आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से बिजनेस करने के तरीकों को बदल रही है। आज इसकी मदद से कंपनियां रोजमर्रा के कामों को ऑटोमेट कर रही हैं, ग्राहकों के व्यवहार को समझ रही हैं, भविष्य की मांग का अनुमान लगा रही हैं और बिजनेस से जुड़े बड़े फैसले लेने में मदद पा रही हैं।
कंपनियों के पास अब पहले से ज्यादा बेहतर AI मॉडल, कोपायलट और अपने आप कई काम करने वाले AI एजेंट उपलब्ध हैं। हालांकि, सिर्फ नई और आधुनिक तकनीक अपनाने से कमाई बढ़ने, मुनाफे में सुधार होने, काम की उत्पादकता बढ़ने या ग्राहकों के साथ बेहतर संबंध बनने की गारंटी नहीं मिलती। असली चुनौती AI की क्षमताओं को बिजनेस की जरूरतों, सही फैसलों और बेहतर नतीजों से जोड़ना है।
आज भी कई कंपनियां बिखरे हुए डेटा, आपस में जुड़े न होने वाले सिस्टम, फैसले लेने में देरी, जिम्मेदारियों की अस्पष्टता और AI पर किए गए निवेश से मिलने वाले फायदे को मापने जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल एक नया AI टूल अपनाने से नहीं हो सकता।
इसके लिए कंपनियों को ऐसी व्यवस्थित रणनीति की जरूरत है, जिसमें AI की क्षमता के साथ बिजनेस का अनुभव, इंसानी समझ, सही नियम और फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने की व्यवस्था भी शामिल हो।
यहीं पर एंटरप्राइज एजेंसी (Enterprise Agency) की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है। इसका मतलब है कि कोई कंपनी AI से मिली जानकारी और सुझावों का इस्तेमाल करके सही फैसले ले और उन फैसलों को ऐसे कामों में बदले, जिनके नतीजों को मापा जा सके।
जहां एजेंटिक AI (Agentic AI) का मुख्य उद्देश्य AI सिस्टम को अपने आप कुछ काम करने में सक्षम बनाना है, वहीं एंटरप्राइज एजेंसी इस बात पर ध्यान देती है कि कंपनी फैसले कैसे लेती है, किसी काम को करने की मंजूरी कैसे देती है और उसके नतीजों की जिम्मेदारी कैसे तय करती है।
जैसे-जैसे AI बिजनेस के अलग-अलग कामों का हिस्सा बन रहा है, वैसे-वैसे कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करती हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि वे उस तकनीक का सही इस्तेमाल कैसे करती हैं।
भरोसेमंद जानकारी, सही फैसलों और जिम्मेदारी के साथ काम करने की क्षमता ही यह तय करेगी कि AI किसी कंपनी के बिजनेस को कितना फायदा पहुंचा सकता है।
AI के तेजी से विकास ने कंपनियों के लिए काम करने के कई नए अवसर पैदा किए हैं। इसकी मदद से कंपनियां अपनी उत्पादकता बढ़ा सकती हैं, ग्राहकों को बेहतर अनुभव दे सकती हैं, बार-बार किए जाने वाले कामों को ऑटोमेट कर सकती हैं और बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण कर सकती हैं। हालांकि, किसी तकनीक का सक्षम होना और उससे बिजनेस को वास्तविक फायदा मिलना दो अलग-अलग बातें हैं।
उदाहरण के लिए, AI कुछ ही मिनटों में हजारों ग्राहकों की शिकायतों का सार तैयार कर सकता है, बिक्री से जुड़े आंकड़ों में छिपे पैटर्न पहचान सकता है या स्टॉक के स्तर में बदलाव करने का सुझाव दे सकता है। लेकिन कंपनियों को यह भी जांचना पड़ता है कि AI से मिली जानकारी कितनी सही और उपयोगी है, फैसले को मंजूरी देने की जिम्मेदारी किसकी है और उस फैसले को लागू करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
तकनीक की क्षमताओं और कंपनी के वास्तविक प्रदर्शन के बीच यही अंतर AI को बिजनेस में अपनाने की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
McKinsey के 2025 के वैश्विक AI McKinsey's 2025 global survey on AI सर्वेक्षण के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल लगभग दो-तिहाई लोगों ने बताया कि उनकी कंपनियों ने अभी तक पूरे संगठन में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू नहीं किया था। वहीं, 62% लोगों ने बताया कि उनकी कंपनियां AI एजेंट्स के साथ कम से कम प्रयोग कर रही थीं। इसके बावजूद, केवल 39% लोगों ने कहा कि उनकी कंपनियों को पूरे संगठन के स्तर पर ब्याज और कर से पहले की कमाई (EBIT) में AI का प्रभाव दिखाई दिया। ये आंकड़े बताते हैं कि AI के साथ प्रयोग करना और उससे पूरे बिजनेस के प्रदर्शन में सुधार लाना दो अलग-अलग चीजें हैं।
इसका कारण हमेशा यह नहीं होता कि AI उपयोगी नतीजे देने में सक्षम नहीं है। कई बार कंपनियों के पास AI से मिली जानकारी को रोजमर्रा के फैसलों और कामकाज से जोड़ने की उचित व्यवस्था नहीं होती।
उदाहरण के लिए, AI पर आधारित बिक्री का अनुमान लगाने वाला सिस्टम बता सकता है कि आने वाले समय में किसी उत्पाद की मांग कम हो सकती है। लेकिन यदि बिक्री, खरीद, वित्त और लॉजिस्टिक्स की टीमें अलग-अलग डेटा और मंजूरी की प्रक्रियाओं पर काम करती हैं, तो कंपनी समय पर कदम नहीं उठा पाएगी। इससे जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा हो सकता है और अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है।
इसलिए कंपनियों को AI का मूल्यांकन करते समय तीन महत्वपूर्ण सवालों पर ध्यान देना चाहिए।
AI क्या कर सकता है। (What Can AI Do?) इसमें AI मॉडल, कोपायलट और अपने आप काम करने वाले AI एजेंट्स की तकनीकी क्षमताओं को समझना शामिल है।
बिजनेस को कौन-सा फैसला लेना चाहिए। (What Should the Business Decide?) इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, भरोसेमंद जानकारी, बिजनेस के नियम और इंसानी समझ जरूरी हैं।
फैसले से बिजनेस को क्या फायदा होगा। (How Will the Decision Create Value?) यह इस बात पर निर्भर करता है कि फैसला कितनी अच्छी तरह लागू किया गया, उसकी जिम्मेदारी किसने ली और उसके नतीजों को कैसे मापा गया।
एंटरप्राइज एजेंसी इन तीनों पहलुओं को एक साथ जोड़ती है। इससे कंपनियां केवल अलग-अलग AI टूल्स का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकती हैं जिसमें AI से मिली जानकारी बेहतर फैसले लेने में मदद करे और उन फैसलों को जिम्मेदारी के साथ लागू किया जा सके।
एजेंटिक AI और एंटरप्राइज एजेंसी आपस में जुड़े हुए विचार हैं, लेकिन बिजनेस में इनकी भूमिका अलग-अलग होती है।
एजेंटिक AI ऐसे AI सिस्टम को कहा जाता है, जो किसी निश्चित लक्ष्य को पूरा करने के लिए अलग-अलग चरणों की योजना बना सकते हैं, उपलब्ध टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, सॉफ्टवेयर के साथ काम कर सकते हैं और तय सीमाओं के भीतर अपनी गतिविधियों में बदलाव कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई AI एजेंट किसी सप्लायर के बारे में जानकारी जुटा सकता है, अलग-अलग सप्लायर की कीमतों की तुलना कर सकता है, खरीद का ऑर्डर तैयार कर सकता है या किसी असामान्य स्थिति में मामले को जांच के लिए कर्मचारी के पास भेज सकता है।
इन क्षमताओं से कर्मचारियों का मैन्युअल काम कम हो सकता है और प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा सकती हैं। हालांकि, AI एजेंट को अपने आप अधिक काम करने में सक्षम बना देने का यह मतलब नहीं है कि वह कंपनी की प्राथमिकताओं, कानूनी जिम्मेदारियों, जोखिम सहने की सीमा या फैसले लेने की आंतरिक व्यवस्था को भी पूरी तरह समझता है।
एंटरप्राइज एजेंसी किसी AI मॉडल का केवल एक फीचर नहीं है, बल्कि यह पूरे संगठन की काम करने और फैसले लेने की क्षमता से जुड़ी अवधारणा है। इसका अर्थ है कि कोई कंपनी AI से मिली जानकारी को अपने बिजनेस की जरूरतों, फैसले लेने के अधिकारों, नियमों और काम पूरा करने की प्रक्रियाओं के साथ जोड़ सके।
जिस कंपनी में एंटरप्राइज एजेंसी मजबूत होती है, वह स्पष्ट कर सकती है कि किन फैसलों में AI की मदद ली जा सकती है, कौन-से काम AI अपने आप कर सकता है, किन परिस्थितियों में इंसानी मंजूरी जरूरी होगी और काम पूरा होने के बाद नतीजों की निगरानी कैसे की जाएगी।
इसे बैंक के उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि कोई बैंक अपनी लोन पॉलिसी में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। एक AI सिस्टम इस बदलाव से कमाई बढ़ने की संभावना बता सकता है, जबकि दूसरा सिस्टम कर्ज से जुड़े जोखिम बढ़ने की चेतावनी दे सकता है। वहीं, अनुपालन से जुड़ा सिस्टम यह बता सकता है कि किन नियमों और कानूनी सीमाओं का पालन करना जरूरी है।
ऐसी स्थिति में एंटरप्राइज एजेंसी इन सभी जानकारियों को एक साथ समझने और सही फैसला लेने की व्यवस्था तैयार करने में मदद करती है।
अलग-अलग सिस्टम के सुझावों पर स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय, बैंक अपने सामान्य बिजनेस नियमों के आधार पर सभी विकल्पों का मूल्यांकन कर सकता है, संभावित फायदे और जोखिम समझ सकता है, जरूरी मंजूरी ले सकता है, फैसले के पीछे के कारणों का रिकॉर्ड रख सकता है और उसके नतीजों पर नजर रख सकता है।
दोनों के बीच अंतर को सरल शब्दों में समझें तो एजेंटिक AI तकनीक की काम करने की क्षमता बढ़ाता है, जबकि एंटरप्राइज एजेंसी यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि कंपनी उस क्षमता का सही, जिम्मेदार और प्रभावी इस्तेमाल करे।
ये दोनों एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं। कंपनियों को ऐसे सक्षम AI सिस्टम भी चाहिए, जो उपयोगी काम कर सकें, और ऐसी संगठनात्मक प्रक्रियाएं भी चाहिए, जो AI की क्षमताओं को बिजनेस के लक्ष्यों से जोड़ सकें।
Also Read: ESG क्या है और कंपनियों को इसे क्यों अपनाना चाहिए? पूरी जानकारी
AI मॉडल बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण कर सकते हैं, उसमें छिपे पैटर्न पहचान सकते हैं और बेहतर फैसले लेने के लिए सुझाव दे सकते हैं। लेकिन इन सुझावों की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि AI को कितनी सही जानकारी दी गई है, उसके सामने कौन-सी सीमाएं तय की गई हैं और बिजनेस का लक्ष्य क्या है।
किसी कंपनी के कामकाज से जुड़ी जानकारी कई जगहों पर मौजूद होती है। इसमें पहले लिए गए फैसले, ग्राहकों से किए गए वादे, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें, वित्तीय लक्ष्य, सरकारी नियम, कंपनी की आंतरिक नीतियां और पुराने अनुभवों से मिली सीख शामिल होती हैं।
यदि AI को जरूरी और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तो वह ऐसे सुझाव दे सकता है जो सुनने में सही लगें, लेकिन कंपनी की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल न हों।
मान लीजिए कि एक रिटेल कंपनी किसी बड़े त्योहार के दौरान विशेष ऑफर देने की तैयारी कर रही है। कंपनी का मार्केटिंग सिस्टम अनुमान लगा रहा है कि इस दौरान उत्पादों की मांग बढ़ेगी। वहीं, स्टॉक से जुड़ा सिस्टम बता रहा है कि गोदाम में सामान सीमित मात्रा में उपलब्ध है। दूसरी ओर, वित्त विभाग ने खर्चों पर नियंत्रण रखने और कार्यशील पूंजी (Working Capital) को बेहतर बनाने का लक्ष्य तय किया है।
यदि ये सभी सिस्टम अलग-अलग काम करते हैं, तो हर विभाग अपने हिसाब से सुझाव दे सकता है। मार्केटिंग टीम प्रचार और विज्ञापनों पर खर्च बढ़ाने की सलाह दे सकती है, जबकि ऑपरेशंस टीम स्टॉक की कमी को देखते हुए छूट सीमित रखने के पक्ष में हो सकती है। वहीं, वित्त विभाग खर्च कम करने के लिए इन्वेंट्री का स्तर घटाने पर जोर दे सकता है।
ऐसी स्थिति में कंपनी की चुनौती केवल अधिक जानकारी या नए अनुमान जुटाना नहीं है। असली चुनौती ग्राहकों की मांग, उत्पादों की उपलब्धता, ग्राहकों की उम्मीदों और कंपनी की वित्तीय सीमाओं के बीच सही संतुलन बनाना है।
यदि कंपनी सभी विभागों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर उसका विश्लेषण करे, तो वह अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकती है, प्राथमिकताएं तय कर सकती है और सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ फैसले लागू कर सकती है।
कंपनियों को अपने कामकाज से जुड़ी जरूरी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि कर्मचारी और AI सिस्टम जरूरत के समय उसका सही इस्तेमाल कर सकें। इसके लिए महत्वपूर्ण आंकड़ों और मापदंडों की स्पष्ट परिभाषा तय करना, बिजनेस के नियमों को दर्ज करना, डेटा की जिम्मेदारी तय करना और संवेदनशील जानकारी तक पहुंच को नियंत्रित करना जरूरी है।
उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में एक विभाग के लिए रेवेन्यू का मतलब कुल बिक्री हो सकता है, जबकि दूसरा विभाग छूट और रिटर्न घटाने के बाद मिलने वाली कमाई को रेवेन्यू मानता हो। यदि AI इन दोनों आंकड़ों की तुलना एक ही आधार पर कर देता है, तो रिपोर्ट में गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
ऐसी गलतियों से बचने के लिए कंपनियों को बिजनेस से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दों और आंकड़ों की एक समान परिभाषा तय करनी चाहिए। साथ ही, डेटा को सही तरीके से एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंचाने की व्यवस्था बनानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी विभाग एक ही मानक के अनुसार काम करें।
2025 की DORA रिपोर्ट, 2025 DORA report on AI-assisted software development जो AI की मदद से सॉफ्टवेयर विकसित करने के तरीकों का अध्ययन करती है, इस बात पर भी जोर देती है कि AI को अपनाना केवल बेहतर टूल चुनने तक सीमित नहीं है। कंपनी की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की क्षमताएं और तकनीकी व्यवस्था भी यह तय करती हैं कि किसी एक काम में मिली उत्पादकता का फायदा पूरे संगठन को कितना मिलता है।
इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियों को AI की क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ अपने अनुभव, व्यावसायिक जानकारी और डेटा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाना चाहिए।
AI से बिजनेस को वास्तविक फायदा तब मिलता है, जब उसकी मदद से लिए गए फैसले लागू होते हैं और कामकाज के नतीजों में सुधार दिखाई देता है। किसी डैशबोर्ड या प्रेजेंटेशन में मौजूद जानकारी उपयोगी हो सकती है, लेकिन केवल जानकारी मिलने से कंपनी का प्रदर्शन अपने आप बेहतर नहीं होता।
इसलिए कंपनियों को डेटा के विश्लेषण और फैसले लेने की प्रक्रिया को उन कार्यप्रणालियों से जोड़ना चाहिए, जिनके जरिए फैसले लागू किए जाते हैं।
यदि किसी ऐसी प्रक्रिया में चैटबॉट जोड़ दिया जाए, जिसमें पहले से ही कई अनावश्यक चरण हों, तो कुछ काम तेजी से हो सकते हैं। लेकिन इससे प्रक्रिया में मौजूद मूल समस्याएं जरूरी नहीं कि दूर हो जाएं। बेहतर तरीका यह है कि कंपनी पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा करे, देरी के कारणों को पहचाने और तय करे कि AI किस तरह काम को आसान और प्रभावी बना सकता है।
मार्च 2025 में प्रकाशित McKinsey के शोध के अनुसार, AI अपनाने से जुड़े जिन संगठनात्मक तरीकों का अध्ययन किया गया, उनमें कार्यप्रणाली को नए सिरे से तैयार करना EBIT पर सकारात्मक प्रभाव से सबसे मजबूत संबंध रखने वाला तरीका था। हालांकि, जनरेटिव AI का इस्तेमाल करने वाले संगठनों के केवल 21% उत्तरदाताओं ने बताया कि उनकी कंपनियों ने कम से कम कुछ कार्यप्रणालियों में बुनियादी बदलाव किए थे। इससे पता चलता है कि कई कंपनियां काम करने के पुराने तरीकों को पूरी तरह बदलने के बजाय उनमें AI जोड़ने तक ही सीमित थीं।
इसे सप्लायर के बिलों का भुगतान करने वाले विभाग के उदाहरण से समझ सकते हैं। AI बिलों से जरूरी जानकारी निकाल सकता है, रिकॉर्ड का मिलान कर सकता है, असामान्य शुल्क पहचान सकता है और भुगतान की मंजूरी देने के लिए सुझाव दे सकता है। लेकिन यदि किसी गड़बड़ी की स्थिति में बिल को कई कर्मचारियों और विभागों के पास मैन्युअल जांच के लिए भेजना पड़ता है, तो पूरी प्रक्रिया में देरी बनी रह सकती है।
इसके बजाय, कंपनी ऐसी व्यवस्था बना सकती है जिसमें तय सीमा के भीतर आने वाले कम जोखिम वाले बिल अपने आप प्रक्रिया में आगे बढ़ जाएं। रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर बिल संबंधित कर्मचारी के पास जांच के लिए भेजा जाए और अधिक राशि वाले या संदिग्ध लेनदेन की अतिरिक्त समीक्षा की जाए।
इस तरह के बदलावों के प्रभाव को मापने के लिए बिलों के निपटारे में लगने वाला समय, गलतियों की संख्या, भुगतान में देरी और प्रत्येक बिल को प्रोसेस करने की लागत जैसे मापदंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
AI को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए हर कंपनी को तुरंत बड़े स्तर पर बदलाव करने की जरूरत नहीं है। शुरुआत किसी ऐसी प्रक्रिया से की जा सकती है, जिसमें समस्या स्पष्ट हो, फैसले की जिम्मेदारी तय हो और अपेक्षित लाभ को मापा जा सके।
शुरुआत करने के लिए कुछ उपयोगी क्षेत्र इस प्रकार हैं।
ग्राहकों की समस्याओं को हल करने में लगने वाला समय कम करना।
बिक्री की मांग का बेहतर अनुमान लगाना और स्टॉक की योजना में सुधार करना।
बिलिंग में गलतियों या ग्राहकों के रिन्यूअल छूट जाने से होने वाले रेवेन्यू के नुकसान की पहचान करना।
कॉन्ट्रैक्ट की जांच और दस्तावेजों को प्रोसेस करने की प्रक्रिया तेज करना।
संदिग्ध लेनदेन और कामकाज से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करना।
AI लागू करने से पहले कंपनियों को मौजूदा प्रदर्शन का रिकॉर्ड तैयार करना चाहिए और सुधार के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने चाहिए। इसके बाद AI लागू होने के बाद के नतीजों की तुलना पहले की स्थिति से करनी चाहिए। इस मूल्यांकन में तकनीक को लागू करने की लागत, कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली जांच, रखरखाव और संभावित जोखिमों को भी शामिल करना चाहिए।
मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक कामों को ऑटोमेट करना नहीं है, बल्कि पूरे बिजनेस की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना है, ताकि कंपनी कम समय और संसाधनों में अधिक प्रभावी नतीजे हासिल कर सके।
जैसे-जैसे बिजनेस में AI का इस्तेमाल वित्तीय, संचालन और ग्राहकों से जुड़े फैसले लेने के लिए बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके लिए स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय करना भी जरूरी हो गया है। AI से जुड़े नियमों को केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिजनेस की एक महत्वपूर्ण जरूरत के रूप में देखना चाहिए।
AI की कोई सलाह किसी प्रोडक्ट की कीमत तय करने, किसी सप्लायर को ऑर्डर देने, ग्राहक की शिकायत को प्राथमिकता देने या किसी संदिग्ध लेनदेन की जांच करने को प्रभावित कर सकती है। ऐसे फैसलों का असर कंपनी की कमाई, कानूनी जिम्मेदारियों, बाजार में उसकी छवि और नैतिक मूल्यों पर पड़ सकता है।
इसलिए कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि AI की मदद से लिए गए फैसलों के लिए कौन जिम्मेदार होगा और जरूरत पड़ने पर उन फैसलों की समीक्षा कैसे की जाएगी।
कंपनियों को फैसलों का ऐसा रिकॉर्ड तैयार करना चाहिए, जिससे बाद में यह समझा जा सके कि कोई फैसला कैसे लिया गया और उसके पीछे क्या कारण थे। इस्तेमाल के आधार पर इस रिकॉर्ड में निम्नलिखित जानकारियां शामिल की जा सकती हैं।
फैसले का उद्देश्य और उसे लेने के लिए तय किए गए बिजनेस नियम।
AI की सलाह तैयार करने में इस्तेमाल किए गए डेटा और मान्यताएं।
इस्तेमाल किए गए AI मॉडल या सिस्टम का वर्जन।
AI की सलाह पर भरोसे का स्तर, उसकी सीमाएं और उससे जुड़ी अनिश्चितताएं।
उस व्यक्ति का नाम या पद, जिसने कार्रवाई को मंजूरी दी।
की गई कार्रवाई, बाद में हुए बदलाव और उनसे प्राप्त नतीजे।
हर AI टूल के लिए एक जैसे दस्तावेज और नियम जरूरी नहीं हैं। उदाहरण के लिए, आंतरिक मीटिंग का सारांश तैयार करने वाले कम जोखिम वाले AI टूल पर उतनी सख्त निगरानी की जरूरत नहीं होती, जितनी लोन देने, बीमा की पात्रता तय करने या मेडिकल फैसलों को प्रभावित करने वाले AI सिस्टम पर होती है।
हालांकि, सभी मामलों में एक बात समान रहती है। कंपनियों को यह समझाने में सक्षम होना चाहिए कि महत्वपूर्ण फैसले कैसे लिए गए और उनके आधार पर की गई कार्रवाई के लिए कौन जिम्मेदार है।
अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) US National Institute of Standards and Technology (NIST) AI से जुड़े जोखिमों को संभालने के लिए उपयोगी दिशा-निर्देश देता है। इसका AI Risk Management Framework और Generative AI Profile कंपनियों को AI सिस्टम के पूरे जीवनचक्र के दौरान जोखिमों की पहचान करने, उनका आकलन करने, उन्हें नियंत्रित करने और लगातार निगरानी करने में मदद करता है।
कंपनियां इस तरीके को अपनाते हुए AI के अलग-अलग इस्तेमाल को उनके संभावित प्रभाव के आधार पर वर्गीकृत कर सकती हैं। इसके साथ ही, वे जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया तय कर सकती हैं, सिस्टम को लागू करने से पहले उसकी जांच कर सकती हैं और लॉन्च के बाद भी उसके प्रदर्शन पर नजर रख सकती हैं।
उदाहरण के लिए, मीटिंग का सारांश तैयार करने वाले AI टूल को सीमित निगरानी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके विपरीत, ग्राहकों की क्रेडिट लिमिट में बदलाव की सलाह देने वाले AI सिस्टम की अधिक सख्ती से जांच होनी चाहिए। ऐसे सिस्टम के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, सीमित एक्सेस, मानवीय समीक्षा और लगातार निगरानी जरूरी है।
AI से जुड़े फैसलों में इंसानों की भागीदारी भी सार्थक होनी चाहिए। कर्मचारियों के पास इतनी जानकारी, अधिकार और समय होना चाहिए कि वे AI की गलत या संदिग्ध सलाह पर सवाल उठा सकें। उन्हें सिस्टम से मिलने वाली हर सलाह को बिना जांचे मंजूरी देने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।
AI गवर्नेंस का उद्देश्य काम में अनावश्यक रुकावट पैदा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ काम करने में मदद करना होना चाहिए। जब फैसले लेने के अधिकार स्पष्ट हों और जोखिम के अनुसार नियम बनाए जाएं, तो कंपनियां महत्वपूर्ण जोखिमों को नियंत्रित करते हुए तेजी से काम कर सकती हैं।
AI को अपनाने के दौरान होने वाली एक आम गलती यह है कि कंपनियां उसके इस्तेमाल को ही सफलता का प्रमाण मान लेती हैं। कितने कर्मचारी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, कितनी सामग्री तैयार की गई है या कितने काम ऑटोमेट किए गए हैं, ये आंकड़े AI को अपनाने की प्रगति जरूर दिखाते हैं। लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि कंपनी को वास्तव में कोई व्यावसायिक फायदा हुआ है।
इसलिए कंपनियों को AI की सफलता का आकलन करने के लिए संचालन, वित्त, ग्राहक अनुभव और जोखिम से जुड़े अलग-अलग संकेतकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
|
बिजनेस का उद्देश्य (Business Objective) |
प्रदर्शन मापने के उपयोगी संकेतक (Useful Performance Indicators) |
|---|---|
|
कमाई बढ़ाना (Revenue Growth) |
बिक्री में बदलने वाले संभावित ग्राहकों का अनुपात, ग्राहकों को बनाए रखने की दर और प्रति ग्राहक कमाई। |
|
लागत कम करना (Cost Efficiency) |
प्रति लेनदेन लागत, काम पूरा करने में लगने वाला समय और दोबारा काम करने की जरूरत। |
|
कार्यशील पूंजी का बेहतर प्रबंधन (Working Capital) |
इन्वेंट्री टर्नओवर, बिक्री की रकम मिलने में लगने वाले दिन और नकदी चक्र। |
|
ग्राहक अनुभव बेहतर बनाना (Customer Experience) |
शिकायत का समाधान करने में लगने वाला समय, ग्राहक संतुष्टि और एक ही समस्या के लिए बार-बार संपर्क करने की दर। |
|
संचालन को मजबूत बनाना (Operational Resilience) |
सिस्टम बंद रहने का समय, सिस्टम को दोबारा चालू करने में लगने वाला समय और सप्लाई में आने वाली रुकावटें। |
|
जोखिम और नियमों का पालन (Risk and Compliance) |
गलतियों की दर, कंपनी की नीतियों का उल्लंघन और ऑडिट में सामने आने वाली कमियां। |
|
कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाना (Workforce Productivity) |
बचाया गया समय, काम की गुणवत्ता और कर्मचारियों को अधिक महत्वपूर्ण कामों के लिए उपलब्ध कराई गई क्षमता। |
इन संकेतकों का चुनाव हर AI प्रोजेक्ट के उद्देश्य के अनुसार किया जाना चाहिए। सभी प्रोजेक्ट पर एक ही तरह के मापदंड लागू करना सही तरीका नहीं है।
उदाहरण के लिए, ग्राहकों की सहायता करने वाला AI टूल किसी कंपनी में औसत शिकायत निपटान समय को कम कर सकता है। लेकिन अगर ग्राहकों को उसी समस्या के समाधान के लिए बार-बार कंपनी से संपर्क करना पड़ता है, तो उत्पादकता में दिखने वाला सुधार वास्तविक नहीं हो सकता।
ऐसे मामले में कंपनी को केवल शिकायत निपटाने में लगे समय को नहीं देखना चाहिए। उसे यह भी जांचना चाहिए कि समस्या का समाधान कितना प्रभावी रहा, ग्राहक कितने संतुष्ट हैं, कितने ग्राहकों ने दोबारा संपर्क किया और कितने मामलों में कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ी।
इसी तरह, AI की मदद से काम करने वाला सेल्स टूल अधिक संभावित ग्राहकों की जानकारी जुटा सकता है। लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि कंपनी की लाभदायक बिक्री भी बढ़ जाए। इसलिए कंपनियों को केवल संभावित ग्राहकों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और उनसे होने वाली कमाई को भी मापना चाहिए।
McKinsey के 2025 के शोध के अनुसार, AI का इस्तेमाल और उसके साथ प्रयोग बढ़ने के बावजूद, सर्वे में शामिल कंपनियों के केवल एक छोटे हिस्से ने पूरे संगठन के स्तर पर EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई पर इसका प्रभाव बताया। McKinsey के 2025 के एक अन्य शोध में भी स्पष्ट प्रदर्शन संकेतकों को उन महत्वपूर्ण तरीकों में शामिल किया गया, जिनका बेहतर वित्तीय नतीजों से संबंध पाया गया।
इससे एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है। AI में किया गया निवेश तभी सफल माना जाना चाहिए, जब वह बिजनेस के स्पष्ट उद्देश्यों से जुड़ा हो, उसके नतीजों को मापने के लिए शुरुआती स्तर तय किया गया हो और समय-समय पर उसके प्रदर्शन की समीक्षा की जाती हो।
टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, रिटेल और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के अनुभव बताते हैं कि AI से बेहतर नतीजे पाने के लिए केवल तकनीक का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ काम करने के सही तरीके, स्पष्ट जिम्मेदारियां और नतीजों की निगरानी भी जरूरी है।
नीचे दिए गए उदाहरण बताते हैं कि कंपनियां AI की क्षमताओं को अपने रोजमर्रा के काम और बिजनेस के लक्ष्यों से कैसे जोड़ सकती हैं। इन्हें इस बात का प्रमाण नहीं मानना चाहिए कि हर कंपनी AI के इस्तेमाल से पहले ही ऐसे नतीजे हासिल कर चुकी है।
AI कोडिंग टूल डेवलपर्स को कोड लिखने, उसे समझने और उसकी जांच करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन AI की मदद से तेजी से कोड तैयार होने का यह मतलब नहीं है कि कंपनी बेहतर सॉफ्टवेयर भी बना रही है।
Google Cloud की 2025 DORA रिसर्च Google Cloud's 2025 DORA research में AI की मदद से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को संगठन की पूरी कार्यप्रणाली के संदर्भ में समझा गया है। यह रिसर्च इस बात पर ध्यान देती है कि टीमों के काम करने का तरीका और उनके पास उपलब्ध प्रक्रियाएं व संसाधन सॉफ्टवेयर की डिलीवरी को किस तरह प्रभावित करते हैं।
बेहतर तरीका (Best Practice): AI की मदद से कोड तैयार करने के साथ कोड रिव्यू, ऑटोमेटेड टेस्टिंग, सुरक्षा जांच, कंटीन्यूअस इंटीग्रेशन और सॉफ्टवेयर के वास्तविक प्रदर्शन की निगरानी भी करें। केवल काम पूरा करने की गति न मापें, बल्कि सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता, उसमें होने वाली गलतियों और समस्या आने के बाद सिस्टम को दोबारा सामान्य करने में लगने वाले समय का भी आकलन करें।
बैंक AI का इस्तेमाल लेनदेन के पैटर्न का विश्लेषण करने, धोखाधड़ी का पता लगाने, ग्राहक सेवा में मदद करने और कर्ज से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, AI की सलाह को बैंक की जोखिम नीतियों, ग्राहकों की गोपनीयता और लागू कानूनी नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
बेहतर तरीका (Best Practice): बैंक को स्पष्ट रूप से तय करना चाहिए कि कौन-से काम AI अपने आप कर सकता है, किन कामों के लिए अतिरिक्त जांच जरूरी है और किन फैसलों पर अधिकृत कर्मचारियों की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके अलावा, फैसलों का रिकॉर्ड रखें, यह जांचें कि सिस्टम किसी व्यक्ति या समूह के साथ अनुचित व्यवहार तो नहीं कर रहा और गलत अलर्ट के साथ-साथ उन जोखिमों पर भी नजर रखें जिन्हें सिस्टम पहचान नहीं पाया।
इस तरीके से बैंक तेजी से डेटा का विश्लेषण करने के लिए AI का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन उसके हर सुझाव को अंतिम और सही फैसला मानने से बच सकते हैं।
AI की मदद से मांग का अनुमान लगाने वाले टूल रिटेल कंपनियों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि आने वाले समय में कौन-से उत्पाद कितनी मात्रा में बिक सकते हैं। इससे कंपनियां सामान दोबारा मंगाने की योजना बना सकती हैं और संभावित कमी का पहले से पता लगा सकती हैं।
हालांकि, केवल बिक्री का सही अनुमान लगा लेना पर्याप्त नहीं है। इस जानकारी के आधार पर खरीद, इन्वेंट्री, लॉजिस्टिक्स और उत्पादों की बिक्री की योजना बनाने वाली टीमों को भी समय पर कदम उठाने चाहिए।
बेहतर तरीका (Best Practice): AI से मिले अनुमान को उपलब्ध स्टॉक, सप्लायर से सामान आने में लगने वाले समय, प्रमोशन कैलेंडर और कंपनी के वित्तीय लक्ष्यों के साथ जोड़ें। सामान्य परिस्थितियों में नियमित फैसले तेजी से लेने के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं बनाएं। वहीं, असामान्य परिस्थितियों या बड़े वित्तीय प्रभाव वाले मामलों में कर्मचारियों की समीक्षा और मंजूरी सुनिश्चित करें।
जनरेटिव AI ग्राहक सेवा टीमों को बातचीत का सारांश तैयार करने, जरूरी जानकारी खोजने और जवाब लिखने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर ग्राहक को जल्दी जवाब मिलने के बावजूद उसकी समस्या हल नहीं होती, तो वह असंतुष्ट हो सकता है और उसे दोबारा कंपनी से संपर्क करना पड़ सकता है।
बेहतर तरीका (Best Practice): AI टूल को कंपनी की स्वीकृत जानकारी, ग्राहक के पुराने रिकॉर्ड तक नियंत्रित पहुंच, जरूरत पड़ने पर शिकायत को सही कर्मचारी तक पहुंचाने की प्रक्रिया और जवाबों की गुणवत्ता जांचने वाली व्यवस्था से जोड़ें। सफलता को केवल जवाब देने की गति से न मापें। यह भी देखें कि कितनी समस्याओं का सही समाधान हुआ, कितने ग्राहकों ने दोबारा संपर्क किया, ग्राहक कितने संतुष्ट हैं और AI के जवाब कितने सटीक हैं।
इन सभी उदाहरणों से एक सामान्य बात सामने आती है। AI तब बेहतर नतीजे देता है, जब उसके साथ काम करने की स्पष्ट प्रक्रियाएं, तय जिम्मेदारियां, भरोसेमंद जानकारी और वास्तविक नतीजों से मिलने वाला फीडबैक भी मौजूद हो।
AI की मदद से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डेटा विश्लेषण से जुड़े कई काम तेजी से और कम लागत में किए जा सकते हैं। इससे टेक्नोलॉजी सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का तरीका भी बदल रहा है।
पहले टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट की सफलता को मुख्य रूप से इस आधार पर मापा जाता था कि काम तय समय पर पूरा हुआ या नहीं, लागत कितनी रही, सिस्टम कितनी अच्छी तरह काम करता रहा और तकनीकी जरूरतें पूरी हुईं या नहीं। ये सभी बातें आज भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अब कंपनियां टेक्नोलॉजी से अपने बिजनेस के प्रदर्शन में सुधार की भी उम्मीद करती हैं। इसलिए केवल तकनीकी काम पूरा करना पर्याप्त नहीं रह गया है।
टेक्नोलॉजी सेवा देने वाली कंपनियों को यह समझना होगा कि उनके ग्राहक कौन-से फैसले लेना चाहते हैं, उन्हें किन व्यावसायिक सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है और उनके लिए कौन-से नतीजे सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। इसके लिए टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, बिजनेस लीडर्स, संबंधित क्षेत्र के जानकारों, डेटा टीमों और जोखिम प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों के बीच सहयोग जरूरी है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से कर्मचारियों के कौशल की जरूरतें भी बदल रही हैं। जब AI नियमित विश्लेषण और प्रशासनिक कामों का बड़ा हिस्सा संभालने लगता है, तब कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है जो बिजनेस की समस्या को सही ढंग से समझ सकें, उपलब्ध जानकारी और सबूतों का आकलन कर सकें, अलग-अलग विकल्पों के फायदे और नुकसान पहचान सकें, काम करने के तरीकों में सुधार कर सकें और AI की सलाह पर जरूरी सवाल उठा सकें।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की Future of Jobs Report 2025 में विश्लेषणात्मक सोच को नियोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कौशल बताया गया है। रिपोर्ट में AI और बिग डेटा से जुड़े कौशल की बढ़ती मांग पर भी जोर दिया गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि तकनीकी विशेषज्ञता का महत्व कम हो रहा है। बल्कि, अब तकनीकी ज्ञान के साथ सही निर्णय लेने और व्यावसायिक परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी जरूरी होती जा रही है।
कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी बदल रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को यह तय करना होता है कि AI का इस्तेमाल कहां सबसे ज्यादा फायदा दे सकता है, कौन-से जोखिम स्वीकार किए जा सकते हैं, संसाधनों का आवंटन कैसे होगा और अलग-अलग विभाग साझा लक्ष्यों की दिशा में कैसे काम करेंगे। वहीं, मैनेजरों को इन प्राथमिकताओं को रोजमर्रा के काम में लागू करना होता है और कर्मचारियों को AI का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण देना होता है।
टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग कंपनियों के लिए यह एक नया अवसर भी है। वे केवल AI टूल उपलब्ध कराने तक सीमित रहने के बजाय अपने ग्राहकों को काम करने की प्रक्रियाओं में सुधार करने, अलग-अलग सिस्टम को जोड़ने, उचित नियम और निगरानी व्यवस्था बनाने तथा AI से मिलने वाले नतीजों का मूल्यांकन करने में मदद कर सकती हैं।
आने वाले समय में विशेषज्ञता का महत्व केवल यह जानने में नहीं होगा कि कौन-सी तकनीक उपलब्ध है। असली महत्व इस बात का होगा कि वास्तविक बिजनेस परिस्थितियों में सही समस्या के समाधान के लिए उस तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जाए।
AI की मदद से कंपनियां अब पहले से अधिक जानकारी का विश्लेषण कर सकती हैं, नई सामग्री तैयार कर सकती हैं और कई कामों को ऑटोमेट कर सकती हैं। लेकिन केवल शक्तिशाली AI टूल उपलब्ध होने से बिक्री में होने वाला नुकसान, अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल की कमी, काम में देरी और जिम्मेदारियों से जुड़ी समस्याएं अपने आप दूर नहीं होतीं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक में सुधार के साथ-साथ कंपनी के काम करने के तरीकों में बदलाव करना भी जरूरी है।
एंटरप्राइज AI पर किए गए शोध बताते हैं कि AI से वास्तविक बिजनेस वैल्यू हासिल करने के लिए काम करने की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य तय करना, प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाना और AI को रोजमर्रा के काम का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है। इसलिए कंपनियों को AI अपनाने को केवल नए टूल खरीदने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिजनेस में व्यापक बदलाव लाने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
बिजनेस लीडर्स की प्राथमिकता यह पहचानना होनी चाहिए कि किन क्षेत्रों में बेहतर फैसले लेने से वास्तविक और मापने योग्य फायदा हो सकता है। इसके साथ ही, AI सिस्टम को भरोसेमंद बिजनेस जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए और ऐसी प्रक्रियाएं बनानी चाहिए, जिनसे AI की सलाह को जिम्मेदारी के साथ वास्तविक कार्रवाई में बदला जा सके।
भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल अधिक AI टूल इस्तेमाल करने से नहीं मिलेगी। असली फायदा तब होगा, जब कंपनियां बेहतर तकनीक को इंसानी समझ, अपने अनुभव और ज्ञान, स्पष्ट जिम्मेदारियों और अनुशासित तरीके से काम करने की क्षमता के साथ जोड़ेंगी।
आखिरकार, सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि कोई कंपनी कितने AI टूल इस्तेमाल कर सकती है, बल्कि यह है कि AI की मदद से बेहतर फैसले लेकर वह अपने बिजनेस के प्रदर्शन में कितना सुधार कर सकती है।