भारत की प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी अल्ट्राटेक ने ऊर्जा बदलाव के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आदित्य बिड़ला समूह की इस कंपनी की कुल कैप्टिव ग्रीन पावर क्षमता 2 GW से अधिक हो गई है। इसके साथ ही UltraTech ऐसी क्षमता हासिल करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है।
कंपनी ने यह उपलब्धि राजस्थान के बाड़मेर में 116.55 MW की पवन ऊर्जा परियोजना शुरू करने के बाद हासिल की। इसके अलावा कर्नाटक स्थित सरलानगर सीमेंट वर्क्स में 10 MW की अतिरिक्त Waste Heat Recovery System (WHRS) क्षमता भी शुरू की गई है।
इन दोनों परियोजनाओं के जुड़ने के बाद UltraTech की कुल स्थापित ग्रीन एनर्जी क्षमता बढ़कर 2,024 MW हो गई है।
UltraTech के मौजूदा ग्रीन पावर पोर्टफोलियो में नवीकरणीय ऊर्जा और वेस्ट हीट रिकवरी दोनों शामिल हैं। कंपनी के अनुसार इसकी कुल क्षमता का विवरण इस प्रकार है:
कंपनी ने बताया कि यह ग्रीन पावर क्षमता फिलहाल उसकी कुल बिजली जरूरतों का लगभग 48 प्रतिशत पूरा करती है।
यह उपलब्धि बताती है कि अल्ट्राटेक अपने विनिर्माण कार्यों में पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
राजस्थान के बाड़मेर में शुरू की गई 116.55 MW की पवन ऊर्जा परियोजना ने UltraTech को 2 GW की ग्रीन पावर क्षमता का आंकड़ा पार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पवन ऊर्जा कंपनी के व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा है। इसके साथ ही UltraTech सौर ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा पहलों पर भी काम कर रही है।
कंपनी लंबे समय से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता में सुधार करना और विनिर्माण गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ UltraTech Waste Heat Recovery System यानी WHRS का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ा रही है।
कंपनी ने कर्नाटक के सरलानगर सीमेंट वर्क्स में हाल ही में 10 MW की WHRS क्षमता शुरू की है।
WHRS तकनीक में विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को बेकार जाने देने के बजाय उसे दोबारा इस्तेमाल कर बिजली तैयार की जाती है। इससे सीमेंट संयंत्र अपनी ऊर्जा दक्षता बढ़ा सकते हैं और बाहर से बिजली लेने पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
सीमेंट जैसे ऊर्जा-गहन उद्योग में यह तकनीक बिजली की खपत को अधिक प्रभावी बनाने और ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
UltraTech के विनिर्माण नेटवर्क में भी ग्रीन एनर्जी के बढ़ते इस्तेमाल का असर दिखाई दे रहा है।
कंपनी के अनुसार, FY27 में अब तक भारत में उसके 76 विनिर्माण संयंत्रों में से करीब एक-तिहाई संयंत्रों ने अपनी बिजली जरूरतों का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ग्रीन एनर्जी से पूरा किया है।
इनमें से पांच संयंत्रों में ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल 95 प्रतिशत से अधिक रहा है।
ये आंकड़े बताते हैं कि UltraTech के विनिर्माण कार्यों में नवीकरणीय ऊर्जा और वेस्ट हीट से प्राप्त ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
UltraTech ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान भी अपनी ग्रीन पावर क्षमता में तेजी से विस्तार किया।
कंपनी ने FY26 में करीब 430 MW की ग्रीन एनर्जी क्षमता शुरू की। यह विस्तार कंपनी की बहु-आयामी ऊर्जा बदलाव रणनीति का हिस्सा है।
इस रणनीति में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, वेस्ट हीट रिकवरी और ऊर्जा भंडारण जैसी अलग-अलग तकनीकों को शामिल किया गया है। इन सभी का उद्देश्य कंपनी के बिजली स्रोतों को अधिक स्वच्छ, कुशल और भरोसेमंद बनाना है।
UltraTech अपनी गतिविधियों में Battery Energy Storage Systems (BESS) को भी धीरे-धीरे शामिल कर रही है।
सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की एक बड़ी चुनौती यह है कि इनसे हर समय समान मात्रा में बिजली नहीं मिलती। सूरज की रोशनी और हवा की उपलब्धता के आधार पर बिजली उत्पादन में बदलाव होता रहता है।
बैटरी स्टोरेज इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली को बैटरी में जमा करके जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे ग्रीन एनर्जी का उपयोग बढ़ाने के साथ बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता भी बेहतर हो सकती है।
UltraTech पहले ही अलग-अलग स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठा चुकी है।
कंपनी ने 2025 में गुजरात स्थित सेवाग्राम सीमेंट वर्क्स में एक ऑन-साइट हाइब्रिड चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना शुरू की थी। UltraTech ने इसे भारत की पहली ऐसी परियोजना बताया था।
इस परियोजना में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को एक साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय बिजली को अधिक लगातार उपलब्ध कराना है।
ऊर्जा की बड़ी जरूरत वाले सीमेंट उद्योग के लिए इस तरह की व्यवस्था नवीकरणीय बिजली की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।
UltraTech के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम उसकी कैप्टिव थर्मल पावर को लेकर रणनीति में भी दिखाई देते हैं।
कंपनी के अनुसार, उसने 10 वर्षों से अधिक समय से नई कैप्टिव थर्मल पावर क्षमता में निवेश नहीं किया है।
यह नीति नई परियोजनाओं और मौजूदा संयंत्रों के विस्तार, दोनों पर लागू होती है। कंपनी की रणनीति अपने कुल बिजली मिश्रण में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाने पर केंद्रित है।
सीमेंट निर्माण एक ऊर्जा-गहन उद्योग है। इसलिए ऊर्जा दक्षता बढ़ाना और स्वच्छ बिजली का इस्तेमाल करना इसके डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
UltraTech नवीकरणीय ऊर्जा, WHRS और बैटरी स्टोरेज में निवेश के जरिए पारंपरिक बिजली पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रही है।
कंपनी आगे भी नवीकरणीय ऊर्जा और वेस्ट हीट रिकवरी परियोजनाओं को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि उसकी कुल बिजली जरूरतों में ग्रीन पावर का योगदान और अधिक बढ़ सके।
UltraTech एक 10 अरब अमेरिकी डॉलर की बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी है और चीन के बाहर बिक्री मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनियों में प्रमुख स्थान रखती है।
कंपनी की कुल ग्रे सीमेंट क्षमता 210.1 MTPA है, जबकि व्हाइट सीमेंट और पुट्टी क्षमता 3.5 MTPA है।
इतने बड़े विनिर्माण नेटवर्क के लिए बिजली की जरूरत भी काफी अधिक है। ऐसे में कंपनी का ग्रीन एनर्जी पोर्टफोलियो उसके पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ लंबे समय में स्वच्छ और अधिक कुशल ऊर्जा व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
UltraTech का 2,024 MW कैप्टिव ग्रीन पावर क्षमता हासिल करना भारत के औद्योगिक ऊर्जा बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा, वेस्ट हीट रिकवरी और बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकों को अपनी ऊर्जा रणनीति में शामिल किया है।
2 GW से अधिक ग्रीन पावर क्षमता के साथ UltraTech ने अपनी बिजली जरूरतों का लगभग 48 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। आने वाले समय में इन पहलों का विस्तार कंपनी की ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है।