अमेरिका में विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को सख्त करने की ट्रंप प्रशासन की योजना को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस नए नियम को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिसके तहत विदेशी छात्रों और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि तय की जानी थी। यह फैसला अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी Department of Homeland Security (DHS) द्वारा नई नीति लागू किए जाने से ठीक एक दिन पहले आया।
नए नियम का उद्देश्य उन विदेशी नागरिकों के अमेरिका में रहने की अवधि को सीमित करना था, जो पढ़ाई, शोध, एक्सचेंज कार्यक्रम या पत्रकारिता जैसे कार्यों के लिए देश में आते हैं। मौजूदा व्यवस्था में कई विदेशी छात्र और शोधकर्ता तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने वीजा की शर्तों और संबंधित कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अदालत के फैसले के बाद फिलहाल यह पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला जज F. Dennis Saylor ने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी Department of Homeland Security (DHS) की प्रस्तावित नीति के खिलाफ फैसला सुनाया। यह कानूनी चुनौती श्रमिक संगठनों और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक गठबंधन ने दायर की थी।
जज Saylor ने कहा कि नई नीति तैयार करते समय DHS ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को पर्याप्त रूप से पूरा नहीं किया। अदालत के अनुसार, विभाग ने अपने फैसले के समर्थन में बेहद कमजोर आधार पेश किए।
DHS का तर्क था कि नए नियम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और वीजा व्यवस्था में संभावित दुरुपयोग तथा धोखाधड़ी को रोकने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि विभाग ने प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी महत्वपूर्ण चिंताओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया और यह भी ठीक से नहीं देखा कि कम नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे विकल्पों से समान उद्देश्य हासिल किया जा सकता था या नहीं।
अदालत के अनुसार, किसी लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने से पहले सरकार को उसके व्यापक प्रभावों पर पर्याप्त विचार करना चाहिए। खासकर जब इसका असर छात्रों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों, विश्वविद्यालयों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता हो।
DHS ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है। विभाग के General Counsel James Percival ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आव्रजन अधिकारियों की उन गतिविधियों पर कार्रवाई करने की क्षमता सीमित हो सकती है, जिन्हें प्रशासन वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग के रूप में देखता है।
Percival का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत कुछ लोग छात्र के रूप में अमेरिका में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन पढ़ाई से जुड़ी बहुत कम आवश्यकताओं को पूरा करते हुए लंबे समय तक देश में रह सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने हाल के समय में आव्रजन नियंत्रण को सख्त करने और अमेरिका में पढ़ाई, काम या एक्सचेंज कार्यक्रमों के लिए आने वाले विदेशी नागरिकों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।
जज Saylor ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तावित नियम उस व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करता, जिसे अमेरिका लगभग पांच दशकों से लागू करता आ रहा है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी छात्रों को आम तौर पर “Duration of Status” के आधार पर वीजा दिया जाता है। इसका मतलब है कि छात्र अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करते रहने तक अमेरिका में रह सकता है।
इस व्यवस्था के तहत छात्र को हर निश्चित अवधि के बाद केवल रहने की अवधि बढ़ाने के लिए अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ती, बशर्ते वह अपने कार्यक्रम और वीजा से जुड़ी शर्तों का पालन कर रहा हो।
जज Saylor ने इस व्यवस्था से जुड़े व्यापक लाभों की ओर भी ध्यान दिलाया। पिछले कई दशकों में लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं ने अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और शोध किया है।
अदालत ने माना कि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भागीदारी ने विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में प्रगति में योगदान दिया है। इसके अलावा, विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं की मौजूदगी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण रही है।
DHS ने जुलाई में प्रस्तावित नियम पेश किया था। इसका उद्देश्य “Duration of Status” व्यवस्था को हटाकर कुछ विदेशी नागरिकों के अमेरिका में रहने की अधिकतम अवधि तय करना था।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत F वीजा, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा किया जाता है, के लिए अधिकतम चार साल की अवधि तय की जानी थी।
इसी तरह J वीजा, जो कुछ एक्सचेंज विजिटर्स के लिए होता है, के तहत भी अधिकतम चार साल तक रहने की सीमा प्रस्तावित थी।
नए प्रस्ताव का असर विदेशी पत्रकारों पर भी पड़ना था। विदेशी मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों को जारी किए जाने वाले I वीजा के तहत अमेरिका में रहने की अवधि अधिकतम 240 दिन किए जाने का प्रस्ताव था।
यदि किसी विदेशी नागरिक को निर्धारित अवधि से अधिक समय अमेरिका में रहना होता, तो उसे अलग से विस्तार के लिए आवेदन करना पड़ता।
अदालत के फैसले में नए नियम के संभावित आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया गया। अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में फिलहाल लगभग 16 लाख F वीजा धारक और करीब 5 लाख J वीजा धारक हैं।
अमेरिका के कई प्रमुख विश्वविद्यालय और शोध संस्थान अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं पर काफी निर्भर हैं। विशेष रूप से स्नातकोत्तर स्तर के कई पाठ्यक्रमों में विदेशी छात्रों की संख्या महत्वपूर्ण है।
जज Saylor ने आशंका जताई कि नए नियम लागू होने से अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन कम हो सकता है। इससे विश्वविद्यालयों पर अतिरिक्त प्रशासनिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है।
अदालत ने अनुमान लगाया कि कुछ संस्थानों को नए नियम के कारण सैकड़ों मिलियन डॉलर तक के खर्च का सामना करना पड़ सकता है। जज ने चेतावनी दी कि उच्च शिक्षा और व्यापक अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
नई नीति के खिलाफ कानूनी चुनौती देने वाले उच्च शिक्षा संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि प्रस्तावित नियम से विश्वविद्यालयों, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका थी।
प्रेसिडेंट्स अलायंस ऑन हायर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन की चीफ मिरियम फेल्डब्लम Presidents’ Alliance on Higher Education and Immigration Miriam Feldblum ने कहा कि अदालत का फैसला उस संभावित नुकसान को पहचानता है, जो नई नीति लागू होने पर हो सकता था।
उनके अनुसार, अदालत के हस्तक्षेप से फिलहाल मौजूदा व्यवस्था बनी रहेगी और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती रहेगी। इससे अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय छात्रों, शोधकर्ताओं और अन्य वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलती रहेगी।
अदालत के फैसले के बाद DHS की प्रस्तावित नई नीति फिलहाल लागू नहीं हो सकेगी। इसका मतलब है कि पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्र और एक्सचेंज विजिटर फिलहाल पुरानी Duration of Status व्यवस्था के तहत अमेरिका में रह सकेंगे।
हालांकि, यह राहत अभी अस्थायी है। कानूनी मामला आगे बढ़ेगा और भविष्य में अदालत के अन्य फैसलों के आधार पर स्थिति बदल सकती है।
यह मामला केवल विदेशी छात्रों और पत्रकारों के वीजा तक सीमित नहीं है। इसका असर ट्रंप प्रशासन की व्यापक आव्रजन नीति पर भी पड़ सकता है। प्रशासन विदेशी नागरिकों की निगरानी और अमेरिका में उनके रहने से जुड़े नियमों को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल अदालत के आदेश से विदेशी छात्रों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और विश्वविद्यालयों को प्रस्तावित तय अवधि वाले नियम से अस्थायी राहत मिली है। अंतिम स्थिति आगे होने वाली कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
अमेरिकी संघीय अदालत का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका माना जा रहा है। अदालत ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि को सीमित करने वाले प्रस्तावित नियम को फिलहाल रोक दिया है। इससे लगभग पांच दशकों से चली आ रही “Duration of Status” व्यवस्था बनी हुई है।
यह मामला आने वाले समय में यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन नियंत्रण को मजबूत करने की कोशिशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय छात्रों, शोधकर्ताओं और वैश्विक प्रतिभाओं से मिलने वाले शैक्षणिक और आर्थिक लाभों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।