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सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) लंबे समय में धन बनाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है, और LIC Mutual Fund ने अपनी कई स्कीम्स के जरिए इसे साबित किया है। कुछ चुनिंदा फंड्स में ₹10,000 मासिक SIP ने 10 वर्षों में लगभग ₹34 लाख का फंड तैयार किया है, जो कंपाउंडिंग और नियमित निवेश की ताकत को दर्शाता है।
LIC म्यूचुअल फंड की स्थापना 20 अप्रैल 1994 को हुई थी। यह Life Insurance Corporation of India द्वारा प्रायोजित है। इसका ट्रस्टी LIC Mutual Fund Trustee Private Ltd. है, जबकि इसकी एसेट मैनेजमेंट कंपनी LIC Mutual Fund Asset Management Limited है।
यह फंड हाउस इक्विटी और डेट दोनों कैटेगरी में निवेश विकल्प प्रदान करता है और समय के साथ निवेशकों के बीच एक मजबूत भरोसेमंद नाम बन चुका है।
नीचे LIC म्यूचुअल फंड की पांच प्रमुख स्कीम्स दी गई हैं जिन्होंने पिछले 10 वर्षों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
LIC MF Infrastructure Fund ने पिछले 10 वर्षों में लगभग 18.51% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है।
NAV: ₹60.08 (29 अप्रैल 2026 तक)
SIP ग्रोथ: ₹10,000 मासिक → लगभग ₹34.73 लाख (10 साल में)
कुल संपत्ति: ₹905 करोड़
एक्सपेंस रेशियो: 1.01%
बेंचमार्क: NIFTY Infrastructure TRI
यह फंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ग्रोथ से लाभ उठाता है और हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड निवेशकों के लिए उपयुक्त है।
LIC MF Large and Mid Cap Fund बड़े और मिड कैप कंपनियों में निवेश करता है।
औसत रिटर्न: 16.18% (10 साल)
NAV: ₹43.11
SIP ग्रोथ: ₹10,000 मासिक → लगभग ₹29.98 लाख
कुल संपत्ति: ₹2,710 करोड़
बेंचमार्क: NIFTY Large Midcap 250 TRI
यह फंड संतुलित जोखिम और स्थिर ग्रोथ का विकल्प प्रदान करता है।
LIC MF Nifty Next 50 Index Fund NIFTY Next 50 इंडेक्स को फॉलो करता है।
औसत रिटर्न: 14.41%
NAV: ₹57.62
SIP ग्रोथ: ₹10,000 मासिक → लगभग ₹26.87 लाख
कुल संपत्ति: ₹90 करोड़
बेंचमार्क: NIFTY Next 50 TRI
यह फंड उभरती बड़ी कंपनियों में निवेश का अवसर देता है।
LIC MF Nifty 100 ETF टॉप 100 कंपनियों में निवेश करता है।
औसत रिटर्न: 13.10%
NAV: ₹271.98
SIP ग्रोथ: ₹10,000 मासिक → लगभग ₹24.81 लाख
कुल संपत्ति: ₹668 करोड़
बेंचमार्क: NIFTY 100 TRI
यह कम लागत में व्यापक बाजार एक्सपोजर देता है।
LIC MF Nifty 50 ETF भारत के प्रमुख 50 शेयरों में निवेश करता है।
औसत रिटर्न: 13.05%
NAV: ₹267.46
SIP ग्रोथ: ₹10,000 मासिक → लगभग ₹24.74 लाख
कुल संपत्ति: ₹799 करोड़
बेंचमार्क: NIFTY 50 TRI
यह फंड कम खर्च में स्थिर रिटर्न प्रदान करता है।
₹10,000 मासिक SIP का लाखों में बदलना दर्शाता है कि लंबी अवधि में निवेश कितना शक्तिशाली हो सकता है। SIP निवेश बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित करता है और कंपाउंडिंग का लाभ देता है।
निष्कर्ष: 2026 में सही फंड चुनना जरूरी
LIC म्यूचुअल फंड विभिन्न जोखिम स्तरों के अनुसार विकल्प प्रदान करता है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम क्षमता के अनुसार फंड चुनना चाहिए।
लंबी अवधि के निवेश में सही चयन से बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
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भारतीय शेयर बाजार में अब बड़े विदेशी निवेशकों का एकाधिकार खत्म हो रहा है, और इसकी कमान रिटेल निवेशकों (आम निवेशक) ने अपने हाथों में ले ली है, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मार्च महीने के ताजा आंकड़े इस बात की सबसे बड़ी गवाही दे रहे हैं, हर महीने अपनी सैलरी या कमाई से थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाने वाले नौकरीपेशा और आम लोगों ने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश का एक नया इतिहास रच दिया है, मार्च में SIP के जरिए होने वाला निवेश अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time high) पर पहुंच गया है, फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये के मुकाबले यह 8 फीसदी बढ़कर 32,087 करोड़ रुपये हो गया है।
SIP की इस रफ्तार का सीधा असर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले फंड) पर पड़ा है, मार्च के महीने में इक्विटी फंड्स में निवेश ने 56 फीसदी की जोरदार छलांग लगाई है, यह आंकड़ा 40,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि ठीक एक महीने पहले फरवरी में यह 25,977 करोड़ रुपये था, अगर हम पिछले साल के इसी महीने (25,082 करोड़ रुपये) से इसकी तुलना करें, तो यह सालाना आधार पर 61% की शानदार ग्रोथ है, यह स्पष्ट करता है, कि पारंपरिक बचत योजनाओं से इतर, लोग अब लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी बाजार पर अपना गहरा भरोसा जता रहे हैं।
जब बात यह आती है, कि आम आदमी का यह पैसा जा कहां रहा है, तो इसमें सबसे ऊपर नाम ‘फ्लेक्सी कैप फंड्स’ का आता है, बाजार की अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने अपना सबसे ज्यादा पैसा (10,054 करोड़ रुपये) इसी कैटेगरी में डाला है, यह लगातार दूसरा महीना है, जब फ्लेक्सी कैप में 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है, फ्लेक्सी कैप फंड मैनेजरों को बाजार की स्थिति के अनुसार बड़ी, छोटी या मझोली कंपनियों में पैसा लगाने की छूट देते हैं।
इसके अलावा छोटी और मझोली कंपनियों पर भी लोगों का अटूट विश्वास बना हुआ है, स्मॉलकैप फंड्स में 6,263 करोड़ रुपये और मिडकैप फंड्स में 6,063 करोड़ रुपये का मजबूत निवेश देखने को मिला है, हालांकि वित्तीय वर्ष का अंत होने के कारण शायद निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को व्यवस्थित किया, जिसके चलते टैक्स बचाने वाले ईएलएसएस (ELSS) से 437 करोड़ रुपये और डिविडेंड फंड्स से 59.21 करोड़ रुपये की निकासी भी हुई है।
जहां एक तरफ इक्विटी बाजार में बहार है, वहीं सुरक्षित माने जाने वाले डेट फंड्स का हाल एकदम उल्टा नजर आया, मार्च में डेट म्यूचुअल फंड्स से लगभग 2.94 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम निकासी हुई, जबकि फरवरी में इन्हीं फंड्स में 42,106 करोड़ रुपये आए थे, दरअसल मार्च वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना होता है, इस समय कॉरपोरेट घराने एडवांस टैक्स चुकाने और अपनी बैलेंस शीट को संतुलित करने के लिए लिक्विड फंड्स से पैसा निकालते हैं, यही वजह है, कि अकेले लिक्विड फंड्स से 1.34 लाख करोड़ रुपये निकाले गए, ओवरनाइट फंड्स और मनी मार्केट फंड्स से भी भारी निकासी हुई।
इसके साथ ही शेयर और बॉन्ड दोनों में निवेश करने वाले हाइब्रिड फंड्स से भी 16,538 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई, हालांकि इस पूरी गिरावट के बीच मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स ने निवेशकों को अपनी ओर खींचा और इसमें 5,212 करोड़ रुपये का नया निवेश आया।