भारत के समुद्री और तटीय पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चलाए गए ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान को इस वर्ष देशभर में बड़े स्तर पर जनभागीदारी मिली। अभियान के दौरान करीब 15 लाख लोगों ने महासागर संरक्षण की शपथ ली। यह अभियान 12 से 19 सितंबर 2026 तक चलाया गया और इसके तहत देश के 13 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 231 स्थानों पर तटीय सफाई अभियान आयोजित किए गए। इसमें नागरिकों, छात्रों, तटीय समुदायों, स्वयंसेवकों, सरकारी संस्थानों और वैज्ञानिक संगठनों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अभियान में लोगों की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि समुद्रों और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नागरिकों की लगातार भागीदारी भी जरूरी है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह Dr. Jitendra Singh, Union Minister of State (Independent Charge) for Science and Technology and Earth Sciences ने नई दिल्ली में आयोजित वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में समुद्री संरक्षण के साथ-साथ देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने विज्ञान से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के बीच अधिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने शहर आधारित वैज्ञानिक समूहों के विकास का सुझाव भी दिया। इन समूहों का उद्देश्य किसी शहर में काम कर रहे वैज्ञानिक संस्थानों और संबंधित पक्षों को एक साथ लाकर उनके बीच सहयोग, जानकारी साझा करने और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल कर रहा है, उनकी जानकारी आम लोगों तक प्रभावी और समय पर पहुंचनी चाहिए।
बैठक में वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल भाषा और आसानी से समझ आने वाले माध्यमों के जरिए जनता तक पहुंचाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों और आम समाज के बीच संबंध को मजबूत करना तथा लोगों को देश में हो रहे अनुसंधान और तकनीकी विकास की जानकारी देना है।
बैठक में वैज्ञानिक उपलब्धियों की डिजिटल लाइब्रेरी तैयार करने की योजना की भी समीक्षा की गई। प्रस्तावित डिजिटल लाइब्रेरी को एक साझा मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां भारत के वैज्ञानिक संस्थानों के काम और उपलब्धियों से जुड़ी वीडियो तथा अन्य सामग्री को एक जगह उपलब्ध कराया जा सकेगा।
CSIR-NIScPR को इस डिजिटल लाइब्रेरी के संस्थागत ढांचे और कार्यान्वयन की व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। संबंधित मंत्रालय और विभाग भी इसमें अपनी भागीदारी तथा संसाधनों को साझा करने से जुड़े पहलुओं पर काम कर रहे हैं।
बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग, CSIR और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे डिजिटल संचार कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।
इन पहलों के तहत विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियों को छोटे और आसानी से समझ आने वाले डिजिटल प्रारूपों में लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए वैज्ञानिक जानकारी को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘विज्ञान की बात’ कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से शुरू की गई मासिक व्याख्यान श्रृंखला है। इसका उद्देश्य भारत के स्वायत्त वैज्ञानिक संस्थानों में हो रहे शोध और विकास कार्यों को आम लोगों तक पहुंचाना है।
इस कार्यक्रम का दूसरा संस्करण 26 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसमें एस.एन. बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र के निदेशक शामिल होंगे। कार्यक्रम में मौलिक भौतिक विज्ञान और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास पर चर्चा की जाएगी।
‘विज्ञान की बात’ का पहला संस्करण 29 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया था। इसमें शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग से जुड़े 7,500 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
मासिक कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई यह श्रृंखला आधुनिक शोध, नई तकनीकों और वैज्ञानिक विकास को लोगों के सामने रखने का एक नियमित माध्यम बनने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवाद को बढ़ाना भी है।
समीक्षा बैठक में CSIR@85 से जुड़ी तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसमें 25 सितंबर 2026 को होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी ली गई। इसके साथ ही ESTIC-2026 से संबंधित तैयारियों और कार्यक्रम की प्रगति पर भी चर्चा की गई।
बैठक में वैज्ञानिक संस्थानों की उपलब्धियों को समन्वित तरीके से लोगों तक पहुंचाने और बड़े कार्यक्रमों के लिए प्रभावी जनसंपर्क व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी तथा विभागों के भीतर बेहतर तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने विषय आधारित बातचीत और वैज्ञानिक समूहों के माध्यम से संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने जनसंपर्क और लोगों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने वाली टीमों के बीच नियमित संवाद की जरूरत पर भी जोर दिया। बेहतर तालमेल से वैज्ञानिक संस्थान अपनी प्रमुख उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी लोगों तक अधिक व्यवस्थित तरीके से पहुंचा सकते हैं।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने वाली योजनाएं एक व्यापक प्रयास की ओर संकेत करती हैं। समुद्रों की सफाई और संरक्षण के लिए चलाए गए अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हुई, जबकि ‘विज्ञान की बात’ और प्रस्तावित डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से वैज्ञानिक उपलब्धियों को समाज के साथ जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान 2022 में शुरू हुआ था और समय के साथ यह देशभर में समुद्र तटों की सफाई तथा समुद्री संरक्षण से जुड़ी जनभागीदारी वाली पहल के रूप में विकसित हुआ है। 2026 में इसका आयोजन 12 से 19 सितंबर तक किया गया।
2026 के अभियान में 15 लाख महासागर संरक्षण शपथ और 13 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के 231 स्थानों पर तटीय सफाई गतिविधियां इस पहल में जनता की व्यापक भागीदारी को दर्शाती हैं। अभियान में छात्रों, स्वयंसेवकों, तटीय समुदायों और विभिन्न संस्थानों को जोड़ा गया।
भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को आम लोगों से जोड़ने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ जैसे अभियान लोगों को समुद्री पर्यावरण की जिम्मेदारी से जोड़ते हैं, जबकि ‘विज्ञान की बात’ और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी पहल वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल तरीके से जनता तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं।
15 लाख लोगों द्वारा महासागर संरक्षण की शपथ लेना इस बात को सामने लाता है कि पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं वैज्ञानिक मंत्रालयों के बीच सहयोग, डिजिटल संचार और नियमित सार्वजनिक संवाद से भारत के वैज्ञानिक कार्यों को व्यापक समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।