रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) कंपनी की वित्तीय स्थिति को अधिक लचीला बनाने में मदद कर सकता है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ रेटिंग्स के अनुसार, इस आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और ब्याज से जुड़े खर्चों को कम करने में किया जाएगा। इससे रिलायंस को भविष्य में दूरसंचार नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और नई तकनीकों में निवेश करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिलेगी। Moody’s ने इस कदम को कंपनी की साख के लिहाज से सकारात्मक बताया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स Jio Platforms में 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी ने बुधवार को अपना आईपीओ पेश किया, जिसके जरिए ऊपरी मूल्य सीमा पर लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। आईपीओ के लिए प्रति शेयर मूल्य दायरा 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया गया है। यह पूरा निर्गम नए शेयर जारी करके लाया जा रहा है और इसके लिए आवेदन की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर है।
CreditSights के अनुसार, Jio Platforms इस आईपीओ से प्राप्त राशि में से 27,500 करोड़ रुपये तक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली दूरसंचार सहायक कंपनी Reliance Jio Infocomm Ltd का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल कर सकती है। शेष राशि का उपयोग कारोबार के विस्तार, पूंजीगत खर्च और दैनिक परिचालन के लिए जरूरी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।
मूडीज़ रेटिंग्स Moody’s Ratings के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स Jio Platforms का आईपीओ रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए साख के लिहाज से सकारात्मक कदम है। इससे कंपनी को कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी और उस पर ब्याज तथा कर्ज से जुड़े अन्य खर्चों का बोझ कम हो सकता है।
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि कर्ज का बोझ घटने से रिलायंस के पास दूरसंचार नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में निवेश करने के लिए अधिक धन उपलब्ध हो सकेगा। कंपनी को इन क्षेत्रों में विस्तार करने के लिए अपनी उधारी बढ़ाने पर पहले की तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
आईपीओ के बाद Jio Platforms के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों से धन जुटाने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे कंपनी को भविष्य में निवेश, दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण और रणनीतिक साझेदारियों के लिए वित्तीय संसाधन हासिल करने में मदद मिलेगी।
Moody’s के अनुसार, शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से Jio Platforms की वित्तीय स्थिति और कारोबार के मूल्यांकन को समझना भी आसान होगा। इससे निवेशकों को कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
Moody’s के मुताबिक, मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान Jio Platforms ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के कुल समेकित EBITDA में लगभग 37 प्रतिशत योगदान दिया। EBITDA का अर्थ ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई है। यह किसी कंपनी के परिचालन प्रदर्शन को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रमुख वित्तीय मापदंड है।
इस योगदान से पता चलता है कि रिलायंस के कारोबार में डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ा है। आईपीओ के बाद भी रिलायंस Jio पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगी, हालांकि नए शेयर जारी होने के कारण उसकी हिस्सेदारी का प्रतिशत कम हो जाएगा।
Moody’s का अनुमान है कि अगले दो वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज का समायोजित शुद्ध कर्ज-से-EBITDA अनुपात लगभग 1.0 से 1.2 गुना के बीच रह सकता है। यह स्तर एजेंसी की 3.0 गुना की उस सीमा से काफी नीचे है, जिसके पार जाने पर कंपनी की क्रेडिट रेटिंग घटाने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, Moody’s ने स्पष्ट किया कि आईपीओ का सबसे बड़ा लाभ कंपनी को मिलने वाली अतिरिक्त वित्तीय स्वतंत्रता है। अगले 12 महीनों में इससे कंपनी के कर्ज अनुपात या नकदी की उपलब्धता में बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
Moody’s के अनुसार, 31 मार्च तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास नकदी, नकदी समकक्ष और चालू निवेश के रूप में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये थे। इसके मुकाबले कंपनी की रिपोर्ट की गई चालू उधारी, जिसमें लीज से जुड़ी देनदारियां भी शामिल थीं, लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये थी।
इसके बावजूद, कंपनी का पूंजीगत खर्च अगले दो वर्षों तक ऊंचा रहने का अनुमान है। Moody’s के अनुसार, रिलायंस का समेकित पूंजीगत खर्च सालाना लगभग 15 अरब अमेरिकी डॉलर रह सकता है। इसमें ऊर्जा, दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं और अन्य कारोबारी क्षेत्रों में निवेश शामिल हो सकता है।
CreditSights ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर अपनी “Market Perform” सिफारिश बरकरार रखी है। इसका अर्थ है कि फर्म फिलहाल कंपनी के प्रदर्शन को बाजार के अनुरूप मानती है। हालांकि, उसने रिलायंस के 2045 में परिपक्व होने वाले बॉन्ड को आकर्षक नहीं बताया। इसके पीछे मुख्य वजह बॉन्ड का अपेक्षाकृत महंगा मूल्यांकन है।
फर्म के अनुमान के अनुसार, आईपीओ से रिलायंस का अनुमानित शुद्ध कर्ज अनुपात लगभग 0.2 प्रतिशत अंक सुधर सकता है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत में यह अनुपात 2.1 गुना था।
CreditSights ने Jio के लगभग 70,800 करोड़ रुपये के कुल कर्ज और करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये के स्थगित स्पेक्ट्रम भुगतान का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े बताते हैं कि आईपीओ से प्राप्त धन का उपयोग कर्ज चुकाने में करना कंपनी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।
Jio Platforms के सामने भविष्य में कारोबार बढ़ाने के कई अवसर हैं। इनमें अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क, घरों के लिए ब्रॉडबैंड, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड, कंपनियों के लिए डेटा समाधान और उद्यमों में AI आधारित सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी डिजिटल वाणिज्य और अन्य तकनीक-आधारित सेवाओं में भी अपनी उपस्थिति बढ़ा सकती है।
Jio पहले से ही ब्रॉडबैंड, डिजिटल मनोरंजन, संगीत स्ट्रीमिंग और क्लाउड स्टोरेज जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग कंपनी के लिए नए राजस्व स्रोत तैयार कर सकती है।
CreditSights के अनुमान के अनुसार, आईपीओ के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास Jio Platforms की लगभग 64.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रह सकती है। इस तरह कंपनी को शेयर बाजार से पूंजी जुटाने का अवसर मिलेगा, जबकि Jio पर उसका रणनीतिक नियंत्रण भी बना रहेगा।
Jio में निवेश करने वाली मौजूदा अल्पांश हिस्सेदार कंपनियों Meta और Google की हिस्सेदारी का प्रतिशत भी नए शेयर जारी होने से कम हो जाएगा। हालांकि, उनकी वास्तविक हिस्सेदारी में कितना बदलाव होगा, यह आईपीओ के बाद शेयरों के कुल ढांचे पर निर्भर करेगा।
Jio Platforms के आईपीओ को बड़े संस्थागत निवेशकों से अच्छी शुरुआती प्रतिक्रिया मिली है। सोमवार को कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर लगभग 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए। रिपोर्ट के अनुसार, इस आवंटन के लिए निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही।
एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं। उनकी भागीदारी से आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की शुरुआती दिलचस्पी का संकेत मिलता है। हालांकि, केवल एंकर निवेशकों की मांग के आधार पर सूचीबद्ध होने के बाद शेयर के प्रदर्शन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
Jio के पास 52.4 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने विशाल ग्राहक आधार का इस्तेमाल अधिक लाभ देने वाली सेवाओं से कमाई बढ़ाने में किस तरह करती है।
उद्यमों के लिए तकनीकी समाधान, क्लाउड सेवाएं और AI आधारित उत्पाद भविष्य में कंपनी के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकते हैं। रिलायंस के लिए आईपीओ एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए वह अपने बड़े निवेश कार्यक्रम के एक हिस्से को कर्ज के बजाय इक्विटी पूंजी से पूरा कर सकती है।
Moody’s का कहना है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से Jio Platforms के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और उसके कारोबार का बाजार मूल्य अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगा। आईपीओ के बाद भी Jio रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कारोबार बना रहेगा।