कैसे बनी Bata भारतीयों की पहली पसंद

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20 Dec 2021
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भारत का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय फुटवियर ब्रांड बाटा वास्तव में भारतीय ब्रांड नहीं है। लेकिन इसने अपने प्रभावी रणनीतियों के द्वारा भारतीयों के दिमाग पर एक विशेष छाप छोड़ी है, जिसने इसे भारतीय बाजारों में सफल बनाया है।

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Bata नाम से तो आप‌ सभी भलीभांति परिचित होंगे। आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इस नाम से परिचित ना हो। और परिचित हो भी क्यों ना, यह भारत का सबसे भरोसेमंद फुटवियर ब्रांड footwear brand जो है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अन्य कई देशों में भी बाटा एक घरेलू नाम है जो अपने उत्पादों की गुणवत्ता quality of products के लिए जाना जाता है। लगभग हम सभी ने कभी ना कभी अपने जीवन में बाटा के जूते या चप्पल ज़रूर पहने होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मशहूर ब्रांड बाटा एक चेक ब्रांड है जिसका मुख्यालय अब स्विट्जरलैंड Switzerland में स्थित है। विश्वास नहीं होता ना? लेकिन यह सत्य है कि बाटा कोई भारतीय ब्रांड नहीं है। आज अधिकांश लोग ऐसा मानते हैं कि बाटा एक भारतीय ब्रांड है लेकिन ऐसा नहीं है। पिछले कई वर्षों से बाटा ने हम सभी को यह महसूस कराया है कि वह एक भारतीय कंपनी है और यही उसकी सफलता का राज़ है।

कैसे हुई बाटा कंपनी की शुरुआत

बाटा कंपनी की शुरुआत टॉमस बाटा Tomas Bata ने 1894 में की थी। 3 अप्रैल को Prague, Czech में जन्में टॉमस अपने शुरुआती दिनों में अपने परिवार के साथ जूते के कारोबार में शामिल थे। पूरे परिवार के जूतों के व्यवसाय में शामिल होने के कारण उन्हें इस व्यवसाय का काफी ज्ञान हो गया। टॉमस ने महज 15 साल की उम्र में जूते के निर्माण का व्यवसाय शुरू किया, लेकिन किन्हीं कारणवश वह असफल रहा। इसकी वजह से उन्हें हर किसी की आलोचनाएं सुननी‌ पड़ी लेकिन उन्होंने बिना इसकी परवाह किए अपने छोटे पारिवारिक व्यवसाय family business को एक बड़े व्यवसाय में तब्दील करने का निश्चय किया। 

इसके बाद 1894 में टॉमस ने अपने भाई और बहन के साथ मिलकर ज़्लिन टाऊन Zlin town में छोटी सी किराए की दुकान के साथ जूते का व्यवसाय शुरू किया। वहां उन्होंने अपनी पहली जूते की कंपनी शुरू की जिसे उन्होंने T and A Bata का नाम दिया। कंपनी के शुरू होने के एक साल बाद टॉमस को कई वित्तीय समस्याओं से गुजारना पड़ा जिससे वह क़र्ज़ में डूब गए। इसके बाद टॉमस ने चमड़े के जूते के बजाय कैनवास के जूते बनाने का फैसला किया। 1897 में टॉमस ने बटोव्कास Batovka नामक एक जूते का निर्माण किया। यह अपने सरल स्टाइल, हल्के वज़न और कम कीमत के कारण काफी लोकप्रिय हो गया। इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे काफी लोकप्रियता हासिल की और कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में भी वृद्धि हुई जिससे यह कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो गई। लगातार जूतों के नए आविष्कार ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होने लगे जिसने बाटा को एक सफल ब्रांड बनाया। यह धीरे-धीरे कई देशों में एक पॉपुलर ब्रांड बन गया।

इस रणनीति से बाटा बनी भारतीय बाजारों में लोकप्रिय

अपने उत्तम गुणवत्ता के फुटवियर उत्पादों के कारण बाटा ने दुनिया के कई देशों में व्यवसाय किया लेकिन भारत में ब्रांड को विकसित करना एक कठिन काम था। फिर 1920 में बाटा के संस्थापक ने गौर किया कि भारत की अधिकतम आबादी नंगे पांव ही चलती है। जिसके कारण गर्मियों में उनके पांव जलते हैं और कभी-कभी चोट की वजह से उन्हें टेटनस जैसी बीमारी हो जाती है। इस समस्या को टॉमस ने एक सुनहरे अवसर की तरह इस्तेमाल किया। बाटा ने भारतीय अखबारों में एक विज्ञापन निकाला जिसकी टैगलाइन थी- " गर्मी में सुखद शीतलता" और इस टैग लाइन के साथ उन्होंने 6 विभिन्न डिजाइनों के फुटवियर की तस्वीरें लगाई और वही अपने दूसरे विज्ञापन में बाटा ने टिटनेस की जागरूकता tetanus awareness फैलाई और लोगों से जूते पहनने की अपील की। बाटा ने लगभग अपने सभी विज्ञापनों में ऐसी समस्याओं पर बात की जिससे भारतीय खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस करें। इसके साथ साथ उन्होंने अपने सभी विज्ञापनों में भारतीय चेहरे इस्तेमाल किए। इन विज्ञापन की रणनीतियों के कारण कई भारतीय इन विज्ञापनों से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करने लगे और जूतों के इस्तेमाल की ओर ध्यान केंद्रित करने लगे। इसके बाद बाटा ने अपने सभी जूतों के डिज़ाइन और क़ीमतें भारतीयों के हिसाब से रखा। बाटा की रणनीति बिल्कुल सरल थी - "जैसा देश वैसा भेष"। बाटा की यही रणनीति भारतीयों के दिमाग में एक भारतीय ब्रांड बन गया। वर्तमान समय में इसे बखूबी देखा जा सकता है कि कैसे बाटा भारतीय बाजारों में इतना लोकप्रिय बन गया है।

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