टाटा मोटर्स ने इटली की वाणिज्यिक वाहन निर्माता कंपनी Iveco Group के अधिग्रहण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। कंपनी ने इवेको के सभी बकाया सामान्य शेयरों को खरीदने के लिए स्वैच्छिक निविदा पेशकश यानी Voluntary Tender Offer शुरू कर दी है। इस पेशकश के तहत Iveco के शेयरधारकों को प्रत्येक शेयर के लिए €14.1 नकद देने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह पेशकश टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी TML CV Holdings B.V. के माध्यम से शुरू की गई है। इसके लिए आवश्यक नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया है। इस सौदे को Tata Motors के वैश्विक वाणिज्यिक वाहन कारोबार को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
टाटा मोटर्स Tata Motors की पेशकश को लेकर अब इवेको के शेयरधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इवेकोके निदेशक मंडल ने इस सौदे का सर्वसम्मति से समर्थन किया है और कंपनी के शेयरधारकों से Tata Motors की पेशकश स्वीकार करने की सिफारिश की है।
इवेको की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी Exor ने भी इस सौदे का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई है। Exor के पास Iveco के लगभग 27.06 प्रतिशत सामान्य शेयर हैं, जो कंपनी के कुल मतदान अधिकारों का करीब 43.19 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।
Exor अपनी हिस्सेदारी को Tata Motors की निविदा पेशकश के तहत देने के लिए तैयार है। इससे प्रस्तावित अधिग्रहण को आगे बढ़ाने में Tata Motors को महत्वपूर्ण समर्थन मिल सकता है।
इवेको के शेयरधारकों के लिए Tata Motors की पेशकश की स्वीकृति अवधि 7 सितंबर से 26 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है। हालांकि, लागू नियमों के अनुसार इस अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
इस दौरान इवेको के शेयरधारक यह तय कर सकेंगे कि वे अपने शेयर Tata Motors की पेशकश के तहत बेचने चाहते हैं या नहीं।
इवेको ने 16 अक्टूबर को एक असाधारण आम बैठक यानी Extraordinary General Meeting बुलाने की योजना बनाई है। इस बैठक में शेयरधारक उस प्रस्तावित लेनदेन से जुड़े प्रस्तावों पर मतदान करेंगे।
यह मतदान सौदे की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि अधिग्रहण की अंतिम संरचना शेयरधारकों की स्वीकृति और Tata Motors द्वारा हासिल की जाने वाली हिस्सेदारी पर निर्भर करेगी।
इस अधिग्रहण प्रस्ताव के तहत Tata Motors का लक्ष्य Iveco के कम से कम 95 प्रतिशत शेयर हासिल करना है। हालांकि, संबंधित प्रस्ताव को शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर यह सीमा घटकर 80 प्रतिशत तक हो सकती है।
यदि Tata Motors Iveco की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने में सफल रहती है, तो कंपनी बाकी बचे शेयरों को भी खरीदने के लिए डच कानून के तहत Squeeze-Out प्रक्रिया अपना सकती है।
इस प्रक्रिया के जरिए शेष शेयरधारकों से बचे हुए शेयर हासिल किए जा सकते हैं, जिससे Tata Motors Iveco पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।
यदि Tata Motors की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक लेकिन 95 प्रतिशत से कम रहती है, तो कंपनी अधिग्रहण के बाद डीमर्जर और परिसमापन की प्रक्रिया अपनाने की योजना बना रही है। हालांकि, इसके लिए आवश्यक नियामकीय और अन्य मंजूरियां हासिल करना जरूरी होगा।
प्रस्तावित अधिग्रहण को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण नियामकीय मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें प्रतिस्पर्धा संबंधी मंजूरी, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी FDI से जुड़ी मंजूरी और विदेशी सब्सिडी नियमों के तहत स्वीकृति शामिल हैं।
इन मंजूरियों के बाद Tata Motors और Iveco के बीच प्रस्तावित सौदे को पूरा करने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। हालांकि, अंतिम रूप से सौदा पूरा होने के लिए निर्धारित शर्तों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी रहेगा।
Tata Motors और Iveco के प्रस्तावित संयोजन का उद्देश्य एक बड़ा वैश्विक वाणिज्यिक वाहन समूह तैयार करना है। दोनों कंपनियों के कारोबार को मिलाने के बाद संयुक्त समूह की सालाना बिक्री 5.9 लाख से अधिक वाहनों तक पहुंच सकती है।
वहीं, संयुक्त कारोबार से करीब €21 अरब का वार्षिक राजस्व उत्पन्न होने का अनुमान है। इससे नई कंपनी वैश्विक वाणिज्यिक वाहन बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकती है।
प्रस्तावित संयुक्त कारोबार का भौगोलिक आधार भी काफी विविध होगा। अनुमान के अनुसार, संयुक्त कारोबार में यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 46 प्रतिशत होगी। इसके बाद भारत की करीब 32 प्रतिशत, दक्षिण अमेरिका की 8 प्रतिशत और अन्य बाजारों की लगभग 14 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
इस तरह दोनों कंपनियों के कारोबार को मिलाने से संयुक्त समूह को अलग-अलग क्षेत्रों में संतुलित बाजार उपस्थिति मिल सकती है।
Tata Motors और Iveco के कारोबार में अपेक्षाकृत सीमित समानता है। Tata Motors की वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में भारत और उभरते बाजारों में मजबूत स्थिति है। दूसरी ओर, Iveco की यूरोप और लैटिन अमेरिका में स्थापित बाजार मौजूदगी और वितरण नेटवर्क है।
अधिग्रहण के बाद दोनों कंपनियों की उत्पादन क्षमता, आपूर्तिकर्ता नेटवर्क और उत्पाद पोर्टफोलियो को एक साथ लाने का अवसर मिलेगा। इससे संयुक्त कंपनी को अलग-अलग बाजारों में अपने उत्पादों और क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
Tata Motors के लिए यह सौदा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनी का वैश्विक वाणिज्यिक वाहन कारोबार और व्यापक हो सकता है।
Iveco के अधिग्रहण से Tata Motors को यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। Iveco की मौजूदा बाजार पहुंच, उत्पादन सुविधाएं और ग्राहक नेटवर्क Tata Motors के लिए वैश्विक विस्तार में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, संयुक्त समूह को भारत और अन्य उभरते बाजारों में Tata Motors की मजबूत स्थिति का लाभ मिल सकता है।
यदि Tata Motors निर्धारित हिस्सेदारी हासिल करने में सफल रहती है, तो दोनों कंपनियों के संयोजन से सालाना 5.9 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री और लगभग €21 अरब के राजस्व वाला वैश्विक वाणिज्यिक वाहन समूह तैयार हो सकता है।
यह सौदा Tata Motors को यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने तथा उत्पादन, आपूर्ति और उत्पाद क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर दे सकता है। हालांकि, अंतिम परिणाम Iveco के शेयरधारकों के फैसले और आगे की नियामकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।