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भारत की प्रमुख आईटी सेवा कंपनी Wipro ने ₹15,000 करोड़ के विशाल शेयर बायबैक की घोषणा की है, जो कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बायबैक प्रस्ताव है। कंपनी ने ₹250 प्रति शेयर के भाव पर शेयर वापस खरीदने का प्रस्ताव रखा है, जो मौजूदा बाजार कीमत की तुलना में प्रीमियम पर है। यह घोषणा कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ आई है और शेयरधारकों को वैल्यू बढ़ाने की रणनीति को दर्शाती है।
विप्रो के निदेशक मंडल ने यह बायबैक प्रस्ताव 16 अप्रैल को हुई बैठक में मंजूर किया। आईटी कंपनी अधिकतम 60 करोड़ इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी, जिनका फेस वैल्यू ₹2 प्रति शेयर है।
यह बायबैक कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा कार्यक्रम है, जो मजबूत नकदी स्थिति और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कंपनी ने बायबैक के लिए ₹250 प्रति शेयर का मूल्य तय किया है, जो उस दिन के बंद भाव ₹210 की तुलना में लगभग 19% अधिक है।
यह प्रीमियम निवेशकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है। बायबैक टेंडर ऑफर प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिसमें पात्र शेयरधारक अपने शेयर तय कीमत पर बेच सकेंगे।
हालांकि यह प्रस्ताव अभी शेयरधारकों की मंजूरी (पोस्टल बैलेट) के अधीन है।
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार:
कंपनी शेयरधारकों की मंजूरी के बाद रिकॉर्ड डेट की घोषणा करेगी।
विप्रो ने पहले भी कई बार शेयर बायबैक किए हैं और शेयरधारकों को मूल्य लौटाया है:
नया प्रस्ताव अब तक का सबसे बड़ा बायबैक है।
बायबैक के साथ कंपनी ने जनवरी–मार्च तिमाही के नतीजे भी जारी किए।
विप्रो का शुद्ध लाभ ₹3,502 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹3,570 करोड़ की तुलना में 2% कम है।
हालांकि तिमाही आधार पर लाभ 12% बढ़कर ₹3,502 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही के ₹3,119 करोड़ से अधिक है।
कंपनी की मुख्य आईटी सेवाओं से राजस्व ₹24,236 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8% अधिक है।
यह वृद्धि आईटी सेवाओं की स्थिर मांग और वैश्विक बाजार में कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।
विप्रो का शेयर गुरुवार को ₹210.26 पर 0.24% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
शेयर का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
52 सप्ताह का उच्च स्तर ₹273.10 (22 दिसंबर 2025) और निम्न स्तर ₹186.50 (30 मार्च 2026) रहा।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹2.2 लाख करोड़ से अधिक है।
बायबैक को आमतौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है, कि कंपनी अपने शेयर को अंडरवैल्यू मानती है।
इससे शेयरधारकों को नकदी प्राप्ति का अवसर मिलता है, और बचे हुए शेयरों की प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार हो सकता है।
यह बायबैक ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक आईटी सेक्टर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
कंपनी का उद्देश्य है:
निष्कर्ष:
विप्रो का ₹15,000 करोड़ का बायबैक कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा कदम है। यह न केवल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर है, बल्कि कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को भी दर्शाता है। मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव बाजार में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
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दिग्गज आईटी कंपनी Wipro 1 मार्च से अपने सभी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा रही है, जिससे उनके कर्मचारियों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी, क्योंकि सितंबर में सैलरी बढ़ाने में देरी हुई थी, कंपनी के एक इंटरनल ईमेल के अनुसार इस बात की जानकारी सामने आई है, हालांकि बढ़ोतरी का परसेंटेज तुरंत नहीं बताया गया, टैरिफ वॉर और जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के कारण अनिश्चित बिजनेस हालात के बाद भारतीय IT सर्विस कंपनियां इस फाइनेंशियल ईयर में सैलरी बढ़ाने और सैलरी के अलग-अलग हिस्सों का पेमेंट करने में सावधान रही हैं।
TCS ने अप्रैल से सितंबर तक बढ़ोतरी टाल दी, और ज्यादातर कर्मचारियों को 4.5 से 7 फीसदी के बीच बढ़ोतरी दी, अगस्त में देरी करने के बाद कॉग्निजेंट ने आखिरकार नवंबर से सैलरी बढ़ा दी।
विप्रो बड़ी IT कंपनियों में सबसे आखिर में सैलरी बढ़ाने वाली कंपनी है, कंपनी ने कहा कि वह बिजनेस के माहौल के हिसाब से फैसला लेगी, जनवरी में चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर सौरभ गोविल Saurabh Govil ने कहा था, कि वे जल्द ही इस पर फैसला लेने वाले हैं।
विप्रो ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तीसरी तिमाही के लिए 100 परसेंट तिमाही वेरिएबल पे भी दिया है, जो कर्मचारियों को फरवरी की सैलरी के साथ दिया जाएगा, हालांकि सैलरी बढ़ाने में देरी हुई, लेकिन कंपनी वेरिएबल पेमेंट में दिल खोलकर काम कर रही है, पहली दो तिमाहियों में भी इसने सभी कर्मचारियों को 90 परसेंट से ज्यादा पेमेंट किया।
विप्रो लिमिटेड ने फिस्कल ईयर की तीसरी तिमाही में प्रॉफिट में गिरावट की रिपोर्ट दी है, जिसमें कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में लगातार और साल-दर-साल आधार पर गिरावट आई है, जबकि IT सर्विस देने वाली बड़ी कंपनी ने मामूली रेवेन्यू ग्रोथ दी और इंटरिम डिविडेंड की घोषणा की।
कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही के लिए 3,119 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पोस्ट किया, जो तिमाही-दर-तिमाही 4 फीसदी और साल-दर-साल 7 फीसदी कम है़, कंपनी ने कहा कि कमाई पर कॉस्ट प्रेशर का असर पड़ा, जिसमें लेबर कोड से जुड़े एडजस्टमेंट से जुड़े खर्च भी शामिल हैं।
लेबर कोड में बदलाव के असर को एडजस्ट करने के बाद तिमाही के लिए नेट इनकम 3,360 करोड़ रुपये थी, QoQ में 3.6 फीसदी और YoY में 0.3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई।
विप्रो लिमिटेड एक लीडिंग AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी सर्विस और कंसल्टिंग कंपनी है, जो क्लाइंट्स की सबसे मुश्किल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ज़रूरतों को पूरा करने वाले इनोवेटिव सॉल्यूशन बनाने पर फोकस करती है। हमारे कंसल्टिंग-लेड अप्रोच और AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म, सॉल्यूशन और ट्रांसफॉर्मेटिव ऑफरिंग के विप्रो इंटेलिजेंस™ यूनिफाइड सूट का इस्तेमाल करके हम क्लाइंट्स को इंटेलिजेंट और सस्टेनेबल बिज़नेस बनाने के उनके सबसे बड़े सपनों को पूरा करने में मदद करते हैं। विप्रो इनोवेशन नेटवर्क – विप्रो इंटेलिजेंस™ का हिस्सा – इनोवेशन लैब्स और पार्टनर लैब्स, एकेडेमिया और ग्लोबल टेक कम्युनिटीज़ की क्षमताओं को एक साथ लाकर क्लाइंट-सेंट्रिक को-इनोवेशन और को-क्रिएशन के लिए हमारे कमिटमेंट को सपोर्ट करता है। 65 देशों में 230,000 से ज़्यादा एम्प्लॉई और बिज़नेस पार्टनर के साथ हम अपने कस्टमर्स, कलीग्स और कम्युनिटीज़ को हमेशा बदलती दुनिया में आगे बढ़ने में मदद करने का वादा पूरा करते हैं।