नेस्ले इंडिया ने अपने शिशु पोषण उत्पाद Lactogen Pro 1 की पैकेजिंग पर किए गए एक दावे को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को विस्तृत जवाब सौंपा है। यह मामला उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन (Whey Protein) के आसानी से पचने संबंधी दावे से जुड़ा है। खाद्य नियामक ने कंपनी से इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था।
नेस्ले इंडिया Nestlé India के एक प्रवक्ता ने बताया कि FSSAI की हालिया पोस्ट में उत्पादों के लेबल से संबंधित वही मुद्दे दोहराए गए हैं, जिनका उल्लेख नियामक ने 18 सितंबर को अपनी पिछली पोस्ट में किया था। प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी इस मामले में अपना विस्तृत जवाब पहले ही नियामक को सौंप चुकी है।
यह मामला शिशु पोषण उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार में किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों की जांच से जुड़ा है। खाद्य नियामक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऐसे उत्पादों के बारे में किए जाने वाले दावे उचित वैज्ञानिक आधार पर टिके हों और उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद के गुणों के बारे में भ्रामक जानकारी न मिले।
FSSAI ने अपने हालिया नोटिस में नेस्ले इंडिया Nestlé India से Lactogen Pro 1 की पैकेजिंग पर किए गए उस दावे का आधार स्पष्ट करने को कहा, जिसमें बताया गया है कि उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन दूध के प्रोटीन का हिस्सा है और इसे आसानी से पचाया जा सकता है।
नियामक के अनुसार, यह दावा उत्पाद की पैकेजिंग और विज्ञापन सामग्री में देखा गया था। इसलिए संबंधित खाद्य कारोबार संचालक को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज और दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण जमा करने का निर्देश दिया गया।
व्हे प्रोटीन दूध में पाए जाने वाले प्रमुख प्रोटीनों में से एक है। खाद्य उत्पादों में इसका इस्तेमाल पोषण संबंधी विशेषताओं के लिए किया जाता है। हालांकि, किसी उत्पाद में किसी विशेष प्रोटीन की मौजूदगी और उसके पाचन से जुड़े दावे को अलग-अलग समझना जरूरी है।
यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद की पैकेजिंग या विज्ञापन में यह बताती है कि कोई घटक आसानी से पचता है, तो नियामक उस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक आधार मांग सकता है। इस मामले में FSSAI ने लैक्टोजेन प्रो 1 के लेबल पर लिखे दावे को लेकर यही प्रक्रिया अपनाई है।
नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक, कंपनी ने FSSAI की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अपना विस्तृत जवाब पहले ही प्रस्तुत कर दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कंपनी द्वारा नियामक को सौंपे गए दस्तावेजों की पूरी सामग्री या वैज्ञानिक प्रमाणों का विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि नियामक ने कंपनी के जवाब को स्वीकार कर लिया है या मामले में अंतिम निर्णय हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी ने अपना पक्ष रखा है और नियामक की जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
लैक्टोजेन प्रो 1 से जुड़ा यह मामला शिशु पोषण उत्पादों के प्रचार और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर FSSAI की व्यापक कार्रवाई के बीच सामने आया है। नियामक ने इससे पहले भी खाद्य निर्माताओं और अन्य संबंधित पक्षों को ऐसे दावों के संबंध में नोटिस जारी किए थे, जिनके भ्रामक होने या नियमों के अनुरूप न होने की आशंका जताई गई थी।
इन मामलों में पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े दावों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों पर शिशुओं के लिए दूध के विकल्पों के प्रचार का मुद्दा भी शामिल था।
FSSAI ने कुछ शिशु पोषण उत्पादों में मौजूद घटकों के बारे में किए गए उन दावों पर भी सवाल उठाए थे, जिनमें कहा गया था कि वे शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।
नियामक ने ऐसे बयानों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे। इसके अतिरिक्त, व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने से जुड़े दावों की भी जांच की गई।
शिशु पोषण उत्पादों से संबंधित प्रचार में संतुलित पोषण, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क के विकास जैसे लाभों का उल्लेख किया जा सकता है। लेकिन ऐसे दावों के लिए उचित आधार और लागू नियमों का पालन जरूरी है। नियामक की चिंता यह सुनिश्चित करना है कि माता-पिता और अन्य उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में ऐसी जानकारी न मिले, जो उपलब्ध प्रमाणों से समर्थित न हो।
FSSAI ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर शिशुओं के लिए दूध के विकल्पों के प्रचार को लेकर भी चिंता जताई थी। ऐसे प्रचार में कुछ उत्पादों को विशेष पोषण लाभों से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने पर सवाल उठाए गए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री भी लागू नियमों के दायरे में आ सकती है। इसलिए कंपनियों और प्रचार से जुड़े अन्य पक्षों को उत्पाद संबंधी दावों तथा विज्ञापन सामग्री की समीक्षा करते समय संबंधित कानूनों और नियमों का ध्यान रखना होता है।
FSSAI ने संकेत दिया कि कुछ प्रचार सामग्री शिशु दुग्ध विकल्प अधिनियम, 1992, जिसमें 2003 में संशोधन किया गया था, और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती है।
इन कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य शिशुओं के लिए दूध के विकल्पों और संबंधित पोषण उत्पादों के प्रचार तथा प्रस्तुति को नियंत्रित करना है। इन नियमों के तहत उत्पादों से जुड़े दावों और प्रचार सामग्री की प्रकृति महत्वपूर्ण हो सकती है।
FSSAI ने संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण और दावों के समर्थन में जरूरी प्रमाण मांगे हैं। आगे की कार्रवाई इन जवाबों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद तय की जा सकती है।
इसका अर्थ है कि नोटिस जारी होना अपने आप में अंतिम दोष निर्धारण या दंड की घोषणा नहीं है। नियामक को संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध प्रमाण देखने के बाद लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेना होगा।
Nestlé India और FSSAI के बीच Lactogen Pro 1 की लेबलिंग को लेकर उठा मुद्दा शिशु पोषण उत्पादों पर किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों के वैज्ञानिक आधार और नियामकीय अनुपालन के महत्व को सामने लाता है। कंपनी का कहना है कि उसने अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर दिया है, जबकि नियामक ने दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे थे।
इस मामले में आगे का घटनाक्रम FSSAI की समीक्षा और संबंधित दस्तावेजों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अंतिम नियामकीय निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।