अफ्रीका के पश्चिमी हिस्से में स्थित पश्चिमी सहारा क्षेत्र में पिछले 35 वर्षों से जारी संयुक्त राष्ट्र (UN) का शांति मिशन अब समाप्त होने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मिशन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को घोषणा की कि इस मिशन को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस फैसले पर क्षेत्र के प्रमुख पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। पश्चिमी सहारा पर अपना अधिकार जताने वाले मोरक्को ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया है, जबकि अल्जीरिया के समर्थन वाले पोलिसारियो फ्रंट ने चिंता जाहिर की है।
यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा है और इसके केंद्र में पश्चिमी सहारा की राजनीतिक स्थिति, स्वतंत्रता की मांग तथा मोरक्को की संप्रभुता का सवाल है। संयुक्त राष्ट्र का यह मिशन युद्धविराम की निगरानी करने के साथ-साथ क्षेत्र में जनमत संग्रह कराने की जिम्मेदारी भी निभा रहा था, लेकिन मतदाता पात्रता को लेकर असहमति के कारण यह जनमत संग्रह कभी आयोजित नहीं हो सका।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस United Nations Secretary-General António Guterres ने बताया कि सुरक्षा परिषद द्वारा मिशन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर नहीं किए जाने के कारण इसे समाप्त किया जाएगा। इस मिशन का नाम MINURSO है। इसकी शुरुआत वर्ष 1991 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद की गई थी।
गुटेरेस के बयान के अनुसार, 1 नवंबर से मिशन को बंद करने का पहला चरण यानी परिसमापन प्रक्रिया शुरू होनी थी। इस दौरान मिशन के संसाधनों और उपकरणों को उन देशों में वापस भेजा जाएगा, जिन्होंने शांति सैनिक उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही मिशन की गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
MINURSO पिछले साढ़े तीन दशकों से पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युद्धविराम पर नजर रखना और क्षेत्र में शांति बनाए रखने में सहायता करना था। इसके अलावा, इसे पश्चिमी सहारा के लोगों के लिए जनमत संग्रह आयोजित कराने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
पश्चिमी सहारा लंबे समय से मोरक्को और स्वतंत्रता की मांग करने वाले पोलिसारियो फ्रंट के बीच विवाद का विषय रहा है। स्पेन इस क्षेत्र का पूर्व औपनिवेशिक शासक था। वर्ष 1976 में स्पेन के यहां से हटने के बाद पोलिसारियो फ्रंट ने एक स्वतंत्र देश की स्थापना की मांग शुरू की।
पोलिसारियो फ्रंट को अल्जीरिया का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, मोरक्को पश्चिमी सहारा को अपना हिस्सा मानता है और इस क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी रही।
वर्ष 1991 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ। इसके बाद MINURSO की स्थापना की गई, ताकि युद्धविराम की निगरानी की जा सके और विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता तैयार हो। हालांकि, जनमत संग्रह कराने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि मतदान करने का अधिकार किन लोगों को मिलना चाहिए।
MINURSO के नाम में शामिल 'R' शब्द जनमत संग्रह यानी रेफरेंडम को दर्शाता है। मिशन को पश्चिमी सहारा के भविष्य पर लोगों की राय जानने के लिए मतदान आयोजित कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।
लेकिन मतदाता सूची और पात्रता के मानदंडों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार मतभेद बने रहे। कौन इस क्षेत्र का निवासी माना जाएगा और किसे मतदान का अधिकार मिलेगा, इस सवाल पर सहमति नहीं बन पाई। नतीजतन, 35 वर्षों के दौरान जनमत संग्रह आयोजित नहीं किया जा सका।
पश्चिमी सहारा विवाद में एक महत्वपूर्ण बदलाव पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुआ था। उस समय परिषद ने अमेरिका की ओर से तैयार किए गए एक प्रस्ताव को अपनाया था। इसमें मोरक्को की उस योजना को विवाद के समाधान के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बताया गया था, जिसके तहत पश्चिमी सहारा को मोरक्को की संप्रभुता के अंतर्गत स्वायत्तता देने की बात कही गई थी।
इस योजना के अनुसार, पश्चिमी सहारा को कुछ आंतरिक मामलों में अधिकार मिल सकते हैं, लेकिन क्षेत्र पर अंतिम संप्रभुता मोरक्को के पास रहेगी। मोरक्को इस प्रस्ताव को अपने पक्ष में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानता है। हालांकि, पोलिसारियो फ्रंट स्वतंत्र देश की मांग पर कायम है।
इस घटनाक्रम के एक वर्ष बाद सुरक्षा परिषद में अमेरिका के समर्थन वाले एक अन्य प्रस्ताव पर मतभेद सामने आए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मोरक्को की योजना के पक्ष में संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकता को और मजबूत करना तथा शांति मिशन के दायरे को कम करना था।
सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर अमेरिका और रूस के बीच मतभेद निर्णायक साबित हुए। रूस ने पिछले वर्ष अमेरिका के प्रस्ताव पर मतदान के दौरान मतदान से दूरी बनाई थी, लेकिन इस बार उसने अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को वीटो कर दिया।
वीटो के कारण अमेरिकी प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद रूस की ओर से पेश किए गए एक अलग प्रस्ताव को भी सुरक्षा परिषद में आवश्यक समर्थन नहीं मिला। इस तरह परिषद में दोनों प्रस्ताव विफल हो गए और MINURSO के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए कोई नया आदेश जारी नहीं हो सका।
इसका सीधा असर मिशन के भविष्य पर पड़ा। सुरक्षा परिषद में सहमति नहीं बनने के कारण मिशन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त हो गया और इसे आगे जारी रखने का रास्ता बंद हो गया।
मोरक्को ने संयुक्त राष्ट्र मिशन के कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। मोरक्को के विदेश मंत्री नासिर बुरिता ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि मिशन के नाम में जनमत संग्रह का उल्लेख अब एक पुरानी और अप्रासंगिक व्यवस्था बन चुका है।
उन्होंने बताया कि मोरक्को को पहले से जानकारी थी कि रूस अमेरिका के प्रस्ताव को वीटो कर सकता है। इसके बावजूद रबात ने इस स्थिति को मौजूदा व्यवस्था के कुछ नियमों की समीक्षा करने के अवसर के रूप में देखा।
मोरक्को के शाही महल की ओर से भी बयान जारी किया गया। इसमें मिशन के कार्यकाल का नवीनीकरण नहीं होने को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया गया। मोरक्को का मानना है कि इससे पश्चिमी सहारा के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमित विचार-विमर्श से बाहर लाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।
मोरक्को के विपरीत अल्जीरिया और पोलिसारियो फ्रंट ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। अल्जीरिया के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को मिशन का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाए जाने पर गहरा अफसोस व्यक्त किया।
अल्जीरिया ने इस स्थिति के लिए अमेरिका के उस रुख को जिम्मेदार ठहराया, जिसे उसने मोरक्को के पक्ष में जरूरत से ज्यादा झुका हुआ बताया। अल्जीरिया का मानना है कि पश्चिमी सहारा विवाद के समाधान में सभी पक्षों के हितों और क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं को समान महत्व मिलना चाहिए।
वहीं, पोलिसारियो फ्रंट ने सुरक्षा परिषद की बैठक में पैदा हुए गतिरोध पर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि परिषद में सहमति नहीं बनना विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। पोलिसारियो फ्रंट लंबे समय से पश्चिमी सहारा को एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने की मांग करता रहा है।
MINURSO की समाप्ति के साथ पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र की शांति व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण भूमिका खत्म हो जाएगी। मिशन के उपकरणों और अन्य संसाधनों को संबंधित देशों में वापस भेजा जाएगा। हालांकि, मिशन समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि पश्चिमी सहारा का राजनीतिक विवाद भी समाप्त हो गया है।
क्षेत्र की स्थिति अब भी मोरक्को की संप्रभुता की मांग और पोलिसारियो फ्रंट की स्वतंत्रता की मांग के बीच उलझी हुई है। जनमत संग्रह का सवाल भी अनसुलझा है। सुरक्षा परिषद में हालिया मतभेद बताते हैं कि इस विवाद पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एकमत होना आसान नहीं है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय पक्ष पश्चिमी सहारा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए किस तरह की कूटनीतिक पहल करते हैं। फिलहाल, 35 वर्षों तक जारी रहा MINURSO मिशन अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन जिस राजनीतिक विवाद के समाधान के लिए इसकी स्थापना हुई थी, वह अब भी कायम है।