नई दिल्ली में आयोजित 13वें पीएएफआई वार्षिक फोरम 2026 13वें PAFI Annual Forum 2026 के Leadership Dialogue में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भागीदारी और Global Value Chains तथा Supply Chains में देश की भूमिका मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर बात की। 24 सितंबर 2026 को जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक व्यापार और आर्थिक साझेदारियों पर एक बदलती आर्थिक स्थिति के साथ बातचीत कर रहा है।
गोयल ने भारत की अर्थव्यवस्था के वर्तमान आकार, क्रय शक्ति समानता यानी Purchasing Power Parity (PPP) के आधार पर इसकी स्थिति और भविष्य में 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत अभी दुनिया के साथ करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत करता है, जबकि PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर की है और इस आधार पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Union Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal ने 13वें PAFI Annual Forum 2026 के Leadership Dialogue में कहा कि भारत की आर्थिक क्षमता बढ़ने के साथ वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका भी बदल रही है। उन्होंने भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में मौजूदा आर्थिक मापदंडों के बीच का अंतर कम हो सकता है।
यह बदलाव केवल अर्थव्यवस्था के आकार तक सीमित नहीं है। इसका असर व्यापार समझौतों, निवेश, उत्पादन, निर्यात और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी पर भी पड़ सकता है।
सरकार पहले ही विभिन्न देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों और आर्थिक साझेदारियों पर बातचीत कर रही है। सितंबर 2026 में सरकार ने यह भी कहा था कि भारत के मौजूदा और प्रस्तावित Free Trade Agreements से भारतीय कारोबारों को अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंच देने का प्रयास किया जा रहा है।
गोयल के अनुसार, भारत का व्यापार वार्ताओं को लेकर दृष्टिकोण उसकी बढ़ती आर्थिक क्षमता और वैश्विक बाजारों के साथ गहरे जुड़ाव की जरूरत से प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक साझेदारियां केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इनके माध्यम से सेवाओं, पर्यटकों और विद्यार्थियों की आवाजाही बढ़ाने के साथ-साथ खेल और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग के अवसर बनाए जा सकते हैं।
इस तरह भारत का उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में केवल एक बाजार के रूप में भाग लेना नहीं, बल्कि उत्पादन, सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक व्यापक भूमिका निभाना है।
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत कई देशों और क्षेत्रों के साथ आर्थिक एवं व्यापारिक साझेदारियों पर बातचीत कर रहा है। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, Southern African Customs Union (SACU), मैक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, Gulf Cooperation Council (GCC) और इजरायल शामिल हैं।
इन वार्ताओं का उद्देश्य भारतीय कंपनियों के लिए बाजारों तक पहुंच बढ़ाना, वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना और भारत की Global Value Chains तथा Supply Chains में भागीदारी को मजबूत करना है।
भारत हाल के वर्षों में अलग-अलग क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों का विस्तार करने पर भी जोर देता रहा है। सरकार के अनुसार, भारत के मौजूदा Free Trade Agreements कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों तक प्राथमिकता वाली पहुंच उपलब्ध कराते हैं।
वैश्विक व्यापार व्यवस्था में केवल उत्पादों का निर्यात ही महत्वपूर्ण नहीं है। सेवाओं, निवेश, तकनीक और कुशल लोगों की आवाजाही भी आर्थिक साझेदारियों का अहम हिस्सा बन चुकी है।
गोयल ने व्यापक आर्थिक सहयोग के तहत वस्तुओं और सेवाओं के साथ पर्यटकों और विद्यार्थियों की आवाजाही तथा शिक्षा और खेल के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
यह दृष्टिकोण भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक उत्पादन और सेवा नेटवर्क के साथ जोड़ने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
पीयूष गोयल ने तकनीकी क्षेत्रों में भारत की भविष्य की जरूरतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की खपत सालाना 150 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। इसके साथ उन्होंने Artificial Intelligence यानी AI के पूरे Ecosystem में क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसमें Large Language Models और एजेंटिक AI मॉडल जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
भारत में सेमीकंडक्टर और AI को रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में विकसित करने पर हाल के महीनों में सरकार और उद्योग दोनों का ध्यान बढ़ा है। अगस्त 2026 में भारत और जापान के बीच सेमीकंडक्टर तथा AI पर उद्योग स्तर की बातचीत में भी इन क्षेत्रों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया गया था।
गोयल ने भारत के Startup Ecosystem के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि Startup India पहल शुरू होने के समय देश में लगभग 400–500 स्टार्टअप थे। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है और देश में 120 से अधिक Unicorns हैं।
स्टार्टअप क्षेत्र के अगले चरण में सरकार का ध्यान Innovation और Deep-Tech Ecosystem को बढ़ावा देने पर है। Deep-Tech में ऐसी तकनीकें शामिल हैं, जिनमें वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत तकनीकी क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य उन्नत तकनीकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स को Deep-Tech Ecosystem में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसका उद्देश्य केवल नए कारोबार तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीकों और उत्पादों को विकसित करना भी है जो वैश्विक बाजार में उपयोग किए जा सकें।
भारत की निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी क्षेत्र ने रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा है।
पीयूष गोयल ने भारत की युवा आबादी को भी वैश्विक आर्थिक बदलावों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार, आज देश के युवा दुनिया में हो रहे बदलावों और उपलब्ध अवसरों के बारे में पहले की तुलना में अधिक जानकारी रखते हैं।
उन्होंने भारतीय युवाओं की क्षमता पर विश्वास जताते हुए कहा कि वे अपने भविष्य को लेकर सूचित निर्णय लेने में सक्षम हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी बढ़ने के साथ युवाओं के लिए व्यापार, तकनीक, स्टार्टअप, शिक्षा, सेवाओं और नए उद्योगों में अवसरों का दायरा भी बदल रहा है।
पीयूष गोयल के संबोधन का एक प्रमुख विषय भारत को Global Value Chains और Supply Chains के साथ अधिक मजबूती से जोड़ना रहा। इसका अर्थ है कि भारत केवल तैयार उत्पादों के बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं, तकनीक, सेवाओं और निर्यात में भी अधिक भागीदारी करे।
विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौते, सेमीकंडक्टर और AI जैसे नए क्षेत्रों पर ध्यान, Deep-Tech स्टार्टअप्स को बढ़ावा और वैश्विक बाजारों के साथ आर्थिक संबंधों का विस्तार इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
सरकार ने हाल में भी भारतीय उद्योगों को स्थानीय कारोबार से वैश्विक कारोबार की ओर बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।
कुल मिलाकर, PAFI Annual Forum 2026 में पीयूष गोयल के संबोधन ने भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी, व्यापार समझौतों, तकनीकी क्षमताओं, स्टार्टअप्स और Supply Chains में बढ़ती भूमिका से जुड़े कई पहलुओं को सामने रखा। आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि के साथ इन क्षेत्रों में देश की भूमिका किस तरह विकसित होती है, यह वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए महत्वपूर्ण विषय रहेगा।