भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 5 अक्टूबर को निवेशकों को Finfluencers, गुमनाम निवेश सलाह और बहुत अधिक रिटर्न का दावा करने वाले लोगों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत में शेयर बाजार और अन्य पूंजी बाजारों में आम लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए सही जानकारी हासिल करना और सोच-समझकर निवेश करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
पांडे ने यह बात चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में SEBI के Project Jagrook की शुरुआत के दौरान कही। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे निवेश के लिए केवल ऐसे वित्तीय उत्पाद, माध्यम और संस्थाओं का इस्तेमाल करें, जो नियामकीय व्यवस्था के तहत आते हैं। इससे निवेश धोखाधड़ी और गलत सलाह के जोखिम को कम किया जा सकता है।
SEBI प्रमुख ने यह भी कहा कि लोगों को उन्हीं वित्तीय उत्पादों में पैसा लगाना चाहिए, जिन्हें वे अच्छी तरह समझते हों। इसके साथ निवेश में विविधता यानी अलग-अलग जगहों पर पैसा लगाना, जल्दी निवेश शुरू करना और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey ने निवेशकों को एक महत्वपूर्ण बात से सावधान किया कि केवल इसलिए किसी निवेश में पैसा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि दूसरे लोग उसमें निवेश कर रहे हैं।
आज सोशल मीडिया और इंटरनेट पर निवेश से जुड़ी सलाह आसानी से उपलब्ध है। कई Finfluencers शेयर, म्यूचुअल फंड या दूसरे वित्तीय उत्पादों को लेकर अपने विचार और सुझाव देते हैं। कुछ मामलों में निवेशकों को बहुत कम समय में बहुत अधिक रिटर्न मिलने का दावा भी किया जाता है।
पांडे ने ऐसे दावों पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचने की सलाह दी। निवेशकों को किसी भी सिफारिश के आधार पर पैसा लगाने से पहले यह समझना चाहिए कि निवेश किस तरह काम करता है, उसमें कितना जोखिम है और संभावित नुकसान कितना हो सकता है।
गुमनाम निवेश टिप्स से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसकी निवेश सलाह सही या सुरक्षित है।
तुहिन कांत पांडे ने अपने संबोधन में SEBI के एक सर्वे के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। सर्वे से पता चलता है कि भारत में प्रतिभूति बाजार से जुड़े उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन वास्तविक भागीदारी अभी भी काफी कम है।
सर्वे के अनुसार करीब 63% परिवार प्रतिभूति बाजार के कम से कम एक उत्पाद के बारे में जानते हैं। हालांकि, इनमें से केवल 9.5% परिवार ही वास्तव में बाजार में भाग लेते हैं।
यह अंतर बताता है कि बाजार के बारे में जानकारी होना और निवेश के लिए पर्याप्त ज्ञान होना दो अलग-अलग बातें हैं।
SEBI के आंकड़ों के अनुसार केवल 36% निवेशकों के पास प्रतिभूति बाजार की उच्च या मध्यम स्तर की जानकारी है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक भी हैं, जो बाजार में पैसा लगा रहे हैं लेकिन वित्तीय उत्पादों और उनसे जुड़े जोखिमों को पूरी तरह नहीं समझते।
यही कारण है कि SEBI निवेशक शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
SEBI के सर्वे में निवेश को लेकर शहरी और ग्रामीण भारत के बीच अंतर भी सामने आया है।
आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में प्रतिभूति बाजार में भागीदारी करीब 15% है, जबकि ग्रामीण भारत में यह लगभग 6% है।
यह अंतर बताता है कि वित्तीय जानकारी और निवेश के अवसरों को देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि निवेशक वित्तीय उत्पादों की जानकारी हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में हासिल करना अधिक पसंद करते हैं। ऐसे में स्थानीय भाषाओं में सरल और भरोसेमंद वित्तीय शिक्षा उपलब्ध कराना निवेशकों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
SEBI ने निवेशकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए Project Jagrook शुरू किया है। इसका उद्देश्य निवेश से जुड़े सही ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाना और लोगों को सुरक्षित तथा समझदारी से निवेश करने के लिए तैयार करना है।
Project Jagrook के तहत SEBI के साथ स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, National Institute of Securities Markets (NISM) और अन्य संबंधित संस्थाओं को एक साझा निवेशक-शिक्षा व्यवस्था के तहत जोड़ा जाएगा।
इस पहल के जरिए निवेशकों को वित्तीय उत्पादों, बाजार के जोखिम, धोखाधड़ी से बचाव और सही निवेश व्यवहार के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया जाएगा।
SEBI ने विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच प्रतिभूति बाजार से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए MUST नाम का एक कार्यक्रम भी घोषित किया है।
इसका उद्देश्य युवा वर्ग को निवेश और वित्तीय बाजारों की बुनियादी जानकारी देना है, ताकि वे भविष्य में निवेश से जुड़े फैसले अधिक समझदारी से ले सकें।
युवा निवेशकों की संख्या बढ़ने के साथ वित्तीय शिक्षा का महत्व भी बढ़ रहा है। कम उम्र में सही जानकारी मिलने से निवेशक जोखिम, रिटर्न और लंबे समय की वित्तीय योजना को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
पिछले एक दशक में भारत के पूंजी बाजार का आकार काफी बढ़ा है। इस विस्तार का अंदाजा कई महत्वपूर्ण आंकड़ों से लगाया जा सकता है।
देश में Demat खातों की संख्या बढ़कर 23.8 करोड़ हो गई है। वहीं, अलग-अलग निवेशकों की संख्या करीब 15 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
बाजार पूंजीकरण भी वित्त वर्ष 2015-16 के करीब 95 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 472 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की संपत्ति करीब 22 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 78 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
इसी तरह, म्यूचुअल फंड की प्रबंधनाधीन संपत्ति यानी AUM भी लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 87 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में निवेश और पूंजी बाजार की पहुंच पहले की तुलना में काफी व्यापक हुई है।
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का मुख्य संदेश यही है कि केवल लोगों का बाजार से जुड़ना पर्याप्त नहीं है। निवेशकों को यह भी पता होना चाहिए कि वे किस उत्पाद में पैसा लगा रहे हैं और उससे जुड़े जोखिम क्या हैं।
Finfluencers, गुमनाम टिप्स और असामान्य रूप से ज्यादा रिटर्न के वादे निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में सावधानी बेहद जरूरी है। निवेशकों को केवल नियामकीय व्यवस्था के तहत आने वाले माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी भी निवेश निर्णय से पहले पर्याप्त जानकारी हासिल करनी चाहिए।
भारत में पूंजी बाजार का विस्तार आगे भी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में निवेशक शिक्षा, वित्तीय जागरूकता और सही जानकारी यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि बाजार में बढ़ती भागीदारी सुरक्षित और समझदारीपूर्ण निवेश में बदल सके।