भारत की UNSC सदस्यता की तैयारी: AI, समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा पर जोर

41
30 Oct 2026
7 min read

News Synopsis

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की तैयारी कर रहे भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और समुद्री सुरक्षा को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। भारत का कहना है कि नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ समुद्री क्षेत्र में नए खतरे भी पैदा हो रहे हैं।

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों के बीच सहयोग और सूचनाओं का आदान-प्रदान जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव सुरक्षा मजबूत करने, आर्थिक अवसर बढ़ाने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने चेताया कि नई तकनीकों का गलत इस्तेमाल समुद्री व्यापार, जहाजों और अंतरराष्ट्रीय संचार व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर संभावित हमलों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

UNSC चुनाव में भारत की प्राथमिकता AI और समुद्री सुरक्षा (India Prioritises AI and Maritime Security for UNSC Elections)

भारत ने स्पष्ट किया है कि 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद United Nations Security Council (UNSC) की अस्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी में AI और समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय होंगे।

भारत अगले वर्ष होने वाले चुनाव में भाग लेने की तैयारी कर रहा है। निर्वाचित होने पर उसका कार्यकाल 2028 से शुरू होकर दो वर्षों तक चलेगा।

पी. हरीश ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दिया जोर (P. Harish Calls for International Cooperation)

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा बढ़ाना और अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए।

उनके अनुसार, नई तकनीकों से असमानता बढ़ने के बजाय उसे कम करने में मदद मिलनी चाहिए। इसी तरह समुद्री क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल देशों के बीच तनाव बढ़ाने के बजाय साझा सुरक्षा मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए।

भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि समुद्री सुरक्षा किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। सुरक्षित व्यापारिक मार्ग बनाए रखने के लिए सभी संबंधित देशों को मिलकर काम करना होगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री सुरक्षा पर विशेष चर्चा (UN Security Council Holds Debate on Maritime Security)

सुरक्षा परिषद में उभरती तकनीकों और समुद्री सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय शांति पर प्रभाव को लेकर खुली बहस आयोजित की गई।

इस बैठक का आयोजन परिषद की अध्यक्षता कर रहे ग्रीस ने किया। बैठक की अध्यक्षता ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यिरियाकोस मित्सोताकिस ने की।

भारत और ग्रीस के बीच पहले भी हो चुकी है चर्चा (India and Greece Previously Discussed AI and Maritime Security)

पी. हरीश ने बताया कि इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेत्रितिस ने AI और समुद्री सुरक्षा पर एक उच्चस्तरीय चर्चा की संयुक्त अध्यक्षता की थी।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा बहस उस बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर है।

भारत का उद्देश्य समुद्री खतरों से निपटने के लिए नई तकनीकों, बेहतर निगरानी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को बढ़ावा देना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर खतरा (Oil Tankers Face Threats in the Strait of Hormuz)

सुरक्षा परिषद में यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब ईरान की नौसेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए और उनमें आग लग गई।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों की भारत ने की निंदा (India Condemns Attacks on Commercial Ships)

पी. हरीश ने कहा कि भारत व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करता है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता, बिना रुकावट वैध व्यापार और जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।

विकासशील देशों पर पड़ सकता है अधिक असर (Developing Countries May Face Greater Economic Impact)

भारत ने चेताया कि व्यापारिक जहाजों पर हमले केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित समस्या नहीं हैं।

ऐसी घटनाओं से सामान की आपूर्ति बाधित हो सकती है, परिवहन खर्च बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

इनका असर विकासशील देशों पर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि वे आवश्यक वस्तुओं, ईंधन और समुद्री परिवहन पर काफी निर्भर हैं।

AI से समुद्री सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी (How AI Can Strengthen Maritime Security)

भारत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई निगरानी तकनीकें समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

पी. हरीश के अनुसार, उपग्रहों से मिलने वाली तस्वीरों, रडार और जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों का AI की मदद से विश्लेषण किया जा सकता है।

इससे समुद्र में संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने और सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

नई तकनीकों के दुरुपयोग पर भी चिंता (Concerns Over Misuse of Emerging Technologies)

हालांकि, भारत ने चेताया कि स्वचालित प्रणालियों, साइबर तकनीकों और AI का गलत इस्तेमाल भी समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।

इन तकनीकों के जरिए जहाजों की संचार व्यवस्था बाधित करने, बंदरगाहों को निशाना बनाने या महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे को नुकसान पहुंचाने का खतरा हो सकता है।

भारत ने ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल में मानवीय निगरानी, स्पष्ट जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत की SAGAR नीति और समुद्री सूचना केंद्र की भूमिका (India's SAGAR Vision and Maritime Information Centre)

भारत ने समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी SAGAR नीति का उल्लेख किया।

SAGAR का अर्थ है क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (Security and Growth for All in the Region)। इस दृष्टिकोण के तहत भारत समुद्री क्षेत्र में सहयोग, सुरक्षा और साझा विकास को बढ़ावा देता है।

IFC-IOR से समुद्री गतिविधियों की निगरानी (IFC-IOR Supports Maritime Information Sharing)

पी. हरीश ने गुरुग्राम के निकट स्थित सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) का उदाहरण दिया।

भारतीय नौसेना द्वारा संचालित इस केंद्र की स्थापना 2018 में हुई थी। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, इसके 12 साझेदार हैं।

यह केंद्र समुद्री गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने और विभिन्न देशों के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद करता है।

भारत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था समुद्री खतरों की पहचान करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने का उपयोगी माध्यम बन सकती है।

समुद्र के नीचे इंटरनेट केबलों की सुरक्षा पर चिंता (Concerns Over Undersea Internet Cable Security)

सुरक्षा परिषद की बैठक में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया।

भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार और लेखक फरीद जकारिया ने वीडियो संदेश के जरिए बताया कि दुनिया का लगभग 95 प्रतिशत डिजिटल संचार समुद्र के नीचे बिछी केबलों के नेटवर्क से होकर गुजरता है।

उन्होंने चेताया कि इन केबलों पर हमला होने से अंतरराष्ट्रीय संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इंटरनेट केबलों की सुरक्षा में AI की भूमिका (Role of AI in Protecting Undersea Cables)

जकारिया के अनुसार, AI की मदद से वास्तविक समय में आंकड़ों का विश्लेषण करके संचार संकेतों में जानबूझकर रुकावट डालने या समुद्री केबलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों का पता लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आवश्यक तकनीक उपलब्ध है, लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

ईरानी सैन्य अधिकारी की चेतावनी (Warning by Iranian Military Official)

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ कमांडर ब्रिगेडियर जनरल यादोल्लाह जवानी ने चेतावनी दी थी कि ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला होने की स्थिति में उनका देश होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है।

यह एक सशर्त चेतावनी थी, किसी हमले की पुष्टि नहीं।

7. संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी संगठनों द्वारा तकनीक के दुरुपयोग पर चेताया (UN Warns Against Misuse of Technology by Non-State Actors)

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के मुख्य कार्यालय के प्रमुख अर्ल कोर्टने रैट्रे ने चेताया कि आतंकवादी संगठन और अन्य गैर-सरकारी सशस्त्र समूह नई तकनीकों का दुरुपयोग कर सकते हैं।

उन्होंने सुरक्षा परिषद से इन खतरों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया।

नई तकनीकों से समुद्री निगरानी और बचाव कार्य बेहतर हो सकते हैं, लेकिन इनके गलत इस्तेमाल से व्यापारिक जहाजों, बंदरगाहों और संचार प्रणालियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र की 29 अक्टूबर की जानकारी में भी बताया गया कि सस्ते ड्रोन, स्वचालित जहाज और साइबर हमले समुद्री सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी में AI और समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरे हैं।

भारत ने स्पष्ट किया है कि नई तकनीकों का इस्तेमाल समुद्री व्यापार, जहाजों, कर्मचारियों और महत्वपूर्ण संचार व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करने के लिए होना चाहिए।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरों और समुद्री इंटरनेट केबलों पर संभावित हमलों ने इस विषय की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

भारत का जोर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी से AI अपनाने पर है। हालांकि, सुरक्षा परिषद की सदस्यता का फैसला संयुक्त राष्ट्र की चुनाव प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

Podcast

TWN Exclusive