केंद्र सरकार देश के छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है। Union Cabinet मंगलवार को ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund को मंजूरी दे सकती है। Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की बैठक में विचार किया जा सकता है।
यह फंड वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसे छोटे कारोबार और उद्यमों को पूंजी उपलब्ध कराना है, जिनमें आगे बढ़ने की क्षमता है, लेकिन विस्तार के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत है।
प्रस्तावित फंड के जरिए तय पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली चुनिंदा कंपनियों को इक्विटी सहायता देने की योजना है। इससे उन छोटे और मध्यम कारोबारों को मदद मिल सकती है, जिन्हें मौजूदा समय में कर्ज हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था में छोटे और मध्यम कारोबारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, कई छोटे उद्यमों के सामने कारोबार बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
क्रेडिट की उपलब्धता सीमित होने पर ऐसे कारोबारों के लिए नई मशीनरी खरीदना, तकनीक को बेहतर करना, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना या नए बाजारों में विस्तार करना मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित SME Growth Fund का उद्देश्य इसी तरह की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।
सरकार ऐसे कारोबारों पर ध्यान देना चाहती है, जिन्होंने विकास की क्षमता दिखाई है और जिन्हें अपने संचालन का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस फंड के तहत सभी कंपनियों को सीधे सहायता नहीं दी जाएगी। इसके बजाय पहले से तय पात्रता मानदंडों के आधार पर चुनिंदा उद्यमों को इक्विटी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे कारोबारों को आगे बढ़ने में मदद करना है, जिनमें मजबूत विकास क्षमता है, लेकिन पूंजी की कमी उनकी प्रगति में बाधा बन रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Finance Minister Nirmala Sitharaman ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते समय ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund की घोषणा की थी।
इस फंड के जरिए देशभर में विकास की संभावनाओं वाले उद्यमों के विस्तार को समर्थन देने की योजना बनाई गई है। वित्त मंत्रालय ने उस समय कहा था कि फंड तय पात्रता मानदंडों के आधार पर चुनिंदा उद्यमों को इक्विटी सहायता उपलब्ध कराएगा।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब कई MSME को कारोबार बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाने में मुश्किलें आती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल उन MSME के लिए उपयोगी हो सकती है, जो वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा पुरानी तकनीक के कारण प्रतिस्पर्धा में पीछे रह रहे कारोबारों को भी अतिरिक्त पूंजी मिलने से अपनी उत्पादन क्षमता और तकनीकी व्यवस्था सुधारने का अवसर मिल सकता है।
नई पूंजी का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, तकनीकी उन्नयन और अन्य व्यावसायिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है, हालांकि वास्तविक सहायता और पात्रता का दायरा सरकार की अंतिम व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
सरकार ने MSME को इक्विटी सहायता देने के लिए पहले से मौजूद Self-Reliant India Fund को भी मजबूत करने की योजना बनाई है।
बजट में इस फंड के लिए ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान किया गया था। इसके अलावा व्यापक Fund-of-Funds व्यवस्था के तहत पूरे वर्ष और आवंटन मिलने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य MSME में इक्विटी भागीदारी को लगातार समर्थन देना है। इससे ऐसे छोटे और मध्यम कारोबारों को पूंजी जुटाने के नए रास्ते मिल सकते हैं, जिन्हें पारंपरिक कर्ज के माध्यम से वित्त प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
सरकार का ध्यान केवल इक्विटी फंडिंग तक सीमित नहीं है। बजट में छोटे कारोबारों की नकदी और कार्यशील पूंजी से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए भी कई प्रस्ताव रखे गए हैं।
MSME के लिए समय पर भुगतान मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी कारोबार को अपने ग्राहकों से भुगतान देर से मिलता है, तो उसके पास कर्मचारियों के वेतन, कच्चा माल खरीदने और अन्य रोजमर्रा के खर्चों के लिए पर्याप्त नकदी नहीं बचती।
इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने Trade Receivables Discounting System यानी TReDS को मजबूत करने से जुड़े कई उपाय प्रस्तावित किए हैं।
सरकार की योजना सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए MSME के साथ लेनदेन करते समय TReDS का इस्तेमाल अनिवार्य करने की है।
TReDS एक ऐसा मंच है, जिसके जरिए MSME अपने व्यापारिक बकाये या चालानों को समय से पहले नकदी में बदलने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इससे छोटे कारोबारों के सामने आने वाली कार्यशील पूंजी की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
यदि बड़े सार्वजनिक उपक्रमों से मिलने वाले भुगतान को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया जा सके, तो MSME अपने दैनिक कारोबार को अधिक सुचारु रूप से चला सकते हैं।
सरकार ने Government e-Marketplace (GeM) को TReDS के साथ जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद और MSME को मिलने वाले भुगतान की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस एकीकरण से सरकारी खरीद के माध्यम से कारोबार करने वाले छोटे उद्यमों को अपने बकाये के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
बजट में इनवॉयस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारों को अपने बकाये के बदले वित्त प्राप्त करने में अधिक सुविधा देना है।
इसके अलावा सरकार TReDS के माध्यम से पैदा होने वाले प्राप्य भुगतानों को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के रूप में जारी करने की अनुमति देने की योजना बना रही है।
इन उपायों से वित्तीय संस्थानों और बाजार के अन्य भागीदारों के लिए MSME के बकाये से जुड़े वित्तीय साधनों में भागीदारी के नए अवसर बन सकते हैं।
SME Growth Fund और TReDS से जुड़े प्रस्तावों को एक साथ देखा जाए तो सरकार MSME की दो प्रमुख वित्तीय जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
पहली जरूरत कारोबार के विस्तार के लिए इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना है। दूसरी जरूरत रोजमर्रा के कारोबार को चलाने के लिए कार्यशील पूंजी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund विकास की क्षमता रखने वाले चुनिंदा कारोबारों को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। वहीं TReDS, GeM एकीकरण और क्रेडिट गारंटी से जुड़े प्रस्ताव छोटे कारोबारों की नकदी स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
यदि कैबिनेट प्रस्तावित फंड को मंजूरी देती है और बजट में घोषित अन्य उपाय प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो इससे देश के MSME क्षेत्र को विस्तार, तकनीकी सुधार और वित्तीय स्थिरता के लिए अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।