दुनिया पहले से ही रिकॉर्ड स्तर के तापमान का सामना कर रही है और अब एक शक्तिशाली El Niño की स्थिति आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को और बढ़ा सकती है। University of Chicago के Climate Impact Lab के नए आकलन के अनुसार, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में दुनिया भर में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं। इनमें भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। इस आंकड़े में करीब 1,600 मौतों का ऊपर-नीचे का अनुमान भी शामिल है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस आकलन का उद्देश्य केवल संभावित मौतों की संख्या बताना नहीं है, बल्कि यह पहचानना भी है कि किन क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी का खतरा अधिक हो सकता है, ताकि सरकारें और स्थानीय प्रशासन समय रहते बचाव के उपाय कर सकें।
भारत उन देशों में शामिल है जहां आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अध्ययन के अनुसार, भारत में अनुमानित अतिरिक्त मौतों का लगभग आधा हिस्सा दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच हो सकता है। इस अवधि में करीब 7,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि भारत में गर्मी से जुड़ा जोखिम फरवरी के बाद भी खत्म नहीं हो सकता और देश के 2027 के गर्मी वाले महीनों में मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
भारत की बड़ी आबादी, अलग-अलग जलवायु क्षेत्र और कई इलाकों में पहले से मौजूद गर्मी के जोखिम इसे इस तरह के मौसम संबंधी बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। खासतौर पर खुले में काम करने वाले श्रमिक, बुजुर्ग, बच्चे और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अत्यधिक गर्मी के दौरान अधिक जोखिम में रह सकते हैं।
भारत में दिसंबर से फरवरी आमतौर पर गर्मियों की तुलना में ठंडे महीने होते हैं। ऐसे में इस अवधि में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान विशेष ध्यान आकर्षित करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में मौतों का असर समय के साथ बढ़ सकता है और यह जोखिम देश के अगले गर्मी के मौसम तक जारी रह सकता है।
Climate Impact Lab के आकलन के अनुसार, मौजूदा El Niño घटना के शुरुआती छह महीनों में सामान्य वर्ष की तुलना में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं। अध्ययन में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक की अवधि पर विशेष ध्यान दिया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका सबसे बड़ा असर उन क्षेत्रों में पड़ सकता है जहां अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए संसाधन, स्वास्थ्य सेवाएं और मौसम संबंधी चेतावनी प्रणालियां अपेक्षाकृत कमजोर हैं। Global South के कई देशों में इस कारण जोखिम अधिक रहने का अनुमान है।
अध्ययन ने दुनिया के 24,000 से अधिक क्षेत्रों में तापमान और मृत्यु दर के बीच संबंधों का इस्तेमाल किया है। इसके बाद मौसमी तापमान पूर्वानुमानों के आधार पर संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया।
भारत के अलावा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर लगभग 19,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। वहीं इंडोनेशिया में लगभग 19,300 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
दक्षिण अमेरिका में ब्राजील के लिए लगभग 13,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। अफ्रीका के Sahel क्षेत्र में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड को मिलाकर लगभग 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इनमें अकेले नाइजीरिया में लगभग 31,400 मौतों का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त मौतों का बड़ा हिस्सा Global South के देशों में केंद्रित हो सकता है। इन क्षेत्रों में कई समुदायों के पास अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त ठंडक की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और शुरुआती चेतावनी प्रणाली उपलब्ध नहीं होती।
इसी कारण शोधकर्ताओं ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पहले से संसाधन उपलब्ध कराने और जोखिम वाले इलाकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है।
El Niño एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान, बारिश और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है।
Climate Impact Lab के आकलन के अनुसार, मौजूदा El Niño के दौरान दुनिया की भूमि का औसत तापमान सामान्य से लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इसके साथ सामान्य वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक बेहद गर्म दिन देखने को मिल सकते हैं।
बारिश के बदलते पैटर्न का असर खेती, जल उपलब्धता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ सकता है। इससे पहले से गर्मी और पानी की कमी का सामना कर रहे समुदायों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने से शरीर पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक और गर्मी से संबंधित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। अत्यधिक तापमान पहले से मौजूद हृदय और सांस संबंधी बीमारियों को भी गंभीर बना सकता है।
जिन लोगों के पास घर में पर्याप्त ठंडक, स्वास्थ्य सेवाओं या गर्मी से बचाव की जानकारी तक आसान पहुंच नहीं है, उनके लिए खतरा अधिक हो सकता है। खुले में काम करने वाले लोगों को भी गर्मी के लंबे समय तक संपर्क में रहना पड़ सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन अनुमानों का इस्तेमाल सरकारें और स्थानीय संस्थाएं पहले से तैयारी करने के लिए कर सकती हैं। संभावित उपायों में गर्मी की चेतावनी प्रणाली, Cooling Centres, पानी और Hydration Stations, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं।
जो इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं, वहां आपातकालीन संसाधन पहले पहुंचाने से गर्मी के स्वास्थ्य प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
यह समझना जरूरी है कि भारत के लिए 15,800 और दुनिया के लिए 4,51,000 का आंकड़ा निश्चित मौतों की संख्या नहीं है। यह जलवायु और मृत्यु दर से जुड़े मॉडल के आधार पर निकाला गया अनुमान है।
वास्तविक स्थिति El Niño की तीव्रता, तापमान कितने समय तक सामान्य से ऊपर रहता है, बारिश के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, चेतावनी प्रणालियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
Climate Impact Lab के शोधकर्ताओं ने मौजूदा El Niño को भविष्य की जलवायु परिस्थितियों की एक झलक के रूप में बताया है। उनका आकलन है कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण आज की असामान्य गर्म परिस्थितियां कुछ क्षेत्रों में अधिक सामान्य हो सकती हैं।
इसलिए केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। गर्मी से बचाव की बेहतर योजना, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, चेतावनी प्रणालियों का विस्तार और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए लंबे समय की रणनीति भी जरूरी होगी।
University of Chicago के Climate Impact Lab का यह आकलन बताता है कि शक्तिशाली El Niño और पहले से बढ़े हुए वैश्विक तापमान के कारण आने वाले महीनों में गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों और दुनिया में 4,51,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान गंभीर चिंता का संकेत है, लेकिन इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
इन अनुमानों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य समय रहते तैयारी करना है। गर्मी की चेतावनी, ठंडक की सुविधाएं, पर्याप्त पानी, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा जैसे कदम संभावित जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।