भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि अनुमान को घटाकर 6.6% कर दिया है, जो पहले 6.9% था। यह संशोधन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के कारण किया गया है। इन वैश्विक जोखिमों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मजबूती पर सावधानीपूर्ण भरोसा जताया है।
RBI की नवीनतम मौद्रिक नीति रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाया गया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार वास्तविक GDP वृद्धि अब निम्न प्रकार रहने की उम्मीद है:
यह इस वर्ष में RBI द्वारा किया गया दूसरा डाउनवर्ड रिवीजन है, जो वैश्विक अस्थिरता और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितताओं को दर्शाता है।
इसके साथ ही मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया और मौद्रिक नीति रुख को “न्यूट्रल” बनाए रखा।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह निर्णय मुद्रास्फीति, विकास संकेतकों और वैश्विक अनिश्चितताओं के संतुलित आकलन पर आधारित है। दरों को स्थिर रखकर RBI आर्थिक स्थिरता बनाए रखना चाहता है।
ग्रोथ अनुमान में कटौती के बावजूद RBI ने कहा है, कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियाँ स्थिर बनी हुई हैं। हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक बताते हैं कि कई प्रमुख क्षेत्रों में स्थिरता देखी जा रही है।
RBI गवर्नर ने कहा कि बढ़ती लागतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद उपभोक्ता खर्च अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है।
RBI के अनुसार भारत में कारोबारी विश्वास अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी नौकरियों पर संभावित प्रभाव की चिंताओं के बावजूद कंपनियाँ विस्तार योजनाओं को जारी रखे हुए हैं।
सेवा क्षेत्र, जो भारत की GDP का बड़ा हिस्सा है, मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। खासकर IT, फाइनेंशियल सर्विसेज और डिजिटल सेक्टर अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।
नीति में सबसे बड़ी चिंता वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर जताई गई है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका असर अब घरेलू खुदरा कीमतों पर दिखने लगा है।
ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च भी प्रभावित हो सकता है, जिससे आगे चलकर महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना है।
RBI गवर्नर ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कृषि क्षेत्र ग्रामीण मांग को प्रभावित करता है, जो समग्र आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।
शहरी क्षेत्रों में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसके पीछे कई कारण हैं:
RBI का मानना है, कि ये कारक बाहरी जोखिमों के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं।
RBI ने चेतावनी दी है, कि कमजोर वैश्विक मांग और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागतें भारत के निर्यात को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि वैश्विक आर्थिक मंदी जारी रहती है, तो इससे व्यापार घाटे और चालू खाता संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।
यह संशोधित अनुमान सरकार द्वारा FY26 की जनवरी-मार्च तिमाही के GDP आंकड़ों के जारी होने से पहले आया है। इसके साथ ही पूरे वर्ष के आंकड़े नए आधार वर्ष 2022–23 के अनुसार प्रकाशित किए जाएंगे।
निष्कर्ष:
RBI द्वारा FY27 के GDP ग्रोथ अनुमान को 6.6% तक घटाना वैश्विक जोखिमों और आर्थिक अनिश्चितताओं को दर्शाता है। हालांकि घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए हुए है। आने वाले समय में तेल की कीमतें, मानसून और वैश्विक मांग आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।