कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोल रही है। इसी दिशा में Anthropic ने खगोल विज्ञान से जुड़ी एक अहम उपलब्धि की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, एक शोधकर्ता ने उसके Claude Science टूल की मदद से पराबैंगनी (Ultraviolet या UV) प्रकाश में पूरे आकाश का संपूर्ण मानचित्र तैयार किया है। Anthropic इसे अपनी तरह का पहला संपूर्ण आकाशीय पराबैंगनी मानचित्र बता रही है।
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसके लिए किसी नए टेलीस्कोप या नए आकाशीय सर्वेक्षण की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय, पहले से एकत्र किए गए पराबैंगनी अवलोकनों को एक साथ जोड़ा गया और उपलब्ध आँकड़ों में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए Claude Science की मदद ली गई।
यह काम दिखाता है कि AI टूल पहले से मौजूद आँकड़ों को जोड़ने, जटिल जानकारी का विश्लेषण करने और नए शोध संसाधन तैयार करने में वैज्ञानिकों की सहायता कर सकते हैं। हालांकि, Anthropic ने अभी तक शोधकर्ता की पहचान, इस्तेमाल किए गए सभी आँकड़ों और मानचित्र बनाने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा नहीं किया है। इसलिए इस उपलब्धि का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने के लिए अधिक जानकारी की जरूरत होगी।
Anthropic ने 30 जून, 2026 को Claude Science पेश किया था। यह AI आधारित शोध मंच है, जिसे मुख्य रूप से कंप्यूटेशनल बायोलॉजी यानी कंप्यूटर की मदद से जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए बनाया गया है। हालांकि, इसकी क्षमताओं का उपयोग दूसरे वैज्ञानिक विषयों में भी किया जा सकता है।
यह मंच वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा करने, आँकड़ों का विश्लेषण करने, प्रयोगों की योजना बनाने, चित्र और ग्राफ तैयार करने तथा शोध दस्तावेज लिखने जैसे कई कामों को एक साथ करने में मदद करता है।
इसका एक प्रमुख उद्देश्य शोधकर्ताओं को जटिल विश्लेषण व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में सहायता देना है। विज्ञान में किसी शोध को दोबारा जाँच पाना बेहद जरूरी होता है। इससे दूसरे वैज्ञानिक इस्तेमाल की गई विधियों को समझ सकते हैं, विश्लेषण दोहरा सकते हैं और यह परख सकते हैं कि नतीजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सकती है या नहीं।
हालांकि, Claude Science को मुख्य रूप से जैविक शोध को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन पराबैंगनी मानचित्र से जुड़ी यह परियोजना बताती है कि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल खगोल विज्ञान और बड़े आँकड़ों वाले अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
Anthropic के अनुसार, शोधकर्ता ने Claude Science की सहायता से पहले से मौजूद पराबैंगनी आँकड़ों और खगोलीय अवलोकनों को जोड़कर आकाश का एक संयुक्त मानचित्र तैयार किया।
खगोल विज्ञान से जुड़े पुराने अभियानों ने पराबैंगनी उत्सर्जन के बारे में बड़ी मात्रा में जानकारी एकत्र की थी। लेकिन इन अवलोकनों में आकाश के सभी हिस्से शामिल नहीं थे। इस कारण मानचित्र में कई जगह खाली क्षेत्र रह गए थे और पूरे आकाश का एक समान दृश्य तैयार करना मुश्किल था।
बताया गया है कि इस परियोजना में उपलब्ध अवलोकनों को एक साथ जोड़ा गया और AI की मदद से उन क्षेत्रों को पूरा करने का प्रयास किया गया, जिनकी जानकारी पुराने मानचित्रों में नहीं थी। इससे अलग-अलग अंतरिक्ष अभियानों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों को व्यवस्थित करने और उन्हें एक साथ इस्तेमाल करने के नए तरीके खोजने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, मानचित्र में किसी खाली हिस्से को भर देने का यह अर्थ नहीं है कि उस क्षेत्र का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया है। दोबारा तैयार किए गए क्षेत्रों की विश्वसनीयता इस्तेमाल किए गए आँकड़ों, मान्यताओं और तकनीकों पर निर्भर करती है। Anthropic ने अभी तक पर्याप्त तकनीकी जानकारी साझा नहीं की है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि खाली क्षेत्रों को किस तरीके से तैयार किया गया और उनकी सटीकता कितनी है।
खगोल वैज्ञानिक कई दशकों से पराबैंगनी प्रकाश का अध्ययन कर रहे हैं। इन अवलोकनों से तारों, आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष में होने वाली दूसरी घटनाओं को समझने में मदद मिलती है। इससे पहले भी आकाश का अधिक व्यापक और संपूर्ण मानचित्र बनाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं।
नासा का Galaxy Evolution Explorer, जिसे GALEX के नाम से भी जाना जाता है, पराबैंगनी प्रकाश में ब्रह्मांड का अध्ययन करने वाले प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में से एक था।
वर्ष 2010 तक इस मिशन ने आकाश के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से का मानचित्र तैयार कर लिया था। इससे वैज्ञानिकों को पराबैंगनी विकिरण करने वाले स्रोतों और आकाशगंगाओं के विकास को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
हालांकि, इस सर्वेक्षण ने आकाश के बड़े हिस्से को कवर किया था, लेकिन इसका मानचित्र संपूर्ण नहीं था।
वर्ष 2021 में एक अन्य शोध प्रयास में डीप लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करके Far-ultraviolet Imaging Spectrograph (FIMS) से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर संयुक्त आकाशीय मानचित्र तैयार किए गए।
इस शोध ने भी उपलब्ध पराबैंगनी अवलोकनों की कुछ सीमाओं को सामने रखा। इनमें आकाश के अलग-अलग हिस्सों में असमान कवरेज और आँकड़ों के बीच मौजूद खाली क्षेत्र शामिल थे।
मार्च 2026 में शोधकर्ताओं ने प्रारंभिक ब्रह्मांड से जुड़े लाइमन-अल्फा (Lyman-alpha) पराबैंगनी उत्सर्जन का त्रि-आयामी मानचित्र तैयार करने की जानकारी दी थी।
यह परियोजना एक अलग वैज्ञानिक उद्देश्य पर केंद्रित थी और Anthropic के Claude Science वाले काम से इसका सीधा संबंध नहीं था। फिर भी, यह दिखाती है कि पराबैंगनी अवलोकन ब्रह्मांड के इतिहास को समझने में कई तरह से मदद कर सकते हैं।
पराबैंगनी विकिरण अंतरिक्ष में होने वाली ऊर्जावान घटनाओं के बारे में ऐसी जानकारी देता है, जो सामान्य दृश्य प्रकाश में आसानी से दिखाई नहीं देती। इसलिए पूरे आकाश का व्यापक पराबैंगनी मानचित्र वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
इसके कुछ प्रमुख लाभ हैं:
एक सतत मानचित्र वैज्ञानिकों को अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित सर्वेक्षणों की तुलना में अध्ययन के लिए अधिक एकसमान आधार भी दे सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक वैज्ञानिक महत्व उपलब्ध आँकड़ों की गुणवत्ता और उन क्षेत्रों की विश्वसनीयता पर निर्भर करेगा, जिन्हें अनुमान या पुनर्निर्माण के आधार पर तैयार किया गया है।
यह परियोजना बताती है कि AI वैज्ञानिकों को बड़े और बिखरे हुए आँकड़ों के साथ काम करने में मदद कर सकता है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों को अक्सर कई स्रोतों से जानकारी जुटानी पड़ती है, अधूरे आँकड़ों की पहचान करनी होती है, विश्लेषण के लिए कोड लिखना पड़ता है और पूरी प्रक्रिया का दस्तावेज तैयार करना होता है।
AI इन कामों को व्यवस्थित करने और शोध के कुछ चरणों में लगने वाला समय कम करने में सहायता दे सकता है। लेकिन AI की मदद से किए गए शोध की वैज्ञानिक जाँच फिर भी जरूरी है। शोधकर्ताओं के पास मूल आँकड़ों तक पहुँच, विश्लेषण की स्पष्ट जानकारी और नतीजों की स्वतंत्र जाँच की सुविधा होनी चाहिए।
इस पराबैंगनी मानचित्र के मामले में इस्तेमाल किए गए आँकड़ों, मानचित्र बनाने की तकनीकों और उनकी पुष्टि करने की प्रक्रिया को सार्वजनिक करना महत्वपूर्ण होगा। इससे वैज्ञानिक समुदाय यह जाँच सकेगा कि इस काम को दोहराया जा सकता है या नहीं और क्या भविष्य के शोध में इसका इस्तेमाल उपयोगी रहेगा।
Anthropic ने अभी तक शोधकर्ता की पहचान उजागर नहीं की है और न ही मानचित्र बनाने में इस्तेमाल किए गए आँकड़ों तथा तरीकों की पूरी जानकारी दी है।
अगला महत्वपूर्ण कदम पर्याप्त तकनीकी दस्तावेज और सहायक आँकड़े जारी करना होगा, ताकि स्वतंत्र शोधकर्ता इस उपलब्धि की जाँच कर सकें। यदि मानचित्र की पुष्टि हो जाती है और इसे खगोल विज्ञान से जुड़े शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाता है, तो यह ब्रह्मांड में पराबैंगनी विकिरण करने वाले स्रोतों के अध्ययन के लिए उपयोगी संसाधन बन सकता है।
Anthropic के Claude Science प्रोजेक्ट से पता चलता है कि AI पहले से मौजूद खगोलीय अवलोकनों को जोड़कर वैज्ञानिक आँकड़ों में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है। पूरे आकाश का पराबैंगनी मानचित्र बनाने का यह दावा आशाजनक है, लेकिन इसकी संपूर्णता, सटीकता और वैज्ञानिक विश्वसनीयता की पुष्टि के लिए इस्तेमाल किए गए आँकड़ों और तरीकों को सार्वजनिक करना जरूरी होगा।