केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026 में भारत के डिजिटल वित्त के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि वित्तीय व्यवस्था वास्तव में बुद्धिमान तभी बन सकती है, जब पहले वह समाज के हर वर्ग के लिए आसानी से उपलब्ध और सुलभ हो।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल Global Fintech Festival में बोलते हुए सिंधिया ने दूरसंचार संपर्क को फिनटेक व्यवस्था की “अदृश्य राजमार्ग” बताया। उनके अनुसार, डिजिटल वित्त के अगले चरण को आगे बढ़ाने में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी—कनेक्टिविटी, कंप्यूट और भरोसा।
उनका कहना था कि भारत ने डिजिटल ढांचे के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब इसी आधार पर देश अधिक सुरक्षित, समावेशी और बुद्धिमान वित्तीय व्यवस्था तैयार कर सकता है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया Union Minister of Communications Jyotiraditya M. Scindia ने भारत में पिछले एक दशक के दौरान हुए डिजिटल बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली आबादी करीब 25 करोड़ से बढ़कर लगभग 100 करोड़ हो गई है। इसी अवधि में ब्रॉडबैंड की पहुंच भी करीब 6 करोड़ से बढ़कर 103 करोड़ तक पहुंच गई है।
यह वृद्धि लगभग 16 गुना है और भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार को दिखाती है। आज स्मार्टफोन केवल बातचीत या इंटरनेट चलाने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि लाखों भारतीयों के लिए यह एक तरह की “बैंक शाखा” बन चुका है।
स्मार्टफोन और इंटरनेट के विस्तार ने लोगों को बैंकिंग के साथ-साथ ऋण, निवेश और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ने का अवसर दिया है। सिंधिया के अनुसार, करीब 6.5 लाख गांव अब डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग ले रहे हैं।
भारत में 5G के विस्तार ने भी इस बदलाव को गति दी है। वर्ष 2022 में शुरू हुई 5G सेवा अब 99.9% जिलों और लगभग 85% आबादी तक पहुंच चुकी है। केवल 26 महीनों में इस विस्तार को संभव बनाने में 5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन महत्वपूर्ण रहे हैं।
सिंधिया ने संचार सेवाओं की लागत में आई कमी को भी भारत के डिजिटल बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार, डेटा की कीमत घटकर लगभग 10 सेंट प्रति GB रह गई है।
कम कीमत वाले इंटरनेट ने अधिक लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आसान बनाया है। इसका सीधा लाभ डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग, निवेश, सरकारी सेवाओं और फिनटेक से जुड़े अन्य क्षेत्रों को मिला है।
भारत की डिजिटल क्षमता का उदाहरण देते हुए सिंधिया ने UPI का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में जहां UPI पर पहले महीने करीब 90,000 लेनदेन हुए थे, वहीं अब इसका विस्तार 740 से अधिक बैंकों तक हो चुका है।
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से करीब 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रही।
सिंधिया के अनुसार, भारत में होने वाले घरेलू डिजिटल लेनदेन में करीब 84% हिस्सेदारी UPI की है। वहीं, दुनिया में होने वाले वास्तविक समय वाले डिजिटल भुगतान में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49% है।
उन्होंने बताया कि UPI को फिलहाल नौ देशों तक बिना किसी शुल्क के पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा करीब 20 और देशों में इस व्यवस्था के विस्तार की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने इसे “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना से जोड़ते हुए कहा कि भारत का डिजिटल मॉडल दुनिया के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
सिंधिया ने कहा कि डिजिटल वित्त के अगले चरण के लिए खुला, सस्ता और सुरक्षित डिजिटल ढांचा जरूरी होगा। उनके अनुसार, जब ढांचा खुला होता है तो नवाचार को बढ़ावा मिलता है, जब वह सस्ता होता है तो वित्तीय समावेशन बढ़ता है और जब वह सुरक्षित होता है तो लोगों का भरोसा मजबूत होता है।
उन्होंने करीब 60 करोड़ जनधन खातों और डिजिलॉकर में मौजूद लगभग 9 अरब दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। इन पहलों ने वित्तीय और डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने में आने वाली कई बाधाओं को कम किया है।
जैसे-जैसे डिजिटल वित्त अधिक बुद्धिमान और स्वचालित हो रहा है, वैसे-वैसे सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना जरूरी है। सिंधिया ने संचार साथी Sanchar Saathi और AI आधारित ASTR व्यवस्था का उदाहरण दिया, जिसने 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों को बंद करने में मदद की है।
उन्होंने Financial Fraud Risk Indicator यानी FRI का भी उल्लेख किया। यह व्यवस्था संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने और धोखाधड़ी वाला भुगतान पूरा होने से पहले उसे रोकने में मदद कर सकती है।
सिंधिया ने बैंकिंग नेटवर्क में एक समान कार्यप्रणाली अपनाने और धोखाधड़ी होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही जोखिम की पहचान करने की जरूरत बताई।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में डिजिटल कनेक्टिविटी की स्थिति पर सिंधिया ने कहा कि फिनटेक से जुड़ी कनेक्टिविटी अब लगभग हर गांव तक पहुंच चुकी है।
Digital Bharat Nidhi के तहत बिना दूरसंचार सुविधा वाले करीब 34,000 गांवों में 22,000 टावर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में दूरसंचार और डिजिटल संपर्क की पूरी पहुंच सुनिश्चित करना है।
सिंधिया के अनुसार, AI, कंप्यूटिंग क्षमता और डिजिटल ढांचे का एक साथ इस्तेमाल वित्तीय सेवाओं को और बेहतर बना सकता है। इससे लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार वित्तीय सलाह, अधिक सटीक ऋण मूल्यांकन और भविष्य में अधिक स्वचालित वित्तीय सेवाएं मिल सकती हैं।
हालांकि, ऐसे डिजिटल वित्तीय मॉडल में सुरक्षा और भरोसा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
सिंधिया ने भारत के स्वदेशी 4G दूरसंचार ढांचे और 5G से जुड़े जारी प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने 6G के क्षेत्र में भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
भारत का लक्ष्य वैश्विक 6G पेटेंट में 10% योगदान देना और अंतरराष्ट्रीय 6G मानकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। इससे भारत केवल डिजिटल सेवाओं का बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि भविष्य की दूरसंचार तकनीक विकसित करने वाले देशों में भी अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026 में सिंधिया के संदेश का मुख्य केंद्र यह रहा कि डिजिटल वित्त का अगला चरण केवल सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसे अधिक समावेशी, सुरक्षित, भरोसेमंद और बुद्धिमान बनाना होगा।
उन्होंने भारत के लिए स्पष्ट दिशा बताते हुए कहा कि देश को “भारत में नवाचार करें, भारत में सेवा दें, दुनिया की सेवा करें और सुरक्षित तरीके से सेवा दें” की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।