भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI देश में डिजिटल भुगतान से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने के लिए India Digital Payment Intelligence Corporation यानी IDPIC के व्यापक रोलआउट की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल भुगतान तंत्र को साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
RBI के Deputy Governor Shirish Chandra Murmu ने बताया कि IDPIC का परीक्षण फिलहाल आठ बैंकों के साथ किया जा रहा है। उन्होंने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर IANS से बातचीत में कहा कि केंद्रीय बैंक अब इस पहल के अगले चरण को तेजी से आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
यह पायलट प्रोजेक्ट ऐसे समय में चल रहा है जब देश में डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर अपराधी भी धोखाधड़ी के नए और अधिक जटिल तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में RBI और सरकार वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
IDPIC को एक ऐसे साझा तंत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान संदिग्ध धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा कर सकेंगे। इसका उद्देश्य संभावित धोखाधड़ी की जानकारी और चेतावनी समय पर संबंधित संस्थानों तक पहुंचाना है।
IDPIC में Artificial Intelligence यानी AI, Machine Learning यानी ML और Big Data Analytics जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना है। इन तकनीकों की मदद से बड़ी मात्रा में उपलब्ध लेनदेन और धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण किया जा सकता है।
AI और Machine Learning ऐसे पैटर्न पहचानने में मदद कर सकते हैं, जिन्हें पारंपरिक निगरानी व्यवस्था के जरिए तुरंत पहचानना मुश्किल हो सकता है। वहीं Big Data Analytics बड़ी मात्रा में उपलब्ध जोखिम और लेनदेन संबंधी जानकारी को समझने में मदद कर सकता है।
सरकार पहले भी बता चुकी है कि IDPIC का उद्देश्य उन्नत तकनीकों के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच वास्तविक समय में धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी और अलर्ट साझा करना है।
RBI के अनुसार IDPIC अभी आठ बैंकों के साथ पायलट आधार पर चल रहा है। इस चरण में यह देखा जा रहा है कि अलग-अलग संस्थानों से धोखाधड़ी संबंधी जानकारी किस तरह एकत्र की जाए, उसका विश्लेषण कैसे किया जाए और जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थानों तक जानकारी कितनी तेजी से पहुंचाई जा सके।
यदि IDPIC को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो अधिक बैंक और वित्तीय संस्थान एक साझा धोखाधड़ी सूचना तंत्र से जुड़ सकते हैं। इससे किसी संदिग्ध लेनदेन या धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क की पहचान होने पर दूसरे संस्थानों को भी समय पर चेतावनी दी जा सकती है।
इससे अलग-अलग बैंकों द्वारा अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाने के बजाय एक अधिक समन्वित व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक और वित्तीय संस्थान इस प्रणाली के साथ कितनी अच्छी तरह जुड़ते हैं और जानकारी को कितनी तेजी से साझा करते हैं।
डिजिटल भुगतान में बढ़ते जोखिमों के बीच AI और Machine Learning आधारित प्रणालियां धोखाधड़ी की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
किसी व्यक्ति या खाते के सामान्य लेनदेन के व्यवहार में अचानक बदलाव, असामान्य लेनदेन या कई खातों के बीच संदिग्ध गतिविधियों जैसे संकेतों का विश्लेषण तकनीक आधारित प्रणालियों के जरिए किया जा सकता है।
IDPIC का उद्देश्य केवल धोखाधड़ी होने के बाद कार्रवाई करना नहीं है। इसका एक प्रमुख लक्ष्य ऐसी जानकारी और संकेतों को साझा करना है, जिनकी मदद से संभावित धोखाधड़ी की पहचान पहले की जा सके।
RBI ने वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए अन्य तकनीकी उपाय भी शुरू किए हैं। इनमें MuleHunter.AI शामिल है। यह प्रणाली बैंकों को ऐसे संभावित Mule Accounts की पहचान करने में मदद करने के लिए बनाई गई है, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल रकम को आगे भेजने के लिए किया जा सकता है।
RBI Deputy Governor Shirish Chandra Murmu ने डिजिटल भुगतान के साथ Cash यानी नकदी की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अर्थव्यवस्था में नकदी का महत्व पूरी तरह खत्म हो गया है।
नकदी का इस्तेमाल केवल वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के लिए नहीं होता। घरों और व्यक्तियों के पास रखी नकदी बचत और मूल्य को सुरक्षित रखने के माध्यम के रूप में भी काम करती है।
इसी वजह से डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था में मौजूद नकदी में उसी अनुपात में कमी जरूरी नहीं है। नकदी रखने की मात्रा व्यापक आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती है।
दूसरी ओर, अर्थव्यवस्था के अधिक औपचारिक होने से डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। इससे डिजिटल लेनदेन के लिए सुरक्षित और मजबूत व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ रही है।
RBI के Deputy Governor ने केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए Regulatory Circulars की संख्या पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष RBI ने 600 से अधिक Draft और Final Amendment Circulars जारी किए थे।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संख्या को 600 से अधिक अलग-अलग Regulatory Changes के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
RBI ने Regulated Entities को लगभग 11 श्रेणियों में व्यवस्थित किया है। एक ही Regulatory Change से जुड़ी जानकारी अलग-अलग श्रेणियों की संस्थाओं के लिए अलग-अलग Circulars के माध्यम से जारी की जा सकती है।
इसका अर्थ है कि कई Circulars एक ही व्यापक नियामकीय बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। RBI के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य संस्थानों के लिए जरूरी नियमों की पहचान और उनका पालन करना आसान बनाना है, न कि केवल Regulatory Burden बढ़ाना।
IDPIC की पहल यह दिखाती है कि डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ Cybersecurity को मजबूत करना भी जरूरी होता जा रहा है। जैसे-जैसे लोग और कारोबार डिजिटल माध्यमों से अधिक भुगतान कर रहे हैं, वैसे-वैसे वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बढ़ रही है।
एक साझा Intelligence-Sharing Platform बैंकों और वित्तीय संस्थानों को धोखाधड़ी के नए तरीकों की जानकारी साझा करने में मदद कर सकता है। इससे किसी एक संस्थान में सामने आए संदिग्ध पैटर्न के बारे में दूसरे संस्थानों को भी समय पर जानकारी मिल सकती है।
भारत में डिजिटल भुगतान ने उपभोक्ताओं और कारोबारों के लिए लेनदेन को आसान बनाया है। लेकिन इसके साथ साइबर धोखाधड़ी के जोखिम भी सामने आए हैं। IDPIC इसी चुनौती से निपटने के लिए Real-Time Intelligence, AI आधारित विश्लेषण और वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग को एक साझा ढांचे में लाने की कोशिश है।
फिलहाल आठ बैंकों के साथ चल रहा पायलट इस व्यवस्था का शुरुआती चरण है। अब RBI इसका विस्तार तेजी से करने पर ध्यान दे रहा है। आने वाले समय में IDPIC कितना प्रभावी साबित होता है, यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक और वित्तीय संस्थान इसमें कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जुड़ते हैं, जानकारी कैसे साझा करते हैं और धोखाधड़ी के संकेत मिलने पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं।
यदि यह व्यवस्था बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल भुगतान तंत्र में धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था बन सकती है।
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