जानिए कैडबरी की सफलता की कहानी और मार्केटिंग स्ट्रेटजी

367
23 Aug 2022
8 min read

Post Highlight

भारत में मिठाइयों की कोई कमी नहीं है। यहां आपको हर जगह की कोई स्पेशल मिठाई मिल जाएगी। एक ऐसा देश जो अपनी मिठाइयों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और जिस देश में मिठाई की कोई कमी नहीं है, उस देश में एक ब्रांड आता है कैडबरी Cadbury और उसने कुछ ऐसा किया कि आज लोगों के मन में मीठा और कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट Cadbury Dairy Milk Chocolate का एक ही मतलब है। इंडिया में पहले से ही इतनी मिठाइयां बनती है कि हमें किसी नई चीज़ की आवश्यकता नहीं थी फिर भी इंडिया में आज डेयरी मिल्क सबसे ज्यादा खाई जाती है। अब क्योंकि कैडबरी लोगों को इतनी पसंद है तो इसके पीछे की कहानी जानना भी तो जरूरी है। आइए कैडबरी डेयरी मिल्क की कहानी और इसकी मार्केटिंग स्ट्रेटजी Success Story and marketing strategy of Cadbury के बारे में जानते हैं। 

#SuccessStoryOfCadbury
#MarketingStrategyOfCadbury

Podcast

Continue Reading..

कैडबरी Cadbury के बारे में किसे नहीं पता है! कैडबरी Cadbury का तो नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है और मन करता है कि चलो कुछ मीठा हो जाए। आप सब मेरी बात से सहमत होंगे अगर मैं कहूं कि 'मीठा' यह शब्द सुनते ही हमारे मन में कैडबरी डेयरी मिल्क Cadbury Dairy Milk का ख्याल आता है पर क्या आपको पता है कि आपकी फेवरेट चॉकलेट कैडबरी डेयरी मिल्क, कैडबरी का रियल प्रोडक्ट नहीं थी। एक ऐसा प्रोडक्ट जिसकी मार्केट को कोई जरूरत नहीं थी, जो कैडबरी का प्रोडक्ट नहीं थी, उस प्रोडक्ट से किसी कम्पनी ने 24,000 करोड़ रुपए की कमाई की। 

भारत में मिठाइयों की कोई कमी नहीं है। यहां आपको हर जगह की कोई स्पेशल मिठाई मिल जाएगी। एक ऐसा देश जो अपनी मिठाइयों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और जिस देश में मिठाई की कोई कमी नहीं है, उस देश में एक ब्रांड आता है कैडबरी Cadbury और उसने कुछ ऐसा किया कि आज लोगों के मन में मीठा और कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट का एक ही मतलब है। इंडिया में पहले से ही इतनी मिठाइयां बनती है कि हमें किसी नई चीज़ की आवश्यकता नहीं थी फिर भी इंडिया में आज डेयरी मिल्क सबसे ज्यादा खाई जाती है। अब क्योंकि कैडबरी लोगों को इतनी पसंद है तो इसके पीछे की कहानी जानना भी तो जरूरी है। आइए कैडबरी डेयरी मिल्क की कहानी और इसकी मार्केटिंग स्ट्रेटजी Success Story and marketing strategy of Cadbury के बारे में जानते हैं। 

SUCCESS STORY OF CADBURY

18 शताब्दी की शुरुआत की बात है, जब लोगों ने इतना ज्यादा शराब पीना शुरू कर दिया था कि 5 में से 10 लोगों की मृत्यु शराब पीने से होने लगी। जॉन कैडबरी John Cadbury नामक शख्स को ये बात बहुत अजीब लगी। वह इसके पीछे का पूरा कारण जानना चाहते थे इसीलिए उन्होंने उन लोगों से बात की जो शराब के बिना नहीं रह पाते थे। उन्होंने उन लोगों से सवाल किया कि आप शराब क्यों पीते हैं इसपर लोगों ने कहा कि उन्हें शराब का स्वाद अच्छा लगता है, उन्हें शराब पीकर खुशी मिलती है और शराब पीकर जो नशा मिलता है वह कुछ और पीने से नहीं मिलता है। जब जॉन कैडबरी John Cadbury ने इस पर और रिसर्च की तब उन्हें पता चला कि लोगों के शराब को पीने का मुख्य कारण नशा नहीं बल्कि स्वाद है। लोग शराब इसीलिए पी रहे थे क्योंकि उन्हें उसका स्वाद अच्छा लगता था। जॉन कैडबरी कुछ बदलाव लाना चाहते थे क्योंकि उनसे लोगों का इस तरह से नशा करना नहीं देखा जा रहा था। वह उन लोगों के पास गए और उनसे पूछा कि अगर मैं आपके लिए शराब से भी ज्यादा अच्छी कोई ड्रिंक ले आऊं तो क्या आप सब शराब पीना छोड़ देंगे। इसपर ज्यादातर लोगों का उत्तर आया कि आप पहले शराब से बेहतर कोई ड्रिंक लाओ तब हम निर्णय लेंगे। 

जॉन कैडबरी समझ गए थे कि अगर वह मार्केट में कुछ ऐसा ला देंगे जिसका स्वाद लोगों को शराब से ज्यादा अच्छा लगेगा तो लोग शराब पीना छोड़ देंगे। जॉन कैडबरी रिसर्च करते हैं और 1824 में वह मार्केट में हॉट चॉकलेट मिल्क Hot Chocolate Milk लाते हैं। जॉन कैडबरी का प्लान काम करता है और वही होता है जो उन्होंने सोचा था। हॉट चॉकलेट मिल्क के मार्केट में आते ही लोगों का ध्यान इसकी तरफ आ जाता है और दिन में कई बार शराब पीने वाले लोग अब दिन में कई बार हॉट चॉकलेट मिल्क पीना शुरू कर देते हैं। 

जॉन कैडबरी का हॉट चॉकलेट मिल्क वाला बिजनेस बहुत प्रॉफिटेबल था और लोगों को हॉट चॉकलेट मिल्क की लत लग गई थी। जॉन कैडबरी ने बिज़नेस को बड़ा करने के लिए मार्केट में कैडबरी की 16 नई ड्रिंक को लॉन्च किया। जॉन कैडबरी का बिज़नेस बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन उनके बेटे जॉर्ज कैडबरी George Cadbury ये बात समझ गए थे कि ये बिज़नेस लंबा नहीं चल पाएगा और उन्हें कुछ अलग करना चाहिए। 

एक दिन जॉर्ज हॉट चॉकलेट को कुछ देर के लिए छोड़ देते हैं और जब वह वापस आकर देखते हैं तो थिक लेयर जैसा एक क्रस्ट पाते हैं। वह उसे ठंडा करते हैं और टेस्ट करते हैं और उन्हें वह क्रस्ट बहुत टेस्टी लगता है। जॉर्ज कैडबरी समझ गए थे कि वो जो कुछ अलग करने का सोच रहे थे वह यही है और अब ये क्रस्ट उनका नया प्रोडक्ट बनेगा। कुछ एक्सपेरिमेंट करने के बाद उन्हें जो फाइनल रिज़ल्ट मिलता है, वह होता है उनका फाइनल प्रोडक्ट यानी कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट। 

यह रेसिपी जॉर्ज कैडबरी की थी लेकिन आज दुनिया भर के ज्यादातर चॉकलेट ब्रांड्स जैसे नेस्ले Nestle, अमूल Amul, मार्स और Hershey's भी जॉर्ज कैडबरी की रेसिपी को फॉलो कर रहे हैं। इन सब के बावजूद भी इंडिया में आज नंबर 1 चॉकलेट ब्रांड कैडबरी chocolate brand Cadbury है। आपको बता दें कि कैडबरी कोई कंपनी नहीं बल्कि ब्रांड है। कंपनी का नाम मोंडेलेज इंटरनेशनल Mondelez International है। कैडबरी ब्रांड मोंडेलेज इंटरनेशनल के अंडर आता है।

भारत में कैडबरी ने सन् 1948 में एंट्री ली। उन्होंने कैडबरी के चॉकलेट्स को डिस्ट्रीब्यूटर्स को बेचना शुरू किया। दरअसल, कैडबरी अपने चॉकलेट्स पर डिस्ट्रीब्यूटर्स को अच्छा खासा मार्जिन देती है। आपको बता दें कि उस वक्त जितना मार्जिन चॉकलेट्स पर मिलता था उतना मार्जिन कोई भी एफएमसीजी प्रोडक्ट पर नहीं मिलता था इसीलिए ज्यादा से ज्यादा रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कैडबरी से हाथ मिलाना शुरू किया और कैडबरी धीरे -धीरे इंडियन मार्केट पर कब्जा करने लगी। 

MARKETING STRATEGY OF CADBURY

कैडबरी के सामने अभी भी एक समस्या थी। यह चॉकलेट बच्चों की फेवरेट बन गई थी लेकिन जब भी कोई पेरेंट्स अपने बच्चे को डेंटिस्ट के पास लेकर जाते तो डेंटिस्ट उस बच्चे के कैविटी का कारण चॉकलेट बता देते। एक बच्चा उस चॉकलेट के लिए चाहे कितनी भी ज़िद कर ले लेकिन डॉक्टर के मना करने पर कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चे को वो नहीं देगा, जो उसके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। कैडबरी अपने प्रमोशन Cadbury promotion पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही थी लेकिन डॉक्टर्स की एडवाइस का प्रभाव पेरेंट्स पर इतना ज्यादा था कि कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चे के लिए चॉकलेट नहीं खरीद रहे थे। 1992 में कैडबरी ने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए अपनी सेल्स को दुगना करने का सोचा था, लेकिन उसी साल की शुरुआत में उनकी सेल्स में 15 प्रतिशत की गिरावट आ गई। 

आज भले ही आपको हर उम्र के लोग चॉकलेट खाते मिल जाएंगे लेकिन उस समय ऐसा नहीं था। चॉकलेट्स ज्यादातर बच्चे खाते थे और कैडबरी और दूसरे ब्रांड्स जो चॉकलेट बनाते थे, उनका टारगेट कस्टमर भी बच्चे ही थे। 1994 में सारी चॉकलेट्स कंपनी के सेल्स में गिरावट आ रही थीं क्योंकि पेरेंट्स डॉक्टर्स की एडवाइस को फॉलो कर रहे थे कि चॉकलेट खाने की वजह से बच्चों को कैविटी की समस्या हो रही है। 

कैडबरी के प्रोडक्ट और मार्केटिंग में कोई कमी नहीं थी फिर भी सेल्स में गिरावट आने को वजह से उन्होंने मार्केट में अपने ब्रांड की खराब सिचुएशन पर रिसर्च किया। कैडबरी को अब समझ में आ गया था कि उससे कहां गलती हुई है। उन्होंने अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटजी Marketing strategy of Cadbury से अपने कंज्यूमर को तो लुभा लिया है लेकिन अपने बायर को नहीं लुभा पाएं हैं। दरअसल, मार्केटिंग की मदद से कैडबरी ने बच्चों को अपना बना लिया था और बच्चे (कंज्यूमर) अपने पैरेंट्स से चॉकलेट के लिए ज़िद करते थे लेकिन पेरेंट्स (बायर) के दिमाग से डॉक्टर्स की एडवाइस नहीं जा रही थी कि अगर उनके बच्चे चॉकलेट को कंज्यूम करेंगे तो उनके दांत खराब हो जाएंगे। 

Also Read : Marketing strategy: Kurkure कैसे बना इंडिया का फेवरेट स्नैक्स?

अब यहां पर कैडबरी ने जबरदस्त मार्केटिंग स्ट्रेटजी Cadbury marketing strategy को अपनाया। कैडबरी ने द रियल टेस्ट ऑफ़ लाइफ The real taste of Life नाम से एक कैंपेन चलाया। इस कैंपेन की मदद से इंडिया में चॉकलेट्स को लेकर जो लोगों की सोच थी वह पूरी तरह से बदल गई। पहले कैडबरी के 10 और 20 रुपए के चॉकलेट्स आते थे लेकिन अब कैडबरी ने प्रीमियम और सब प्रीमियम कैटेगरी की भी शुरुआत की। एडवरटाइजमेंट की मदद से कैडबरी ने ये बताया कि चॉकलेट्स सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि यूथ और मिडल एज के लोगों के लिए भी है। इस कैंपेन ने कैडबरी की किस्मत बदल दी लेकिन मेहनत कैडबरी ने की और इसका फायदा सारे चॉकलेट्स ब्रांड्स को हुआ। कैंपेन की शुरुआत कैडबरी ने की लेकिन कैडबरी के प्रतिस्पर्धी को भी इससे फायदा होने लगा। उस वक्त मार्केट में कई चॉकलेट ब्रांड्स मौजूद थे लेकिन कैडबरी का कॉम्पिटिशन नेस्ले से था। 

मार्केट में कैडबरी की डेयरी मिल्क ₹5, ₹10, ₹20 और ₹50 रुपए की आती थी और इन चॉकलेट्स की सेल्स के लिए कैडबरी क्रिएटिव एड दिखाती थी। फ़िर से एक बार कैडबरी के सामने मुश्किल आ खड़ी हुई क्योंकि एड कैडबरी दिखाती थी लेकिन उसका फायदा कैडबरी के कॉम्पिटिशन नेस्ले Nestle को होने लगा। दरअसल, कैडबरी का ऐड देखकर लोगों को चॉकलेट खाने का मन होता था लेकिन जब वो शॉप पर जाते थे तो वहां उन्हें नेस्ले की मंच Nestle Munch भी दिखाई देती थी। नेस्ले की मंच साइज और वेट में कैडबरी की डेयरी मिल्क से ज्यादा थी। इस पर लोगों को लगा कि 5 रुपए की कैडबरी डेयरी मिल्क खाने से अच्छा है कि 5 रुपए की नेस्ले मंच खा लो और इसी कारण की वजह से कैडबरी से ज्यादा प्रॉफिट नेस्ले को होने लगा। नेस्ले को टक्कर देने के लिए कैडबरी ने मार्केट में अपनी नई चॉकलेट लॉन्च की और वो चॉकलेट पर्क Cadbury Perk थी। 

बच्चों के लिए बनाया गया प्रोडक्ट डेयरी मिल्क Cadbury Dairy Milk धीरे-धीरे पूरे देश का फेवरेट चॉकलेट बन गया और आज यह भारत में सबसे ज्यादा बिकता है। 

अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटजी की मदद से कैडबरी बच्चे, यूथ और मिडल एज सभी लोगों के दिल पर राज़ कर रही थी और कंपनी की सेल्स दिन-ब-दिन बढ़ रही थी लेकिन कैडबरी के सामने एक और चुनौती आई। लोग इस चॉकलेट को बेहद पसंद करते थे लेकिन अचानक से लोगों को कैडबरी की चॉकलेट के नाम से डर लगने लगा। दरअसल, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर Food and Drugs Administration को अक्टूबर 2003 में एक कॉल आता है और उन्हें बताया जाता है कि डेयरी मिल्क की चॉकलेट में कीड़े पाए गए हैं। टीवी, न्यूजपेपर और रेडियो की वजह से ये खबर आग की तरह फैल जाती है और वैसे तो त्योहार के वक्त कैडबरी की सेल्स 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ती थी लेकिन इस बार जो हुआ उससे कंपनी को काफी लॉस हुआ। डेयरी मिल्क चॉकलेट में कीड़े पाए जाने की वजह से इस ब्रांड की सेल्स 30 प्रतिशत घट गई। 

दरअसल, जब तक प्रोडक्ट होलसेलर के पास रहता था तब तक तो ठीक था लेकिन जैसे ही प्रोडक्ट रिटेलर्स के पास जाता था तो उसे सही से ना स्टोर करने की वजह से चॉकलेट में कीड़े लग गए थे। कैडबरी ने तो बयान दे दिया कि उनकी गलती नहीं है और होलसेलर और रिटेलर्स की वजह से चॉकलेट में कीड़े पाए गए हैं लेकिन इस चीज़ का जिम्मेदार कैडबरी को ही ठहराया गया। कैडबरी की सेल्स एक बार फिर से गिरने लगीं और इस बार मार्केट में कमबैक करने के लिए कैडबरी को एक नई और बेहतरीन मार्केटिंग स्ट्रेटजी चाहिए थी। 

कैडबरी ब्रांड एंबेसडर Cadbury Brand Ambassador

दरअसल, पेपर पैकेजिंग की वजह से चॉकलेट में ये समस्या आई थी इसीलिए कैडबरी ने फिर से एक नई शुरुआत की और पेपर पैकेजिंग की जगह मेटलिक फ्लो पैकेजिंग metallic flow packaging करना शुरू किया। इतना ही नहीं कैडबरी ने 40 प्रतिशत मार्केटिंग बजट बढ़ाया और नए ऐड के लिए मेगास्टार अमिताभ बच्चन Amitabh Bachchan को साइन किया। अमिताभ बच्चन को कौन नहीं पसंद करता है और उस वक्त एड के लिए कैडबरी का बिग बी को साइन करना कम्पनी का बेस्ट निर्णय था। कैडबरी ने अपने एड से लोगों को सिखाया कि खुशी का हर पल कैडबरी के बिना अधूरा है और उन्होंने कैडबरी की टैगलाइन रखी- कुछ अच्छा हो जाए, कुछ मीठा हो जाए, "Kuchh Achha Ho Jayee", "Kuchh Meetha Ho Jayee".

इतना ही नहीं अगर प्राइस की बात करें तो आज कैडबरी के पास सबके लिए कुछ है। कैडबरी के प्रोडक्ट आपको ₹2, ₹5, ₹10, ₹20, ₹40, ₹70, ₹80, ₹100, ₹500, ₹1000 और उससे भी ज्यादा रेंज के मिल जाएंगे। 

निष्कर्ष

एक वो समय था जब डॉक्टर्स के मना करने पर पेरेंट्स ने अपने बच्चों को कैडबरी चॉकलेट देने से मना कर दिया था और एक आज का समय है जहां कैडबरी ने सबके लिए अपने प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं। कैडबरी ने लोगों का चॉकलेट और मीठे के प्रति परसेप्शन बदल के रख दिया है इसीलिए आज जब भी कोई मीठा शब्द का प्रयोग करता है तो हमारे मन में सबसे पहले कैडबरी का विचार आता है। कैडबरी ने अपने एड से लोगों को सिखाया कि खुशी का हर पल कैडबरी के बिना अधूरा है और उन्होंने कैडबरी की टैगलाइन रखी- कुछ अच्छा हो जाए, कुछ मीठा हो जाए।

TWN In-Focus