नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 SEMICON India 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े 25 MoUs और महत्वपूर्ण घोषणाएं हुईं। इन समझौतों और रणनीतिक सहयोग के जरिए सेमीकंडक्टर सामग्री, विनिर्माण, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, चिप डिजाइन और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
इन पहलों में भारतीय और वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े भागीदार शामिल रहे। सहयोग का मुख्य फोकस महत्वपूर्ण सामग्रियों के स्थानीय उत्पादन, स्वदेशी सिलिकॉन कार्बाइड पावर तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स, डीप-टेक निवेश, विशेष लॉजिस्टिक्स और कुशल कार्यबल तैयार करने पर रहा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दूसरे दिन की चर्चाओं में नीति निर्माता, वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय उद्योग, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शिक्षाविद और छात्र शामिल हुए। इस दौरान विनिर्माण, सप्लाई चेन, अनुसंधान एवं विकास (R&D), अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, चिप डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर सामग्री और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इन चर्चाओं ने भारत के एक एकीकृत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी “Silicon to Systems” इकोसिस्टम की दिशा में बढ़ते कदमों को रेखांकित किया।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक फायरसाइड बातचीत के दौरान कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के चरण से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि India Semiconductor Mission (ISM) 2.0, ISM 1.0 के तहत तैयार किए गए आधार को आगे बढ़ाएगा। इसके लिए छह प्रमुख स्तंभों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें चिप डिजाइन, मशीन और सामग्री, अधिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करना, ATMP/OSAT उद्योग को मजबूत करना, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा और कौशल विकास शामिल हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव Union Minister for Electronics and Information Technology, Railways, and Information and Broadcasting Ashwini Vaishnaw ने कहा कि ISM 1.0 को मूल रूप से छह साल का कार्यक्रम माना गया था, लेकिन इसके लक्ष्यों को केवल चार वर्षों में हासिल कर लिया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ISM 2.0 भी इसी तरह निर्धारित समय से पहले आगे बढ़ सकता है। इसके पीछे उन्होंने निवेशकों की मजबूत और लगातार बढ़ती रुचि को एक महत्वपूर्ण कारण बताया।
उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की डिजाइन क्षमता को देश की प्रमुख ताकतों में से एक बताया। उनके अनुसार, ISM 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन कंपनियां उभर सकती हैं। इससे भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा यानी IP तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में चिप डिजाइन को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक Electronic Design Automation यानी EDA टूल्स तक पहुंच मिली है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी प्राप्त हुई है।
पिछले चार वर्षों में लगभग 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह संख्या 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के निर्धारित लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।
वैष्णव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए केवल अच्छी गुणवत्ता पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धी लागत भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि ISM 1.0 के तहत मंजूर किए गए 12 संयंत्रों में से पांच ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
उन्होंने भारत को एक भरोसेमंद देश के रूप में मिली वैश्विक पहचान और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के मजबूत रिकॉर्ड को भी देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
SEMICON India 2026 में भारत के प्रति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की मजबूत रुचि भी देखने को मिली। मंत्री ने कार्यक्रम में व्यापक बिजनेस-टू-बिजनेस यानी B2B बातचीत और दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि Country Roundtables के दौरान वैश्विक कंपनियों ने भारत में अपनी गतिविधियां और भागीदारी बढ़ाने में बढ़ती रुचि दिखाई। यह भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को दर्शाता है।
वैष्णव ने भारत के डिजाइन सेवाओं से आगे बढ़कर “Product Nation” बनने की दिशा में बदलाव पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि भारत में डिजाइन किए जा रहे चिप्स केवल डिजाइन सेवाओं तक सीमित न रहें, बल्कि तेजी से तैयार उत्पादों और वास्तविक उपयोग वाले सिस्टम का हिस्सा बनें।
सेमीकंडक्टर निर्माण केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए मशीनों, विशेष सामग्रियों, विशेष प्रकार की लॉजिस्टिक्स, पानी के कुशल इस्तेमाल, जल पुनर्चक्रण और उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित प्रतिभाओं की भी आवश्यकता होती है।
वैष्णव ने इन सभी क्षेत्रों को उभरते भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया। इससे संकेत मिलता है कि भारत अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल अंतिम निर्माण क्षमता विकसित करने के बजाय पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी SEMICON India 2026 के दूसरे दिन सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मजबूत और लचीली सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के लिए भरोसा, विश्वसनीयता, प्रोत्साहन और साझा मूल्य निर्माण जैसे तत्व महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, वैश्विक सहयोग को इस तरह आगे बढ़ाने की जरूरत है कि भारत अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ दुनिया की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं का भी लाभ उठा सके।
मिस्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को केवल घरेलू संसाधनों तक सीमित रखने के बजाय भारत की अपनी ताकतों और वैश्विक क्षमताओं के बीच संतुलित सहयोग के रूप में देखने पर जोर दिया।
SEMICON India 2026 के दूसरे दिन हुए 25 MoUs और रणनीतिक घोषणाओं ने इस व्यापक दिशा को सामने रखा। सामग्री और मशीनों से लेकर चिप डिजाइन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, निवेश और कौशल विकास तक, भारत सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले वर्षों में ISM 2.0, निजी निवेश, वैश्विक साझेदारी, अनुसंधान और कुशल प्रतिभा इस बदलाव के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।