चीज़ें कम इस्तेमाल करें। इन छोटी-छोटी शुरुआत से आप नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

2. रीयूज़ Reuse

रीयूज़ Reuse नाम से ही आप समझ गए होंगे कि इसका क्या मतलब है। इसका मतलब है कि आप नॉन-बायोडिग्रेडेबल चीज़ों को फिर से यूज़ करके नॉन-बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को कम कर सकते हैं। इसके लिए आप जैसे घर में आने वाले नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट्स या घर में पड़ी हुई चीज को को किसी न किसी रूप में रीयूज़ करके उसे नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा बनने से रोक सकते हैं।

जैसे बाजार से आने वाली प्लास्टिक बोतल, डब्बे आदि का उपयोग आप किसी भी सामान को रखने के लिए कर सकते हैं। इसी तरह पुराने प्लास्टिक के बर्तन जैसे टब, बाल्टी आदि का उपयोग गमलों के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा पुराने गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स आदि को फेंकने के बजाय आप उन्हें एक्सचेंज ऑफर में देकर नए आइटम ले सकते हैं। आप साथ ही वेस्ट चीज़ों से सजावट की चीज़ें भी बना सकते हैं। 

3. रीसायकल Recycle

Recycle से मतलब है जो सामान आपका किसी काम का नहीं है या जिस सामान को आप उपयोग नहीं कर रहे हैं यानि जो सामान रीसायकल करने योग्य हो, उसे रीसायकल करें, उस सामान को यहाँ वहाँ न फेंके और उसे कबाड़ीवालों को बेचें जिससे वो रीसायकल हो सके।

जैव निम्नीकरणीय पदार्थों एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर (Differences between Biodegradable and Non-biodegradable Wastages) 

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Wastage) वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Non-Biodegradable Wastage) ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ, ये पदार्थ प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते हैं। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ इनका ढ़ेर लग जाता है एवं प्रकृति में इकट्ठे हो जाते हैं।

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ इनकी उत्पत्ति जैविक होती है। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं।

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैव आवर्धन (Biomagnification) प्रदर्शित नहीं करते हैं। वहीं घुलनशील अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं अर्थात् जैव आवर्धन प्रदर्शित करते हैं ।

  • बायोडिग्रेडेबल कचरे का उपयोग ऊर्जा खाद, खाद और बायोगैस के उत्पादन के लिए किया जाता है गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को अलग और पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है लेकिन प्रक्रिया बहुत महंगी है

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ, प्रकृति में इनका पुनः चक्रण संभव है। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ प्रकृति में इनका पुनः चक्रण संभव नहीं है।

  • बायोडिग्रेडेबल कचरे में डीग्रेडेशन प्रोसेस Degradation process तेज है गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे में Degradation process धीमी है। 

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे अपशिष्ट पदार्थ हैं जिन्हें हानि रहित पदार्थों में तोड़ा जा सकता है जैस-गोबर। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे अपशिष्ट पदार्थ हैं जिन्हें हानिरहित पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है। जैसे-डी० डी० टी०, प्लास्टिक आदि।

  •  बायोडिग्रेडेबल कचरा जैव-भू-रासायनिक चक्र biogeochemical cycles का हिस्सा बन जाता है। गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा कभी भी जैव-भू-रासायनिक चक्र में प्रवेश नहीं करता है। 

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जीवाणुओं, बैक्टीरिया द्वारा अपघटित हो जाते हैं और इस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाये रखते हैं। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ बैक्टीरिया जैसे जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते हैं।

  • बायोडिग्रेडेबल कचरा जमा नहीं होता है लेकिन कम समय में उपयोग हो जाता है। गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा अक्सर जमा हो जाता है। 

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थ के उदाहरण जैसे – मलमूत्र, कागज, शाक, फल, कपड़ा आदि। वहीं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ के उदाहरण हैं – प्लास्टिक, डी.डी.टी. , ऐलुमिनियम के डिब्बे आदि ।

निष्कर्ष 

हम सब जानते हैं कि हमारी पृथ्वी मनुष्य के बोझ से पहले से ही त्रस्त है और उस पर कचरे का और बोझ लादना जीवन के लिए और हम सबके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

बदलती जलवायु और हर दिन आने वाले संकट हमें सतर्क कर रहे हैं कि अभी भी वक्त है हम सबको संभल जाना चाहिए। हमारी सरकारें तो अपना काम कर रही हैं लेकिन हमारा भी फर्ज है कि हम और आप मिलकर छोटी सी शुरुआत करके इस धरती को हरा भरा और साफ़ सुथरा बनाएं। 

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