फ़ूड डिलीवरी की बड़ी कंपनी Zomato (Eternal Ltd) एक नए क्लाउड किचन ब्रांड 'Ritual' का पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। इसका मकसद ज़्यादा प्रोटीन वाले और सेहत पर फ़ोकस करने वाले खाने की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
इस ब्रांड को Massive Restaurants के साथ पार्टनरशिप में लॉन्च किया जा रहा है। Massive Restaurants वही हॉस्पिटैलिटी कंपनी है, जो Farzi Cafe और Louis Burger जैसी चेन चलाती है। पहले Eternal के पूर्व CEO Deepinder Goyal ने कहा कि कंपनी अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसे कोई प्राइवेट ब्रांड लॉन्च नहीं करेगी जो उसके रेस्टोरेंट पार्टनर्स से मुक़ाबला करें।
मौजूदा मॉडल भी इसी सिद्धांत पर चलता दिख रहा है, जिसमें ऑपरेशन Zomato खुद नहीं, बल्कि एक पार्टनर रेस्टोरेंट ग्रुप संभाल रहा है।
यह क्लाउड किचन अभी सिर्फ़ गुरुग्राम की कुछ जगहों पर चालू है, और आस-पास के इलाकों में Zomato ऐप के ज़रिए ऑर्डर किए जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक यह पहल अभी पायलट स्टेज पर है, और अगर यह कॉन्सेप्ट लोगों को पसंद आता है, तो इसे और भी शहरों में बढ़ाया जाएगा।
Ritual के तहत मिलने वाला खाना ज़्यादातर फ़िटनेस और न्यूट्रिशन सेगमेंट पर फ़ोकस करता है। इसके मेन्यू में प्रोटीन शेक शामिल हैं, जो प्लांट-बेस्ड और व्हे से लेकर यीस्ट-बेस्ड ब्लेंड तक कई तरह के हैं, साथ ही मिल्कशेक, हॉट और आइस्ड कॉफ़ी, ग्रिल्ड पनीर वेजी और सलाद भी मिलते हैं।
हालांकि कंपनी के ऐप में पहले से ही हेल्दी खाने के ऑप्शन मौजूद हैं, लेकिन Ritual फिटनेस के प्रति जागरूक ग्राहकों की बढ़ती कम्युनिटी को खाना पहुंचाने की एक ज़्यादा व्यवस्थित कोशिश है।
इसकी प्रतिद्वंद्वी Swiggy ने भी EatRight के साथ इस सेगमेंट में कदम रखा है। यह एक खास कैटेगरी है, जो 50 से ज़्यादा शहरों में हाई-प्रोटीन, कम कैलोरी और बिना चीनी वाले खाने के ऑप्शन देती है।
Ritual के उलट, जो Massive Restaurants के साथ पार्टनरशिप में एक खास क्लाउड किचन के तौर पर काम करता है, Swiggy का EatRight उन पार्टनर रेस्टोरेंट से डिशेज़ इकट्ठा करता है, जो पहले से ही उसके प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड हैं।
Swiggy ने अपने Q3 शेयरहोल्डर लेटर में इस कैटेगरी की बढ़ती लोकप्रियता पर ज़ोर दिया है। उसने बताया कि EatRight के ऑर्डर—जिनमें हाई-प्रोटीन, कम कैलोरी और शुगर-फ्री ऑप्शन शामिल हैं, अब प्लेटफॉर्म पर होने वाले हर नौ ऑर्डर में से लगभग एक होते हैं।
हेल्थ पर फोकस वाले खाने की तरफ यह कदम भारत के वेलनेस और न्यूट्रिशन मार्केट में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी के बीच उठाया गया है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक भारत के हेल्थ और वेलनेस फूड मार्केट की मौजूदा कीमत लगभग $35–$39 बिलियन है। उम्मीद है, कि 2032–2033 तक यह बढ़कर $78 बिलियन से $140 बिलियन के बीच पहुंच जाएगा, जो कि लोगों के अपनाने के रुझानों पर निर्भर करेगा।
इसके तहत अकेले प्रोटीन सप्लीमेंट मार्केट ही 2024 में लगभग $773 मिलियन का था। उम्मीद है, कि 2033 तक यह बढ़कर लगभग $2 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसमें लगभग 11% की CAGR (सालाना चक्रवृद्धि दर) से बढ़ोतरी होगी। बड़े प्रोटीन न्यूट्रिशन मार्केट की कीमत लगभग $2.5 बिलियन आंकी गई है, और उम्मीद है, कि 2028 तक इसमें सालाना लगभग 14% की बढ़ोतरी होगी।
इस ग्रोथ की वजह शहरी भारत में फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रोटीन की व्यापक कमी है, स्टडीज़ से पता चलता है, कि लगभग 73% भारतीय प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं।
Zomato का एक खास क्लाउड किचन के साथ प्रयोग ऐसे समय में आया है, जब बड़े पैमाने पर रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी के कारण ऑपरेशनल रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है।
यह संकट पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी सप्लाई में रुकावटों के कारण पैदा हुआ है, जिसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रने वाली एनर्जी शिपमेंट्स को प्रभावित किया है, जो LPG आयात के लिए एक अहम ट्रांज़िट रूट है। भारत अपनी LPG ज़रूरतों का लगभग 62% आयात करता है, जिसमें से लगभग 85–90% शिपमेंट्स आमतौर पर खाड़ी देशों से होकर गुज़रती हैं, जिससे देश सप्लाई में रुकावटों के प्रति खास तौर पर संवेदनशील हो जाता है।
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की संस्था NRAI ने चेतावनी दी है, कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई जल्द ही फिर से शुरू नहीं हुई, तो हज़ारों प्रतिष्ठानों को बंद होने का सामना करना पड़ सकता है। बेंगलुरु, पुणे और दिल्ली-NCR जैसे शहरों में कई रेस्टोरेंट ने कमी के कारण पहले ही अपने मेन्यू में कटौती कर दी है, या अस्थायी रूप से अपना काम-काज बंद कर दिया है।
इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में 1,000–1,500 रेस्टोरेंट पहले ही अपना काम-काज बंद कर चुके हैं, जबकि कई अन्य ईंधन बचाने के लिए मेन्यू के विकल्पों में कटौती कर रहे हैं।
इस रुकावट का असर Zomato और Swiggy जैसे फ़ूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म पर भी पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि कम रेस्टोरेंट ही ऑनलाइन ऑर्डर पूरे कर पा रहे हैं। सप्लाई में यह रुकावट ऐसे समय में आई है, जब फ़ूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म दिसंबर तिमाही में ही अपनी ग्रोथ की रफ़्तार फिर से पकड़ना शुरू कर रहे थे। Swiggy ने बताया कि Q3 FY26 में उसकी ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) पिछले साल के मुकाबले 20.5% बढ़कर ₹8,959 करोड़ हो गई, जो लगभग तीन सालों में उसकी सबसे तेज़ ग्रोथ है।
इसी तरह Zomato ने नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में पिछले साल के मुकाबले 16.6% की ग्रोथ दर्ज की, जो बढ़कर ₹9,846 करोड़ हो गई। इसका मतलब है, कि इस तिमाही में GOV में 21.3% की ग्रोथ हुई, जो पिछली तिमाही में दर्ज 13.8% की ग्रोथ से ज़्यादा तेज़ है।
आर्थिक मोर्चे पर Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal ने दिसंबर तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट में पिछले साल के मुकाबले 73% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की, जो बढ़कर ₹102 करोड़ हो गया। वहीं ऑपरेटिंग रेवेन्यू बढ़कर ₹16,315 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण Blinkit का इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल में बदलना था।
हालाँकि LPG सप्लाई में आ रही यह नई रुकावट अब मार्च तिमाही में ऑर्डर की संख्या को कम करने का खतरा पैदा कर रही है। इससे फ़ूड डिलीवरी सेक्टर में रिकवरी की रफ़्तार धीमी हो सकती है, ठीक ऐसे समय में जब कंपनियाँ खास फ़ूड कैटेगरी में ग्रोथ बढ़ाने के लिए Ritual जैसे नए फ़ॉर्मेट के साथ प्रयोग कर रही हैं।