भारत में डिजिटल डेटा सुरक्षा कानून Digital Personal Data Protection (DPDP) Act को लागू करने की तैयारी के बीच WhatsApp ने एक नया वैकल्पिक (Optional) Age Verification फीचर टेस्ट करना शुरू कर दिया है। इस फीचर का उद्देश्य प्लेटफॉर्म को भविष्य में लागू होने वाले नियमों के अनुरूप तैयार करना है, खासकर बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।
Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक परीक्षण (Pilot Test) है और इसमें भाग लेना पूरी तरह यूज़र की इच्छा पर निर्भर है। ऐप का उपयोग जारी रखने के लिए किसी भी यूज़र को अपनी जन्मतिथि बताना या उम्र सत्यापित करना अनिवार्य नहीं होगा। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस टेस्ट के दौरान एकत्र की गई उम्र संबंधी जानकारी पूरी तरह निजी रहेगी और किसी अन्य यूज़र को दिखाई नहीं देगी।
WhatsApp द्वारा Age Verification प्रक्रिया शुरू करने का मुख्य कारण भारत में तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल डेटा गोपनीयता (Data Privacy) नियम हैं। Digital Personal Data Protection (DPDP) Act देश में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के सुरक्षित उपयोग और नागरिकों की गोपनीयता की रक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार करता है।
WhatsApp के अनुसार, कंपनी इस समय ऐसे तरीकों का परीक्षण कर रही है जिनसे यूज़र्स की गोपनीयता से समझौता किए बिना उनकी उम्र की पुष्टि की जा सके। इससे भविष्य में नए नियम लागू होने पर कंपनी उनके अनुरूप आसानी से काम कर सकेगी।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फीचर के आने से WhatsApp के सामान्य उपयोग या यूज़र एक्सपीरियंस में कोई बदलाव नहीं होगा।
हाल ही में कई यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर ऐसे स्क्रीनशॉट साझा किए, जिनमें WhatsApp उनसे जन्मतिथि दर्ज करने के लिए कह रहा था। संदेश में यह भी लिखा था कि भारत के आगामी कानूनों के तहत प्लेटफॉर्म को उम्र से जुड़ी जानकारी एकत्र करनी होगी। इसके बाद Age Verification को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
Digital Personal Data Protection Act का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य इंटरनेट पर बच्चों की गोपनीयता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करना है।
इस कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के सभी व्यक्तियों को "बच्चा" माना जाएगा। जब इस कानून के संबंधित प्रावधान पूरी तरह लागू हो जाएंगे, तब किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को बच्चे का व्यक्तिगत डेटा प्रोसेस करने से पहले उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सत्यापित अनुमति (Verifiable Parental Consent) लेना अनिवार्य होगा।
कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि कंपनियां ऐसी मजबूत तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था अपनाएं, जिससे यह पुष्टि की जा सके कि अभिभावक की अनुमति वास्तविक और सही है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य बच्चों के लिए इंटरनेट को अधिक सुरक्षित बनाना और उनके व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकना है।
DPDP Act के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए कई नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
इन नियमों के अनुसार कोई भी प्लेटफॉर्म बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करके उनका Behavioural Profiling नहीं कर सकेगा और न ही उनके व्यवहार के आधार पर उन्हें Targeted Advertisements दिखा सकेगा।
इसके अलावा कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल न हों, जिससे बच्चों को नुकसान पहुंचे या उनके व्यक्तिगत डेटा का गलत उपयोग हो।
यदि कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में काम करने वाली बड़ी टेक कंपनियां अभी से इन नियमों के पालन की तैयारी में जुट गई हैं।
हालांकि Verifiable Parental Consent से जुड़े विस्तृत नियम मई 2027 से लागू होने की संभावना है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश टेक कंपनियां अभी से अपनी तैयारी शुरू कर चुकी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कंपनियां पहले से उम्र संबंधी जानकारी एकत्र करना और अपनी तकनीकी प्रणाली का परीक्षण शुरू कर देंगी, तो उन्हें कानून लागू होने से पहले अपने Compliance सिस्टम को विकसित, जांचने और बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
WhatsApp का यह पायलट प्रोजेक्ट भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि Age Verification केवल एक पहलू है। सरकार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर यूज़र की पहचान, गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े अन्य फीचर्स की भी समीक्षा कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि Username जैसे नए फीचर्स भविष्य में पहचान छिपाने, फर्जी प्रोफाइल बनाने, धोखाधड़ी और साइबर अपराध जैसी चुनौतियां बढ़ा सकते हैं।
सरकार फिलहाल उद्योग से प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर रही है। इसके बाद विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर लागू होने वाले समान सुरक्षा मानकों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
WhatsApp केवल आयु सत्यापन (Age Verification) फीचर को लेकर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि इसके प्रस्तावित Username फीचर को लेकर भी सरकार की ओर से गहन समीक्षा की जा रही है।
इस फीचर के तहत यूज़र्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए केवल यूज़रनेम के माध्यम से एक-दूसरे से बातचीत कर सकेंगे। इसका उद्देश्य यूज़र्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है, लेकिन सरकार को इससे जुड़े कुछ सुरक्षा संबंधी जोखिमों की चिंता है।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि यूज़रनेम फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इसका दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।
सरकार को विशेष रूप से निम्नलिखित जोखिमों की चिंता है।
फर्जी पहचान (Impersonation) बनाना।
फिशिंग (Phishing) हमलों में वृद्धि।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी।
साइबर अपराधों की जांच को कठिन बनाना।
अपराधियों द्वारा अपनी वास्तविक पहचान छिपाना।
सरकार का कहना है कि ऐसे फीचर लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और पहचान दोनों सुरक्षित रहें।
सरकार द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद WhatsApp ने आश्वासन दिया कि वह भारत में Username फीचर तब तक लॉन्च नहीं करेगा, जब तक नियामक संस्थाओं (Regulators) के साथ उसकी बातचीत पूरी नहीं हो जाती।
कंपनी ने कहा कि वह सरकार के साथ मिलकर ऐसा समाधान तैयार करना चाहती है, जिससे यूज़र प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा दोनों का संतुलन बना रहे।
सरकार की समीक्षा केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने अन्य लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे Telegram और Signal से भी उनके Username सिस्टम और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी मांगी है।
सरकार यह जानना चाहती है कि ये प्लेटफॉर्म निम्नलिखित समस्याओं से कैसे निपटते हैं।
पहचान की चोरी (Identity Theft)।
फर्जी अकाउंट।
ऑनलाइन धोखाधड़ी।
फिशिंग हमले।
यूज़र वेरिफिकेशन सिस्टम।
शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया।
इस समीक्षा का उद्देश्य भविष्य में सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए समान सुरक्षा मानक (Common Safety Standards) तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार ऐसे नियम लागू कर सकती है, जिनका पालन भारत में संचालित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को करना होगा।
इन नियमों का उद्देश्य होगा।
यूज़र्स की पहचान की सुरक्षा।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा।
साइबर अपराधों की रोकथाम।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाना।
डेटा सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना।
भारत WhatsApp के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। देश में करोड़ों लोग व्यक्तिगत बातचीत, व्यापार, शिक्षा और सरकारी सेवाओं के लिए इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।
इतने बड़े यूज़र बेस को देखते हुए भारत के डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन करना WhatsApp के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
WhatsApp का कहना है कि वह नए नियमों का पालन करते हुए भी यूज़र्स की प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं करेगा।
कंपनी के अनुसार।
आयु सत्यापन परीक्षण पूरी तरह वैकल्पिक है।
यूज़र्स की निजी जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी।
आयु संबंधी जानकारी अन्य लोगों को दिखाई नहीं जाएगी।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले की तरह जारी रहेगा।
यूज़र अनुभव (User Experience) पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना और यूज़र्स का भरोसा बनाए रखना दोनों है।
भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) Act लागू होने की तैयारी के बीच WhatsApp द्वारा वैकल्पिक आयु सत्यापन (Age Verification) फीचर का परीक्षण यह दर्शाता है कि बड़ी टेक कंपनियां नए डेटा सुरक्षा नियमों के अनुरूप अपनी सेवाओं को पहले से तैयार कर रही हैं।
हालांकि यह फीचर अभी केवल परीक्षण चरण में है और उपयोगकर्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और डिजिटल पहचान से जुड़े नियम पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त होंगे।
इसके साथ ही Username फीचर, Telegram और Signal जैसे अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सरकारी समीक्षा यह संकेत देती है कि भारत डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन जवाबदेही के लिए व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार कर रहा है।
WhatsApp का कहना है कि वह नए कानूनों का पालन करते हुए भी यूज़र्स की प्राइवेसी और भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा।