भारत की स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग यात्रा: परम 8000 से परम रुद्र तक

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06 Oct 2026
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भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा इस बात का शानदार उदाहरण है कि तकनीकी सोच, स्वदेशी इंजीनियरिंग और लंबे समय तक किए गए सरकारी निवेश से किसी देश की वैज्ञानिक क्षमताओं को किस तरह मजबूत किया जा सकता है। भारत की यह यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में PARAM 8000 के विकास से शुरू हुई थी।

आज यह यात्रा एक ऐसे व्यापक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) नेटवर्क में बदल चुकी है, जिसका उपयोग विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सरकारी संगठनों और तकनीक आधारित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।

आज सुपरकंप्यूटर केवल वैज्ञानिक सिद्धांतों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल मौसम की भविष्यवाणी, जलवायु मॉडलिंग, दवा की खोज, जीनोमिक्स, आपदा प्रबंधन, नई सामग्रियों पर शोध, ऊर्जा की खोज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा रहा है। बड़े और जटिल आंकड़ों का तेजी से विश्लेषण करने तथा कठिन गणनाओं को कम समय में पूरा करने में सुपरकंप्यूटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत की इस बदलाव की यात्रा के केंद्र में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission - NSM) है। इसका उद्देश्य देश में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सिस्टम को एक साथ जोड़ने और विशेष तकनीकी अनुप्रयोगों के क्षेत्र में भारत की अपनी विशेषज्ञता विकसित करना है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का लक्ष्य केवल शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा स्वदेशी तकनीकी तंत्र तैयार करना है, जिसमें भारतीय संस्थान उन्नत कंप्यूटिंग सिस्टम को डिजाइन, विकसित, तैयार, संचालित और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें। इससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ शोध और नवाचार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

जैसे-जैसे भारत अधिक शक्तिशाली और आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ रहा है, PARAM 8000 से PARAM Rudra तक का सफर देश की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। यह यात्रा बताती है कि भारत ने किस तरह धीरे-धीरे अपनी कंप्यूटिंग क्षमताओं को मजबूत किया, शोध के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया और वैज्ञानिकों, छात्रों तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के लिए उन्नत कंप्यूटिंग के नए अवसर तैयार किए।

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परम 8000 से परम रुद्र तक: भारत ने अपनी सुपरकंप्यूटिंग ताकत कैसे बनाई। From PARAM 8000 to PARAM Rudra: How India Built Its Supercomputing Power.

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा की शुरुआत परम 8000 से। India’s Supercomputing Journey Begins with PARAM 8000.

भारत की स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग यात्रा ने वर्ष 1991 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसी वर्ष सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) ने PARAM 8000 को तैयार किया और इसे देश के सामने प्रस्तुत किया। यह भारत के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि थी।

उस समय उन्नत कंप्यूटिंग तकनीक तक पहुंच हासिल करना आसान नहीं था और यह तकनीक रणनीतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती थी। ऐसे समय में भारत द्वारा अपना सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। PARAM 8000 की कंप्यूटिंग क्षमता लगभग 1 गीगाफ्लॉप थी। इसके साथ ही भारत ने स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत शुरुआत की।

PARAM 8000 की उपलब्धि केवल उसकी कंप्यूटिंग गति तक सीमित नहीं थी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसने यह साबित किया कि भारत के इंजीनियर और वैज्ञानिक देश में ही हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित कर सकते हैं। इस उपलब्धि ने आगे चलकर भारत में सुपरकंप्यूटिंग तकनीक के विकास का आधार तैयार किया।

परम 8000 से अधिक शक्तिशाली परम सिस्टम तक। From PARAM 8000 to More Powerful PARAM Systems.

समय के साथ वैज्ञानिक शोध और तकनीकी जरूरतें बढ़ती गईं। इसके साथ ही अधिक शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम की जरूरत भी महसूस हुई। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए PARAM सीरीज का लगातार विकास किया गया। बाद के सुपरकंप्यूटर पहले की तुलना में अधिक तेज और शक्तिशाली बने तथा उन्होंने अधिक जटिल वैज्ञानिक कार्यों को पूरा करने में मदद की।

इस विकास में PARAM Yuva एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसकी कंप्यूटिंग क्षमता 54 टेराफ्लॉप तक पहुंची। PARAM Yuva — C-DAC

ऐसे शक्तिशाली सिस्टम की मदद से वैज्ञानिक उन जटिल गणनाओं और सिमुलेशन को कम समय में पूरा कर सके, जिन्हें सामान्य कंप्यूटरों पर करने में काफी अधिक समय लग सकता था।

हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का इस्तेमाल धीरे-धीरे मौसम की भविष्यवाणी, कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स और वैज्ञानिक सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में होने लगा। इससे यह साबित हुआ कि सुपरकंप्यूटर केवल प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल देश की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में भी किया जा सकता है।

PARAM सीरीज के विकास ने भारत को सुपरकंप्यूटिंग के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुभव हासिल करने में भी मदद की। इनमें सिस्टम आर्किटेक्चर, पैरेलल कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और बड़े कंप्यूटिंग सिस्टम के प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षमताओं ने आगे चलकर भारत के व्यापक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इकोसिस्टम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: देशभर में HPC इकोसिस्टम का निर्माण। National Supercomputing Mission: Building a Nationwide HPC Ecosystem.

केवल अलग-अलग सुपरकंप्यूटर बनाने से आगे। Moving Beyond Individual Supercomputers.

भारत के सुपरकंप्यूटिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission — Department of Science & Technology) की शुरुआत के साथ आया। इस मिशन का उद्देश्य केवल कुछ शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर तैयार करना नहीं है। इसका लक्ष्य देशभर में ऐसा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसका लाभ वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों को मिल सके।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत भारत में 50 सुपरकंप्यूटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन सभी सिस्टम की संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 123 पेटाफ्लॉप से अधिक होने की योजना है। इन्हें देश के विभिन्न शैक्षणिक और शोध संस्थानों में स्थापित किया जा रहा है।

सितंबर 2026 तक 40 सुपरकंप्यूटर तैनात किए जा चुके थे। इनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 68 पेटाफ्लॉप थी। इन सिस्टम को उनकी कंप्यूटिंग क्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।

  • 13 हाई-एंड सुपरकंप्यूटर की क्षमता 1 पेटाफ्लॉप से अधिक है।
  • 12 मध्यम क्षमता वाले सिस्टम की क्षमता 500 टेराफ्लॉप से 1 पेटाफ्लॉप के बीच है।
  • 15 सिस्टम की क्षमता 500 टेराफ्लॉप से कम है।

इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों की जरूरत के अनुसार उन्हें उचित कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराना है। हर शोध परियोजना को एक ही स्तर की कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता नहीं होती। कुछ शोध कार्यों के लिए बहुत शक्तिशाली सिस्टम जरूरी होते हैं, जबकि दूसरे कार्य मध्यम क्षमता वाले सिस्टम पर भी किए जा सकते हैं।

देशभर में HPC इन्फ्रास्ट्रक्चर क्यों जरूरी है। Why Distributed HPC Infrastructure Matters.

सुपरकंप्यूटर तभी उपयोगी साबित होते हैं, जब वैज्ञानिक और शोधकर्ता उनका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें। देश के अलग-अलग हिस्सों में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से उन्नत कंप्यूटिंग तक पहुंच की भौगोलिक और संस्थागत बाधाओं को कम किया जा सकता है।

देशभर के विश्वविद्यालय, शोध संगठन और प्रयोगशालाएं सिमुलेशन, आंकड़ों के विश्लेषण और अन्य जटिल शोध कार्यों के लिए इन HPC सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए हर संस्थान को अपने स्तर पर एक अलग सुपरकंप्यूटर तैयार करने की जरूरत नहीं होगी।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां बड़े स्तर का सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना आर्थिक या तकनीकी रूप से कठिन हो सकता है। इससे उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाओं का लाभ केवल कुछ बड़े शोध केंद्रों तक सीमित रहने के बजाय देश के अधिक से अधिक संस्थानों तक पहुंच सकता है।

इस प्रकार भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा PARAM 8000 जैसे शुरुआती स्वदेशी सिस्टम से आगे बढ़कर एक व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में पहुंच रही है। यह बदलाव केवल अधिक शक्तिशाली मशीनें बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि देशभर में शोध और नवाचार के लिए उन्नत कंप्यूटिंग को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

परम रुद्र: स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग के एक नए दौर की शुरुआत। PARAM Rudra: A New Phase of Indigenous Supercomputing.

स्वदेशी रुद्र सर्वर बने इसकी ताकत का आधार। Indigenous Rudra Servers at the Core.

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत PARAM Rudra सीरीज भारत की स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन सुपरकंप्यूटरों के जरिए भारत अपनी हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता को और मजबूत करने के साथ-साथ जरूरी तकनीक को देश में ही विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

PARAM Rudra सिस्टम में C-DAC द्वारा भारत में डिजाइन और विकसित किए गए Rudra सर्वर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ स्वदेशी सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक भी तैयार किया गया है। यह व्यवस्था भारत को HPC तकनीक की पूरी श्रृंखला में अपनी क्षमताएं विकसित करने में मदद कर रही है।

सितंबर 2026 तक PARAM Rudra सुपरकंप्यूटरों में करीब 6,000 Rudra सर्वर लगाए जा चुके थे। वहीं, करीब 1,500 अन्य सर्वर निर्माण के चरण में थे। इससे पता चलता है कि भारत अपने हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार विस्तार दे रहा है।

इन सिस्टम का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध के लिए किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं।

  • खगोल विज्ञान।
  • सामग्री विज्ञान।
  • परमाणु भौतिकी।
  • पृथ्वी विज्ञान।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
  • जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन।

Rudra सर्वर का विकास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधुनिक डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम में सर्वर ही कंप्यूटिंग क्षमता का मुख्य आधार होते हैं। अपने सर्वर विकसित करने से भारत को सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के महत्वपूर्ण हिस्से पर घरेलू तकनीकी क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है।

हार्डवेयर से आगे, पूरा स्वदेशी तकनीकी इकोसिस्टम। From Hardware to a Complete Technology Ecosystem.

PARAM Rudra का विकास भारत की सुपरकंप्यूटिंग रणनीति में हो रहे बड़े बदलाव को भी दिखाता है। अब भारत का लक्ष्य केवल शक्तिशाली कंप्यूटरों को तैयार करना या उन्हें स्थापित करना नहीं है। इसके साथ-साथ हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, कूलिंग और निर्माण से जुड़ी तकनीकों को भी देश में विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

एक मजबूत स्वदेशी इकोसिस्टम भारत को उन्नत कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अधिक तकनीकी मजबूती दे सकता है। इससे जरूरी तकनीकों और उपकरणों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

इस तरह PARAM Rudra केवल एक सुपरकंप्यूटर सीरीज नहीं है, बल्कि भारत में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग से जुड़ी विभिन्न तकनीकों और क्षमताओं को एक साथ विकसित करने के प्रयास का हिस्सा है।

स्वदेशी हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तकनीक का निर्माण। Building Indigenous High-Performance Computing Technologies.

Rudra सर्वर और घरेलू निर्माण। Rudra Servers and Domestic Manufacturing.

C-DAC ने Rudra सर्वर प्लेटफॉर्म को डिजाइन और विकसित किया है। इन सर्वरों को उन्नत हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग कार्यों के लिए जरूरी प्रोसेसिंग क्षमता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

Rudra तकनीक को भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनियों को उत्पादन के लिए भी हस्तांतरित किया गया है। इससे देश में सुपरकंप्यूटिंग के शोध और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध बनता है।

भारत में इन तकनीकों का निर्माण केवल सुपरकंप्यूटर तैयार करने तक सीमित नहीं है। इससे विशेष तकनीकी कौशल, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में भी मदद मिल सकती है। लंबे समय में यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट तकनीक का विकास। Development of High-Speed Interconnect Technology.

सुपरकंप्यूटर केवल कई शक्तिशाली प्रोसेसरों को एक साथ जोड़ने वाली मशीन नहीं होता है। इसमें मौजूद हजारों कंप्यूटिंग नोड्स को एक-दूसरे के साथ बहुत तेजी से जानकारी का आदान-प्रदान करना पड़ता है।

अगर इन नोड्स के बीच डेटा का आदान-प्रदान धीमा हो, तो सुपरकंप्यूटर की कुल क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट तकनीक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत ने 100 Gbps और 200 Gbps की गति वाली स्वदेशी हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट तकनीक विकसित की है। इससे अलग-अलग कंप्यूटिंग नोड्स के बीच तेजी से डेटा भेजना और प्राप्त करना संभव होता है।

यह तकनीक खास तौर पर बड़े स्तर के सिमुलेशन और पैरेलल कंप्यूटिंग जैसे कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे कार्यों में कई प्रोसेसर और कंप्यूटिंग नोड्स एक साथ किसी जटिल समस्या को हल करने के लिए काम करते हैं।

स्वदेशी कूलिंग तकनीक पर भी जोर। Focus on Indigenous Cooling Technology.

हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के सामने केवल कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने की चुनौती नहीं होती है। शक्तिशाली प्रोसेसर बड़ी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते हैं और इस प्रक्रिया में काफी गर्मी भी पैदा होती है। इसलिए सुपरकंप्यूटर के लिए प्रभावी कूलिंग सिस्टम बेहद जरूरी होता है।

भारत ने HPC सिस्टम के लिए स्वदेशी कूलिंग तकनीक विकसित और प्रदर्शित की है। अब इस तकनीक को इस्तेमाल में लाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

एक प्रभावी कूलिंग सिस्टम कंप्यूटिंग उपकरणों को उचित तापमान पर बनाए रखने में मदद करता है। इससे सिस्टम की विश्वसनीयता और बेहतर संचालन में मदद मिल सकती है। साथ ही, अधिक कुशल कूलिंग तकनीक ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करने में भी उपयोगी हो सकती है।

स्वदेशी सिस्टम सॉफ्टवेयर का विकास। Development of Indigenous System Software.

सुपरकंप्यूटर की क्षमता केवल उसके हार्डवेयर पर निर्भर नहीं करती है। प्रोसेसर, मेमोरी, स्टोरेज, नेटवर्क और कंप्यूटिंग कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है।

इसी वजह से भारत ने अपने हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इकोसिस्टम के तहत स्वदेशी HPC सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक भी विकसित किया है। यह सॉफ्टवेयर सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम के अलग-अलग संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद करता है।

स्वदेशी सॉफ्टवेयर क्षमता विकसित करने से भारत को अपने HPC सिस्टम की जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है।

परम शावक से छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ। PARAM Shavak Benefits Students and Researchers.

भारत ने परम शावक PARAM Shavak नाम से एक कॉम्पैक्ट सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम भी विकसित किया है। इसे एक तरह के “सुपरकंप्यूटिंग-इन-ए-बॉक्स” सिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जिसे देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। 

परम शावक को इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में HPC और AI से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की तकनीक को समझने और उसका व्यावहारिक इस्तेमाल करने का अवसर देना है।

ऐसी प्रणालियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हर छात्र या शोधकर्ता के लिए देश के सबसे बड़े सुपरकंप्यूटर तक सीधे पहुंच हासिल करना संभव नहीं होता। छोटे और अधिक सुलभ सिस्टम के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों में HPC के प्रति जागरूकता और व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाया जा सकता है।

इस तरह Rudra सर्वर, हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट, स्वदेशी कूलिंग, सिस्टम सॉफ्टवेयर और PARAM Shavak जैसे प्रयास भारत के सुपरकंप्यूटिंग इकोसिस्टम को केवल अधिक शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि अधिक स्वदेशी और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वास्थ्य, विज्ञान और राष्ट्रीय जरूरतों के लिए सुपरकंप्यूटिंग। Supercomputing for Healthcare, Science and National Applications.

जीनोमिक्स और दवा खोज में उपयोग। Genomics and Drug Discovery.

भारत में विकसित सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण उपयोग जीनोमिक्स और दवा खोज के क्षेत्र में हो रहा है।

बड़े स्तर पर जैविक डेटा का विश्लेषण करने के लिए बहुत अधिक कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग यानी HPC की मदद से शोधकर्ता बड़ी मात्रा में आणविक जानकारी को तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं। इससे संभावित दवाओं की पहचान करने और अलग-अलग रासायनिक यौगिकों के बीच होने वाली प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।

कोविड-19 महामारी के दौरान भी कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मौजूदा दवाओं की जांच करने और उनके संभावित दुष्प्रभावों का अनुमान लगाने के लिए किया गया था। इस अनुभव ने दिखाया कि उन्नत कंप्यूटिंग तकनीक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के समय मेडिकल रिसर्च को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मौसम और वायु प्रदूषण की मॉडलिंग। Weather and Air Pollution Modelling.

मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए वातावरण और पर्यावरण से जुड़ी बहुत बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करना पड़ता है।

सुपरकंप्यूटर शोधकर्ताओं को अधिक जटिल और बेहतर रिजॉल्यूशन वाले मॉडल चलाने में सक्षम बनाते हैं। इससे मौसम के पैटर्न और पर्यावरण में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।

HPC का इस्तेमाल शहरी मौसम और वायु प्रदूषण की मॉडलिंग में भी किया जा रहा है। इससे शहरों को वायु गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने के लिए उपयोगी जानकारी मिल सकती है।

बाढ़ की भविष्यवाणी में सुपरकंप्यूटिंग। Flood Forecasting.

भारत की भौगोलिक विविधता को देखते हुए बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की समय पर भविष्यवाणी करना बेहद महत्वपूर्ण है।

सुपरकंप्यूटिंग आधारित मॉडल मौसम, नदियों और भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी का एक साथ विश्लेषण कर सकते हैं। इससे बाढ़ की भविष्यवाणी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।

HPC इकोसिस्टम के माध्यम से विकसित बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली दो दिन पहले तक बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल महानदी नदी बेसिन के लिए किया जा रहा है।

इस तरह की प्रणालियां दिखाती हैं कि सुपरकंप्यूटिंग का वास्तविक जीवन में कितना महत्वपूर्ण उपयोग हो सकता है। जटिल गणनाओं के जरिए तैयार जानकारी प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को संभावित बाढ़ से पहले तैयारी करने में मदद कर सकती है।

जंगल की आग की मॉडलिंग। Forest-Fire Modelling.

जंगलों में आग मौसम, जमीन की बनावट और पेड़-पौधों की स्थिति जैसे कई कारकों के आधार पर तेजी से फैल सकती है।

HPC आधारित फॉरेस्ट-फायर मॉडलिंग में सैटेलाइट से मिलने वाले रिमोट सेंसिंग डेटा और कंप्यूटिंग मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इनके जरिए यह अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है कि आग किस दिशा में और कितनी तेजी से फैल सकती है।

ऐसी जानकारी वन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को बेहतर योजना बनाने और आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद कर सकती है।

ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग। Energy and Scientific Research.

सुपरकंप्यूटिंग का इस्तेमाल ऊर्जा क्षेत्र और वैज्ञानिक अनुसंधान के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इनमें तेल और गैस की खोज के लिए भूकंपीय इमेजिंग, कंप्यूटेशनल केमिस्ट्री, मटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इन सभी क्षेत्रों में जटिल गणनाओं और बड़ी मात्रा में डेटा के विश्लेषण की जरूरत होती है। HPC की मदद से शोधकर्ता बड़े स्तर पर वैज्ञानिक मॉडल और सिमुलेशन चला सकते हैं तथा ऐसे डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं, जिसे सामान्य कंप्यूटरों से प्रोसेस करना काफी मुश्किल हो सकता है।

नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जुड़ रहे हैं शोध संस्थान। National Knowledge Network Connects Research Institutions.

एक जुड़ा हुआ शोध वातावरण तैयार करना। Creating a Connected Research Environment.

सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब अलग-अलग संस्थानों के शोधकर्ता इन संसाधनों तक पहुंच बना सकें और आपस में जानकारी साझा कर सकें।

नेशनल नॉलेज नेटवर्क (NKN) इस इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देशभर के शैक्षणिक और शोध संस्थानों को एक हाई-स्पीड राष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए जोड़ता है।

यह कनेक्टिविटी शोधकर्ताओं को अलग-अलग कंप्यूटिंग सुविधाओं तक पहुंच बनाने, देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद संस्थानों के साथ मिलकर काम करने और वैज्ञानिक ज्ञान साझा करने में मदद करती है।

भारत जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से विविध देश में इस तरह की नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे उन्नत शोध सुविधाओं का लाभ केवल कुछ बड़े शोध केंद्रों तक सीमित रहने के बजाय अधिक संस्थानों तक पहुंचाया जा सकता है।

बड़े शोध केंद्रों से आगे सुपरकंप्यूटिंग की पहुंच। Expanding Access Beyond Major Research Centres.

एक जुड़ा हुआ HPC इकोसिस्टम देश के अलग-अलग संस्थानों के शोधकर्ताओं को उन परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर दे सकता है, जिनमें बहुत अधिक कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है।

इसका सबसे बड़ा लाभ उन विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को मिल सकता है, जिनके पास अपनी बड़ी सुपरकंप्यूटिंग सुविधा स्थापित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय या तकनीकी संसाधन नहीं हैं।

इस तरह नेटवर्क आधारित सुपरकंप्यूटिंग व्यवस्था भारत में उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाओं की पहुंच को व्यापक बना सकती है। इससे अधिक शोधकर्ता, विद्यार्थी और संस्थान राष्ट्रीय स्तर के कंप्यूटिंग संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे और देश में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक मजबूत सहयोगी वातावरण तैयार हो सकेगा।

भारत में HPC प्रतिभा और कौशल का विकास। Developing India’s HPC Talent and Skills.

16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को मिला समर्थन। More Than 16,000 Researchers Supported.

सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत होती है, जो HPC सिस्टम को विकसित करने, कॉन्फिगर करने और उनका सही तरीके से इस्तेमाल करने की जानकारी रखते हों।

सितंबर 2026 तक नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के इन्फ्रास्ट्रक्चर से 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को मदद मिल चुकी थी। इनमें 2,900 से अधिक PhD शोधार्थी शामिल हैं। यह सुविधा देशभर के 400 से अधिक संस्थानों तक पहुंच चुकी है।

इन सिस्टम पर अब तक 1.5 करोड़ से अधिक कंप्यूट जॉब्स पूरे किए जा चुके हैं। इनके जरिए 1,990 से अधिक शोध प्रकाशनों में भी योगदान दिया गया है।

ये आंकड़े बताते हैं कि सुपरकंप्यूटिंग की सफलता को केवल प्रोसेसर की स्पीड या लगाए गए सुपरकंप्यूटरों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिए। कितने शोधकर्ता इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे कितना नया ज्ञान और शोध तैयार हो रहा है, ये भी उतने ही महत्वपूर्ण पैमाने हैं।

छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण। Training Students, Faculty and Researchers.

नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन ने HPC का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए कई प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

  • जागरूकता कार्यक्रम।

  • हैकाथॉन।

  • बूटकैंप।

  • फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम।

  • विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • EduHPC वर्कशॉप।

  • SWAYAM प्लेटफॉर्म पर HPC पाठ्यक्रम।

  • HPC शिक्षा पोर्टल।

इन पहलों के जरिए छात्रों और शिक्षकों को पैरेलल कंप्यूटिंग, वैज्ञानिक प्रोग्रामिंग, कंप्यूटिंग कार्यों के प्रबंधन और HPC इन्फ्रास्ट्रक्चर के व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने में मदद मिल सकती है।

कुशल तकनीकी कार्यबल तैयार करना भारत की लंबे समय की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए भी जरूरी है। अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर तभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर पाएंगे, जब शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के पास उन्हें प्रभावी तरीके से चलाने और उपयोग करने का जरूरी ज्ञान और कौशल होगा।

सुपरकंप्यूटिंग और सतत विकास। Supercomputing and Sustainable Development.

जलवायु और पर्यावरण से जुड़े अनुसंधान में मदद। Supporting Climate and Environmental Research.

पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

क्लाइमेट मॉडलिंग, मौसम की भविष्यवाणी, बाढ़ का पूर्वानुमान और जंगल की आग से जुड़े सिमुलेशन जैसे काम शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों को समझने में मदद करते हैं।

इस तरह सुपरकंप्यूटिंग का इस्तेमाल केवल वैज्ञानिक गणनाओं तक सीमित नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारी, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय लचीलापन जैसे व्यापक विकास लक्ष्यों में भी योगदान दे सकता है।

शिक्षा, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा। Education, Innovation and Collaboration.

नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से देश में तकनीकी क्षमता बढ़ाने में भी योगदान दे रहा है।

इसके साथ ही सरकार, विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों के बीच सहयोग से नई तकनीकों और उनके नए उपयोगों को विकसित करने के अवसर बढ़ सकते हैं।

एक मजबूत HPC इकोसिस्टम केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में ही मदद नहीं करता, बल्कि इससे नए उत्पाद, सेवाएं और तकनीक आधारित व्यवसाय विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

इस तरह सुपरकंप्यूटिंग भारत में अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

AI और HPC: भारत की कंप्यूटिंग यात्रा का अगला चरण। AI and HPC: The Next Stage of India’s Computing Journey.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से विकास के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग भी बढ़ रही है।

अत्याधुनिक AI मॉडल को तैयार करने और चलाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। वहीं, वैज्ञानिक अनुसंधान में भी AI का इस्तेमाल बड़े डेटा और कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन के साथ तेजी से बढ़ रहा है।

इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का मेल भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

AI और HPC के संभावित उपयोग। Potential Applications of AI and HPC.

AI और HPC का संयुक्त इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है।

  • मौसम और जलवायु की भविष्यवाणी।

  • स्वास्थ्य और मेडिकल रिसर्च।

  • कृषि।

  • दवा खोज।

  • ऊर्जा प्रणालियां।

  • इंजीनियरिंग।

  • मटेरियल रिसर्च।

  • वैज्ञानिक सिमुलेशन।

AI और HPC को एक साथ इस्तेमाल करने से शोधकर्ता बड़ी मात्रा में डेटा का तेजी से विश्लेषण कर सकते हैं। इससे डेटा में छिपे पैटर्न की पहचान करने और अधिक कंप्यूटिंग क्षमता वाले जटिल कार्यों को कम समय में पूरा करने में मदद मिल सकती है।

आने वाले समय में AI और सुपरकंप्यूटिंग का यह संयोजन भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी नवाचार और डिजिटल आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारतीय सुपरकंप्यूटिंग का आगे का सफर (The Road Ahead for Indian Supercomputing)

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा PARAM 8000 से शुरू होकर आज ऐसे व्यापक तकनीकी इकोसिस्टम तक पहुंच चुकी है, जिसमें देश में विकसित सर्वर, नेटवर्किंग तकनीक, सिस्टम सॉफ्टवेयर, कूलिंग सिस्टम और विशेष जरूरतों के लिए बनाए गए एप्लिकेशन शामिल हैं।

अब सुपरकंप्यूटिंग के अगले चरण में केवल ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा. इसके साथ ऊर्जा की कम खपत, बेहतर विश्वसनीयता, आसानी से बढ़ाई जा सकने वाली क्षमता और ज्यादा लोगों तक पहुंच जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।

देश में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के विकास को बढ़ावा देना आगे भी महत्वपूर्ण रहेगा. इसके साथ विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और स्टार्टअप्स को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग यानी HPC की सुविधाएं अधिक आसानी से उपलब्ध कराना भी जरूरी है. इससे भारत के इनोवेशन और रिसर्च इकोसिस्टम के बड़े हिस्से को आधुनिक कंप्यूटिंग का लाभ मिल सकेगा।

इसका अंतिम लक्ष्य केवल तेज सुपरकंप्यूटर बनाना नहीं है. असली उद्देश्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां कंप्यूटिंग की शक्ति का इस्तेमाल नई वैज्ञानिक खोजों, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं, तकनीकी नवाचार और देश की बड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए किया जा सके।

एक सुपरकंप्यूटर से राष्ट्रीय कंप्यूटिंग इकोसिस्टम तक (From a Single Supercomputer to a National Computing Ecosystem)

PARAM 8000 से PARAM Rudra तक का सफर भारत की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में तीन दशकों से अधिक की प्रगति को दिखाता है।

PARAM 8000 ने यह साबित किया कि भारत अपने दम पर सुपरकंप्यूटर विकसित कर सकता है. इसके बाद PARAM सीरीज के अलग-अलग सिस्टम ने देश की वैज्ञानिक और तकनीकी कंप्यूटिंग क्षमता को लगातार मजबूत किया।

इसके बाद National Supercomputing Mission (NSM) ने इस प्रयास को एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदल दिया. इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का मजबूत नेटवर्क और इकोसिस्टम तैयार करना था।

PARAM Rudra ने इस दिशा को आगे बढ़ाते हुए देश में विकसित सर्वर तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण कंप्यूटिंग घटकों को मजबूत करने पर जोर दिया है।

सितंबर 2026 तक मिशन के तहत 40 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं. इनसे 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को सहायता मिली है. मिशन का लक्ष्य कुल 50 सिस्टम स्थापित करना है, जिनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 123 पेटाफ्लॉप्स से अधिक होगी।

भारत की सुपरकंप्यूटिंग की कहानी केवल मशीनों की कहानी नहीं है. इसके केंद्र में शोधकर्ता, इंजीनियर, विद्यार्थी, शिक्षक, निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी हैं. ये सभी मिलकर देश के HPC इकोसिस्टम को मजबूत बनाते हैं।

भारत जैसे-जैसे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़ रहा है और अपनी घरेलू तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, सुपरकंप्यूटिंग वैज्ञानिक शोध, इनोवेशन और राष्ट्रीय विकास के लिए और भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

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