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पुणे स्थित निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनी वास्कॉन इंजीनियर्स लिमिटेड ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) से जामनगर विस्तार परियोजना के लिए एक बड़ा ऑर्डर हासिल किया है। यह अनुबंध ₹131 करोड़ से अधिक का है, जो कंपनी के ऑर्डर पाइपलाइन को मजबूत करता है। यह विकास ऐसे समय में आया है, जब कंपनी के तिमाही प्रदर्शन पर दबाव देखा जा रहा है, लेकिन यह ऑर्डर उसके दीर्घकालिक व्यवसाय दृष्टिकोण को मजबूती देता है।
वास्कॉन इंजीनियर्स ने घोषणा की है, कि उसे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से ₹131.58 करोड़ (GST को छोड़कर) का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) प्राप्त हुआ है। यह अनुबंध रिलायंस के गुजरात स्थित जामनगर विस्तार प्रोजेक्ट के लिए निर्माण कार्य से संबंधित है।
कंपनी के स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार यह परियोजना जामनगर के RG एक्सपेंशन प्रोजेक्ट के सेक्टर-3 में चार G+12 FLL प्रकार की आवासीय इमारतों के निर्माण से जुड़ी है। यह ऑर्डर बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ) आधार पर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि भुगतान किए गए कार्य की मात्रा के अनुसार किया जाएगा।
कंपनी ने बताया कि यह अनुबंध एक घरेलू इकाई द्वारा दिया गया है, और यह पूरी तरह से घरेलू परियोजना है।
समझौते के अनुसार वास्कॉन इंजीनियर्स को यह परियोजना ऑर्डर मिलने की तारीख से 19 महीनों के भीतर पूरी करनी होगी।
इस निर्माण कार्य में बहुमंजिला आवासीय भवन शामिल हैं, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर ऑपरेशंस के विस्तार का हिस्सा है। जामनगर दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में से एक है, जिसे रिलायंस संचालित करता है।
इस प्रकार का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट कंपनी की EPC (Engineering, Procurement and Construction) क्षमताओं को मजबूत करता है और निर्माण क्षेत्र में उसकी साख बढ़ाता है।
हालांकि कंपनी ने बड़ा ऑर्डर हासिल किया है, लेकिन हालिया तिमाही में इसका वित्तीय प्रदर्शन कमजोर रहा। कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 32% घटकर ₹259 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹385 करोड़ था।
राजस्व में गिरावट परियोजना निष्पादन की धीमी गति और आय मान्यता में कमी को दर्शाती है।
कंपनी का परिचालन प्रदर्शन भी कमजोर रहा। EBITDA 61% घटकर ₹16 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष ₹42 करोड़ था।
EBITDA मार्जिन भी घटकर 6% रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 11% था। यह गिरावट बढ़ती परिचालन लागत और कमजोर लाभप्रदता को दर्शाती है।
कंपनी का शुद्ध लाभ 83% घटकर ₹6 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह ₹34 करोड़ था।
कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष की तिमाही में ₹75 करोड़ का एक असाधारण लाभ (exceptional gain) शामिल था, जिसने उस समय मुनाफे को बढ़ा दिया था।
कमजोर तिमाही प्रदर्शन के बावजूद कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है, जो भविष्य की आय का संकेत देती है।
कंपनी की कुल ऑर्डर बुक ₹2,717 करोड़ है, जिसमें से ₹2,387 करोड़ बाहरी EPC ऑर्डर्स से संबंधित हैं।
FY26 के दौरान कंपनी को ₹762 करोड़ के EPC प्रोजेक्ट इनफ्लो मिले हैं। यह दर्शाता है, कि कंपनी लगातार नए प्रोजेक्ट हासिल कर रही है।
रिलायंस से मिला यह नया ऑर्डर कंपनी की भविष्य की राजस्व संभावनाओं को और मजबूत करता है।
जामनगर रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां दुनिया का एक बड़ा रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स स्थित है।
यहां लगातार विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जाते हैं। वास्कॉन को मिला यह अनुबंध इसी विस्तार योजना का हिस्सा है।
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही लागत बढ़ने, परियोजना देरी और मार्जिन दबाव जैसी चुनौतियां भी हैं।
कंपनियों के लिए बड़े ऑर्डर प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन लाभप्रदता मुख्य रूप से कुशल निष्पादन और लागत प्रबंधन पर निर्भर करती है।
निष्कर्ष:
वास्कॉन इंजीनियर्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज से मिला ₹131 करोड़ का जामनगर प्रोजेक्ट ऑर्डर कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद यह अनुबंध उसके ऑर्डर बुक को मजबूत करता है, और भविष्य की आय के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
कंपनी की आगे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बड़े प्रोजेक्ट्स को कितनी कुशलता से पूरा करती है, और परिचालन प्रदर्शन में कितना सुधार लाती है।
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मार्केट वैल्यू के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries की वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कुल कमाई (टोटल इनकम) 2.74 लाख करोड़ रुपए रही। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 1% ज्यादा है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 2.48 लाख करोड़ रुपए की कमाई की थी।
टोटल इनकम में से कर्मचारियों की सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के ओनर्स के पास 18,645 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2024-25 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही से 1% ज्यादा है। पिछले साल कंपनी को 18,540 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।
तीसरी तिमाही में रिलायंस ने प्रोडक्ट और सर्विस से 2.94 लाख करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू जनरेट किया। सालाना आधार पर यह 10.5% बढ़ा है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही 2024 में कंपनी ने 2.67 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था।
रिलायंस जियो (जियो प्लेटफॉर्म), रिटेल, डिजिटल, ऑयल टू केमिकल्स (O2C) और ऑयल एंड गैस। यहां हम एक-एक कर सभी का तीसरी तिमाही का परफॉर्मेंस बता रहे हैं...
रिलायंस जियो
सालाना आधार पर (कंसॉलिडेटेड)
> मुनाफा Q3FY25 के 6,861 करोड़ रुपए के मुकाबले 11.2% बढ़कर Q3FY26 में 7,629 करोड़ रुपए रहा।
> रेवेन्यू 12.7% बढ़कर ₹37,262 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में ये ₹33,074 करोड़ रहा था।
> कंपनी का तीसरी तिमाही में एवरेज रेवेन्यू पर यूजर यानी ARPU ₹211.4 से 1.08% बढ़कर ₹213.7 रहा।
ऑयल टू केमिकल से लेकर अदर बिजनेस
सालाना आधार पर (कंसॉलिडेटेड)
ऑयल-टू-केमिकल: रेवेन्यू ₹1.49 लाख करोड़ से 8.7% बढ़कर ₹1.62 लाख करोड़ रहा।
ऑयल & गैस: रेवेन्यू ₹6,370 करोड़ से 8.4% घटकर ₹5,833 करोड़ रहा।
रिटेल: रेवेन्यू ₹90,351 से 8.3% बढ़कर ₹97,912 करोड़ रहा।
डिजिटल: रेवेन्यू ₹39,733 करोड़ से 12.3% बढ़कर ₹44,653 करोड़ रहा।
अदर बिजनेस: रेवेन्यू ₹12,236 करोड़ से 46% बढ़कर ₹17,868 करोड़ रहा।
16 जनवरी को FY26 की तीसरी तिमाही के नतीजों से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.15% बढ़कर 1,461 के स्तर पर बंद हुआ। बीते 5 दिन में कंपनी का शेयर 0.17% चढ़ा है। एक महीने में 5% और 6 महीने में 2% गिरा है। इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक 7% गिरा है। वहीं कंपनी के शेयर में एक साल में 15% की तेजी रही। रिलायंस का मार्केट कैप 19.72 लाख करोड़ रुपए।
रिलायंस भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनी है। ये अभी हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस मटेरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल सर्विस और रिटेल सेक्टर में काम करती है।