प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का उद्देश्य दूसरे देशों की कीमत पर आगे बढ़ना नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के साथ मिलकर विकास करना है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम Bloomberg New Economy Forum को संबोधित करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान साझा करने और ऐसे अवसर तैयार करने पर जोर दिया, जिनका लाभ अधिक से अधिक लोगों और देशों को मिल सके।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत अलग-थलग रहकर विकास करने या अपनी क्षमताओं तक दूसरों की पहुंच सीमित रखने में विश्वास नहीं करता। इसके बजाय, देश अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ना और वैश्विक विकास में योगदान देना चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister Narendra Modi ने कहा, “भारत किसी की कीमत पर विकास नहीं करता। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए विकास करते हैं।” उनके इस संदेश में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ आपसी सहयोग और साझा समृद्धि के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
उनकी ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब तकनीक, डिजिटल कनेक्टिविटी और जानकारी तक पहुंच वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा समाज के विकास को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताया। उन्होंने देश में मौजूद भाषाई विविधता, मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत का व्यापक सूचना तंत्र लोगों को समाचार प्राप्त करने, अपनी राय व्यक्त करने और अलग-अलग विचारों को समझने के अवसर देता है। देश में अलग-अलग भाषाओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोग अपने विचार रखते हैं और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को समाचार पत्रों और टेलीविजन जैसे पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी मजबूती मिलती है। इन माध्यमों के जरिए लोग सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की भाषाई और मीडिया विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में जानकारी साझा करने और लोगों तक पहुंचाने के लिए कई तरह के माध्यम उपलब्ध हैं। उन्होंने 100 से अधिक भाषाओं, लगभग 80,000 पंजीकृत समाचार पत्रों और प्रकाशनों तथा 1,000 से ज्यादा सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों का उदाहरण दिया।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में ये माध्यम अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोगों, उनकी रुचियों और जरूरतों के अनुसार जानकारी पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं। समाचार पत्र और टेलीविजन आज भी लोगों तक खबरें पहुंचाने के प्रमुख साधन हैं। वहीं, इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं ने समाचार पढ़ने, विचार साझा करने और वर्तमान घटनाओं से जुड़े रहने के नए रास्ते खोले हैं।
मीडिया के अलग-अलग माध्यमों की मौजूदगी से लोगों को विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण जानने का अवसर मिलता है। प्रधानमंत्री के संबोधन में इस विविधता को सार्वजनिक संवाद और लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में प्रस्तुत किया गया।
भारत में डिजिटल तकनीक के विस्तार ने लोगों के बीच संवाद के तरीकों को भी बदला है। प्रधानमंत्री मोदी ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में दोनों प्लेटफॉर्म के 500 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने लोगों को विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने, अपनी राय साझा करने और अपने आसपास के समुदायों से बाहर के विचारों को समझने का अवसर दिया है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं। इनके माध्यम से शिक्षा, समाचार, जानकारी और कारोबार से जुड़ी गतिविधियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। व्यक्ति और छोटे-बड़े व्यवसाय इन माध्यमों का इस्तेमाल करके अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं। इससे पारंपरिक मीडिया पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाना संभव हुआ है।
मोदी ने भारत में खुलकर होने वाली चर्चाओं और अलग-अलग विचारों के आदान-प्रदान का जिक्र किया। उनके अनुसार, डिजिटल पहुंच ने इस तरह के संवाद को व्यापक बनाने में भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में शक्ति के अर्थ और उसके उपयोग पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह भी है कि उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और उससे किसे लाभ मिल रहा है।
उनके विचार में ज्ञान और तकनीकी क्षमताओं का उपयोग अवसर बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उन्हें कुछ लोगों या समूहों तक सीमित रखने के लिए।
यह सोच शिक्षा, डिजिटल सेवाओं, आर्थिक विकास और जानकारी तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। यदि अधिक लोगों को तकनीक का लाभ मिलता है, तो वे आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और नए अवसरों का फायदा उठा सकते हैं।
प्रधानमंत्री के संदेश में नवाचार के सामाजिक महत्व पर भी जोर दिया गया। इसका आशय यह है कि विकास का आकलन केवल नई तकनीक बनाने या आर्थिक उपलब्धियां हासिल करने से नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि उससे आम लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 के बाद भारत के डिजिटल परिदृश्य में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए सस्ते मोबाइल डेटा को कनेक्टिविटी बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बताया।
कम कीमत पर इंटरनेट उपलब्ध होने से अधिक लोगों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल जानकारी और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री तक पहुंच आसान हुई है। बेहतर कनेक्टिविटी ने बड़े शहरों से दूर रहने वाले लोगों के लिए भी ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करना आसान बनाया है, जिन तक पहले पहुंचना मुश्किल था।
प्रधानमंत्री ने दूरदराज के क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल कक्षाओं और दुकानदारों द्वारा डिजिटल साधनों के उपयोग का उदाहरण दिया। इन उदाहरणों से पता चलता है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।
विद्यार्थी इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई की सामग्री हासिल कर सकते हैं, जबकि छोटे कारोबारी ग्राहकों से जुड़ने और अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से भौगोलिक दूरियां कम करने और ग्रामीण तथा दूरदराज के समुदायों के लिए नए अवसर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डिजिटल समावेशन का अर्थ केवल इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके लिए भरोसेमंद नेटवर्क, किफायती उपकरण, डिजिटल साक्षरता और उपयोगी ऑनलाइन सेवाएं भी जरूरी हैं।
भारत जैसे बड़े देश में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अधिक से अधिक लोग तकनीक का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें। इससे शिक्षा, रोजगार, कारोबार और जानकारी तक पहुंच के अवसरों का विस्तार हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल विकास के इस उद्देश्य को साझा प्रगति की व्यापक सोच से जोड़ा। इस दृष्टिकोण के अनुसार, तकनीक और ज्ञान का लाभ समाज के सीमित हिस्से के बजाय अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का मुख्य संदेश भारत की लोकतांत्रिक विविधता, डिजिटल पहुंच के विस्तार और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकास पर केंद्रित रहा। उन्होंने भाषाओं, मीडिया, ऑनलाइन भागीदारी और सस्ते मोबाइल डेटा का उल्लेख करते हुए तकनीक को अवसर बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत की प्रगति का उद्देश्य केवल अपने विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे दुनिया को भी लाभ मिलना चाहिए। उनका संदेश ज्ञान, तकनीक और शक्ति का उपयोग व्यापक जनहित तथा साझा वैश्विक विकास के लिए करने पर केंद्रित था।