रिलायंस जियो ने इस साल IPO लाने की योजना बनाई

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10 Jan 2026
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News Synopsis

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल यूनिट रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स इस साल अपना बहुप्रतीक्षित IPO लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस आईपीओ के जरिए कंपनी अपनी करीब 2.5% हिस्सेदारी बाजार में उतार सकती है। अगर यह योजना अमल में आती है, तो यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है, जिससे 4 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम जुटाई जा सकती है।

50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स वाली दिग्गज कंपनी

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली Reliance Jio, भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, जिसके यूजर्स की संख्या 50 करोड़ से ज्यादा है। Jio का IPO इस साल का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला पब्लिक इश्यू माना जा रहा है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजरें लंबे समय से इस लिस्टिंग पर टिकी हुई हैं।

180 अरब डॉलर से ज्यादा का वैल्यूएशन

नवंबर में इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने रिलायंस जियो का वैल्यूएशन करीब 180 अरब डॉलर आंका था। इस वैल्यूएशन पर अगर कंपनी 2.5% हिस्सेदारी बेचती है, तो लगभग 4.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। यह रकम पिछले साल हुंडई मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर के आईपीओ से भी काफी ज्यादा होगी।

एआई और डिजिटल बिजनेस में विस्तार

पिछले छह वर्षों में जियो ने खुद को सिर्फ टेलीकॉम तक सीमित नहीं रखा है। कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य डिजिटल सेवाओं में भी बड़ा विस्तार किया है। इस दौरान जियो ने केकेआर, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों से फंडिंग जुटाई है।

क्यों सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी लिस्ट करना चाहती है, कंपनी

सूत्रों के मुताबिक कंपनी का आकार बहुत बड़ा होने के कारण रिलायंस फिलहाल सिर्फ 2.5% शेयर ही लिस्ट करना चाहती है। भारतीय बाजार नियामक सेबी की ओर से बड़े आईपीओ के लिए न्यूनतम पब्लिक फ्लोट को 5% से घटाकर 2.5% करने का प्रस्ताव फिलहाल वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। नियम बदलने के बाद कंपनी इसी छोटे हिस्से के साथ लिस्टिंग को प्राथमिकता देना चाहती है, ताकि शेयर की कीमत में बेहतर मांग और प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

वैल्यूएशन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं

कुछ बैंकर जियो का वैल्यूएशन 200 अरब डॉलर से लेकर 240 अरब डॉलर तक आंक रहे हैं, हालांकि रिलायंस ने अभी किसी अंतिम आंकड़े पर मुहर नहीं लगाई है। कंपनी ने इस खबर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।

ऑफर फॉर सेल या नया इश्यू?

यह भी अभी साफ नहीं है, कि जियो का आईपीओ सिर्फ ऑफर फॉर सेल होगा या इसमें नए शेयर भी जारी किए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल था, जिसमें कंपनी को नई पूंजी नहीं मिली थी।

आईपीओ बाजार में भारत की मजबूत स्थिति

जियो की लिस्टिंग ऐसे समय में आ सकती है, जब भारत का आईपीओ बाजार जबरदस्त तेजी में है। एलएसईजी के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राइमरी इक्विटी बाजार रहा, जहां 21.6 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई गई।

दो बड़े बैंक कर रहे हैं, तैयारी

हालांकि अभी औपचारिक नियुक्तियां नहीं हुई हैं, लेकिन मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा बैंक के बैंकर जियो के आईपीओ से जुड़े दस्तावेजों पर काम शुरू कर चुके हैं। यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है। रिलायंस फिलहाल 2.5% पब्लिक फ्लोट नियम को लेकर अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है, और आने वाले महीनों में इश्यू का साइज बदल भी सकता है।

स्टारलिंक से मुकाबले की तैयारी

आने वाले समय में जियो का मुकाबला एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा से भी होने वाला है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है। इसके अलावा जियो ने एनवीडिया के साथ मिलकर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की साझेदारी भी की है।

2026 की पहली छमाही में लिस्टिंग की संभावना

अगस्त में मुकेश अंबानी ने संकेत दिया था, कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में हो सकती है। हालांकि अंतिम समय सीमा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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