केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले ग्राहकों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। नए भुगतान ढांचे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है, बल्कि यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े कारोबारियों और अन्य भागीदारों के बीच होने वाला शुल्क है।
सरकार के अनुसार, नए ढांचे के तहत कुछ निर्धारित पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर MDR लागू होगा। हालांकि, इसका भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों से न वसूलें। यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भी ग्राहकों पर कोई छिपा हुआ शुल्क या प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR को अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक सीमित किया गया है। यह शुल्क भुगतान व्यवस्था में शामिल अलग-अलग भागीदारों के बीच बांटा जाएगा। इनमें बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाले भागीदार शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता को बनाए रखना और भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आधार तैयार करना है। इसके बावजूद रोजमर्रा के छोटे भुगतान करने वाले ग्राहकों पर इसका सीधा आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
नए नियमों के तहत व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के P2M यूपीआई भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसका अर्थ है कि किसी दुकान, छोटे कारोबारी या सेवा प्रदाता को ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 तक का यूपीआई भुगतान करने पर ग्राहक से अलग से कोई MDR शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR की व्यवस्था भी जारी रहेगी। यूपीआई QR कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी, जिनमें रेहड़ी-पटरी वाले भी शामिल हैं, इस व्यवस्था के तहत शून्य MDR का लाभ लेते रहेंगे।
नए MDR ढांचे का पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई लेन-देन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को यूपीआई से भेजा गया पैसा किसी भी राशि का हो, उस पर MDR नहीं लगेगा।
सरकार के अनुसार, P2P लेन-देन यूपीआई के कुल लेन-देन में मात्रा के आधार पर लगभग 37 प्रतिशत और कुल मूल्य के आधार पर करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इसलिए दोस्तों, परिवार के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों को पैसे भेजने वाले यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए इस व्यवस्था में कोई नया शुल्क नहीं है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, नए MDR ढांचे से लगभग 96 प्रतिशत P2M लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। MDR केवल निर्धारित सीमा से अधिक के कुछ व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन इससे बाहर रहेंगे।
इसका मतलब है कि आम ग्राहक द्वारा किए जाने वाले बड़ी संख्या में रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेंगे।
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR को टैक्स, उपकर या सरकार द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। यह भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है, जिसे बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप प्रदाताओं सहित संबंधित भागीदारों के बीच बांटा जाता है।
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहक पर न डालें। इसके साथ ही यूपीआई ऐप प्रदाता ग्राहकों से अलग से प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क नहीं वसूल सकते। ग्राहकों के लिए यूपीआई के मुफ्त इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या लेन-देन की संख्या के आधार पर अलग शुल्क व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
नए ढांचे में कुछ जरूरी और कम लाभ वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था भी रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित लेन-देन पर ₹5 प्रति लेन-देन का निश्चित MDR लागू होगा।
वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, शेयर ब्रोकरों और डीलरों से जुड़े पूंजी बाजार लेन-देन पर MDR 0.02 प्रतिशत होगा और इसे अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक सीमित किया गया है। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों के लिए एक समान शुल्क के बजाय अलग व्यवस्था निर्धारित की गई है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Finance Minister Nirmala Sitharaman ने सरकार की स्थिति दोहराते हुए कहा है कि सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब MDR लागू होने की खबरों के बाद लोगों के बीच यह चिंता पैदा हुई थी कि कहीं यूपीआई से भुगतान करना महंगा न हो जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR व्यापारी-पक्ष की भुगतान व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है, ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क नहीं। वित्त मंत्रालय ने लोगों से यूपीआई से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील भी की है।
अपने संवाद के दौरान सीतारमण ने कुछ अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की। इनमें इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नकल किए जाने की घटना भी शामिल थी। उन्होंने इस व्यवहार को विपक्ष के नेता के संवैधानिक पद के प्रति असम्मानजनक बताया और साथ ही लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व का भी उल्लेख किया।
उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा केंद्र से मिलने वाले धन को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। सीतारमण ने कहा कि राज्यों को उनके निर्धारित हिस्से के अनुसार धन जारी किया जाता है और आरोपों को खारिज किया। इन बयानों को संबंधित राजनीतिक पक्षों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, जबकि यूपीआई और MDR से जुड़े आंकड़े सरकार द्वारा जारी आधिकारिक ढांचे से संबंधित हैं।
आम ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीआई से भुगतान करने पर उन्हें MDR नहीं देना होगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान किसी भी राशि का हो, वह निःशुल्क रहेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था भी जारी रहेगी।
नए ढांचे में MDR केवल निर्धारित शर्तों के तहत कुछ अधिक मूल्य वाले व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन इससे प्रभावित नहीं होंगे। इसलिए नए नियम का उद्देश्य ग्राहक से भुगतान शुल्क लेना नहीं, बल्कि यूपीआई की भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है।
यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। नए MDR ढांचे को लेकर सबसे बड़ी स्पष्टता यह है कि ग्राहकों से MDR नहीं लिया जाएगा। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान, सभी P2P भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-MDR लेन-देन निःशुल्क बने रहेंगे। वहीं, निर्धारित सीमा से अधिक के कुछ व्यापारी लेन-देन पर MDR भुगतान व्यवस्था के भीतर लागू होगा।