उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए लगभग ₹5,500 करोड़ के निवेश पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण व्यवस्था विकसित करना है, ताकि सौर ऊर्जा से मिलने वाली बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सके।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आकलन के अनुसार, उत्तर प्रदेश को वर्ष 2035-36 तक लगभग 52,977 मेगावाट-घंटा (MWh) अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता हो सकती है।
इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) Uttar Pradesh Rajya Vidyut Utpadan Nigam Limited (UPRVUNL) के छह ताप विद्युत संयंत्रों में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली लगाने की योजना तैयार की गई है।
यह पहल बिजली की अधिक मांग वाले समय में आपूर्ति बनाए रखने, महंगी बिजली की खरीद कम करने और राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के छह ताप विद्युत संयंत्रों में बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी।
इसका उद्देश्य बिजली की कम मांग वाले समय में ऊर्जा जमा करना और अधिक मांग होने पर उसका उपयोग करना है।
योजना में निम्नलिखित ताप विद्युत संयंत्रों को शामिल किया गया है।
अनपरा ताप विद्युत संयंत्र।
ओबरा ताप विद्युत संयंत्र।
हरदुआगंज ताप विद्युत संयंत्र।
पनकी ताप विद्युत संयंत्र।
पारीछा ताप विद्युत संयंत्र।
जवाहरपुर ताप विद्युत संयंत्र।
इन सभी स्थानों पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) लगाने का प्रस्ताव है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली बिजली को कुछ समय के लिए संग्रहित करके रखती है।
जब सौर ऊर्जा उपलब्ध होती है या बिजली की मांग कम होती है, तब बैटरियों को चार्ज किया जा सकता है। इसके बाद शाम, रात या अधिक मांग वाले समय में संग्रहित बिजली का उपयोग किया जा सकता है।
इससे बिजली आपूर्ति में आने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने और विद्युत ग्रिड को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) की संसाधन पर्याप्तता योजना का हिस्सा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (IIT-BHU) द्वारा तैयार व्यवहार्यता अध्ययन में छह बिजलीघरों की संभावित भंडारण क्षमता का आकलन किया गया है।
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बिजलीघर |
प्रस्तावित क्षमता |
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अनपरा |
500 MWh |
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ओबरा |
100 MWh |
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हरदुआगंज |
150 MWh |
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पनकी |
150 MWh |
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पारीछा |
150 MWh |
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जवाहरपुर |
3,200 MWh |
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कुल क्षमता |
4,250 MWh |
सबसे अधिक 3,200 MWh क्षमता जवाहरपुर में प्रस्तावित है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक की संसाधन पर्याप्तता रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के लिए 52,977 MWh अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।
प्रस्तावित 4,250 MWh क्षमता इस जरूरत के लगभग 8 प्रतिशत के बराबर है।
इससे राज्य को भविष्य में बढ़ती बिजली मांग के लिए अपनी भंडारण व्यवस्था तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश में गर्मियों, शाम और रात के समय बिजली की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में राज्य को जरूरत पूरी करने के लिए महंगी बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
प्रस्तावित बैटरी भंडारण व्यवस्था इस चुनौती को कम करने में मदद कर सकती है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी के अनुसार, बैटरी भंडारण से सूर्यास्त के बाद भी संग्रहित स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि इससे अधिक मांग वाले समय में बिजली की आपूर्ति बनाए रखने और महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम करने में सहायता मिलेगी।
योजना के लिए चुने गए ताप विद्युत संयंत्रों में जमीन, बिजली नियंत्रण केंद्र और बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।
इससे नई बैटरी प्रणालियों को मौजूदा विद्युत ढांचे से जोड़ने में सुविधा हो सकती है।
हालांकि, वास्तविक लागत और परियोजना पूरी होने का समय तकनीकी मंजूरी, खरीद प्रक्रिया और निर्माण की प्रगति पर निर्भर करेगा।
बैटरी भंडारण प्रणाली का एक प्रमुख लाभ बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
जब सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है, तब अतिरिक्त बिजली को संग्रहित किया जा सकता है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर इस ऊर्जा को ग्रिड में भेजा जा सकता है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के तकनीकी नियमों के अनुसार, ताप विद्युत इकाइयों को कुछ परिस्थितियों में न्यूनतम तकनीकी भार पर संचालित करना पड़ता है।
बैटरी भंडारण व्यवस्था बिजली की मांग में होने वाले बदलावों को संभालने में मदद कर सकती है।
इससे बिजलीघरों के संचालन में लचीलापन बढ़ सकता है और सौर ऊर्जा को विद्युत प्रणाली में शामिल करना आसान हो सकता है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की वार्षिक रिपोर्ट में भी बैटरी भंडारण और चौबीसों घंटे भरोसेमंद हरित बिजली उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
मयूर माहेश्वरी के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना विकसित भारत और उत्तर प्रदेश विजन 2047 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
राज्य सरकार का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करने के साथ बिजली की उपलब्धता और औद्योगिक विकास को मजबूत बनाना है।
उत्तर प्रदेश ने अपनी अर्थव्यवस्था को एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योगों, परिवहन, कृषि और सेवा क्षेत्र में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण होगी।
स्वच्छ ऊर्जा में निवेश से नई तकनीकों के उपयोग, औद्योगिक गतिविधियों और लंबे समय तक टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी की रिपोर्ट ‘पावरिंग उत्तर प्रदेश्स ग्रीन इकोनॉमी: जॉब्स, स्किल्स एंड एंटरप्रेन्योरशिप’ में राज्य के लिए हरित रोजगार की संभावनाओं पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक उत्तर प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था लगभग 7.8 लाख रोजगारों को सहारा दे सकती है।
रोजगार की संभावनाओं में नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन, कचरे का पुनर्चक्रण, कृषि वानिकी और वनों के पुनर्स्थापन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के संचालन और रखरखाव से जुड़ी गतिविधियों में लगभग दो लाख प्रत्यक्ष रोजगार की संभावना बताई गई है।
रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को हरित अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने की सलाह दी है।
बैटरी प्रणालियों की स्थापना, रखरखाव, बिजली प्रबंधन और तकनीकी निगरानी जैसे कामों के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होगी।
यदि प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए, तो युवाओं को इन उभरते क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, 7.8 लाख रोजगार का आंकड़ा एक अनुमान है, न कि अब तक सृजित नौकरियों की संख्या।
छह ताप विद्युत संयंत्रों में 4,250 MWh बैटरी भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना से अधिक मांग वाले समय में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।
यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ बिजली और औद्योगिक विकास के साथ हरित रोजगार की संभावनाओं से भी जुड़ी है।
हालांकि, प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। इसके वास्तविक लाभ परियोजना को मिलने वाली मंजूरियों, निवेश और सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।