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भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि National Payments Corporation of India ने यूरोप में UPI ग्लोबल एक्सेप्टेंस की सीमा बढ़ा दी है। इस कदम से विदेशों में भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए बड़े मूल्य के लेन-देन करना और आसान हो जाएगा।
National Payments Corporation of India ने आधिकारिक रूप से यूरोप में UPI ग्लोबल एक्सेप्टेंस के तहत लेन-देन सीमा बढ़ा दी है। 29 अप्रैल 2026 के नवीनतम सर्कुलर के अनुसार अब पीयर-टू-मार्चेंट (P2M) भुगतान के लिए प्रति लेन-देन और दैनिक सीमा ₹2 लाख कर दी गई है।
इसका मतलब है, कि अब उपयोगकर्ता यूरोप में UPI आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक मूल्य के डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। हालांकि NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है, कि प्रत्येक बैंक अपनी आंतरिक सीमा तय कर सकता है, बशर्ते वह समग्र नियमों के भीतर हो।
यह कदम भारत की रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
UPI ग्लोबल एक्सेप्टेंस की सीमा बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय डिजिटल लेन-देन को आसान बनाना है। यूरोप में भारतीय यात्रियों और व्यवसायिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण बड़े भुगतान की आवश्यकता बढ़ी है।
इस सुधार से रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में भुगतान अधिक सुगम होगा। साथ ही यह भारत के UPI सिस्टम को वैश्विक स्तर पर एक मानक डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में भी एक कदम है।
लिमिट बढ़ाने के साथ-साथ NPCI ने उन देशों की सूची भी अपडेट की है, जहां UPI ग्लोबल एक्सेप्टेंस उपलब्ध है। यूरोप इस विस्तार का प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है।
अक्टूबर 2023 के पहले के दिशानिर्देशों के अनुसार यूरोप के बाहर UPI ट्रांजैक्शन की सीमा अभी भी उसी पुराने सर्कुलर के अनुसार लागू होगी। उस व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय UPI की सीमा ₹10 लाख तक रखी गई थी (श्रेणी के अनुसार)।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय QR कोड पेमेंट सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे विदेशी उपयोगकर्ता भारत में UPI QR कोड स्कैन करके भुगतान कर सकते हैं।
15 सितंबर 2025 को National Payments Corporation of India ने कई श्रेणियों में दैनिक लेन-देन सीमा बढ़ाई थी।
इसमें बीमा प्रीमियम, कैपिटल मार्केट, यात्रा और सरकारी ई-मार्केटप्लेस जैसी श्रेणियां शामिल थीं। कुछ क्षेत्रों में दैनिक सीमा ₹10 लाख तक कर दी गई थी।
क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए भी सीमा बढ़ाकर प्रति लेन-देन ₹5 लाख और दैनिक सीमा ₹6 लाख कर दी गई थी।
विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के आधार पर UPI लिमिट अलग-अलग तय की गई है:
यह संरचना सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
UPI ग्लोबल एक्सेप्टेंस का विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को और मजबूत बनाता है। National Payments Corporation of India ने UPI को एक विश्वस्तरीय रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
UPI अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई देशों में इसका उपयोग बढ़ रहा है। यह भारत की फिनटेक क्षमता और डिजिटल नवाचार का वैश्विक उदाहरण बन गया है।
यूरोप में ₹2 लाख की बढ़ी हुई सीमा से भारतीय यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा। अब वे बिना विदेशी कार्ड या नकद पर निर्भर हुए आसानी से बड़े भुगतान कर सकेंगे।
यूरोप के व्यापारियों के लिए भी यह प्रणाली तेज भुगतान और कम लागत वाला विकल्प प्रदान करती है। इससे लेन-देन अधिक सरल और तेज हो जाता है।
निष्कर्ष:
National Payments Corporation of India द्वारा यूरोप में UPI लिमिट बढ़ाने का निर्णय भारत के डिजिटल भुगतान इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा बढ़ाता है, बल्कि UPI को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाता है।
UPI अब एक अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान मानक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भारत की फिनटेक शक्ति को दुनिया भर में स्थापित करता है।
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अगर आप भी एवरीडे की जरूरत के लिए यूपीआई (UPI) यूज करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है, यूपीआई (UPI) ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है, जनवरी 2026 में यूपीआई (UPI) से हुए ट्रांजैक्शन का कुल प्राइस रिकॉर्ड 28.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि ट्रांजैक्शन की संख्या 2170 करोड़ (21.70 बिलियन) रही, इन आंकड़ों को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की तरफ से जारी किया गया है।
दिसंबर के महीने में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन का प्राइस 27.97 लाख करोड़ रुपये था, जनवरी के महीने में 1.3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, यानी मंथ ऑन मंथ के बेस पर 21% की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई, जनवरी के महीने में हर दिन औसतन 70 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, एक दिन का एवरेज प्राइस करीब 91,400 करोड़ रुपये रहा, इससे डिजिटल पेमेंट की दिन पर दिन लोगों के बीच बढ़ रही पसंद को दिखाया जाता है।
वर्ल्डलाइन के सीईओ रमेश नरसिम्हन Ramesh Narasimhan ने कहा कि यूपीआई (UPI) का तेजी से बढ़ता चलन जारी है, जनवरी 2026 में पिछले साल के मुकाबले 28% की सालाना ग्रोथ हुई, जो देश में कैशलेस इकोनॉमी की तरफ बढ़ते कदम को शो करती है, आइए जानते हैं, लगातार यूपीआई यूजर बढ़ने का कारण :-
> यूपीआई पर ज्यादातर ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री हैं, या इसके ट्रांजैक्शन पर बहुत कम चार्ज लगता है, छोटे पेमेंट्स के लिए किसी तरह का MDR नहीं लगता, इस कारण आम आदमी और दुकानदार इसके आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं।
> यूपीआई के जरिये महज कुछ ही सेकंड में पैसा ट्रांसफर हो जाता है, UPI ID, QR कोड या मोबाइल नंबर से पेमेंट करना बेहद आसान है, Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप्स ने इसे और यूजर-फ्रेंडली बना दिया है।
> देश में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या करोड़ों में है, सस्ता इंटरनेट और 4G/5G ने गांव-गांव तक यूपीआई की पहुंच को बढ़ा दिया है, अब गांवों में भी छोटे व्यापारी QR कोड से पेमेंट लेते हैं।
> डिजिटल इंडिया, जन-धन योजना और कैशलेस प्रमोशन ने यूपीआई को बढ़ावा दिया है, बैंक और फिनटेक कंपनियां लगातार जुड़ रही हैं, छोटे व्यापारियों को भी आसानी से शामिल किया गया है।
> लोग अब सब्जी, किराना, बिल, ऑनलाइन शॉपिंग हर छोटे-बड़े काम के लिए यूपीआई यूज करते हैं, महिलाएं, जेन Z और ग्रामीण यूजर्स के मामले में तेजी से ग्रोथ देखने को मिली थी, फाइनेंशियल इनक्लूजन बढ़ा है, और कैश कम हो रहा है।
भारत के अलावा यूपीआई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार कर रहा है। यह भुगतान प्रणाली सिंगापुर, यूएई, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस और फ्रांस जैसे बाजारों में पहले से ही चालू है, जबकि एनपीसीआई ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के चुनिंदा क्षेत्रों सहित अन्य देशों में इसके विस्तार पर काम कर रहा है।