भारत के शेयर बाजार में आने वाले दो वर्षों के दौरान लगभग 2,000 और कंपनियां सूचीबद्ध हो सकती हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को यह संभावना जताई। उनके अनुसार, शेयर बाजार में कंपनियों के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाने की गतिविधियां बढ़ रही हैं। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले व्यवसायों का रुझान भी सार्वजनिक बाजार की ओर बढ़ रहा है। खास तौर पर मध्यम आकार की ऐसी कंपनियों के पास आगे बढ़ने का अच्छा अवसर है, जो क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्रों में काम कर रही हैं।
हालांकि, पांडे ने यह भी कहा कि केवल कारोबार अच्छा होना किसी कंपनी के शेयर बाजार में उतरने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए वित्तीय रिपोर्टिंग, लेखांकन व्यवस्था और कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत बनाना जरूरी है। कई संभावित कंपनियों को इन क्षेत्रों में मार्गदर्शन और तैयारी की आवश्यकता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) Securities and Exchange Board of India (SEBI) उद्योग संगठनों के सहयोग से ऐसी कंपनियों को बाजार के अनुरूप तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
चालू वित्त वर्ष में भारत के प्राथमिक शेयर बाजार में कंपनियों ने बड़े स्तर पर पूंजी जुटाई है। प्राथमिक बाजार वह माध्यम है, जहां कंपनियां पहली बार या नए शेयर जारी करके निवेशकों से सीधे धन प्राप्त करती हैं। इसमें आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी IPO भी शामिल होता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच मुख्य बोर्ड और SME प्लेटफॉर्म पर कुल 189 कंपनियां सूचीबद्ध हुईं। इन कंपनियों ने मिलकर लगभग 98,038 करोड़ रुपये जुटाए। इसकी तुलना में पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 186 कंपनियों ने शेयर बाजार में प्रवेश करके 71,085 करोड़ रुपये की पूंजी हासिल की थी।
सितंबर के बाद भी बाजार में यह गतिविधि जारी रही। Jio Platforms के IPO के माध्यम से 30,213 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिसे इस खबर में रिकॉर्ड पूंजी जुटाने वाला निर्गम बताया गया है।
यदि प्रेफरेंशियल शेयर जारी करने और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को भी शामिल किया जाए, तो चालू वित्त वर्ष में अब तक 914 कंपनियां पूंजी बाजार से जुड़ चुकी हैं। इन सभी ने मिलकर लगभग 3.15 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। फिलहाल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर करीब 5,300 कंपनियां सूचीबद्ध हैं।
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey के अनुसार, देश में हजारों ऐसी कंपनियां हैं, जो भविष्य में शेयर बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की क्षमता रखती हैं। इनमें से कई व्यवसाय अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्रों में सक्रिय हैं।
इन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार में उतरने की तैयारी और जरूरी प्रक्रियाओं की समझ की कमी है। कई कंपनियों के पास कारोबार बढ़ाने की क्षमता तो है, लेकिन वे सार्वजनिक निर्गम के लिए जरूरी वित्तीय और प्रशासनिक मानकों को पूरा करने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए SEBI ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) Confederation of Indian Industry (CII) और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) जैसे संगठनों से सहयोग करने को कहा है। इन संस्थाओं की मदद से चुनिंदा औद्योगिक समूहों की कंपनियों को शेयर बाजार में प्रवेश की तैयारी कराने पर जोर दिया जा रहा है।
शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से पहले कंपनियों को अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं में सुधार करना होगा। इसके तहत कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
वित्तीय रिपोर्टिंग में सुधार: कंपनियों को हर तिमाही के लेखांकन और वित्तीय रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था बेहतर बनानी होगी।
कॉरपोरेट गवर्नेंस: कारोबार के संचालन और फैसले लेने के लिए प्रभावी नियम और जवाबदेही की व्यवस्था बनानी होगी।
पारदर्शिता: वित्तीय जानकारी और कंपनी के कामकाज से जुड़े विवरण निवेशकों के सामने स्पष्ट रूप से रखने होंगे।
नियमों की तैयारी: सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू होने वाली आवश्यकताओं को समझना और उनका पालन करना होगा।
पांडे के मुताबिक, इस तरह की सहायता से सक्षम मध्यम आकार की कंपनियों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। इससे वे सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी जुटाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगी।
SEBI चेयरमैन ने पश्चिम बंगाल में प्रतिभूति बाजार के बढ़ते विस्तार का भी उल्लेख किया। राज्य में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वित्त वर्ष 2014-15 में पश्चिम बंगाल में लगभग 12 लाख निवेशक थे। अब यह संख्या बढ़कर 90 लाख से अधिक हो गई है। इनमें करीब 36 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं। यह आंकड़ा बताता है कि युवा वर्ग भी शेयर बाजार में निवेश को लेकर रुचि दिखा रहा है।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में पंजीकृत कार्यालय रखने वाली 379 कंपनियां विभिन्न शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हैं। इससे राज्य की कंपनियों और व्यक्तिगत निवेशकों, दोनों की पूंजी बाजार में बढ़ती भागीदारी का पता चलता है।
पश्चिम बंगाल के छोटे और मध्यम आकार के उद्यम यानी SME भी अब पूंजी बाजार का इस्तेमाल कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य की 40 से अधिक SME कंपनियों ने SME IPO के माध्यम से बाजार से धन जुटाया है।
इन कंपनियों ने मिलकर 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी प्राप्त की है। इससे छोटे व्यवसायों के लिए भी शेयर बाजार के जरिए विस्तार और विकास के नए अवसर सामने आ रहे हैं।
कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के अलावा SEBI स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका मजबूत बनाने पर भी ध्यान दे रहा है। इसके लिए एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से क्षमता निर्माण नेटवर्क विकसित करने की योजना है।
इस प्रस्तावित नेटवर्क में पेशेवर संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, उद्योग संघों और वाणिज्य मंडलों को जोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य स्वतंत्र निदेशकों के ज्ञान, कौशल और कामकाज की प्रभावशीलता को बेहतर बनाना है।
पांडे ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों को कंपनी के बोर्ड में केवल नियामकीय औपचारिकताएं पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें कंपनी के फैसलों पर सक्रिय निगरानी रखनी चाहिए और सभी शेयरधारकों, विशेषकर छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
इसके लिए निदेशकों को कारोबार से जुड़ी नई चुनौतियों की बेहतर समझ होना भी जरूरी है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
साइबर सुरक्षा और डिजिटल जोखिम।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कारोबार पर प्रभाव।
पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास से जुड़े मुद्दे।
मानव संसाधन और कार्यप्रणाली में बदलाव।
प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए स्वतंत्र निदेशकों को इन विषयों पर जानकारी और प्रशिक्षण देने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनी के बोर्ड की निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।
अगले दो वर्षों में 2,000 और कंपनियों के शेयर बाजार में आने की संभावना भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार की ओर संकेत करती है। IPO के जरिए बढ़ती धन जुटाने की गतिविधियां, निवेशकों की भागीदारी और छोटे-मध्यम व्यवसायों को मिलने वाला सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, कंपनियों की संख्या बढ़ने के साथ वित्तीय जानकारी की पारदर्शिता, मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी होगी। यदि कंपनियां इन मानकों को बेहतर तरीके से अपनाती हैं, तो नए सूचीबद्ध व्यवसाय भारतीय शेयर बाजार को अधिक व्यापक और भरोसेमंद बनाने में योगदान दे सकते हैं।