दुनियाभर में स्मार्टफोन बाजार इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। मेमोरी चिप की लगातार बनी हुई कमी, बढ़ती उत्पादन लागत और उपभोक्ताओं की बदलती मांग ने इस उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है। इन परिस्थितियों के बीच वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल लगभग 20% की भारी गिरावट दर्ज किए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि शिपमेंट का स्तर पिछले 14 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब स्मार्टफोन कंपनियां नई तकनीक, बेहतर कैमरे, AI सुविधाओं और प्रीमियम उपकरणों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, बढ़ती लागत और आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के कारण कंपनियों के लिए बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसका असर फोन की उपलब्धता, कंपनियों की रणनीति और ग्राहकों की जेब पर भी पड़ रहा है।
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें मेमोरी चिप की कमी, सप्लाई चेन में रुकावटें, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और ग्राहकों की मांग में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं।
स्मार्टफोन बनाने के लिए कंपनियों को प्रोसेसर, मेमोरी चिप, डिस्प्ले और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटकों की जरूरत होती है। इनमें से किसी महत्वपूर्ण हिस्से की आपूर्ति प्रभावित होने पर फोन का उत्पादन और बाजार तक उसकी पहुंच दोनों बाधित हो सकते हैं।
स्मार्टफोन में मेमोरी चिप का इस्तेमाल डेटा और ऐप से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसकी उपलब्धता कम होने या कीमत बढ़ने पर फोन बनाने की कुल लागत भी बढ़ जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी चिप की लगातार कमी ने स्मार्टफोन उद्योग की आपूर्ति को प्रभावित किया है। कंपनियों को जरूरी घटक हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे कुछ मॉडलों के उत्पादन और बाजार में उनकी उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं कंपनियों के लिए समय पर उत्पादों की आपूर्ति करना कठिन बना देती हैं। यदि किसी कंपनी को पर्याप्त मात्रा में जरूरी घटक नहीं मिलते, तो वह बाजार की मांग के अनुसार फोन तैयार नहीं कर पाती।
स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों की मांग भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फोन की कीमतें बढ़ने पर उपभोक्ता नया स्मार्टफोन खरीदने का फैसला टाल सकते हैं या कम कीमत वाले विकल्प चुन सकते हैं।
ऐसी स्थिति में कंपनियों को अपनी उत्पादन योजनाओं और बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ता है। वैश्विक बाजार में आर्थिक परिस्थितियों, कीमतों और ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बदलाव ने भी स्मार्टफोन निर्माताओं के सामने चुनौतियां बढ़ाई हैं।
स्मार्टफोन बाजार पर बढ़ती लागत का सीधा असर दिखाई दे रहा है। Counterpoint Research के अनुसार, मेमोरी चिप की कीमतों में वृद्धि ने फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख घटकों की कुल लागत को प्रभावित किया है। उद्योग में इस कुल लागत को बिल ऑफ मैटेरियल्स (BOM) कहा जाता है।
जब मेमोरी चिप जैसे जरूरी घटक महंगे होते हैं, तो कंपनियों के लिए प्रत्येक स्मार्टफोन का उत्पादन पहले के मुकाबले अधिक खर्चीला हो जाता है। यदि दूसरे घटकों की कीमतें भी बढ़ रही हों, तो लागत का दबाव और गहरा हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मार्टफोन निर्माताओं ने बढ़ती लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया है। इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ा है और 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन की खुदरा कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी होने की बात कही गई है।
कीमतें बढ़ने से ग्राहकों को नया फोन खरीदने के लिए पहले से अधिक पैसा खर्च करना पड़ सकता है। खास तौर पर वे उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं, जो सीमित बजट में स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं।
हालांकि, सभी कंपनियों और मॉडलों पर इसका असर एक जैसा होना जरूरी नहीं है। कीमतों में बदलाव फोन की श्रेणी, उसमें इस्तेमाल किए गए घटकों और कंपनी की मूल्य निर्धारण रणनीति पर भी निर्भर कर सकता है।
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में गिरावट के बावजूद Samsung और Apple अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में मजबूती दिखाई दी, हालांकि उनकी शिपमेंट में भी कुछ गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, Samsung की स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल 3% की गिरावट आई, लेकिन उसकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 23% हो गई।
कंपनी की स्थिति को मजबूत बनाए रखने में उसके Galaxy Z Fold8 सीरीज के प्रति मांग और मिड-रेंज स्मार्टफोन के लिए घटकों की स्थिर आपूर्ति को सहायक बताया गया है।
यह संकेत देता है कि आपूर्ति संबंधी कठिनाइयों के दौरान भी उन कंपनियों को लाभ मिल सकता है, जो अपने लोकप्रिय मॉडलों की मांग को पूरा करने और जरूरी घटकों की उपलब्धता बनाए रखने में सक्षम हैं।
Apple ने भी वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी। रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 22% तक पहुंच गई।
हालांकि, इस अवधि में Apple की शिपमेंट में साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसका एक कारण सामान्य शुरुआती मॉडल iPhone 18 की अनुपस्थिति बताया गया है।
Apple का प्रदर्शन यह दिखाता है कि शिपमेंट में गिरावट आने के बावजूद किसी कंपनी की बाजार हिस्सेदारी मजबूत रह सकती है। बाजार हिस्सेदारी और कुल शिपमेंट अलग-अलग माप हैं। इसलिए किसी कंपनी की हिस्सेदारी बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि उसने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक फोन भेजे हैं।
Samsung और Apple के मुकाबले कुछ अन्य स्मार्टफोन कंपनियों को अधिक दबाव का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi, OPPO और Vivo की शिपमेंट में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती लागत और बाजार की चुनौतियों ने इन कंपनियों की स्थिति को प्रभावित किया।
Xiaomi की शिपमेंट में 30% से अधिक की गिरावट आने की बात कही गई है। इसके बाद कंपनी की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी घटकर लगभग 10% रह गई।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपने लाभ को सुरक्षित रखने के लिए कम कीमत वाले स्मार्टफोन और कुछ विदेशी बाजारों में अपना कारोबार सीमित किया। बढ़ती लागत के दौर में यह रणनीति कंपनी के मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव को कम करने का प्रयास हो सकती है।
हालांकि, कम कीमत वाले मॉडलों पर निर्भरता घटाने से बिक्री की मात्रा पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कंपनियों को लागत नियंत्रण और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, OPPO और Vivo दोनों की स्मार्टफोन शिपमेंट में 20% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही OPPO की बाजार हिस्सेदारी घटकर लगभग 9% और Vivo की हिस्सेदारी 8% रह गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्मार्टफोन बाजार की चुनौतियां केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं। बढ़ती लागत, घटकों की कमी और ग्राहकों की बदलती खरीदारी की आदतों के कारण कई निर्माताओं को अपनी कारोबारी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
आने वाले समय में वैश्विक स्मार्टफोन बाजार की स्थिति काफी हद तक मेमोरी चिप की उपलब्धता, घटकों की कीमतों और उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करेगी। यदि आपूर्ति में सुधार होता है और लागत का दबाव कम होता है, तो कंपनियों को उत्पादन और बिक्री को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, यदि चिप की कमी और महंगाई लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों को कीमतों, फोन के मॉडलों और बाजार रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। ग्राहकों के लिए भी नया स्मार्टफोन खरीदने से पहले कीमत, सुविधाओं और लंबे समय तक मिलने वाले उपयोग का आकलन करना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में बताई गई गिरावट इस उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। Samsung और Apple की मजबूत बाजार हिस्सेदारी के बावजूद, Xiaomi, OPPO और Vivo जैसी कंपनियों पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में मेमोरी चिप की आपूर्ति और बढ़ती लागत यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी कि स्मार्टफोन बाजार कितनी तेजी से संभल पाता है।