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Zomato ने Healthy Subscriptions नामक नया फीचर लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य यूजर्स को पहले से अपने भोजन की योजना बनाने और हेल्दी डाइट बनाए रखने में मदद करना है। यह फीचर कंपनी के Healthy Mode का हिस्सा है और फिलहाल चुनिंदा शहरों में उपलब्ध है। इसके जरिए यूजर्स पार्टनर रेस्टोरेंट्स से क्यूरेटेड मील प्लान सब्सक्राइब कर सकते हैं और अपने भोजन को पहले से शेड्यूल कर सकते हैं।
Healthy Subscriptions फीचर यूजर्स को लंच और डिनर के लिए पहले से भोजन प्लान करने की सुविधा देता है। अब ग्राहक रोजाना ऑर्डर करने के बजाय तय समय के लिए सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं।
यूजर्स निम्नलिखित अवधि के लिए मील प्लान चुन सकते हैं:
यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो अपनी डाइट को व्यवस्थित और हेल्दी रखना चाहते हैं।
यह सिस्टम बेहद आसान और सुविधाजनक तरीके से डिजाइन किया गया है।
इससे रोजाना ऑर्डर करने की झंझट खत्म हो जाती है।
इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत इसका न्यूट्रिशन आधारित स्कोरिंग सिस्टम है।
Zomato के अनुसार इस सब्सक्रिप्शन में शामिल हर डिश को “High Healthy Score” दिया जाता है, जो इन पैरामीटर्स पर आधारित होता है:
ये स्कोर AI आधारित सिस्टम द्वारा तैयार किए जाते हैं, जो प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट पार्टनर्स से मिले डेटा का विश्लेषण करते हैं।
सब्सक्रिप्शन होने के बावजूद यह सेवा काफी लचीली है।
Zomato ने कुछ ऐसे खास डिशेज भी शामिल किए हैं, जो केवल Healthy Subscriptions में उपलब्ध होंगे। ये डिशेज रेगुलर मेन्यू में नहीं मिलेंगे।
इससे यूजर्स को हेल्दी और खास तौर पर डिजाइन किए गए भोजन विकल्प मिलते हैं।
फिलहाल यह फीचर तीन शहरों में उपलब्ध है:
कंपनी ने कहा है कि आने वाले समय में इसे अन्य शहरों में भी लॉन्च किया जाएगा।
इस फीचर का मुख्य उद्देश्य लोगों को हेल्दी खाने की ओर प्रेरित करना और उनके दैनिक जीवन को आसान बनाना है।
Zomato का लक्ष्य है:
इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका है। AI डिशेज के न्यूट्रिशन डेटा का विश्लेषण करके हेल्थ स्कोर तय करता है।
इससे:
यह फीचर फूड डिलीवरी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अब कंपनियां सिर्फ ऑन-डिमांड डिलीवरी तक सीमित नहीं रहकर प्लान्ड मील और हेल्थ-फोकस्ड सर्विसेज की ओर बढ़ रही हैं।
इससे:
निष्कर्ष:
Zomato का Healthy Subscriptions फीचर हेल्दी ईटिंग और फूड टेक्नोलॉजी का एक नया संयोजन है। यह न केवल यूजर्स को सुविधाजनक भोजन योजना देता है, बल्कि उन्हें बेहतर और संतुलित जीवनशैली अपनाने में भी मदद करता है।
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देश की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने एक बार फिर अपने 'प्लेटफॉर्म फीस' में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने हर ऑर्डर पर ली जाने वाली इस फीस को ₹12.50 से बढ़ाकर ₹14.90 कर दिया है। यानी अब आपको हर बार खाना मंगाने पर ₹2.40 अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह ध्यान देने वाली बात है, कि यह कीमत 'प्री-जीएसटी' (Pre-GST) है, जिसका मतलब है, कि टैक्स जुड़ने के बाद यह राशि और भी बढ़ जाएगी। सितंबर 2025 में हुई पिछली बढ़ोतरी के बाद यह कुछ ही महीनों के भीतर फीस में किया गया एक और बड़ा इजाफा है।
बता दें कि इस बढ़ोतरी के साथ 19.2% महंगी हुई है प्लेटफॉर्म फीस। प्लेटफॉर्म फीस वह चार्ज होता है, जो कंपनी ऐप के रखरखाव और अपनी सेवाओं को जारी रखने के लिए ग्राहकों से वसूलती है। यह चार्ज खाने की कीमत, जीएसटी और डिलीवरी पार्टनर फीस से अलग होता है।
दिलचस्प बात यह है, कि जोमैटो की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनी Swiggy भी इसी राह पर चल रही है। स्विगी फिलहाल टैक्स के साथ लगभग ₹14.99 का प्लेटफॉर्म शुल्क वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है, कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपनी कीमतें उसी स्तर पर ले आती है। प्लेटफॉर्म शुल्क वह चार्ज होता है, जो रेस्टोरेंट के बिल और डिलीवरी पार्टनर की फीस के अलावा लिया जाता है। कंपनियां इसका इस्तेमाल अपने ऐप के रखरखाव, टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने और डिलीवरी नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के नाम पर करती हैं। हालांकि ग्राहकों के लिए यह किसी 'साइलेंट टैक्स' से कम नहीं है, क्योंकि छोटे ऑर्डर्स पर यह फीस बिल का एक बड़ा हिस्सा बन जाती है।
जोमैटो द्वारा प्लेटफॉर्म फीस में की गई मामूली दिखने वाली ₹2.40 की बढ़ोतरी असल में कंपनी के लिए 'करोड़ों का खेल' है। अगर जोमैटो के रोजाना के औसतन 20 से 25 लाख ऑर्डर्स देखते हैं, तो यह आंकड़ा हैरान कर देने वाला है। हर रोज ₹2.40 एक्स्ट्रा वसूलने का मतलब है, कि कंपनी हर रोज ₹40 लाख से ₹50 लाख की अतिरिक्त कमाई कर रही है। यह वह पैसा है, जो सीधे कंपनी के मुनाफे में जुड़ता है, क्योंकि इसके लिए उसे कोई अलग से सर्विस नहीं देनी पड़ रही।
अगर इसी कैलकुलेशन को मासिक आधार पर देखें, तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो जाता है। महीने के 30 दिनों के हिसाब से जोमैटो केवल इस ₹2 की बढ़ोतरी से हर महीने ₹12 करोड़ से ₹15 करोड़ का एक्स्ट्रा रेवेन्यू इकट्ठा कर रही है। साल भर में यह रकम ₹144 करोड़ से ₹180 करोड़ तक पहुंच सकती है।
लगातार बढ़ती इस फीस के कारण अब घर बैठे खाना मंगाना एक लग्जरी बनता जा रहा है। एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से रेस्टोरेंट्स अपने खाने के दाम बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डिलीवरी ऐप्स के ये 'एक्स्ट्रा चार्जेस' आम आदमी के बजट को बिगाड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है, कि जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियां अब डिस्काउंट देने के बजाय अपनी कमाई के नए जरिए ढूंढ रही हैं। जो ग्राहक रोजाना या अक्सर बाहर से खाना मंगाते हैं, उनके लिए महीने का कुल खर्च अब काफी ज्यादा बढ़ जाएगा।
जोमैटो ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म फीस में 2.40 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिससे यह प्रति ऑर्डर 12.50 रुपये से बढ़कर 14.90 रुपये हो गया है। इस बीच इटरनल का शेयर 2.80 रुपये या 1.22 प्रतिशत बढ़ा। यह 231.70 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में शेयर 5.65 प्रतिशत या 13.70 रुपये गिरकर 228.90 रुपये पर बंद हुआ था। शेयर ने 16 अक्टूबर 2025 को 368.40 रुपये का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर और 7 अप्रैल 2025 को 189.60 रुपये का 52-सप्ताह का न्यूनतम स्तर छुआ। फिलहाल शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 37.11 प्रतिशत नीचे और अपने 52-सप्ताह के न्यूनतम स्तर से 22.2 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा है। बाजार कैप 223,598.62 करोड़ रुपये है।