प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के फिनटेक उद्योग से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को दुनिया के अधिक से अधिक देशों तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को दूसरे देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ने पर न केवल वैश्विक स्तर पर डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विदेशों में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए भारत पैसे भेजना भी आसान और कम खर्चीला हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने यह बात ग्लोबल फिनटेक फेस्ट Global Fintech Fest के 7वें संस्करण के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जो सफलता हासिल की है, अब उसे दुनिया के दूसरे हिस्सों तक ले जाने का समय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister Narendra Modi ने बताया कि UPI पहले से ही 11 देशों में काम कर रहा है। इसके अलावा, इसे सिंगापुर की घरेलू भुगतान व्यवस्था के साथ भी जोड़ा गया है। उन्होंने फिनटेक क्षेत्र से इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने और भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाने के लिए नए प्रयास करने को कहा।
मोदी ने कहा कि भारत के पास अब ऐसी तकनीकी क्षमता मौजूद है, जिसका उपयोग दुनिया के विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में किया जा सकता है। इससे सीमा पार डिजिटल भुगतान अधिक आसान और सुविधाजनक बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि UPI के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए उन देशों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। इसके अलावा, भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध रखने वाले और अपनी भुगतान प्रणालियों को UPI के साथ जोड़ने के इच्छुक देशों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे देशों के साथ भुगतान प्रणालियों का जुड़ाव भारतीय नागरिकों, कारोबारियों और दोनों देशों के वित्तीय क्षेत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए UPI के संभावित लाभों पर भी जोर दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं। इन पैसों से देश में लाखों परिवारों की आर्थिक जरूरतें पूरी होती हैं।
हालांकि, विदेश से भारत पैसा भेजने के दौरान लगने वाले लेनदेन शुल्क के कारण भेजी गई रकम का एक हिस्सा खर्च हो जाता है। मोदी ने कहा कि UPI के व्यापक इस्तेमाल से ऐसे खर्चों को कम करने की संभावना पैदा हो सकती है।
UPI को दूसरे देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ने से विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अपने परिवारों तक पैसा तेजी से पहुंचाने में मदद मिल सकती है। कम लेनदेन शुल्क का सीधा लाभ उन परिवारों को मिल सकता है, जिन्हें विदेश से आने वाली रकम पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत अब ऐसी तकनीकी क्षमता विकसित कर चुका है, जिससे वह उन वैश्विक कार्ड भुगतान नेटवर्कों के सामने एक मजबूत विकल्प पेश कर सकता है, जिनकी प्रणालियां लंबे समय से दूसरे देशों में विकसित ढांचे पर आधारित रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को केवल डिजिटल भुगतान तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे वैश्विक भुगतान व्यवस्था के नियमों और मानकों को तय करने में भी बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत अपने नियम और मानक तय कर सकता है और उन्हें दुनिया से जोड़ सकता है।”
इस बयान के माध्यम से प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता और अनुभव का इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर नए मानक विकसित करने के लिए करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पहले की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि UPI केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की नवाचार और दुनिया को जोड़ने की सोच को भी दर्शाता है।
उन्होंने डिजिटल भुगतान को भारत की बड़ी सफलताओं में से एक बताया और कहा कि अब फिनटेक क्षेत्र को भुगतान के अलावा वित्तीय सेवाओं के दूसरे क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए।
UPI और डिजिटल भुगतान में मिली सफलता के बाद प्रधानमंत्री ने फिनटेक कंपनियों से वित्तीय सेवाओं के अन्य क्षेत्रों में भी नए समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से बैंकिंग, बीमा, निवेश, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं को आम लोगों के लिए अधिक आसान और सुलभ बनाया जा सकता है।
हालांकि, वित्तीय तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री ने फिनटेक क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और डेटा की सुरक्षा को अधिक महत्व देने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने उन्नत साइबर सुरक्षा उत्पाद विकसित करने और मजबूत डेटा सुरक्षा मानक तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ लोगों के व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मोदी ने फिनटेक क्षेत्र के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा विकसित करने की भी बात कही। उनका कहना था कि तकनीक और वित्तीय सेवाओं के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए ऐसे नियम जरूरी हैं, जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करें।
उन्होंने फिनटेक कंपनियों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने एक फिनटेक कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स बनाने का सुझाव भी दिया। यह सूचकांक अलग-अलग फिनटेक कंपनियों का मूल्यांकन पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों से जुड़े मानकों के आधार पर कर सकता है।
इस तरह की व्यवस्था से ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों की सेवाओं को समझने और बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे फिनटेक कंपनियों पर उपभोक्ताओं के प्रति अधिक जवाबदेह और पारदर्शी तरीके से काम करने का दबाव भी बढ़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील ऐसे समय में आई है, जब भारत का डिजिटल भुगतान क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। UPI ने देश के भीतर डिजिटल लेनदेन को आसान बनाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है।
UPI को अधिक देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ना भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत पैसा भेजना आसान और कम खर्चीला हो सकता है। साथ ही, इससे भारत को भविष्य की वैश्विक डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आकार देने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है।