भारतीय राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस (UPI) ने 2025 की दूसरी छमाही में सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन का 85.5 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जो भारत के भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी बढ़ती प्रमुखता को दर्शाता है। यह जानकारी Reserve Bank of India के आंकड़ों के अनुसार सामने आई है।
रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), जो एक उच्च-मूल्य लेकिन कम मात्रा वाला भुगतान सिस्टम है, ने लेनदेन की मात्रा में केवल 0.1 प्रतिशत का योगदान दिया। वहीं नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) दोनों ने 3.6-3.6 प्रतिशत का योगदान दिया, जैसा कि RBI की नवीनतम अर्धवार्षिक भुगतान प्रणाली रिपोर्ट में बताया गया है।
हालांकि लेनदेन की मात्रा में UPI सबसे आगे है, लेकिन मूल्य के मामले में RTGS सबसे प्रमुख बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार:
यह दर्शाता है, कि RTGS बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है, जबकि UPI मुख्य रूप से छोटे और खुदरा भुगतान के लिए उपयोग होता है।
रिपोर्ट में बताया गया है, कि UPI पूरे देश में बड़े पैमाने पर खुदरा डिजिटल भुगतान का मुख्य चालक बना हुआ है। वहीं RTGS बड़े मूल्य के निपटान (settlements) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NEFT की क्षमता, जो छोटे और बड़े दोनों प्रकार के लेनदेन को एक घंटे के भीतर निपटाने में सक्षम है, इसे भारत के विकसित हो रहे डिजिटल भुगतान वातावरण में प्रासंगिक बनाए रखती है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र काफी तेजी से बढ़ा है:
पिछले पांच वर्षों में:
इस अवधि में:
RBI के अनुसार इस तेज वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि भारत में कुल भुगतान लेनदेन तेजी से बढ़े हैं:
मूल्य के हिसाब से:
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर भारत का डिजिटल भुगतान सिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। UPI ने खुदरा डिजिटल लेनदेन में अपना दबदबा मजबूत किया है, जबकि RTGS और NEFT बड़े और मध्यम मूल्य के लेनदेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
Reserve Bank of India की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है, कि भारत का भुगतान ढांचा पिछले दशक में अत्यधिक विकसित हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसके और अधिक डिजिटल और मजबूत होने की संभावना है।